रविवार, 31 मई 2026

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प

खंडवा- विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में एक प्रभावशाली जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पादों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.पी. सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों तथा महाविद्यालयीन स्टाफ ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि तंबाकू आज केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है। विशेष रूप से युवा वर्ग तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों के आकर्षण में आकर अपने स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को संकट में डाल रहा है। उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों सहित अनेक घातक रोगों का प्रमुख कारण है। समाज को इस बुराई से मुक्त करने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 2026 के लिए निर्धारित थीम “आकर्षण का पर्दाफाश : निकोटिन और तंबाकू की लत का मुकाबला” के अनुरूप महाविद्यालय में भाषण एवं पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने रचनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए तंबाकू सेवन के दुष्परिणामों और नशामुक्त जीवन के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

भाषण प्रतियोगिता में रितिका धोटे, रिनेश, आशीष शाह एवं मिलेश बर्डे ने तंबाकू के दुष्प्रभावों, युवाओं पर उसके प्रभाव तथा समाज में जागरूकता की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं पोस्टर प्रतियोगिता में रिनेश, नौरिन, रुपेश सिसोदिया एवं काजल ने अपने सशक्त संदेशों और आकर्षक चित्रों के माध्यम से तंबाकू विरोधी जनजागरण का संदेश दिया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत संदेश— “दुनिया को है बचाना, नशे की चीजों से दूरी है बनाना”— कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।

कार्यक्रम प्रभारी अमित कुमार अब्राहम ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 की जानकारी देते हुए बताया कि नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति अथवा उनके परिजन इस हेल्पलाइन की सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. महेश भाबोर ने उपस्थित विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों एवं स्टाफ सदस्यों को तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने तथा समाज में नशामुक्ति का संदेश फैलाने की शपथ दिलाई। सभी प्रतिभागियों ने तंबाकू मुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

यह कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वास्थ्य के प्रति सजगता तथा नशामुक्त भारत के निर्माण की भावना को भी सुदृढ़ करने में सफल रहा।

देवी अहिल्याबाई होलकर: न्याय, जनकल्याण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अमर प्रतीक - सद्भावना मंच

खंडवा- भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनका योगदान समय की सीमाओं से परे जाकर पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। मालवा की महान शासक देवी अहिल्याबाई होलकर ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्होंने अपने अद्वितीय नेतृत्व, न्यायप्रियता, धार्मिक सहिष्णुता और जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। उनकी 301वीं जयंती के अवसर पर सद्भावना मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

मंच के सदस्य निर्मल मंगवानी ने बताया कि कार्यक्रम में सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होलकर केवल एक शासक नहीं थीं, बल्कि वे लोकसेवा, धर्म और मानवीय मूल्यों की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने ऐसे समय में शासन की बागडोर संभाली, जब महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता और साहस के बल पर एक आदर्श राज्य की स्थापना की।

साधारण परिवार से असाधारण शिखर तक का सफर

देवी अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के वर्तमान अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मानकोजी शिंदे एक साधारण पटेल थे। कहा जाता है कि उनकी प्रतिभा और संस्कारों से प्रभावित होकर मालवा के महान सेनापति मल्हारराव होलकर ने उन्हें अपने पुत्र खंडेराव होलकर की पत्नी के रूप में स्वीकार किया। विवाह के बाद उन्होंने राजपरिवार में रहते हुए प्रशासन, समाज और धर्म की गहन समझ विकसित की।

पति खंडेराव और बाद में ससुर मल्हारराव के निधन के बाद परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन अहिल्याबाई ने धैर्य और दृढ़ता के साथ राज्य का संचालन संभाला। वर्ष 1767 में उन्होंने मालवा राज्य की सत्ता ग्रहण की और लगभग तीन दशकों तक सफलतापूर्वक शासन किया।

न्यायप्रिय शासन की मिसाल

अहिल्याबाई होलकर का शासन भारतीय इतिहास में सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। वे स्वयं जनता की समस्याएं सुनती थीं और निष्पक्ष निर्णय देती थीं। उनके दरबार में किसी भी व्यक्ति को न्याय पाने के लिए विशेष सिफारिश या प्रभाव की आवश्यकता नहीं होती थी। उनकी प्रशासनिक व्यवस्था इतनी प्रभावी थी कि मालवा क्षेत्र शांति, समृद्धि और सामाजिक सौहार्द का केंद्र बन गया।

उनका मानना था कि शासक का प्रथम कर्तव्य जनता की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। इसी सोच के कारण उन्होंने कृषि, व्यापार, सिंचाई और सड़क निर्माण जैसे क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए।

महिलाओं और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित

देवी अहिल्याबाई ने महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए अनेक पहल कीं। उन्होंने विधवाओं को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिया तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए विभिन्न जनहितकारी योजनाएं संचालित कीं। उनकी नीतियों में सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों की महान संरक्षक

देवी अहिल्याबाई होलकर को भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने देशभर में सैकड़ों मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं और तीर्थस्थलों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया। काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, उज्जैन, गया, द्वारका, हरिद्वार और अनेक धार्मिक स्थलों के विकास में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।

उन्होंने केवल मंदिरों का निर्माण ही नहीं कराया, बल्कि यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशालाएं, कुएं, बावड़ियां और विश्राम गृह भी बनवाए। उनके इन कार्यों ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज भी प्रासंगिक हैं उनके आदर्श

आज जब समाज सुशासन, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहा है, तब देवी अहिल्याबाई होलकर का जीवन और कार्य पहले से अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं। उनका नेतृत्व यह संदेश देता है कि संवेदनशीलता, न्याय और सेवा की भावना के साथ किया गया शासन समाज को नई दिशा दे सकता है।

सद्भावना मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, जगदीशचंद्र चौरे, ओम पिल्लै, जी.डी. सराफ, अनुप शर्मा, गणेश भावसार, अर्जुन बुंदेला, कमल नागपाल, डॉ. एम.एम. कुरेशी, राधेश्याम शाक्य, अशोक जैन, सुभाष मीणा, पं. कृष्ण कुमार व्यास, जयप्रकाश रेवतानी, मनीष गुप्ता, कैलाश पटेल सहित अनेक सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देवी अहिल्याबाई होलकर का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके आदर्शों को अपनाकर ही एक न्यायपूर्ण एवं समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है।

देवी अहिल्याबाई होलकर का व्यक्तित्व भारतीय नारी शक्ति, लोककल्याण और आदर्श शासन की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

जब सपनों को मिला सम्मान: देश सेवा के लिए चयनित युवाओं और उनके अभिभावकों का हुआ गौरवपूर्ण अभिनंदन | जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप के निशुल्क प्रशिक्षण से साकार हो रहे युवाओं के सपने, अग्निवीर, एमपी पुलिस और आरपीएफ में दर्जनों चयन

खंडवा- किसी भी परिवार के लिए वह क्षण गर्व से भर देने वाला होता है, जब उसकी संतान देश की सेवा के लिए वर्दी पहनने का अवसर प्राप्त करती है। ऐसे ही गौरवपूर्ण क्षणों का साक्षी बना नेहरू स्कूल का सभागार, जहां जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग (निशुल्क) ग्रुप द्वारा भारतीय सेना (अग्निवीर), मध्यप्रदेश पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में चयनित युवक-युवतियों एवं उनके अभिभावकों के सम्मान में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चयनित युवाओं को सम्मानित करना नहीं था, बल्कि उन माता-पिता के त्याग, विश्वास और संघर्ष को भी मंच पर सम्मान देना था, जिनकी प्रेरणा और समर्थन ने इन युवाओं को सफलता के इस मुकाम तक पहुंचाया। समारोह में मुख्य अतिथि पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त सुनीता मुवेल तथा विशेष अतिथि उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य भूपेंद्र चौहान ने चयनित अभ्यर्थियों के माता-पिता को “मेरी संतान देश को समर्पित” सम्मान पदक एवं तिरंगा दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन किया।

इस अवसर पर जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप के संचालक अनिल पाटील ने कहा कि युवाओं को सही मार्गदर्शन, अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण मिले तो वे किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनका संस्थान वर्षों से युवाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देकर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा सेवाओं में चयनित कराने का कार्य कर रहा है। आज अनेक युवा इसी प्रशिक्षण के बल पर देश सेवा के महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान कई प्रेरणादायक अनुभव भी साझा किए गए। अग्निवीर में चयनित विकास मालवीय की माता ने बताया कि उनका परिवार ग्राम पिपरटी का निवासी है। उनकी बड़ी बेटी सोनू मालवीय पहले ही इसी प्रशिक्षण समूह से तैयार होकर पुलिस सेवा में चयनित हो चुकी हैं, जबकि दूसरी बेटी रानू मालवीय देश की सीमाओं पर तैनात होकर सेवा दे रही हैं। अब उनके बेटे विकास का अग्निवीर में चयन हुआ है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके परिवार के तीनों बच्चों को आत्मनिर्भर और राष्ट्रसेवा के योग्य बनाने में जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

