मंगलवार, 30 जून 2026

बैतूल के गाजरिया आम को मिला जीआई टैग, देशभर में मिली नई पहचान; मध्यप्रदेश की 12 उद्यानिकी फसलों ने रचा इतिहास

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी उत्पादों को मिला जीआई टैग, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि।

बैतूल। मध्यप्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने में सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ बैतूल जिले के प्रसिद्ध गाजरिया आम को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल बैतूल, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है। जीआई टैग मिलने से गाजरिया आम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशिष्ट पहचान मिलेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और नए बाजारों तक पहुंच का लाभ मिलेगा।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में यह उपलब्धि राज्य के उद्यानिकी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है, जिसे वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।

गाजरिया आम की विशेष पहचान

बैतूल का गाजरिया आम अपनी विशिष्ट गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध के कारण वर्षों से लोगों की पहली पसंद रहा है। इस आम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनानास जैसी सुगंध और गाजर के समान नारंगी रंग का गूदा है। इसी कारण इसे 'गाजरिया आम' कहा जाता है। इसकी मिठास, रेशारहित गूदा और आकर्षक रंग इसे अन्य आमों से अलग पहचान दिलाते हैं।

इतिहासकारों के अनुसार बैतूल जिले के खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ जैसे 500 वर्ष से अधिक पुराने किले इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और गोंड राजाओं के शासन की गवाही देते हैं। माना जाता है कि गाजरिया आम की खेती भी इसी क्षेत्र की प्राचीन कृषि परंपरा का हिस्सा रही है।

इन क्षेत्रों में होता है सर्वाधिक उत्पादन

बैतूल जिले के बैतूल, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर और चिचोली विकासखंडों में गाजरिया आम का सर्वाधिक उत्पादन होता है। अब जीआई टैग मिलने के बाद इन क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने और उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने की योजना बनाई गई है। इससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और निर्यात के अवसर उपलब्ध होंगे।

इन 12 उद्यानिकी उत्पादों को मिला जीआई टैग

मध्यप्रदेश के जिन उद्यानिकी उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, उनमें बैतूल का गाजरिया आम, गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन, खरगौन की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू एवं गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, अलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं। (शासकीय सूची में कुल 12 जीआई टैग स्वीकृत उत्पादों का उल्लेख किया गया है।)

किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। इसके साथ ही निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बैतूल के गाजरिया आम को मिला जीआई टैग केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जिले की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

सोमवार, 29 जून 2026

भाजपा हरसूद विधानसभा की मंडल टोली घोषित: आशापुर मंडल के संयोजक बने दीपक खोरे, संगठन विस्तार को मिलेगी नई गति

खंडवा/हरसूद- भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरसूद विधानसभा (क्रमांक-176) की मंडल टोली की घोषणा कर दी है। पार्टी द्वारा जारी सूची में विभिन्न मंडलों के संयोजकों एवं सदस्यों की नियुक्ति की गई है। संगठनात्मक जिम्मेदारियां अनुभवी, सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को सौंपते हुए भाजपा ने आगामी संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने तथा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का संदेश दिया है।

जिला भाजपा अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर के नेतृत्व में घोषित इस मंडल टोली को संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि नई टीम संगठन की विचारधारा, योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को गांव-गांव और बूथ स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आशापुर मंडल की कमान दीपक खोरे को

जारी सूची के अनुसार आशापुर मंडल का संयोजक श्री दीपक खोरे को नियुक्त किया गया है। लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे दीपक खोखरे को पार्टी ने उनकी कार्यशैली, जनसंपर्क और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके साथ मंडल टोली में श्री किशोर भांगु एवं श्री रघुवीर यादव को सदस्य बनाया गया है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि दीपक खोखरे के नेतृत्व में आशापुर मंडल में संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा पार्टी की योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तरीके से कार्यकर्ताओं एवं आमजन तक पहुंचाया जाएगा।

हरसूद ग्रामीण और नगर मंडल की भी हुई घोषणा

भाजपा द्वारा जारी सूची में हरसूद ग्रामीण मंडल के संयोजक के रूप में श्री ओमप्रकाश गौर को जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ श्री सतीश राजपूत एवं श्री देवदास पवार को मंडल टोली का सदस्य बनाया गया है।

वहीं हरसूद नगर मंडल की जिम्मेदारी श्री श्रीधर मुकाती को सौंपी गई है। नगर मंडल टोली में श्री सुनील पटेल को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों के माध्यम से पार्टी ने अनुभवी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन की मुख्यधारा में स्थान देते हुए भविष्य की रणनीति को मजबूत करने का प्रयास किया है।

बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर

भाजपा का उद्देश्य मंडल स्तर पर संगठन को और अधिक सक्रिय बनाना, बूथ समितियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा पार्टी की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना है। नई मंडल टोली सदस्यता अभियान, जनसंपर्क, संगठन विस्तार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आगामी राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल

मंडल टोली की घोषणा के बाद हरसूद विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का वातावरण देखने को मिला। नव-नियुक्त पदाधिकारियों को पार्टी नेताओं, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नई टीम संगठन की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए पार्टी को और अधिक मजबूत बनाएगी।

नवनियुक्त संयोजकों और सदस्यों ने भी पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संगठन की रीति-नीति के अनुरूप पूरी निष्ठा, समर्पण और सक्रियता के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते हुए हर बूथ और प्रत्येक कार्यकर्ता तक पार्टी की विचारधारा एवं योजनाओं को पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी।

भाजपा नेतृत्व ने विश्वास व्यक्त किया है कि नवगठित मंडल टोली संगठन और जनता के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगी तथा हरसूद विधानसभा क्षेत्र में संगठन को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करेगी।

किसान की बेटी ने संघर्ष से लिखी सफलता की नई इबारत: 11 विभागों की लिखित परीक्षाएं पास कर चुनी रेलवे सुरक्षा बल की राह, दूसरी बेटी का भी पुलिस और आरपीएफ में चयन

खंडवा- मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। इस बात को निमाड़ की दो होनहार बेटियों ने अपनी शानदार सफलता से साबित कर दिखाया है। किसान परिवार से आने वाली दीक्षा सुरागे ने न केवल विभिन्न विभागों की 11 लिखित प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि इस बार मध्यप्रदेश पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) दोनों में चयनित होकर युवाओं के लिए प्रेरणा का नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। दीक्षा ने देश सेवा के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए रेलवे सुरक्षा बल में शामिल होने का निर्णय लिया है। वहीं दीक्षा गुर्जर ने भी पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल दोनों में चयन हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

दोनों बेटियों की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर खंडवा के गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम में जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप द्वारा उनका भव्य सम्मान किया गया। कार्यक्रम देशभक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। प्रशिक्षु युवाओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों के बीच दोनों सफल अभ्यर्थियों को कंधों पर उठाकर स्टेडियम से बाहर तक सम्मानपूर्वक विदा किया। यह दृश्य वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया।

