कार्यक्रम की अवधारणा एवं उद्देश्य
अनुभूति कार्यक्रम का मूल उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को वन संपदा, जैव विविधता, औषधीय पौधों, तितलियों और वन्यजीवों के महत्व से परिचित कराते हुए उनके संरक्षण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना है। यह कार्यक्रम पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर अनुभव आधारित शिक्षा पर केंद्रित है, जिससे बच्चे प्रकृति को केवल समझते नहीं, बल्कि उससे भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।
पूर्व कालीभीत में प्रभावी क्रियान्वयन
खंडवा जिले के वन परिक्षेत्र पूर्व कालीभीत में आयोजित अनुभूति शिविर के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रोशनी की लगभग 100 छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की। शिविर के दौरान विद्यार्थियों को वनों का महत्व, पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण एवं वन्यजीव संरक्षण जैसे विषयों पर वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई।
वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री वीरेन्द्र अचालिया ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष अनुभूति कार्यक्रम की थीम “हम हैं धरती के दूत, अब अकेला नहीं” रखी गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में यह भाव विकसित करना है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।
अनुभवात्मक गतिविधियाँ: सीखने का जीवंत माध्यम
शिविर की विशेषता इसकी अनुभवात्मक गतिविधियाँ रहीं, जिनमें नेचर ट्रेल (जंगल भ्रमण), पक्षी दर्शन, वन्यजीवों के संकेतों की पहचान, प्रकृति आधारित खेल और पर्यावरण प्रश्नोत्तरी शामिल थीं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने प्रकृति को प्रत्यक्ष अनुभव किया, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक और स्थायी बनी।
प्रशिक्षण और मार्गदर्शन
अनुभूति कैंप के मास्टर ट्रेनर श्री मुकेश राठौर ने विद्यार्थियों को सरल एवं प्रभावी तरीके से इको-पर्यटन, सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के शिविर बच्चों में प्रकृति के प्रति अपनत्व, जिम्मेदारी और संरक्षण की भावना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपवनमंडल अधिकारी श्री विजेंद्र जावरिया ने अपने संबोधन में कहा कि अनुभूति कार्यक्रम भविष्य की पीढ़ी को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम है और इससे समाज में दीर्घकालिक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
शैक्षिक सामग्री एवं सहभागिता
शिविर में सहभागिता करने वाले विद्यार्थियों को अनुभूति शैक्षिक किट एवं जानकारीपूर्ण ब्रोशर प्रदान किए गए, जिससे वे शिविर के बाद भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर अध्ययन और जागरूकता बनाए रख सकें।
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने पौधरोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग, वन एवं वन्यजीवों की रक्षा हेतु अपने स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया, जिससे बच्चों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा।
समीक्षात्मक दृष्टिकोण
अनुभूति कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह बच्चों को प्रकृति का मौन दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय संरक्षक बनने की प्रेरणा देता है। यदि भविष्य में ऐसे शिविरों का दायरा ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में और बढ़ाया जाए, अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए तथा शिविर पश्चात् अनुवर्ती गतिविधियाँ आयोजित हों, तो इसका प्रभाव और भी व्यापक व स्थायी हो सकता है।
कुल मिलाकर, अनुभूति कार्यक्रम केवल एक पर्यावरणीय जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संस्कारों की आधारशिला है। यह पहल विद्यार्थियों को प्रकृति से भावनात्मक, नैतिक और व्यावहारिक रूप से जोड़ते हुए उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में सार्थक कदम सिद्ध हो रही है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री नरेन्द्र यादव, श्री सोहनसिंह सोलंकी, श्री गणेश काजले, श्री श्यामसिंह बघेल (वनपाल), श्री सूरजसिंह चौहान (कार्यवाहक उपवनक्षेत्राधिकारी) एवं श्री कैलाश सोलंकी (कार्यवाहक) सहित वनरक्षक श्री प्रदीप औझा, श्री मंगलसिंह किराड़े, श्री सौरभ तिवारी, श्री सुनील कुमार पटेल, श्री सोनू माण्डले, श्री ब्रिजेश कलमें, श्री राजेश बघेल, श्री आशुतोष मिश्रा, श्री उद्देश्य पटेल, श्री चेतन भलावी, श्री रमेश सोलंकी, श्री जयेश अत्रे, कु. कृष्णा टिकरिया, श्री राजकुमार दुबे, श्री अजय कुमार बैगा, श्री बसंत तोमर एवं श्री सिद्धार्थ श्रीवास्तव का उल्लेखनीय सहयोग रहा।