वहीं चयनित अभ्यर्थी दीक्षा ने अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा साझा करते हुए बताया कि पिछली बार अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद उनका चयन नहीं हो पाया था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। परिणामस्वरूप इस बार उनका चयन आरपीएफ और मध्यप्रदेश पुलिस दोनों सेवाओं में हुआ है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है।

जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप की उपलब्धियां भी उल्लेखनीय रही हैं। इस वर्ष समूह से मध्यप्रदेश पुलिस में 17 युवतियों और 10 युवकों का चयन हुआ है। वहीं अग्निवीर भर्ती में 16 युवाओं ने सफलता हासिल की है। इनमें से कई युवा प्रशिक्षण और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में व्यस्त होने के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके, लेकिन उनकी सफलता का उत्सव पूरे समूह ने मिलकर मनाया।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि आज देश को ऐसे समर्पित और अनुशासित युवाओं की आवश्यकता है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर सेवा करें। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए अन्य युवाओं से भी प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

समारोह में सरदार सिंह राजपूत, धीरज, संजय फर्कले, मनीष चौरसिया सहित बड़ी संख्या में अभिभावक, चयनित युवक-युवतियां एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रभु मसानी ने किया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन ग्रुप संचालक अनिल पाटील ने व्यक्त किया।

यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि उन सपनों, संघर्षों और सफलताओं का उत्सव था, जिन्होंने साधारण परिवारों के युवाओं को देश सेवा के गौरवशाली मार्ग तक पहुंचाया। ऐसे प्रयास न केवल युवाओं का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश भी प्रसारित करते हैं।

राज्य स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी खेल प्रतियोगिता में खंडवा की नीतू ठाकुर बनीं प्रदेश चैंपियन | जैवलिन थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया जिले का गौरव

खंडवा- खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है। इसी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए खंडवा जिले के हरसूद विकासखंड की शासकीय प्राथमिक शाला झुम्मरखाली में पदस्थ शिक्षिका नीतू ठाकुर ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 12वीं राज्य स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी खेलकूद प्रतियोगिता में शानदार सफलता अर्जित की है। उन्होंने एथलेटिक्स की जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया तथा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
छतरपुर में 27 से 31 मई 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अधिकारी एवं कर्मचारियों ने विभिन्न खेल स्पर्धाओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यंत उच्च रहा, जहां प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट खेल कौशल और खेल भावना का परिचय दिया। ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में नीतू ठाकुर ने अपनी मेहनत, लगन और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर शीर्ष स्थान हासिल कर खंडवा जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन किया।
नीतू ठाकुर की यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि वे शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के साथ-साथ खेल गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास हो तो किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।
उनकी इस उपलब्धि पर जिले में हर्ष और गौरव का वातावरण है। जिला शिक्षा अधिकारी पी.एस. सोलंकी एवं डाइट प्राचार्य पी.सी. सोनी ने नीतू ठाकुर को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता जिले के अन्य शिक्षकों एवं खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी नीतू ठाकुर खेल जगत में नई उपलब्धियां हासिल कर जिले और प्रदेश का गौरव बढ़ाती रहेंगी।
नीतू ठाकुर की इस ऐतिहासिक सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। उनकी उपलब्धि न केवल खंडवा जिले बल्कि पूरे स्कूल शिक्षा विभाग के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता आने वाली पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी।

‘मन की बात’ का 134वां संस्करण: किसान भाइयों के साथ बूथ स्तर पर सुना गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन, संगठनात्मक सक्रियता में हरसूद विधानसभा रही अग्रणी

खंडवा- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें संस्करण का प्रसारण रविवार को देशभर के साथ खंडवा जिले में भी उत्साह और जनभागीदारी के साथ संपन्न हुआ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर जिले के विभिन्न बूथों पर किसानों, कार्यकर्ताओं और आमजन के साथ कार्यक्रम का सामूहिक श्रवण किया गया। इस दौरान संगठनात्मक गतिविधियों और डिजिटल रिपोर्टिंग के क्षेत्र में हरसूद विधानसभा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए संगठन ऐप पर 100 प्रतिशत रिपोर्टिंग का लक्ष्य पूर्ण किया।

जिला आईटी विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार जिले के सभी मंडलों और बूथों पर कार्यकर्ताओं ने सक्रियता के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशहित, सामाजिक सरोकारों, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं की भूमिका और जनभागीदारी से जुड़े विषयों पर व्यक्त विचारों को कार्यकर्ताओं और किसानों ने ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम के बाद संगठन ऐप पर बूथ स्तर की रिपोर्टिंग का कार्य भी व्यवस्थित रूप से संपन्न किया गया।

संगठनात्मक मजबूती का उदाहरण बनी हरसूद विधानसभा

भाजपा संगठन में डिजिटल रिपोर्टिंग और बूथ स्तर की सक्रियता को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में हरसूद विधानसभा द्वारा संगठन ऐप पर शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग पूर्ण करना संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने जिले में हरसूद विधानसभा को एक आदर्श इकाई के रूप में स्थापित किया है।

पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक कार्यरत सभी कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। कार्यकर्ताओं की सजगता, समयबद्धता और संगठन के प्रति समर्पण के कारण ही यह लक्ष्य पूर्ण हो सका।

वरिष्ठ नेतृत्व का मिला मार्गदर्शन

इस उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह, भाजपा जिलाध्यक्ष, जिला मन की बात प्रभारी, पूर्व महापौर एवं जिला उपाध्यक्ष श्रीमती भावना विजय शाह, विधानसभा प्रभारी संतोष सोनी, किसान मोर्चा विधानसभा प्रभारी रूपेश राजपूत सहित सभी मंडल अध्यक्षों और मंडल प्रभारियों के मार्गदर्शन एवं सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया है।

जिला आईटी विभाग ने इन सभी वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन से कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक दायित्वों के निर्वहन में प्रेरणा प्राप्त होती है।

बूथ कार्यकर्ताओं को दिया सफलता का श्रेय

जिला आईटी विभाग ने विशेष रूप से बूथ समिति के सदस्यों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की है। विभाग ने कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत बूथ स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं में निहित है, जिनकी मेहनत और समर्पण के कारण ही संगठनात्मक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं।

कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जिला आईटी विभाग ने कहा कि संगठन की विचारधारा और जनसेवा के प्रति उनकी निष्ठा ही भाजपा को निरंतर मजबूती प्रदान कर रही है।

जनसंपर्क और संवाद का प्रभावी माध्यम है ‘मन की बात’

उल्लेखनीय है कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देशवासियों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इस कार्यक्रम के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों की प्रेरक कहानियां, नवाचार, जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को देश के सामने प्रस्तुत किया जाता है।

कार्यक्रम के 134वें संस्करण के सफल आयोजन और हरसूद विधानसभा की शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग उपलब्धि को भाजपा संगठन ने कार्यकर्ताओं की एकजुटता, अनुशासन और सक्रियता का सकारात्मक उदाहरण बताया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मन की बात का उप मुख्यमंत्री ने किया श्रवण | प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के प्रेरणादायी विचारों को आत्मसात करें - उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल

भोपाल- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात का उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में जनप्रतिनिधियों व आमजनों के साथ श्रवण किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात के माध्यम से प्रधानमंत्री जी समाज, राष्ट्र निर्माण, जनभागीदारी एवं प्रेरणादायक प्रयासों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करते हैं जो हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं उनके इन विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। 
प्रधानमंत्री जी के मन की बात के 134वें संस्करण का जनपद पंचायत रीवा के प्रांगण में श्रवण करने के उपरांत श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की नजर देश में हो रहे उन विशिष्ट कार्यों पर रहती है जिन पर किसी की भी नजर नहीं जा पाती। उन्होंने मन की बात में उत्कृष्ट कार्य करने वाले खिलाड़ियों सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों से चर्चा की। वह देश के कोने-कोने में बेहतर कार्य करने वालों का जिक्र करते हैं तथा उनका हौसला बढ़ाते हैं। प्रधानमंत्री जी एक-एक मिनट का सदुपयोग कर देश को उत्कृष्ट राष्ट्र बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि जो जिस पद पर है वह वहां बेहतर से बेहतर कार्य करें। कृषि कल्याण वर्ष में हमारे प्रदेश में रिकार्ड गेंहू की खरीदी हुई है। हमारा रीवा क्षेत्र बाणसागर की नहरों से समृद्धशाली बना है। अब इस विकास का फल आने वाली पीढ़ी को मिलेगा। युवाओं को नशे सहित अन्य सामाजिक कुरीतियों से दूर रहना होगा। श्री शुक्ल ने जल संग्रहण व संरक्षण के कार्यों में आमजनों से सहभागिता की अपील की तथा कहा कि वर्षाकाल आने पर पेड़ लगाकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। इस अवसर पर जिला भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गुप्त, जनपद अध्यक्ष संगीता यादव, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, जनपद सीईओ पूनम दुबे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी व आमजन उपस्थित रहे।