असफलता से नहीं टूटी हिम्मत, संघर्ष को बनाया सफलता की सीढ़ी

जय हिंद डिफेंस ट्रेनिंग ग्रुप के संचालक अनिल पाटील ने बताया कि देशगांव निवासी किसान मोहन सुरागे की पुत्री दीक्षा सुरागे ने लगातार कठिन परिश्रम करते हुए विभिन्न विभागों की 11 लिखित परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। पिछली पुलिस भर्ती में उनका चयन होने के बावजूद निर्धारित ऊंचाई (हाइट) पूरी नहीं होने के कारण अंतिम चयन सूची से बाहर होना पड़ा। यह किसी भी अभ्यर्थी के लिए निराशाजनक स्थिति हो सकती थी, लेकिन दीक्षा ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी और अधिक मजबूत की। परिणामस्वरूप इस बार उन्होंने पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल दोनों में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे असफलता भी टिक नहीं सकती।

दूसरी दीक्षा ने भी बढ़ाया निमाड़ का मान

हरदा निवासी तथा वर्तमान में खंडवा में रह रही दीक्षा गुर्जर ने भी अपने अथक प्रयासों से पुलिस एवं रेलवे सुरक्षा बल दोनों में चयन प्राप्त किया। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासित तैयारी और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

सफलता का श्रेय पिता और गुरु को

दीक्षा सुरागे ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और प्रशिक्षक अनिल पाटील को देते हुए कहा कि कठिन समय में पिता ने कभी निराश नहीं होने दिया। उन्होंने हमेशा विश्वास दिलाया कि लगातार प्रयास करने वालों को सफलता अवश्य मिलती है। वहीं पाटील सर ने स्वयं पर विश्वास रखने और दोगुनी मेहनत के साथ लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा दी।

दीक्षा गुर्जर ने भी भावुक होकर बताया कि जब वह असफल हुई थीं, तब अनिल पाटील ने उनसे कहा था—"एक असफलता तुम्हारी काबिलियत तय नहीं करती। हिम्मत रखो, सफलता इतनी बड़ी होगी कि तुम्हें स्वयं तय करना पड़ेगा कि कौन-सी नौकरी चुननी है।" आज यह बात पूरी तरह सच साबित हुई और उनके सामने वास्तव में दो महत्वपूर्ण सेवाओं का विकल्प था।

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षुओं और युवाओं ने दोनों सफल अभ्यर्थियों का जोरदार स्वागत किया। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी सुनकर अनेक युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और अधिक समर्पण के साथ करने का संकल्प लिया। समारोह में विनय जायसवाल, मायाराम, हीरमल सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

दोनों बेटियों की उपलब्धि यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी कभी सफलता की राह नहीं रोकती, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और आत्मविश्वास अटूट हो। किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाओं तक पहुंचने का यह सफर न केवल निमाड़, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

सद्भावना मंच के ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में अभिनेता अमित महोदय ने साझा किए जीवन के प्रेरक अनुभव

खंडवा- शहर के माली कुआं स्थित सद्भावना मंच कार्यालय में आयोजित ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में मुंबई से आए फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक अमित महोदय ने मंच के सदस्यों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने अभिनय जीवन के अनुभव साझा करते हुए जीवन में निरंतर सीखने, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के महत्व पर प्रेरक विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने उनसे अभिनय, संघर्ष और जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सहज और प्रेरणादायक अंदाज में उत्तर दिया।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मंच के निर्मल मंगवानी ने बताया कि अतिथि अभिनेता अमित महोदय का स्वागत एवं सम्मान मंच के संस्थापक प्रमोद जैन द्वारा शाल, श्रीफल और मोतियों की माला पहनाकर किया गया। सम्मान के बाद आयोजित संवाद सत्र में अभिनेता ने अपने फिल्मी सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्हें फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें जीवन को अनेक दृष्टिकोणों से समझने की प्रेरणा दी।

अपने संबोधन में अमित महोदय ने कहा कि "दुनिया की पढ़ाई से तो हम कभी भी दूरी बना सकते हैं, लेकिन जीवन रूपी विद्यालय की पढ़ाई अंतिम सांस तक चलती रहती है। हर दिन, हर पल और हर परिस्थिति हमें कुछ न कुछ नया सिखाती है।" उन्होंने कहा कि जीवन में दूसरों से तुलना करने या अनावश्यक प्रतिस्पर्धा में उलझने के बजाय व्यक्ति को स्वयं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यदि मन में सभी के प्रति शुभभावना और सकारात्मक दृष्टिकोण हो तो सफलता और संतोष दोनों प्राप्त किए जा सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें, निरंतर सीखते रहें और विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर के रूप में स्वीकार करें। उनके प्रेरक विचारों को उपस्थित सदस्यों ने गंभीरता से सुना और सराहा।

कार्यक्रम में मंच संस्थापक प्रमोद जैन, सुरेंद्र गीते, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, जीडी सराफ, सुनील सोमानी, केबी मनसारे, देवेंद्र जैन, विजया द्विवेदी, गणेश भावसार, निर्मल मंगवानी, अजय मंडलोई, अशोक जैन, धीरज नेगी, अशोक पारवानी, सुभाष मीणा, योगेश गुजराती, डॉ. एम.एम. कुरैशी, पं. कृष्ण कुमार व्यास, रामनाथ सराफ सहित अनेक सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन आत्मविकास, सकारात्मक चिंतन और सामाजिक सद्भाव के संदेश के साथ हुआ।

खंडवा में वन भूमि पर बड़ी कार्रवाई: 105 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया, 9 हजार कंटूर ट्रेंच बनाकर दोबारा कब्जे पर लगेगी रोक

खंडवा- जिले में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन और वन विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए गुड़ी रेंज के ग्राम आमाखुजरी में 105 हेक्टेयर वन क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस कार्रवाई का स्वयं कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता एवं पुलिस अधीक्षक श्री अगम जैन ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

वन भूमि पर अतिक्रमण की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित की। अभियान के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।

निरीक्षण के दौरान वनमंडल अधिकारी श्री राकेश डामोर भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि लगभग तीन दर्जन जेसीबी मशीनों की सहायता से पूरे अतिक्रमित क्षेत्र को मुक्त कराया गया। इसके साथ ही भविष्य में दोबारा अतिक्रमण की संभावना को रोकने के लिए क्षेत्र में 9 हजार बड़े आकार के कंटूर ट्रेंच (गड्ढे) तैयार किए गए हैं।

वन अधिकारियों के अनुसार कंटूर ट्रेंच न केवल अतिक्रमण रोकने में प्रभावी होंगे, बल्कि वर्षा जल संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा वन क्षेत्र के प्राकृतिक पुनर्जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा के संवर्धन को भी मजबूती मिलेगी।

कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने कार्रवाई में शामिल वन विभाग, पुलिस एवं प्रशासन की संयुक्त टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि वन भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि एवं वन संपदा की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या अतिक्रमण न करें तथा ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन अथवा वन विभाग को दें, ताकि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भारत डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति की ओर अग्रसर: केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने लॉन्च की नई डिजिटल हेल्थ पहलें, मध्यप्रदेश को मिलेंगी अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक मशीनें

भोपाल/नई दिल्ली- देश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में आयोजित ‘डिजिटल हेल्थ इनिशिएटिव्स लॉन्च कार्यक्रम’ में कई नई डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 90 करोड़ से अधिक आभा (ABHA) खाते और 100 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार होने के साथ भारत आज विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम वाले देशों में शामिल हो चुका है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को नागरिकों के और अधिक निकट लाया जा रहा है। नई पहलों से मरीजों को अस्पतालों, चिकित्सकों, जांच सेवाओं और स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक आसान एवं एकीकृत पहुंच मिलेगी, जिससे उपचार प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बनेगी।