45 डिग्री तापमान में ट्रेनी जूनियर इंजीनियरों ने सीखी ट्रांसमिशन लाइन प्रबंधन की बारीकियां | एमपी ट्रांसको ने ईआरएस टावर के उपयोग और सुरक्षा मानकों की दी व्यावहारिक फील्ड ट्रेनिंग

जबलपुर- विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं सुरक्षित बनाने के लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा अपने ट्रेनी जूनियर इंजीनियरों को अत्याधुनिक तकनीकों और फील्ड कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में कंपनी ने विभिन्न फील्ड कार्यालयों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे ट्रेनी जूनियर इंजीनियरों के लिए सागर जिले के गौरझामर–देवरी अति उच्च दाब (ईएचटी) ट्रांसमिशन लाइन शिफ्टिंग कार्य स्थल पर विशेष फील्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।

भीषण गर्मी और लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद प्रशिक्षु इंजीनियरों ने मौके पर पहुंचकर ट्रांसमिशन लाइन प्रबंधन, आपातकालीन तकनीकों और सुरक्षा मानकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। यह प्रशिक्षण उन्हें वास्तविक कार्य परिस्थितियों से परिचित कराने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ओवरब्रिज निर्माण के कारण किया जा रहा लाइन शिफ्टिंग कार्य

गौरझामर–देवरी मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के अंतर्गत ओवरब्रिज बनाए जाने के कारण अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन को स्थानांतरित करने की आवश्यकता उत्पन्न हुई है। इस जटिल कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए एमपी ट्रांसको द्वारा इमरजेंसी रेस्टोरेशन सिस्टम (ईआरएस) टावर का उपयोग किया जा रहा है।

फील्ड प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनी इंजीनियरों को बताया गया कि ईआरएस टावर एक विशेष प्रकार की अस्थायी संरचना होती है, जिसका उपयोग ट्रांसमिशन लाइन क्षतिग्रस्त होने, प्राकृतिक आपदा आने अथवा लाइन शिफ्टिंग जैसी परिस्थितियों में त्वरित विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए किया जाता है।

आधुनिक तकनीक से कराया गया परिचय

प्रशिक्षण के दौरान इंजीनियरों को ईआरएस टावर की संरचना, स्थापना प्रक्रिया, संचालन प्रणाली और इसके तकनीकी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में यह प्रणाली विद्युत आपूर्ति को लंबे समय तक बाधित होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों ने ट्रेनी इंजीनियरों को यह भी समझाया कि आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क में त्वरित निर्णय क्षमता और तकनीकी दक्षता कितनी महत्वपूर्ण होती है तथा ऐसे उपकरण बिजली व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने में कैसे सहायक होते हैं।

सुरक्षा सर्वोपरि : जीरो एक्सीडेंट लक्ष्य पर विशेष जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक्स्ट्रा हाई टेंशन मेंटेनेंस संभाग, दमोह के सहायक अभियंता एम. ए. बेग ने फील्ड पर उपस्थित प्रशिक्षु इंजीनियरों को सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने एमपी ट्रांसको के “जीरो एक्सीडेंट” लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि विद्युत क्षेत्र में कार्य करते समय सुरक्षा नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने ट्रांसमिशन लाइनों पर कार्य करते समय अपनाई जाने वाली सावधानियों, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) के उपयोग, जोखिम प्रबंधन और आपातकालीन परिस्थितियों में किए जाने वाले उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

व्यावहारिक अनुभव से बढ़ेगा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनी इंजीनियरों को ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। साथ ही उन्हें फील्ड स्तर पर आने वाली तकनीकी चुनौतियों, समस्या समाधान की प्रक्रिया और कार्य निष्पादन की वास्तविक परिस्थितियों से भी अवगत कराया गया।

इस अवसर पर प्रशिक्षुओं ने तकनीकी विषयों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा समाधान किया गया। इससे उनके ज्ञान और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई।

भविष्य के दक्ष विद्युत अभियंता तैयार करने की पहल

एमपी ट्रांसको द्वारा आयोजित इस प्रकार के फील्ड प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि युवा अभियंताओं को वास्तविक कार्य परिस्थितियों में निर्णय लेने, सुरक्षा के प्रति सजग रहने और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाना भी है।

विद्युत क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य के दक्ष और जिम्मेदार अभियंताओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एमपी ट्रांसको की यह पहल प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

मध्यप्रदेश ने ट्रांसमिशन प्लानिंग में रचा नया कीर्तिमान, शुजालपुर में 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत | केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुरूप मजबूत हुआ बिजली ढांचा, प्रदेश की ट्रांसफार्मेशन क्षमता 85 हजार एमवीए के करीब पहुंची

जबलपुर- ऊर्जा क्षेत्र में अधोसंरचना विकास की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश की विद्युत ट्रांसमिशन व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने शुजालपुर स्थित 220 केवी सबस्टेशन में 200 एमवीए क्षमता के नए पावर ट्रांसफार्मर को सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत कर दिया है। यह कार्य केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा निर्धारित ट्रांसमिशन प्लानिंग क्राइटेरिया के अनुरूप किया गया है, जो राज्य की ऊर्जा प्रबंधन क्षमता और तकनीकी दक्षता का प्रमाण माना जा रहा है।

देशभर में विद्युत मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा घरेलू उपभोग में वृद्धि के कारण बिजली की जरूरतें पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उपभोक्ताओं तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क का होना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ एमपी ट्रांसको द्वारा प्रदेश में ट्रांसमिशन अधोसंरचना को लगातार विस्तार दिया जा रहा है।

शुजालपुर परियोजना से बढ़ेगी आपूर्ति की विश्वसनीयता

शुजालपुर के 220 केवी सबस्टेशन में स्थापित 200 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर क्षेत्रीय विद्युत व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेगा। इससे विद्युत भार का बेहतर प्रबंधन संभव होगा, ओवरलोडिंग की संभावनाएं कम होंगी तथा आपूर्ति की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। साथ ही भविष्य में क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना भी उपलब्ध रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े क्षमता वाले ट्रांसफार्मर न केवल तकनीकी हानियों को कम करने में सहायक होते हैं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी विद्युत प्रणाली को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

85 हजार एमवीए के करीब पहुंची प्रदेश की क्षमता

नए ट्रांसफार्मर के शामिल होने के बाद मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 84,933 एमवीए हो गई है। यह आंकड़ा प्रदेश की ऊर्जा अधोसंरचना में हुए व्यापक विस्तार को दर्शाता है और 85 हजार एमवीए के महत्वपूर्ण स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है।

यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि मध्यप्रदेश भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना के साथ अपने विद्युत नेटवर्क को विकसित कर रहा है।

विशाल और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क

एमपी ट्रांसको वर्तमान में प्रदेश के सबसे बड़े तकनीकी नेटवर्कों में से एक का संचालन कर रही है। कंपनी के नेटवर्क में कुल 1,051 अति उच्च दाब (EHT) ट्रांसफार्मर स्थापित हैं, जिनमें 400 केवी के 40, 220 केवी के 220 तथा 132 केवी के 791 ट्रांसफार्मर शामिल हैं।

इसके अलावा कंपनी प्रदेशभर में 43,079 सर्किट किलोमीटर लंबी अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन कर रही है। यह विशाल नेटवर्क प्रदेश के विभिन्न बिजली उत्पादन केंद्रों से ऊर्जा को हजारों किलोमीटर दूर स्थित शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का कार्य करता है।

417 सबस्टेशनों से संचालित हो रही विद्युत व्यवस्था

प्रदेश में एमपी ट्रांसको के कुल 417 सबस्टेशन कार्यरत हैं। इनमें 400 केवी के 14, 220 केवी के 88 और 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं। यह नेटवर्क प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है। इन सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत वोल्टेज का नियमन, भार संतुलन और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी राज्य के औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और आर्थिक प्रगति में मजबूत विद्युत अधोसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मध्यप्रदेश द्वारा सीईए के मानकों के अनुरूप ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार यह दर्शाता है कि राज्य केवल वर्तमान जरूरतों को ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की मांग को भी ध्यान में रखकर कार्य कर रहा है।

शुजालपुर में 200 एमवीए ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण इसी दूरदर्शी योजना का हिस्सा है, जो प्रदेश की विद्युत प्रणाली को अधिक सक्षम, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेश में ट्रांसमिशन क्षमता के लगातार विस्तार से न केवल उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति मिलेगी, बल्कि उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। यही कारण है कि ऊर्जा क्षेत्र की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

डिलीवरी बॉय की आड़ में शहर में फैल रहा था नशे का जाल, खंडवा पुलिस ने 1600 अल्प्राजोलम टैबलेट के साथ चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

खंडवा- मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत खंडवा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना कोतवाली पुलिस ने प्रतिबंधित नशीली दवा अल्प्राजोलम की अवैध तस्करी और सप्लाई में संलिप्त चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1600 अल्प्राजोलम टैबलेट, दो इलेक्ट्रिक स्कूटर, चार मोबाइल फोन तथा नगदी जब्त की है। इस कार्रवाई को जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के नशामुक्त मध्यप्रदेश के संकल्प और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा जिले के सभी थाना प्रभारियों को मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में थाना कोतवाली पुलिस लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी।

मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई

30 मई की देर रात थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण आर्य को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि दो युवक रेलवे ब्रिज के नीचे कब्रिस्तान के पास नशीली गोलियां बेचने की नीयत से आने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर रणनीतिक रूप से घेराबंदी की और संदिग्धों पर नजर रखी।

कुछ समय बाद बताए गए हुलिए के दो युवक वहां पहुंचे, जिन्हें पुलिस ने विधिवत कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया। पूछताछ और तलाशी के दौरान आरोपियों की पहचान मो. रईस (32 वर्ष) निवासी हातमपुरा, खंडवा तथा शेख साहिल (25 वर्ष) निवासी छीपा कॉलोनी, खंडवा के रूप में हुई। दोनों के कब्जे से कुल 100 अल्प्राजोलम टैबलेट बरामद की गईं। इसके अलावा एक इलेक्ट्रिक स्कूटर, दो मोबाइल फोन तथा नगदी भी जब्त की गई।

पूछताछ में खुला बड़े नेटवर्क का राज

प्रारंभिक गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब आरोपियों से गहन पूछताछ की तो नशे के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। आरोपियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस ने बुरहानपुर जिले में दबिश देकर लालबाग निवासी फारिस (40 वर्ष) तथा सिकारपुरा निवासी सुभाष महाजन (60 वर्ष) को गिरफ्तार किया।

इन दोनों आरोपियों के कब्जे से 1500 अतिरिक्त अल्प्राजोलम टैबलेट बरामद की गईं, जिनकी बाजार कीमत लगभग 48 हजार रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने इनके पास से एक अन्य इलेक्ट्रिक स्कूटर और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए। इस प्रकार कार्रवाई में कुल 1600 नशीली गोलियां तथा लगभग 1.24 लाख रुपये मूल्य का मसरूका बरामद किया गया।

डिलीवरी सिस्टम के जरिए हो रही थी सप्लाई

पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी शहर में डिलीवरी बॉय के माध्यम से प्रतिबंधित नशीली दवाओं की सप्लाई कर रहे थे। इससे युवाओं तक आसानी से नशे की पहुंच बनाई जा रही थी। समय रहते पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से न केवल नशे की बड़ी खेप पकड़ी गई बल्कि इसके वितरण तंत्र को भी ध्वस्त करने में सफलता मिली।

युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी कार्रवाई

विशेषज्ञों के अनुसार अल्प्राजोलम एक नियंत्रित दवा है, जिसका दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है। इसके लगातार सेवन से मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण आर्य के नेतृत्व में संपन्न हुई। अभियान में प्रधान आरक्षक इरशाद अली सहित आरक्षक राहुल, आलेश, अरविंद तोमर, पंकज साहू, रुपेश बावने, अभिषेक सन्यास, हेमंत सपकाले, रविंद्र सोलंकी तथा बलवंत राठौर की महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका रही।

खंडवा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के कारोबार के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार, 30 मई 2026

गौ सेवा और प्राकृतिक खेती मानवता की सबसे बड़ी सेवा : उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल | प्राकृतिक खेती से मिट्टी को मिलेगा नया जीवन, किसानों और भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य की होगी रक्षा

रीवा- आधुनिक कृषि पद्धतियों के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच प्राकृतिक खेती आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। यदि धरती की उर्वरा शक्ति को बचाना है, पर्यावरण को सुरक्षित रखना है और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन देना है, तो प्राकृतिक खेती को व्यापक रूप से अपनाना होगा। यह विचार उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में आयोजित प्राकृतिक खेती जागरूकता कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक उत्पादन की दौड़ में वर्षों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया गया है, जिसके कारण मिट्टी की प्राकृतिक शक्ति कमजोर हो रही है। भूमि कठोर और अनुपजाऊ होती जा रही है तथा कृषि उत्पादों में मौजूद रासायनिक तत्व मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज अनेक नई और गंभीर बीमारियों के पीछे खाद्यान्न, फल एवं सब्जियों में बढ़ते रासायनिक अवशेष भी एक प्रमुख कारण हैं।

श्री शुक्ल ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। इसके लिए गौपालन को बढ़ावा देना आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक खेती का आधार गोवंश और जैविक संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि “मानवता की सेवा का सबसे बड़ा कार्य गौ सेवा और प्राकृतिक खेती है।”

उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने के शुरुआती वर्षों में उत्पादन कुछ कम हो सकता है, लेकिन समय के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में सुधार होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी भूमि के एक छोटे हिस्से में प्राकृतिक खेती शुरू करें, ताकि परिवार के लिए शुद्ध और सुरक्षित अनाज तथा सब्जियां उपलब्ध हो सकें। इसके सकारात्मक परिणाम देखकर किसान स्वयं बड़े स्तर पर इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और कृषि के संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। कैंसर अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में जटिल उपचार और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। लेकिन केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बीमारियों के मूल कारणों को भी समाप्त करना होगा। स्वच्छ पेयजल और रसायनमुक्त खाद्यान्न उपलब्ध होने से अनेक बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि बसामन मामा गौ अभ्यारण्य और हिनौती गौधाम में प्राकृतिक खेती के मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, जो किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। स्वयं उन्होंने भी अपनी पांच एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती प्रारंभ की है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है और इसे विकासखंड स्तर तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि गांव-गांव तक इस अभियान को पहुंचाया जा सके।

कार्यक्रम का आयोजन व्यावसायिक संस्थान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने संस्थान द्वारा संचालित स्वयंसेवी संस्था समृद्धि सरोज फाउंडेशन का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एस.के. त्रिपाठी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों को सम्मानित किया।

समारोह में समाजसेवी राम सिंह ने प्राकृतिक खेती की आवश्यकता और रीवा जिले में कृषि विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संस्थान के संचालक शैलेन्द्र सिंह पटेल ने अतिथियों का स्वागत किया। वहीं डॉ. के.एस. बघेल, डॉ. अजय पाण्डेय, डॉ. बृजेश तिवारी, डॉ. संजय सिंह और अखिलेश पटेल सहित कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तकनीकों, लाभों और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और प्राकृतिक खेती के माध्यम से स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण का संकल्प लिया। यह आयोजन कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा से नहीं होगा समझौता : उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल

रीवा में निर्माणाधीन अस्पताल, कैंसर सेंटर, शौर्य स्मारक और सड़क परियोजनाओं का किया निरीक्षण, जनता दर्शन में सुनीं समस्याएं
रीवा- उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा शहर में चल रहे विभिन्न महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्धता की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी एजेंसियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण की जाएं, ताकि आमजन को जल्द से जल्द बेहतर सुविधाओं का लाभ मिल सके।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मातृ-शिशु अस्पताल, पीजी हॉस्टल, पीईटी स्कैन सेंटर तथा कैंसर अस्पताल का अवलोकन किया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को रीवा और विंध्य क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन संस्थानों के पूर्ण होने से क्षेत्र के मरीजों को बेहतर उपचार और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।
उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने और निर्माण कार्यों को तय मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए।
इसके बाद श्री शुक्ल ने निर्माणाधीन नैकहाई शौर्य स्मारक का निरीक्षण किया। उन्होंने स्मारक निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह स्मारक वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्मारक का निर्माण निर्धारित मानकों और समय-सीमा के अनुरूप पूरा किया जाए, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन सके।
उप मुख्यमंत्री ने कुठुलिया-रौसर सड़क परियोजना का भी निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सड़क विकास किसी भी क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का आधार होता है। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के लोगों को बेहतर और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी, जिससे स्थानीय विकास को भी गति प्राप्त होगी। उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण कार्यक्रम के बाद उप मुख्यमंत्री ने अमहिया स्थित अपने निवास पर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में आम नागरिकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याएं, अपेक्षाएं और सुझाव सुने तथा संबंधित अधिकारियों और स्टाफ को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रत्येक नागरिक की शिकायत पर संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री का यह निरीक्षण दौरा विकास परियोजनाओं की गति और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य, सड़क और स्मारक निर्माण जैसी परियोजनाओं के पूर्ण होने से रीवा एवं विंध्य क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