इन डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम में आरोग्य सेतु 2.0, आयुष्मान ऐप, आयुष्मान सारथी व्हाट्सएप चैटबॉट, नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX), यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI), ई-सुश्रुत क्लिनिक, ड्रग रजिस्ट्री, कॉमन LOINC कोड्स फॉर इंडिया (CLCI) तथा भारत हेल्थ टर्मिनोलॉजी सर्विस (BHTS) जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत की गई।

श्री नड्डा ने बताया कि आरोग्य सेतु 2.0 को एक समग्र डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में विकसित किया गया है, जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोरों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों सहित सभी आयु वर्ग के नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।

मध्यप्रदेश को मिली आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की बड़ी सौगात

कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत पीएम-केयर्स फंड के माध्यम से आगामी तीन वर्षों में प्रदेश को 13 एमआरआई मशीनें, 11 मैमोग्राफी मशीनें तथा 308 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

इन अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से प्रदेश के जिला अस्पतालों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में जांच सुविधाओं का विस्तार होगा। विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को समय पर बेहतर निदान (डायग्नोस्टिक) सेवाएं उपलब्ध कराने में यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने जताया आभार

मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम-केयर्स के माध्यम से मिलने वाले अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देंगे। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ जांच सुविधाएं मिलेंगी और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान एवं उपचार संभव हो सकेगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार, आयुष) प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, उत्तरप्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलों और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है।

वट पूर्णिमा पर श्री लवकुशेश्वर महादेव–महावीर हनुमान मंदिर में उमड़ी श्रद्धा, महिलाओं ने की अखंड सौभाग्य की कामना

खंडवा- वट पूर्णिमा के पावन अवसर पर शहर के महावीर बाग, हनुमान नगर स्थित श्री लवकुशेश्वर महादेव–महावीर हनुमान मंदिर में धार्मिक आस्था और श्रद्धा का मनोहारी संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने मंदिर परिसर में पहुंचकर विधि-विधान से वट वृक्ष का पूजन किया तथा अपने परिवार के सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना की।

मंदिर परिसर में हाल ही में निर्मित वट वृक्ष के चबूतरे के आसपास महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन-अर्चना की। वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए रक्षा सूत्र बांधे और भगवान से अखंड सौभाग्य एवं सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मांगा। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला।

मंदिर से जुड़े मुदित जेटली ने बताया कि वट पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्वान पंडित कपिल चन्द्रे ने वट पूर्णिमा की महिमा, धार्मिक महत्व तथा सनातन परंपरा में वट वृक्ष के आध्यात्मिक स्वरूप पर आधारित विशेष कथा का वाचन किया। उपस्थित महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

कथा के समापन के पश्चात भगवान श्री लवकुशेश्वर महादेव का विशेष पूजन-अभिषेक कर प्रसादी अर्पित की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान महादेव एवं श्री हनुमान जी के दर्शन कर परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

मंदिर समिति के अनुसार ऐसे धार्मिक आयोजन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में आध्यात्मिक चेतना एवं सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम का सख्त पालन: समय सीमा में सेवाएं नहीं देने पर खंडवा में तीन पंचायत सचिवों पर अर्थदंड

खंडवा- आम नागरिकों को शासकीय सेवाएं निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से लागू किए गए लोक सेवा गारंटी अधिनियम-2010 के तहत समयबद्ध सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खंडवा जिले के खालवा विकासखंड के तीन पंचायत सचिवों पर जन्म प्रमाण-पत्र समय पर जारी नहीं करने के कारण अर्थदंड लगाया गया है।
कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने बताया कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत नागरिकों को चिन्हित शासकीय सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराना प्रत्येक संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की वैधानिक जिम्मेदारी है। यदि किसी स्तर पर अनावश्यक विलंब होता है तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दोषी अधिकारी पर आर्थिक दंड अधिरोपित किया जाता है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने बताया कि खालवा विकासखंड की ग्राम पंचायत डाभीया, ढकोची तथा मीरपुर खालवा में जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने में निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया गया। जांच में विलंब की पुष्टि होने पर संबंधित पंचायत सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अर्थदंड लगाया गया है।
जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत डाभीया की पंचायत सचिव श्रीमती टीना पटेल द्वारा आवेदक को जन्म प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने में पांच दिन की देरी की गई। इस कारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रतिदिन 250 रुपये की दर से कुल 1,250 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं ग्राम पंचायत ढकोची के पंचायत सचिव लाल बहादुर शिलाले तथा ग्राम पंचायत मीरपुर खालवा के पंचायत सचिव शुभम मार्को पर भी सेवा प्रदाय में विलंब के कारण 250-250 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार समय सीमा से अधिक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी पर 250 रुपये प्रतिदिन की दर से आर्थिक दंड लगाया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि आम नागरिकों को शासकीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।
कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जिले में लोक सेवा गारंटी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा तथा भविष्य में भी समय सीमा का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे सुशासन की भावना को और अधिक मजबूती मिल सके।

देशम् संगठन की वार्षिक आमसभा संपन्न: शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समाज सेवा के नए संकल्पों के साथ ₹11.29 लाख का बजट पारित