खेल समरसता और भाईचारे का सशक्त माध्यम हैं : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल | मिहिर सेन तरणताल में 54वीं राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता का शुभारंभ, डायविंग पूल का नाम होगा कैप्टन बजरंगी प्रसाद के नाम पर

भोपाल/रीवा- खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में समरसता, अनुशासन और भाईचारे की भावना विकसित करने का सशक्त साधन हैं। सकारात्मक सोच और खेल भावना के साथ किया गया प्रयास हमेशा सफलता की ओर ले जाता है। यह विचार उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा स्थित ऐतिहासिक मिहिर सेन तरणताल में आयोजित 54वीं राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि तरणताल के डायविंग पूल का नाम प्रदेश के गौरव और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित तैराक कैप्टन बजरंगी प्रसाद के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही उनकी उपलब्धियों और योगदान को दर्शाने वाला शिलालेख भी स्थापित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
अपने संबोधन में श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा को राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिलना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। यहां उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी मध्यप्रदेश की टीम में शामिल होकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक खिलाड़ी को उदीयमान प्रतिभा के रूप में अपने लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। जीत महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना और निरंतर सीखने का दृष्टिकोण है। हार से निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर आगे बढ़ना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा की धरती खेल प्रतिभाओं की भूमि रही है। यहीं के महान तैराक कैप्टन बजरंगी प्रसाद को तैराकी के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि मिहिर सेन तरणताल के निर्माण में भी कैप्टन बजरंगी प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। विशेष बात यह रही कि उन्होंने स्वयं के नाम के बजाय इस तरणताल का नाम महान तैराक मिहिर सेन के सम्मान में रखने का सुझाव दिया था, जो उनके विनम्र व्यक्तित्व और खेल भावना को दर्शाता है।
श्री शुक्ल ने तरणताल में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए नए स्प्रिंगबोर्ड लगाए जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ ऐसे खेल आयोजन किसी क्षेत्र की सकारात्मक पहचान स्थापित करते हैं और युवाओं को खेलों की ओर आकर्षित करते हैं। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच होती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रतियोगिता से निकलने वाले खिलाड़ी प्रदेश और देश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि रीवा में इस आयोजन से स्थानीय खिलाड़ियों को प्रेरणा और बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
मध्यप्रदेश तैराकी संघ के अध्यक्ष पीयूष शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग दो दशक बाद रीवा में राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। चार दिवसीय इस प्रतियोगिता में 114 स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के 18 जिलों से आए लगभग 200 खिलाड़ी और 50 से अधिक तकनीकी अधिकारी एवं प्रशिक्षक भाग ले रहे हैं।
प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्पर्धाओं के विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. पंचूलाल प्रजापति, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, पूर्व पार्षद शिवदत्त पाण्डेय, राजगोपाल मिश्रचारी, लालबहादुर सिंह, प्रोफेसर जयराम शुक्ल, संभागीय खेल अधिकारी एम.के. धौलपुरी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, खेल प्रेमी, खिलाड़ी और उनके परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुकेश येंगल एवं डॉ. आरती तिवारी ने किया।
राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता का यह आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को नया मंच प्रदान करेगा, बल्कि रीवा को प्रदेश के प्रमुख खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

पत्रकारिता पेशा नहीं, समाज को दिशा देने का संकल्प है : डॉ. मनोज निवारिया

खंडवा- हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों, दायित्वों और सामाजिक सरोकारों को पुनः आत्मसात करने का अवसर है। इसी उद्देश्य के साथ सद्भावना मंच कार्यालय में हिंदी पत्रकारिता दिवस का आयोजन किया गया, जहां पत्रकारिता के महत्व, उसकी सामाजिक भूमिका और लोकतंत्र में उसकी जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दादा माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, कर्मवीर पीठ खंडवा के कैंपस प्राचार्य डॉ. मनोज निवारिया ने कहा कि पत्रकारिता केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का एक सशक्त संकल्प है। उन्होंने कहा कि विचारों की स्वतंत्रता, कलम की ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही ही पत्रकारिता की असली पहचान है। जब पत्रकार निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करता है, तब वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनता है।

डॉ. निवारिया ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ भारत का पहला हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र था। यह केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि हिंदी भाषी समाज की चेतना और अभिव्यक्ति का प्रारंभिक मंच था। इसी ऐतिहासिक विरासत को स्मरण करते हुए प्रतिवर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है।

सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। पत्रकार समाज और शासन के बीच संवाद का सेतु बनकर कार्य करता है। सत्य को सामने लाना, जनहित के मुद्दों को प्रमुखता देना तथा सामाजिक चेतना को जागृत करना पत्रकारिता का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि कलम की शक्ति किसी भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है और यही शक्ति लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करती है।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान डिजिटल युग में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। सोशल मीडिया और त्वरित सूचना के दौर में सत्य, विश्वसनीयता और तथ्यपरकता को बनाए रखना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे समाज तक प्रमाणिक और संतुलित जानकारी पहुंचाएं।

वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का विकास करना भी है। निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर सकती है और जनता के विश्वास को बनाए रख सकती है।

इस अवसर पर पूर्व डीएसपी आनंदपाल तोमर, केबी मनसारे, गणेश भावसार, ओम पिल्लै, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, देवेंद्र जैन, डॉ. एम.एम. कुरैशी, अनूप शर्मा, राधेश्याम शाक्य, निर्मल मंगवानी, सुभाष मीणा, नदीम रायल, कैलाश पटेल सहित अनेक मंच सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए और हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन पत्रकारिता के आदर्शों, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा की भावना को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ।

दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रतीक बनीं शिक्षिका श्रद्धा गुप्ता, राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में जीते दो स्वर्ण पदक

खंडवा- जब प्रतिभा के साथ समर्पण, अनुशासन और निरंतर प्रयास जुड़ जाते हैं, तब सफलता स्वयं कदम चूमती है। इसका उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर, विकासखंड पंधाना, जिला खंडवा की शिक्षिका श्रीमती श्रद्धा गुप्ता ने, जिन्होंने 12वीं राज्य स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी खेल प्रतियोगिता 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 मीटर दौड़ एवं लंबी कूद दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल खंडवा जिले बल्कि पूरे इंदौर संभाग का गौरव बढ़ाया है।

छतरपुर में 27 मई से 31 मई 2026 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न संभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, नर्मदापुरम, रीवा, सागर, शहडोल एवं उज्जैन संभाग सहित लोक शिक्षण संचालनालय की टीमों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रदेशभर से आए अनुभवी और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही, किंतु श्रीमती श्रद्धा गुप्ता ने अपने अद्वितीय खेल कौशल, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर दोनों स्पर्धाओं में प्रथम स्थान अर्जित कर स्वर्णिम सफलता हासिल की।

100 मीटर दौड़ में उनकी तेज गति और शानदार तालमेल ने सभी प्रतियोगियों को पीछे छोड़ दिया, वहीं लंबी कूद स्पर्धा में उनके तकनीकी कौशल और संतुलित प्रदर्शन ने उन्हें विजेता बनाया। दो अलग-अलग एथलेटिक्स स्पर्धाओं में एक साथ स्वर्ण पदक जीतना उनकी बहुमुखी खेल प्रतिभा का प्रमाण है।

विशेष बात यह है कि यह सफलता कोई एक दिन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासित जीवनशैली और खेलों के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है। श्रीमती श्रद्धा गुप्ता लगातार तीन वर्षों से राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त कर रही हैं। वर्ष 2024 में भी उन्होंने 100 मीटर दौड़ और लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीतकर जिले और संभाग का नाम प्रदेश स्तर पर गौरवान्वित किया था। लगातार सफलता प्राप्त करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और उत्कृष्ट खेल संस्कृति को दर्शाता है।

श्रीमती श्रद्धा गुप्ता केवल खेलों तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। एक शिक्षिका के रूप में वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें खेल, विज्ञान और व्यक्तित्व विकास के लिए भी प्रेरित करती रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि शिक्षक केवल ज्ञान के संवाहक ही नहीं, बल्कि समाज के लिए आदर्श व्यक्तित्व भी होते हैं।

उनकी यह सफलता विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आज के समय में जब शारीरिक फिटनेस और खेलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में श्रीमती श्रद्धा गुप्ता की उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि नियमित अभ्यास, सकारात्मक सोच और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री पी. एस. सोलंकी एवं जिला क्रीड़ा अधिकारी श्री पी. डी. डोंगरे ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। विद्यालय परिवार, शिक्षा विभाग, सहकर्मियों एवं क्षेत्रवासियों ने भी उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