2025-26 की उपलब्धियों का प्रस्तुत किया गया लेखा-जोखा, 2026-27 के लिए दीक्षाभूमि प्रज्ञा यात्रा, वेलफेयर योजना, रोजगार, शिक्षा और जनकल्याण की नई योजनाओं का खाका तैयार
भोपाल- गांधी भवन स्थित विनोबा भावे सभागृह में रविवार को देशम् संगठन की वार्षिक आमसभा गरिमामय वातावरण में आयोजित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। संगठन के अध्यक्ष श्री रामस्वरूप निमोरे ने उपस्थित सदस्यों एवं पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आमसभा केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि बीते वर्ष के कार्यों का मूल्यांकन और आने वाले वर्ष के सामाजिक संकल्पों को दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि संगठन के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के सहयोग एवं समर्पण के कारण वर्ष 2025-26 देशम् संगठन के लिए "संकल्प से सिद्धि" का वर्ष साबित हुआ है।
इसके पश्चात संगठन के सचिव (योजना, बजट एवं लेखा) श्री ओमप्रकाश मंडराई ने वर्ष 2025-26 का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संगठन ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, रोजगार मार्गदर्शन और वैवाहिक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए।
उन्होंने बताया कि माता सावित्रीबाई फुले छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लगभग 17 मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की गई। वहीं भोपाल और हरदा में संचालित देशम् आदर्श निःशुल्क कोचिंग क्लासेस के माध्यम से लगभग 100 जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा, अध्ययन सामग्री एवं शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में संगठन द्वारा संचालित तीन निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्रों से लगभग 90 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया तथा माता भीमाबाई मशीन वितरण योजना के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित कर स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया।
वर्षभर संगठन द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, सम्राट अशोक, सावित्रीबाई फुले जयंती, महिला जागृति समारोह, शिक्षक दिवस, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, परिनिर्वाण दिवस तथा विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान, रक्तदाता समूह के माध्यम से जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने, रोजगार एवं शिक्षा समूह के जरिए युवाओं को रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने तथा देशम् वैवाहिक समूह के माध्यम से समाज के युवक-युवतियों को निःशुल्क वैवाहिक मंच उपलब्ध कराने जैसी पहल भी उल्लेखनीय रहीं।
संगठन ने लगभग 50 सदस्यों के साथ काशी-सारनाथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक ज्ञान यात्रा का आयोजन कर सामाजिक चेतना और वैचारिक समृद्धि को भी नई दिशा दी।
बैठक में बताया गया कि संगठन ने सभी वैधानिक दस्तावेज, ऑडिट रिपोर्ट एवं लेखा अभिलेख अद्यतन कर लिए हैं तथा आयकर अधिनियम के तहत 80G एवं 12AA पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है। साथ ही संगठन भारत सरकार के नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत होकर Unique ID MP/2026/1099849 प्राप्त कर चुका है, जिससे संगठन की संस्थागत विश्वसनीयता और अधिक मजबूत हुई है।
कोषाध्यक्ष श्री एन.पी. जकनोरे ने वित्तीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में संगठन को ₹13,23,638 की आय प्राप्त हुई, जिसमें से ₹11,84,725 राशि जनकल्याणकारी गतिविधियों पर व्यय की गई तथा ₹1,38,912 की बचत दर्ज की गई।
इसके बाद महासचिव सेमंतराज बोरीले ने वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना एवं ₹11,29,800 के प्रस्तावित वार्षिक बजट को प्रस्तुत किया। आगामी वर्ष में निःशुल्क कोचिंग एवं सिलाई केंद्रों का विस्तार, दीक्षाभूमि प्रज्ञा यात्रा, देशम् वेलफेयर योजना, मेडिकल कैंप, रक्तदान शिविर, रोजगार एवं कौशल विकास कार्यक्रम, सामाजिक संगोष्ठियां तथा अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस जैसे नए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आमसभा में उपस्थित सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों, वित्तीय पारदर्शिता एवं आगामी कार्ययोजना की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सर्वसम्मति से वार्षिक प्रतिवेदन, कार्ययोजना एवं बजट को स्वीकृति प्रदान की। सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में संगठन के पूर्व अध्यक्ष एवं नियंत्रण समिति के अध्यक्ष श्री जे.पी. गनोते ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। महासचिव सेमंतराज बोरीले ने संगठन की सफलता का श्रेय अध्यक्ष श्री रामस्वरूप निमोरे, संरक्षक श्री लालचंद मंडराई, सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. एच.आर. रैदास, संयोजक श्री अरविंद मंडराई, वरिष्ठ पदाधिकारियों, महिला प्रकोष्ठ, कार्यकारिणी एवं समर्पित कार्यकर्ताओं को देते हुए सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
समापन पंक्ति: देशम् संगठन ने अपनी वार्षिक आमसभा के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा, सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, सेवा और संविधान के मूल्यों को आधार बनाकर संगठन आने वाले वर्षों में भी जनकल्याण की दिशा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।

रविवार, 28 जून 2026

मनु की संतान : मानव सभ्यता के आदि पुरुष, धर्म व्यवस्था के प्रवर्तक और भारतीय संस्कृति की आधारशिला

मनुष्य शब्द की उत्पत्ति और मनु का महत्व- भारतीय सनातन संस्कृति में श्री मनु को मानव जाति का प्रथम पुरुष, समाज व्यवस्था का प्रथम निर्माता और धर्म के मूल प्रवर्तक के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। 'मनुष्य' शब्द की उत्पत्ति भी 'मनु' से मानी जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय परंपरा संपूर्ण मानव समाज को मनु की संतति मानती है। वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत तथा अनेक धर्मग्रंथों में मनु का उल्लेख मानव सभ्यता के आरंभकर्ता और आदर्श शासक के रूप में मिलता है।
मनु केवल एक पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में व्यवस्था, अनुशासन, न्याय, कर्तव्य और मर्यादा के प्रतीक माने जाते हैं। उनके जीवन और विचारों ने हजारों वर्षों तक भारतीय समाज की संरचना और जीवन मूल्यों को प्रभावित किया।
स्वायंभुव मनु और शतरूपा से मानव वंश का विस्तार- पुराणों के अनुसार सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा ने अपने मानस पुत्र स्वायंभुव मनु और उनकी पत्नी शतरूपा को उत्पन्न किया। इन्हीं दोनों से मानव वंश का विस्तार प्रारंभ हुआ। इसलिए सनातन परंपरा में मनु और शतरूपा को प्रथम मानव दंपति माना जाता है।
यह कथा केवल सृष्टि की शुरुआत का वर्णन नहीं करती, बल्कि यह संदेश भी देती है कि परिवार, समाज और संस्कृति का विकास पारस्परिक सहयोग, मर्यादा और उत्तरदायित्व पर आधारित होना चाहिए।
मनु: केवल व्यक्ति नहीं, एक व्यवस्था- भारतीय दर्शन में मनु को एक ऐसे महान विधाता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने मानव समाज को व्यवस्थित जीवन जीने की दिशा दी। उन्होंने धर्म, न्याय, शासन, परिवार, शिक्षा, सामाजिक दायित्व और नैतिक आचरण के सिद्धांतों को स्थापित किया।
'मनु' शब्द संस्कृत की 'मन' धातु से बना है, जिसका अर्थ है—सोचना, समझना और विवेकपूर्ण निर्णय लेना। इसी कारण मनुष्य को ऐसा प्राणी माना गया है, जो केवल बुद्धि ही नहीं बल्कि नैतिक विवेक के आधार पर जीवन जीने की क्षमता रखता है।
मनुस्मृति: प्राचीन भारतीय समाज का विधि ग्रंथ- मनु द्वारा रचित मनुस्मृति भारतीय धर्मशास्त्रों का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसमें व्यक्ति के अधिकारों और कर्तव्यों, सामाजिक व्यवस्था, न्याय प्रणाली, प्रशासन, शिक्षा, विवाह, परिवार, दंड व्यवस्था तथा नैतिक मूल्यों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन भारत की सामाजिक और प्रशासनिक संरचना को समझने में मनुस्मृति एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यद्यपि आधुनिक समय में इसके कुछ प्रावधानों पर विद्वानों के बीच मतभेद और आलोचनाएँ भी रही हैं, फिर भी भारतीय विधि एवं सामाजिक इतिहास के अध्ययन में इसका विशेष स्थान बना हुआ है।
वैवस्वत मनु और महाप्रलय की कथा- पुराणों में वर्णित वैवस्वत मनु की कथा भारतीय संस्कृति की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में से एक है। कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर महाप्रलय आने वाली थी, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण कर मनु को इसकी सूचना दी। उन्होंने मनु को एक विशाल नौका तैयार करने तथा उसमें ऋषियों, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के बीजों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
प्रलय समाप्त होने के बाद इसी सुरक्षित जीवन से पृथ्वी पर पुनः सृष्टि का विस्तार हुआ। यह कथा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जीवन की निरंतरता और मानव उत्तरदायित्व का भी प्रतीक मानी जाती है।
चौदह मनु और मन्वंतर की अवधारणा- सनातन धर्म के अनुसार ब्रह्मा के एक कल्प में चौदह मनु होते हैं तथा प्रत्येक मनु के शासनकाल को मन्वंतर कहा जाता है। वर्तमान समय को सातवें मनु वैवस्वत मनु का मन्वंतर माना जाता है।
यह अवधारणा भारतीय कालगणना की विशालता और वैज्ञानिक सोच को भी दर्शाती है, जिसमें समय को करोड़ों वर्षों के चक्रों में विभाजित कर ब्रह्मांडीय व्यवस्था का वर्णन किया गया है।
मनु का संदेश: धर्म, कर्तव्य और मानवता- श्री मनु ने मानव जीवन के लिए सत्य, धर्म, संयम, करुणा, न्याय, अनुशासन और कर्तव्यपालन को सर्वोच्च महत्व दिया। उनका मानना था कि समाज तभी विकसित और समृद्ध हो सकता है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करे।
उनकी शिक्षाएं यह संदेश देती हैं कि परिवार की मजबूती, समाज की एकता और राष्ट्र की प्रगति का आधार नैतिक जीवन, परिश्रम और परस्पर सम्मान है।
आज के संदर्भ में मनु की प्रासंगिकता- आज जब दुनिया सामाजिक, नैतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, तब मनु के जीवन से मिलने वाले अनुशासन, कर्तव्य, न्याय और मर्यादा के सिद्धांत पहले से अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। उनका संदेश मानव को केवल अधिकारों की नहीं, बल्कि उत्तरदायित्वों की भी याद दिलाता है।
श्री मनु भारतीय संस्कृति के उन महान व्यक्तित्वों में हैं जिन्हें मानव सभ्यता का आदि पुरुष, सामाजिक व्यवस्था का निर्माता और धर्म का प्रवर्तक माना जाता है। "मनु की संतान" होना केवल पौराणिक पहचान नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, विवेक, मर्यादा, न्याय और मानवता जैसे उच्च जीवन मूल्यों को अपनाने का संदेश है।
भारतीय संस्कृति का यह अमूल्य दर्शन आज भी मानव समाज को नैतिकता, सामाजिक समरसता और उत्तरदायी जीवन की प्रेरणा देता है। श्री मनु का जीवन और उनके सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बने रहेंगे।

45 दिवसीय 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' का समापन, सैन्य एवं पुलिस सेवाओं में युवाओं के सपनों को मिली नई दिशा

खंडवा- पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली युवक-युवतियों को सेना, पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने के उद्देश्य से संचालित 45 दिवसीय 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' का सोमवार को गरिमामय समापन समारोह आयोजित किया गया। यह योजना न केवल युवाओं की शारीरिक एवं मानसिक क्षमता को विकसित करने का माध्यम बनी, बल्कि उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना को भी सुदृढ़ करने में सफल रही।

समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तनवे, विशेष अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारनेकर, कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे तथा सहायक आयुक्त सुनीता मुवेल का तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मान किया गया। भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली इस सम्मान परंपरा ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

अपने प्रेरणादायी संबोधन में विधायक श्रीमती कंचन तनवे ने कहा कि आज का युवा यदि लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। उन्होंने कहा कि शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना युवाओं को केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं करती, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित करती है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान, अनुभव और आत्मविश्वास को अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बनाएं।

विशेष अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारनेकर ने सेना एवं पुलिस सेवाओं में अधिकारी बनने की प्रक्रिया, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, शारीरिक दक्षता, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होते। उन्होंने युवाओं को निरंतर अभ्यास, अनुशासन और ईमानदारी के साथ तैयारी करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे ने प्रशिक्षण अवधि के अनुभव साझा करते हुए कहा कि 45 दिनों का यह प्रशिक्षण केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रतिभागियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि दृढ़ निश्चय, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं तथा इन्हीं गुणों के बल पर युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

सहायक आयुक्त सुनीता मुवेल ने कहा कि शासन की यह महत्वाकांक्षी योजना आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से निकले युवा भविष्य में सेना, पुलिस एवं अन्य सुरक्षा बलों में अपनी पहचान स्थापित कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने इसे युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाली एक मील का पत्थर योजना बताया।

समापन समारोह में सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रशिक्षकों ने भी प्रतिभागियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में प्रशिक्षक अलका शर्मा, अनिल पाटील, सरदार सिंह राजपूत, जितेंद्र तिरोल, कैलाश जमरे, विशाल मीणा एवं पियूष मेहरा सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और प्रशिक्षणार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी एवं सुव्यवस्थित संचालन प्रशिक्षु निकिता ने किया।

शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना का यह समापन केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का अंत नहीं, बल्कि अनेक युवाओं के सपनों, संकल्पों और राष्ट्रसेवा के लक्ष्य की नई शुरुआत का प्रतीक बनकर सामने आया। यह पहल निश्चित रूप से प्रतिभाशाली युवाओं को सुरक्षा बलों में बेहतर अवसर दिलाने और उनके भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शनिवार, 27 जून 2026

15 अगस्त के प्रेरक भाषण ने बदल दी जिंदगी: मजदूर के बेटे ने सेना में जाने का सपना किया साकार, दानापुर ट्रेनिंग सेंटर के लिए हुआ रवाना

खंडवा- किसी भी युवा के जीवन में सही समय पर मिली प्रेरणा उसके भविष्य की दिशा तय कर सकती है। खंडवा जिले के ग्राम रजूर के रहने वाले धीरज बाके की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। एक साधारण मजदूर परिवार में जन्मे धीरज ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूर्व सैनिक के प्रेरक संबोधन को सुनने के बाद भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया। आज वही संकल्प वास्तविकता में बदल चुका है और धीरज सेना की प्रारंभिक ट्रेनिंग के लिए बिहार के दानापुर ट्रेनिंग सेंटर रवाना हो गया है।

धीरज बाके के पिता ताराचंद बाके ने बताया कि पिछले वर्ष 15 अगस्त के अवसर पर उनके विद्यालय में पूर्व सैनिक एवं जय हिंद डिफेंस ग्रुप के संचालक अनिल पाटील मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान अनिल पाटील ने सैनिक जीवन के अनुशासन, संघर्ष, देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के महत्व पर प्रभावशाली उद्बोधन दिया। उनके सीने पर सजे सेना के पदक, वर्दी का गौरव और समाज में मिलने वाला सम्मान धीरज के मन को गहराई से छू गया। उसी दिन उसने दृढ़ निश्चय किया कि वह भी भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करेगा।

धीरज ने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार कठिन परिश्रम किया। शारीरिक फिटनेस, दौड़, लिखित परीक्षा और अन्य आवश्यक तैयारियों में उसने पूरे समर्पण के साथ मेहनत की। इस सफर में जय हिंद डिफेंस ग्रुप के संचालक अनिल पाटील का मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ। निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर धीरज का चयन भारतीय सेना के लिए हुआ, जिससे पूरे परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।

धीरज के पिता ताराचंद बाके ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने मजदूरी कर अपने बेटे की शिक्षा और तैयारी में कोई कमी नहीं आने दी। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया। आज बेटे का सेना की ट्रेनिंग के लिए चयन उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है।