श्रीमती श्रद्धा गुप्ता की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग, खंडवा जिले और इंदौर संभाग के लिए गर्व का विषय है। उनकी यह स्वर्णिम उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को खेल, शिक्षा और जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

शुक्रवार, 29 मई 2026

मौसम ने बदला मिजाज: बारिश से ठंडक, कुछ घंटों बाद फिर 36 डिग्री पहुंचा पारा

रोशनी (खंडवा)- भीषण गर्मी और तपते मौसम के बीच शनिवार को रोशनी क्षेत्र के लोगों को कुछ समय के लिए राहत मिली, जब सुबह तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि यह राहत अधिक समय तक कायम नहीं रह सकी और कुछ घंटों बाद फिर से धूप निकलने के साथ तापमान बढ़कर 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

पिछले कई दिनों से क्षेत्र में लगातार तेज गर्मी का दौर जारी है। सुबह से ही चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा था। ऐसे में शनिवार सुबह अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में बादल छाने के साथ तेज हवाएं चलने लगीं। इसके बाद हुई बारिश ने वातावरण में ठंडक घोल दी और लोगों को गर्मी से राहत का एहसास कराया।

सुबह का मौसम रहा सुहावना

बारिश के बाद सुबह लगभग 10:30 बजे तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से कम था। मौसम में आई इस नरमी के कारण लोगों ने राहत महसूस की। कई लोग घरों से बाहर निकले और खुले वातावरण का आनंद लिया। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बारिश का स्वागत किया गया, क्योंकि इससे वातावरण में नमी बढ़ी और धूलभरी गर्म हवाओं से राहत मिली।

हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार तापमान भले ही 33 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके बावजूद पिछले दिनों की तुलना में मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक बना रहा।

दोपहर में फिर बढ़ने लगी गर्मी

बारिश का असर धीरे-धीरे कम होता गया और दोपहर तक आसमान साफ होने लगा। धूप निकलने के साथ ही तापमान में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोपहर करीब 12 बजे के बाद तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि अगले कुछ घंटों में इसके 38 डिग्री तक जाने की संभावना जताई गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद कुछ समय के लिए मौसम बेहद सुहावना हो गया था, लेकिन दोपहर तक गर्मी ने फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। हालांकि तेज गर्मी के बीच मिली यह कुछ घंटों की राहत लोगों के लिए किसी राहत भरी सौगात से कम नहीं रही।

प्री-मानसून गतिविधियों का असर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में इन दिनों प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं। पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों के कारण कहीं-कहीं तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल रही है। इसी का असर रोशनी क्षेत्र में भी दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी मौसम में इसी तरह उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। दिन के समय गर्मी और उमस का प्रभाव जारी रहेगा, जबकि शाम या रात के समय आंधी और हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है।

स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर

मौसम में अचानक होने वाले बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। चिकित्सकों ने नागरिकों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में निकलने से बचने तथा मौसम के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों को गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की आवश्यकता है।

राहत मिली, लेकिन गर्मी से निजात नहीं

शनिवार सुबह हुई बारिश ने भले ही कुछ समय के लिए गर्मी का असर कम कर दिया हो, लेकिन तापमान में दोबारा हुई वृद्धि ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अभी क्षेत्र को भीषण गर्मी से पूरी तरह राहत मिलने वाली नहीं है। लोगों को मानसून की प्रतीक्षा है, जो स्थायी रूप से मौसम में बदलाव ला सकता है। फिलहाल रोशनी क्षेत्र में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग आने वाले दिनों में भी ऐसी ही राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं।

सेवा, नेतृत्व और संगठन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बनीं लायन प्रेरणा दुबे | डिस्ट्रिक्ट 3233G1 की सर्वश्रेष्ठ जोन चेयरपर्सन चुनी गईं, मल्टीपल कन्वेंशन में मिला सिल्वर अवॉर्ड

खंडवा- समाज सेवा, प्रभावी नेतृत्व और संगठनात्मक दक्षता के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रही लायन प्रेरणा दुबे ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3233G1 की जोन चेयरपर्सन एवं लायंस क्लब हरसूद युवांश की संस्थापक के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल में जो उल्लेखनीय कार्य किए, उसके परिणामस्वरूप उन्हें डिस्ट्रिक्ट 3233G1 का सर्वश्रेष्ठ जोन चेयरपर्सन घोषित किया गया। इसके साथ ही लायंस इंटरनेशनल मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 की 9वीं मल्टीपल कन्वेंशन ‘उर्विश’ में उन्हें प्रतिष्ठित ‘आउटस्टैंडिंग जोन चेयरपर्सन सिल्वर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हरसूद, खंडवा और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनकी इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि समर्पण, दूरदृष्टि और सकारात्मक नेतृत्व के माध्यम से सामाजिक संगठनों में भी उत्कृष्ट परिवर्तन लाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में मिला सम्मान

23 एवं 24 मई को इंदौर में आयोजित मल्टीपल कन्वेंशन ‘उर्विश’ में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 955 से अधिक लायंस क्लबों के लगभग 1800 प्रतिनिधियों और सदस्यों ने भाग लिया। इस भव्य आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पदाधिकारियों और सदस्यों को सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर लायन प्रेरणा दुबे को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सिल्वर अवॉर्ड प्रदान किया गया।

सम्मान समारोह में सेकंड वाइस इंटरनेशनल प्रेसिडेंट लायन मनोज शाह सहित डिस्ट्रिक्ट एवं मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। मंच से उनके कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें प्रेरणादायी नेतृत्व का उदाहरण बताया गया।

प्रशासनिक दक्षता और अनुशासित कार्यशैली बनी पहचान

जोन चेयरपर्सन के रूप में लायन प्रेरणा दुबे ने अपने प्रशासनिक दायित्वों का अत्यंत व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। क्लबों की मासिक रिपोर्टिंग को समयबद्ध बनाना, विभिन्न गतिविधियों की सतत मॉनिटरिंग करना तथा डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एडवाइजरी कमेटी (DGAC) की बैठकों का सफल संचालन उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही।

उनके नेतृत्व में जोन के सभी क्लबों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ और संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिली। यही कारण रहा कि उनका जोन पूरे डिस्ट्रिक्ट में अनुकरणीय माना गया।

सेवा कार्यों को दी नई दिशा

लायन प्रेरणा दुबे ने केवल प्रशासनिक कार्यों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि सेवा गतिविधियों को भी प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में आयोजित प्रथम DGAC बैठक को सेवा आधारित स्वरूप दिया गया। इस पहल के अंतर्गत शासकीय अस्पताल हरसूद में एक स्थायी भोजनशाला की शुरुआत करवाई गई, जिससे जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को लाभ मिल रहा है।

यह पहल लायंस इंटरनेशनल के सेवा मूल्यों को धरातल पर उतारने का एक प्रभावी उदाहरण मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस कार्य की व्यापक सराहना हुई और इसे मानव सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

सदस्यता वृद्धि में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

किसी भी सामाजिक संगठन की सफलता उसके सक्रिय सदस्यों पर निर्भर करती है। इसे ध्यान में रखते हुए लायन प्रेरणा दुबे ने अपनी दूसरी DGAC बैठक का प्रमुख विषय सदस्यता वृद्धि रखा। उनके मार्गदर्शन और रणनीतिक प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि जोन के सभी क्लबों में सदस्य संख्या में वृद्धि दर्ज की गई।

विशेष बात यह रही कि उन्होंने स्वयं सात नए सदस्यों को प्रायोजित कर नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। इससे संगठन में नए कार्यकर्ताओं को जुड़ने और सेवा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिला।

नेतृत्व विकास पर विशेष फोकस

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नेतृत्व विकास को भी प्राथमिकता दी। तीसरी DGAC बैठक इसी विषय पर केंद्रित रही। बैठक के पश्चात उन्होंने अपने जोन के सभी क्लबों में CLLI (Certified Lions Leadership Institute) कार्यक्रमों के आयोजन को सुनिश्चित किया।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से नए और युवा सदस्यों को नेतृत्व कौशल विकसित करने, संगठन संचालन को समझने और सेवा गतिविधियों में प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त हुआ। इससे भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार हुआ।

नवाचार और रचनात्मक सोच ने दिलाई अलग पहचान

लायन प्रेरणा दुबे द्वारा तैयार किया गया अभिनव एवं सुव्यवस्थित ‘जोन सोशियो’ भी पूरे डिस्ट्रिक्ट में चर्चा का विषय बना। इस दस्तावेज़ ने जोन की गतिविधियों, उपलब्धियों और प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया, जिससे उनके कार्यों को नई पहचान मिली।

उनकी रचनात्मक सोच, योजनाबद्ध कार्यप्रणाली और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण ने उन्हें अन्य पदाधिकारियों से अलग पहचान दिलाई।

पूरे डिस्ट्रिक्ट ने दी बधाई

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर रीज़न-11 सहित पूरे डिस्ट्रिक्ट 3233G1 के लायन सदस्यों, पदाधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त की। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वे आगे भी सेवा, नेतृत्व और संगठन निर्माण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।

लायन प्रेरणा दुबे की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि समर्पित नेतृत्व, सेवा भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सामाजिक संगठनों के माध्यम से समाज में सार्थक परिवर्तन लाया जा सकता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर खंडवा में जागरूकता रैली, मजदूरों को दिलाई तंबाकू त्यागने की शपथ | जिला चिकित्सालय से निकली जन-जागरूकता रैली, चिकित्सकों ने बताए तंबाकू सेवन के घातक दुष्परिणाम

खंडवा- विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर श्री दादाजी धूनीवाले जिला चिकित्सालय, खंडवा द्वारा जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ सिविल सर्जन द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस दौरान तंबाकू सेवन के प्रति लोगों को जागरूक करने और नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

रैली जिला चिकित्सालय परिसर से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई घंटाघर चौक पहुंची, जहां मजदूर वर्ग एवं आमजन को तंबाकू निषेध की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को तंबाकू एवं उससे निर्मित उत्पादों के सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।

चिकित्सकों ने बताया कि तंबाकू सेवन कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों और अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है। तंबाकू से दूर रहकर न केवल व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ रख सकता है, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित बना सकता है।

कार्यक्रम के दौरान लोगों से अपील की गई कि वे तंबाकू एवं अन्य नशे की आदतों को छोड़कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।

इस अवसर पर आरएमओ, कार्यक्रम के नोडल अधिकारी, वरिष्ठ चिकित्सकगण, नर्सिंग ऑफिसर, पैरामेडिकल स्टाफ एवं जिला चिकित्सालय के अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित यह जागरूकता अभियान लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

हिंदी पत्रकारिता दिवस : कलम की वह मशाल जिसने समाज, लोकतंत्र और राष्ट्र को दिशा दी | 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के बाद डिजिटल युग की नई चुनौतियों और अवसरों के बीच खड़ी है हिंदी पत्रकारिता

"जब इतिहास लिखा जाता है तो उसमें राजाओं और शासकों का उल्लेख होता है, लेकिन जब समाज बदलता है तो उसके पीछे पत्रकारिता की कलम का भी उतना ही बड़ा योगदान होता है।"

30 मई भारतीय पत्रकारिता के इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब वर्ष 1826 में हिंदी भाषा का पहला समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ प्रकाशित हुआ। पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा शुरू किया गया यह समाचार पत्र केवल एक प्रकाशन नहीं था, बल्कि भारतीय जनमानस की चेतना को स्वर देने का एक ऐतिहासिक प्रयास था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है।

लगभग दो शताब्दियों की यात्रा में हिंदी पत्रकारिता ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी आवाज बनने से लेकर लोकतंत्र की प्रहरी बनने तक और अब डिजिटल युग में सूचना क्रांति के केंद्र में पहुंचने तक हिंदी पत्रकारिता का सफर संघर्ष, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरक गाथा है।

हिंदी पत्रकारिता : एक मिशन, जिसने राष्ट्र निर्माण में निभाई अहम भूमिका

हिंदी पत्रकारिता का जन्म किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं हुआ था। इसका मूल उद्देश्य था समाज को जागरूक करना, जनमत तैयार करना और आम जनता की आवाज को अभिव्यक्ति देना।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदी पत्रकारिता ने राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया। उस दौर में समाचार पत्र केवल खबरों का माध्यम नहीं थे, बल्कि स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले हथियार थे। अंग्रेजी शासन के दमन और सेंसरशिप के बावजूद पत्रकारों ने सत्य लिखने का साहस दिखाया। अनेक पत्रकारों ने जेल यात्राएं कीं, आर्थिक संकट झेले और सामाजिक दबावों का सामना किया, लेकिन अपनी लेखनी को झुकने नहीं दिया।

लोकमान्य तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, बाबूराव विष्णु पराड़कर, माखनलाल चतुर्वेदी और पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे व्यक्तित्वों ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम माना।

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ क्यों कहलाती है पत्रकारिता?

लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है। इसका कारण यह है कि पत्रकारिता सत्ता और जनता के बीच संवाद का सेतु बनती है।

पत्रकारिता का कार्य केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं है, बल्कि शासन की नीतियों का विश्लेषण करना, जनहित के मुद्दों को सामने लाना, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर निगरानी रखना तथा समाज को सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करना भी है।

जब किसी गांव में पेयजल की समस्या उजागर होती है, किसी अस्पताल की अव्यवस्था सामने आती है, किसी किसान की पीड़ा शासन तक पहुंचती है या किसी गरीब को न्याय मिलता है, तब उसके पीछे कहीं न कहीं पत्रकारिता की सक्रिय भूमिका होती है।

वर्तमान दौर : सूचना विस्फोट का युग

आज का समय सूचना क्रांति का युग है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने सूचना के प्रवाह को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। जहां कभी समाचार अगले दिन अखबार में प्रकाशित होते थे, वहीं अब घटनाएं सेकंडों में दुनिया भर में पहुंच जाती हैं।

इस बदलाव ने पत्रकारिता को अधिक प्रभावशाली बनाया है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं। आज हर व्यक्ति मोबाइल फोन के माध्यम से सूचना प्रसारित कर सकता है। ऐसे में पत्रकार और आम सूचना प्रसारक के बीच अंतर को बनाए रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

पत्रकारिता का मूल आधार तथ्य, सत्यापन और जिम्मेदारी है, जबकि सोशल मीडिया पर कई बार अपुष्ट और भ्रामक सूचनाएं भी तेजी से फैल जाती हैं।

फेक न्यूज : पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती

वर्तमान समय में फेक न्यूज लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी, आधी-अधूरी या भ्रामक जानकारी कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है।

ऐसे माहौल में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। पत्रकारों को केवल खबर देने की नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच कर सत्य सामने लाने की भूमिका निभानी होती है।

आज पत्रकारिता की सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि वह सूचना की भीड़ में सत्य को पहचानकर जनता तक पहुंचाए।

टीआरपी, क्लिक और व्यूज की दौड़

डिजिटल युग ने मीडिया संस्थानों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी खड़ी की हैं। आज समाचार संस्थानों की सफलता का आकलन कई बार टीआरपी, व्यूज, क्लिक और फॉलोअर्स के आधार पर किया जाता है।

इस प्रतिस्पर्धा ने पत्रकारिता के स्वरूप को प्रभावित किया है। कई बार गंभीर और विकासोन्मुखी मुद्दों की जगह सनसनीखेज खबरें अधिक स्थान प्राप्त कर लेती हैं।

हालांकि यह भी सच है कि आज भी देश में अनेक पत्रकार और मीडिया संस्थान जनहित, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को प्रमुखता देकर पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखे हुए हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और पत्रकारिता का भविष्य

वर्ष 2026 तक आते-आते कृत्रिम बुद्धिमत्ता पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। समाचार लेखन, डेटा विश्लेषण, अनुवाद, वीडियो निर्माण और कंटेंट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

लेकिन प्रश्न यह है कि क्या मशीनें पत्रकारों की जगह ले सकती हैं?