दानापुर ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना होने से पूर्व स्टेडियम परिसर में धीरज का भव्य सम्मान किया गया। जय हिंद डिफेंस ग्रुप के संचालक अनिल पाटील ने पुष्पहार पहनाकर उसका अभिनंदन किया। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं, ग्रामीणों एवं शुभचिंतकों ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों के साथ धीरज का उत्साहवर्धन किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर करण पटेल, धीरज पाटिल सहित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अनेक युवा और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने धीरज की सफलता को गांव और जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और सही मार्गदर्शन मिले तो साधारण परिवार का युवा भी असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है।

धीरज बाके की सफलता यह संदेश देती है कि प्रेरणा, दृढ़ संकल्प और सतत परिश्रम से हर सपना साकार किया जा सकता है। स्वतंत्रता दिवस पर सुना गया एक प्रेरक भाषण उसके जीवन की दिशा बदल गया और आज वह देश सेवा के अपने सपने को साकार करने की ओर पहला महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुका है। यह कहानी न केवल युवाओं को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि एक शिक्षक, पूर्व सैनिक या मार्गदर्शक के प्रेरक शब्द किसी के जीवन में नई उम्मीद और नई पहचान का आधार बन सकते हैं।

शुक्रवार, 26 जून 2026

आधुनिक शिक्षा का नया अध्याय लिखेगा रीवा का पी.के. सांदीपनि विद्यालय | गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित और समावेशी शिक्षा के संकल्प को मिलेगा नया आयाम

रीवा- मध्यप्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री राइज/सांदीपनि विद्यालय योजना तेजी से आकार ले रही है। इसी कड़ी में उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के सिरमौर चौराहा स्थित प्रवीण कुमारी कन्या सांदीपनि विद्यालय (पी.के. स्कूल) के निर्माणाधीन नवीन भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी से भवन निर्माण की गुणवत्ता, उपलब्ध सुविधाओं तथा निर्धारित समय-सीमा के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और कार्य को पूरी गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उपमुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल विद्यालय भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसा आधुनिक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवीन तकनीक, खेल, नवाचार और व्यक्तित्व विकास के सभी अवसर एक ही परिसर में उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री राइज/सांदीपनि विद्यालय इसी सोच का सशक्त उदाहरण हैं।

निर्माणाधीन पी.के. सांदीपनि विद्यालय को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। यहां स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, समृद्ध पुस्तकालय, खेल मैदान, बहुउद्देशीय गतिविधि कक्ष, सुरक्षित एवं स्वच्छ परिसर तथा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए हरित प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। इन सुविधाओं से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मक सोच को विकसित करने का अवसर मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन का प्रत्येक हिस्सा निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए ताकि यह संस्थान लंबे समय तक विद्यार्थियों के लिए उत्कृष्ट शैक्षणिक केंद्र बना रहे। साथ ही उन्होंने निर्माण एजेंसी को समय-सीमा का कड़ाई से पालन करते हुए कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे विद्यालय का संचालन जल्द प्रारंभ किया जा सके।

मुख्यमंत्री राइज/सांदीपनि विद्यालय योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को निजी शिक्षण संस्थानों के समकक्ष आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, खेल एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। रीवा का यह विद्यालय भी इसी उद्देश्य को साकार करते हुए क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं के लिए उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बनेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक अधोसंरचना और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को नई दिशा देती है। ऐसे विद्यालय न केवल बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुणों का भी विकास करते हैं।

रीवा में निर्माणाधीन पी.के. सांदीपनि विद्यालय पूर्ण होने के बाद विंध्य क्षेत्र के शिक्षा परिदृश्य को नई पहचान देगा। यह संस्थान आधुनिक शिक्षा, नवाचार और उत्कृष्ट अधोसंरचना का ऐसा केंद्र बनेगा, जहां से भविष्य के वैज्ञानिक, चिकित्सक, अभियंता, प्रशासक और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवा तैयार होंगे। प्रदेश सरकार की यह पहल निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

वर्षाकालीन तैयारियों पर नगर निगम का फोकस: जलभराव मुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित खंडवा बनाने की दिशा में तेज हुई तैयारियां

खंडवा- मानसून के आगमन के साथ ही नगर प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती शहर को जलभराव, गंदगी और जलजनित बीमारियों से सुरक्षित रखना होती है। इसी उद्देश्य को लेकर नगर निगम खंडवा ने वर्षाकालीन तैयारियों को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। आगामी बारिश के मौसम में नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने नगर निगम कार्यालय में तकनीकी, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक लेकर तैयारियों का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में महापौर ने स्पष्ट किया कि नगर निगम का लक्ष्य केवल बारिश के दौरान उत्पन्न समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि संभावित समस्याओं को पहले से रोकना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर के सभी प्रमुख नालों, नालियों और जल निकासी मार्गों की सफाई युद्ध स्तर पर कराई जाए, ताकि वर्षा का पानी बिना किसी बाधा के निकल सके। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए जहां पिछले वर्षों में जलभराव की स्थिति बनी थी।

महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने कहा कि वर्षाकाल में प्रशासन की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ही नागरिकों को राहत दिला सकती है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी जवाबदेही एवं समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि नगर निगम की टीमें चौबीसों घंटे सक्रिय रहें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि "शहरवासियों की सुरक्षा, सुविधा और स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वर्षा ऋतु के दौरान जलभराव, गंदगी या अन्य समस्याओं से नागरिकों को राहत मिले, इसके लिए नगर निगम व्यापक स्तर पर तैयारियां कर रहा है। प्रत्येक वार्ड की नियमित मॉनिटरिंग होगी और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।"

बैठक में स्वास्थ्य विभाग को विशेष रूप से स्वच्छता व्यवस्था मजबूत रखने, फॉगिंग, एंटी लार्वा गतिविधियों तथा जलजनित एवं मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। वहीं तकनीकी विभाग को जल निकासी तंत्र का नियमित निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य समय पर पूरा करने के लिए कहा गया।

राजस्व विभाग एवं जोन प्रभारियों को भी निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें और स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। महापौर ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी।

बैठक में आयुक्त श्रीमती प्रियंका सिंह राजावत सहित नगर निगम के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, कार्यपालन यंत्री, सहायक एवं उपयंत्री, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के अधिकारी तथा सभी जोन प्रभारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने वर्षाकालीन तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने का भरोसा दिलाया।

पूर्व तैयारी ही प्रभावी प्रबंधन की कुंजी

शहरी क्षेत्रों में मानसून के दौरान जलभराव, सड़क क्षति, गंदगी और संक्रामक बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में यदि प्रशासन पहले से योजनाबद्ध तरीके से तैयारियां कर ले तो इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नगर निगम द्वारा समय रहते समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नगर निगम का उद्देश्य केवल बारिश के दौरान राहत कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसा तंत्र विकसित करना है जिससे शहर में जल निकासी सुचारु बनी रहे, स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध हो सके।

यदि निर्धारित कार्य समय पर पूरे होते हैं और अधिकारी पूरी गंभीरता से अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं, तो इस वर्ष मानसून के दौरान खंडवा शहर को जलभराव और उससे जुड़ी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

करोड़ों की कमाई वाला खंडवा जंक्शन प्यासा: पीने के पानी के लिए भटक रहे यात्री, बोतलबंद पानी बेचने वालों की चांदी