उत्तर है— नहीं।

क्योंकि पत्रकारिता केवल सूचना का संकलन नहीं, बल्कि संवेदना, विवेक, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी विषय है। एआई सहायता कर सकता है, लेकिन किसी किसान के दर्द, किसी आपदा पीड़ित की पीड़ा या किसी सामाजिक समस्या की गहराई को समझने के लिए मानवीय दृष्टि की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी।

क्षेत्रीय और हिंदी पत्रकारिता का स्वर्णिम अवसर

डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा लाभ हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की पत्रकारिता को मिला है। एक समय था जब राष्ट्रीय विमर्श पर अंग्रेजी मीडिया का अधिक प्रभाव माना जाता था, लेकिन आज हिंदी पत्रकारिता करोड़ों लोगों तक सीधे पहुंच रही है।

छोटे शहरों, कस्बों और गांवों की खबरें अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रही हैं। स्थानीय पत्रकार लोकतंत्र की जमीनी आवाज बनकर उभरे हैं। यही हिंदी पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत है— उसकी जनता से निकटता।

पत्रकारिता का धर्म : निष्पक्षता और जनहित

पत्रकारिता का अंतिम उद्देश्य सत्ता का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि सत्य का समर्थन होना चाहिए। पत्रकारिता तब तक प्रासंगिक रहेगी, जब तक वह निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जनहित के मूल्यों पर कायम रहेगी।

पत्रकार की कलम किसी व्यक्ति, संस्था या विचारधारा की नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र की जवाबदेह होनी चाहिए। यही पत्रकारिता की आत्मा है और यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति।

बदलते समय में भी अमर है पत्रकारिता का मूल स्वर

हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस विरासत का स्मरण है जिसने भारतीय समाज को सोचने, समझने और जागरूक होने की शक्ति दी। आज तकनीक बदल रही है, माध्यम बदल रहे हैं, पाठकों की आदतें बदल रही हैं, लेकिन पत्रकारिता का मूल उद्देश्य नहीं बदला है।

सत्य की खोज, जनहित की रक्षा, लोकतंत्र की मजबूती और समाज को सही दिशा देना— यही पत्रकारिता का शाश्वत धर्म है।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इस गौरवशाली सफर में अनेक चुनौतियां आईं, लेकिन हर बार पत्रकारिता ने स्वयं को नए रूप में स्थापित किया। आज भी आवश्यकता है कि पत्रकारिता अपनी विश्वसनीयता, संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता को बनाए रखे।

क्योंकि जब-जब समाज को सच की आवश्यकता होगी, तब-तब पत्रकारिता की कलम ही सबसे विश्वसनीय आवाज बनकर सामने आएगी।

सरपंच घर-घर साफ पानी पहुंचाकर कमाएं पुण्य और यश : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल | कहा- हर घर में शुद्ध पानी पहुंच गया तो अस्पतालों की आधी भीड़ अपने आप कम हो जाएगी

भोपाल/रीवा- उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ग्राम पंचायतों को जल जीवन मिशन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि सरपंच यदि संकल्प के साथ काम करें तो हर घर तक नल से स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ पानी पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा और जनकल्याण का बड़ा कार्य है, जिससे सरपंचों को पुण्य और यश दोनों प्राप्त होंगे।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम में आयोजित जल जीवन मिशन की प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन संचालित किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से गांवों तक शुद्ध और फिल्टर किया हुआ पानी पहुंचाने की आधारभूत व्यवस्था तैयार कर दी गई है। अब इसे प्रत्येक घर तक पहुंचाने और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में ग्राम पंचायतों को पेयजल संबंधी छोटे कार्यों के लिए अधिक अधिकार दिए हैं। नए एसओआर प्रावधानों के तहत पंचायतें 10 हजार रुपये तक के पेयजल कार्य बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के करा सकती हैं। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग और अन्य योजनाओं की राशि का उपयोग भी पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है।

“साफ पानी मिलेगा तो अस्पतालों की भीड़ घटेगी”

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बीमारियां दूषित पानी के कारण फैलती हैं। यदि प्रत्येक परिवार को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो जाए तो अस्पतालों में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और पेयजल का सीधा संबंध है। स्वच्छ पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर जीवन का आधार है। इसलिए ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

पंचायतों को मिलेगा पूरा तकनीकी सहयोग

श्री शुक्ल ने कहा कि जल जीवन मिशन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के इंजीनियर ग्राम पंचायतों को पूरा तकनीकी सहयोग देंगे। जहां पाइपलाइन का काम अधूरा है, उसे पूरा कराया जाएगा। लेकिन अंतिम रूप से घर-घर पानी पहुंचाने और व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी पंचायतों को ही निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि यदि पंचायतें पारदर्शिता और नियमितता के साथ जल आपूर्ति करेंगी तो जल कर संग्रहण में भी कोई कठिनाई नहीं आएगी। इसके लिए महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा सकती है।

“चुनाव जीतने वाला सरपंच पेयजल व्यवस्था भी संभाल सकता है”

अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री ने सरपंचों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो व्यक्ति ग्राम पंचायत का कठिन चुनाव जीत सकता है, उसके लिए गांव में बेहतर पेयजल व्यवस्था स्थापित करना कोई कठिन कार्य नहीं है। आवश्यकता केवल इच्छाशक्ति और जनसेवा की भावना की है।

उन्होंने कार्यशाला में दी जा रही तकनीकी जानकारियों को गंभीरता से आत्मसात करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार की शंका हो तो उसका तत्काल समाधान कराया जाए और हर घर तक नल से जल पहुंचाने का संकल्प लिया जाए।

रीवा जिले में दो हजार करोड़ रुपये के कार्य

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि केवल रीवा जिले में ही जल जीवन मिशन के तहत लगभग दो हजार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। यह निवेश ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सफल सरपंचों और कर्मचारियों का हुआ सम्मान

कार्यशाला के दौरान जल जीवन मिशन के अंतर्गत नल-जल योजनाओं का सफल संचालन करने वाले सरपंचों, ग्राम पंचायत सचिवों तथा वाल्व ऑपरेटरों को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, प्रभारी कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन, जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नल-जल योजनाओं के संचालन, रखरखाव, जल संरक्षण, जल कर वसूली तथा जल स्रोतों के पुनर्भरण (रिचार्ज) जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।

जल जीवन मिशन की यह कार्यशाला केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य और आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुई।

वर्न यूनिट पहुंचे उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, मरीजों की सुविधाओं पर जताई सख्ती | एयरकंडीशनर तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश, कहा- मरीजों को परेशानी हुई तो होगी कार्रवाई

भोपाल/रीवा- उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने शुक्रवार को गांधी स्मारक चिकित्सालय परिसर स्थित वर्न यूनिट का आकस्मिक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति देखी और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने वर्न वार्ड में एयरकंडीशनर की खराब स्थिति पर नाराजगी जताते हुए उसे तत्काल सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्न वार्ड जैसे संवेदनशील विभागों में तापमान नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है, इसलिए यहां स्थापित सभी एयरकंडीशनर और कूलर हर समय चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए।
श्री शुक्ल ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि यदि किसी उपकरण में तकनीकी खराबी आती है तो उसके सुधार में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अतिरिक्त एयरकंडीशनर और कूलर उपलब्ध रखे जाएं ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्न वार्ड में भर्ती मरीजों को विशेष देखभाल और नियंत्रित वातावरण की आवश्यकता होती है। ऐसे में सुविधाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानी हुई तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने वार्ड की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई तथा मरीजों के उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली और अधिकारियों को अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल एवं गांधी स्मारक चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा भी उपस्थित रहे। उन्होंने उप मुख्यमंत्री को वर्न यूनिट की वर्तमान व्यवस्थाओं और सुधारात्मक कार्यों की जानकारी दी।
उप मुख्यमंत्री का यह निरीक्षण राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को अधिक जवाबदेह एवं प्रभावी बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी, अब 70 से नीचे लाने का लक्ष्य : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल | समर्पण भाव, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी निगरानी से मिली बड़ी सफलता, रीवा में कार्यशाला का शुभारंभ

भोपाल/रीवा- मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है और अब राज्य सरकार इसे और नीचे लाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग का पूरा अमला समर्पण भाव से कार्य करे तो मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा आयोजित मातृ मृत्यु दर में कमी लाने संबंधी कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2018-20 के दौरान मातृ मृत्यु दर 173 थी, जो वर्ष 2022-24 में घटकर 135 रह गई है। यह 38 अंकों अर्थात लगभग 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक प्रगति को दर्शाती है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से यह सफलता मिली है। अब आवश्यकता है कि इस अभियान को और गति देकर मातृ मृत्यु दर को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ स्थिति तक पहुंचाया जाए।

उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में चिकित्सकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आशा कार्यकर्ताओं से प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

राजेन्द्र शुक्ल ने वरिष्ठ चिकित्सकों से स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और टेलीमेडिसिन सेवाओं को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाकर ही मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थायी सुधार संभव है।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रीवा तेजी से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कैंसर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है, जो मुंबई के टाटा अस्पताल की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा। साथ ही रीवा संभागीय मुख्यालय ऐसा पहला शहर बनने जा रहा है, जहां चारों ओर रिंग रोड और बायपास जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

कार्यशाला में श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि उप मुख्यमंत्री के प्रयासों से रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हुआ है और यह कार्यशाला मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पद्मा शुक्ला ने कहा कि कार्यशाला में हुए विचार-विमर्श से चिकित्सकों और मैदानी अमले को नई दिशा मिलेगी, जिससे रीवा जिले में मातृ मृत्यु दर को और कम करने में सफलता प्राप्त होगी।

कार्यक्रम में डॉ. नरेश बजाज, डॉ. शशि जैन, संयुक्त संचालक डॉ. अवधिया, अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, तकनीक आधारित निगरानी, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में मातृ मृत्यु दर में और अधिक कमी लाने में सफल हो सकता है।