खंडवा- मध्य रेलवे के भुसावल मंडल का प्रमुख रेलवे स्टेशन खंडवा जंक्शन इन दिनों पेयजल संकट के कारण यात्रियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस महत्वपूर्ण जंक्शन पर पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच स्टेशन पर पानी के लिए यात्रियों को प्लेटफॉर्म दर प्लेटफॉर्म भटकना पड़ रहा है।
यात्रियों के अनुसार स्टेशन पर लगे कई नल बंद पड़े हैं या उनमें पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। नलों पर भी कई बार पानी नहीं मिल पाता, जिससे यात्रियों को मजबूरन बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ-साथ छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
खंडवा जंक्शन मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है, जहां से प्रतिदिन अनेक एक्सप्रेस और मेल ट्रेनें गुजरती हैं। इसके बावजूद यदि यात्रियों को पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो रही है, तो यह रेलवे की यात्री सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्टेशन पर पेयजल संकट का लाभ बोतलबंद पानी बेचने वाले विक्रेताओं को मिल रहा है। मुफ्त पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकांश यात्री मजबूरी में पानी की बोतल खरीद रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि यदि सभी वाटर कूलर और पेयजल केंद्र नियमित रूप से चालू रहें, तो उन्हें अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़े।
सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को होती है जिनकी ट्रेन का ठहराव केवल कुछ मिनटों का होता है। कम समय होने के कारण वे न तो शिकायत दर्ज करा पाते हैं और न ही पानी की व्यवस्था खोज पाते हैं। ऐसे में उन्हें प्यासे ही यात्रा जारी रखनी पड़ती है।
यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि स्टेशन पर बंद पड़े वाटर कूलरों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, सभी पेयजल केंद्रों पर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा गर्मी के मौसम में अतिरिक्त पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले इस महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन पर यात्रियों को पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन यात्रियों की इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी शीघ्रता से करता है, ताकि खंडवा जंक्शन पर आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिल सके।
उल्लेखनीय हैं कि मध्य भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल खंडवा जंक्शन भारतीय रेलवे के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित करने वाला महत्वपूर्ण स्टेशन माना जाता है। उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले इस व्यस्त जंक्शन से प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। बावजूद इसके, स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है।
स्टेशन पर पेयजल, स्वच्छता, प्रतीक्षालय, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर आए दिन यात्रियों की शिकायतें सामने आती रहती हैं। गर्मी के मौसम में पेयजल संकट सबसे बड़ी समस्या बन जाता है, जहां यात्रियों को पानी के लिए प्लेटफॉर्म पर भटकना पड़ता है। कई बार वाटर कूलर बंद रहते हैं या उनमें पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होता, जिससे यात्रियों को मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है।
यात्रियों का कहना है कि जब खंडवा जंक्शन रेलवे को हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व देता है, तब यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होना स्वाभाविक अपेक्षा है। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत दिखाई देती है। सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और वे स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रेलवे स्टेशन की पहचान केवल उसकी आय से नहीं, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और सेवा की गुणवत्ता से होती है। यदि स्टेशन पर बुनियादी सुविधाएं ही सुचारु रूप से उपलब्ध नहीं हों, तो यह रेलवे की यात्री सुविधा संबंधी व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि खंडवा जंक्शन पर पेयजल सहित अन्य यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ किया जाए। उनका कहना है कि करोड़ों की कमाई करने वाले इस महत्वपूर्ण जंक्शन को सुविधाओं के मामले में भी देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों की श्रेणी में लाया जाना चाहिए।
यात्रियों की अपेक्षा केवल इतनी है कि जिस स्टेशन से रेलवे को भरपूर राजस्व प्राप्त होता है, वहां उन्हें कम से कम बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े। अब सभी की निगाहें रेलवे प्रशासन पर हैं कि वह इस दिशा में कब प्रभावी कदम उठाता है।

गुरुवार, 25 जून 2026

अलनीनो की चुनौती के बीच वैज्ञानिक खेती ही बनेगी किसानों की ढाल: कम वर्षा की आशंका पर प्रशासन ने जारी की व्यापक कृषि सलाह

खंडवा- जलवायु परिवर्तन और अलनीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून की अनिश्चितता तथा सामान्य से कम वर्षा की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में जिला प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी है, ताकि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी फसल उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सके।

इसी उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर ऋषव गुप्ता की अध्यक्षता में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कम वर्षा की संभावित स्थिति से निपटने के लिए कृषि रणनीति, जल संरक्षण, फसल चयन, बीमा और आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मौसम के अनुसार लें खेती के निर्णय

कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि खेती अब केवल अनुभव का विषय नहीं रह गई है, बल्कि वैज्ञानिक सलाह और मौसम आधारित निर्णयों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि वर्षा सामान्य से 40 प्रतिशत तक कम रहती है, तो उसी के अनुरूप फसलों का चयन करें और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें।

उन्होंने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करें तथा उन्हें मौसम के अनुरूप कृषि प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित करें।

फसल बीमा बनेगा किसानों की सुरक्षा कवच

कलेक्टर ने बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, सूखा, अतिवृष्टि या मौसम की अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। उन्होंने किसान प्रतिनिधियों से अधिकाधिक किसानों को योजना से जोड़ने का आह्वान किया।

कम पानी में बेहतर उत्पादन की वैज्ञानिक रणनीति

उप संचालक कृषि नितेश कुमार यादव ने बताया कि कम वर्षा की स्थिति में उपलब्ध नमी और वर्षा जल का अधिकतम उपयोग ही खेती की सफलता का आधार बनेगा। इसके लिए किसानों को रिज एंड फरो तथा रेज बेड तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। इन तकनीकों से खेतों में जल निकास और नमी संरक्षण बेहतर होता है तथा पौधों की जड़ों का विकास भी अधिक प्रभावी होता है।

उन्होंने किसानों से खेतों में मल्चिंग अपनाने की अपील की, जिससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और सिंचाई की आवश्यकता भी घटती है।

फसल विविधीकरण से कम होगा जोखिम

बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसानों को सोयाबीन के साथ उड़द, मूंग, चवला, ज्वार और अरहर जैसी फसलों का चयन करना चाहिए।

विशेष रूप से अंतरवर्तीय खेती (इंटरक्रॉपिंग) और मिश्रित खेती प्रणाली को अपनाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन के साथ अरहर, उड़द या लोबिया की खेती कम वर्षा की परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों की आय को भी अधिक सुरक्षित बनाती है।

बीज उपचार और उन्नत किस्मों का महत्व

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि कम वर्षा की स्थिति में बीज अंकुरण की समस्या से बचने के लिए बुवाई से पहले नैनो डीएपी से बीज उपचार अवश्य करें। इससे अंकुरण क्षमता बढ़ती है और पौधों का प्रारंभिक विकास बेहतर होता है।

साथ ही किसानों को सूखा सहनशील एवं अल्प तथा मध्यम अवधि में तैयार होने वाली सोयाबीन की उन्नत किस्मों—जेएस-2172, एनआरसी-150, एनआरसी-142, एनआरसी-130, जेएस-20-116, जेएस-2069 तथा जेएस-9560—का चयन करने की सलाह दी गई।

जल संरक्षण को बनाएं खेती का आधार

बैठक में वर्षा जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि खेतों में वर्षा जल को रोकना, मिट्टी में नमी बनाए रखना और उपलब्ध जल का वैज्ञानिक उपयोग भविष्य की खेती के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि किसान अभी से जल संरक्षण की तकनीकों को अपनाते हैं, तो कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

बदलती जलवायु में वैज्ञानिक खेती ही भविष्य

बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में खेती की सफलता आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, मौसम आधारित निर्णयों, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन पर निर्भर करेगी। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की कि वे कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जारी सलाह का पालन करें तथा नई तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान समय रहते वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हैं, तो कम वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियों में भी उत्पादन और आय पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही सतत और सुरक्षित कृषि की दिशा में सबसे प्रभावी कदम होगा।

मकरोनिया से हरित भविष्य का संकल्प: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का शुभारंभ, अमृत 2.0 के विकास कार्यों को मिली नई गति

भोपाल/सागर- पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और सतत विकास को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सागर जिले के मकरोनिया नगर पालिका क्षेत्र में गुरुवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल के मुख्य आतिथ्य में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर नारियल का पौधा रोपकर अभियान की शुरुआत की गई तथा लगभग दो एकड़ क्षेत्र को विशेष वन ज़ोन के रूप में विकसित करने के लक्ष्य के साथ एक हजार पौधों के रोपण का संकल्प लिया गया।

यह कार्यक्रम नरयावली विधायक इंजी. प्रदीप लारिया के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित विकास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कार्यक्रम में सांसद लता वानखेड़े, कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो यह अभियान पर्यावरण संरक्षण का एक व्यापक जनआंदोलन बन सकता है।

उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधे वृक्ष बनकर पर्यावरण को समृद्ध करें। इसलिए पौधों के संरक्षण और उनकी नियमित देखभाल को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

जल संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि लगातार गिरता भू-जल स्तर भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे में वर्षा जल का अधिकतम संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और जल संरचनाओं का पुनर्जीवन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पुराने कुएं, बावड़ियां, तालाब और जलाशय केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि जल सुरक्षा के मजबूत आधार भी हैं। यदि वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से भूमि में पहुंचाया जाए, तो भू-जल स्तर में सुधार के साथ भविष्य में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अमृत 2.0 योजना से बदल रही मकरोनिया की तस्वीर

उपमुख्यमंत्री ने मकरोनिया क्षेत्र में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप, उच्च गुणवत्ता और तय समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित अमृत योजना का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि शहरों को अधिक व्यवस्थित, पर्यावरण अनुकूल और नागरिक सुविधाओं से संपन्न बनाना है। मकरोनिया में हो रहे विकास कार्य इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण हैं।

शबरी जलाशय और पार्क बनेंगे नई पहचान

नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया ने बताया कि मकरोनिया क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से शबरी जलाशय (सरोवर) का उन्नयन एवं जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र के सौंदर्यीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त लगभग 72 लाख रुपये की लागत से शबरी पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसे आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक आकर्षक पिकनिक और मनोरंजन स्थल के रूप में तैयार किया जाएगा। इससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध होंगे और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा विशेष वन ज़ोन

"एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत दो एकड़ क्षेत्र में विशेष वन ज़ोन विकसित किया जाएगा, जहां एक हजार पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य केवल पौधारोपण करना नहीं, बल्कि एक ऐसा हरित क्षेत्र विकसित करना है जो पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण को बढ़ावा दे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हरित क्षेत्रों का विस्तार भविष्य में शहरी तापमान नियंत्रण, वायु गुणवत्ता सुधार और जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अनुकंपा नियुक्ति पत्र भी किए गए वितरित

कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की संवेदनशील पहल के तहत पात्र हितग्राहियों आशु जाटव एवं प्रिंस दुबे को शासकीय सेवा के लिए अनुकंपा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पात्र परिवारों को समय पर राहत और सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

जनभागीदारी से सफल होंगे पर्यावरण और विकास के लक्ष्य

कार्यक्रम में सांसद लता वानखेड़े ने मकरोनिया क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि रविदास मंदिर निर्माण, शबरी जलाशय के सौंदर्यीकरण और आधारभूत संरचना के विकास से क्षेत्र को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने इन कार्यों में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और आम नागरिकों की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में नगर परिषद के जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, कार्यदायी संस्थाओं के इंजीनियर तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

मकरोनिया में आयोजित यह कार्यक्रम स्पष्ट संदेश देता है कि यदि पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और विकास कार्यों को जनसहभागिता से जोड़ा जाए, तो सतत विकास के लक्ष्य को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य का एक व्यापक सामाजिक संकल्प बनकर उभर रहा है।

जल गंगा संवर्धन अभियान की सागर में समीक्षा: पौधारोपण के साथ संरक्षण पर जोर, जीवित पौधों के आधार पर संस्थाओं को मिलेगा पुरस्कार

भोपाल/सागर- मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' की समीक्षा गुरुवार को सागर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्यों की विधानसभावार मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए फार्म पॉन्ड्स के निर्माण और अन्य जल संरक्षण कार्यों में तेजी लाई जाए।

उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य केवल निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करना नहीं, बल्कि ऐसे गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ कार्य करना है, जिनका दीर्घकालिक लाभ समाज और पर्यावरण दोनों को मिले। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और हरित विकास की दिशा में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है तथा सभी विभागों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

पौधारोपण नहीं, पौधों का संरक्षण है सबसे बड़ी जिम्मेदारी

बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका वृक्ष बनने तक संरक्षण और नियमित देखभाल सुनिश्चित करना ही अभियान की वास्तविक सफलता होगी।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं अथवा अन्य संगठनों द्वारा लगाए गए पौधे अगले वर्ष तक सर्वाधिक संख्या में जीवित और सुरक्षित पाए जाएंगे, उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। उनका मानना था कि इससे समाज में पौधों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना मजबूत होगी।

खुरई मॉडल बना प्रेरणा का केंद्र

बैठक में खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में इस वर्ष एक ही दिन में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले वर्ष भी बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया था और प्रत्येक पौधे की नियमित निगरानी के लिए उसे लगाने वाले व्यक्ति द्वारा समय-समय पर उसकी फोटो अपलोड की जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पौधे की देखभाल निरंतर हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधे की देखभाल एक अभिभावक की तरह की जाती है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जनजागरूकता पर विशेष बल

सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने बैठक में शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने लाखा बंजारा झील पर आयोजित गंगा आरती के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति लोगों में बढ़ी जागरूकता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष सागर नगर में लगभग 25 हजार पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक में देवरी विधायक वृजबिहारी पटेरिया तथा बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।

ट्री-गार्ड और गैप फिलिंग पर भी हुई चर्चा

जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने बिना बाउंड्री वाले क्षेत्रों में लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। वहीं कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में किए गए कार्यों की मॉनिटरिंग, गैप फिलिंग तथा लंबित अनुमतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने की जानकारी दी।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि सागर जिला जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर चुका है तथा शेष कार्यों को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।

जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान

बैठक में सांसद लता वानखेड़े, महापौर संगीता तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री, वन विभाग एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर आधारित एक व्यापक सामाजिक अभियान है। यदि पौधारोपण के साथ पौधों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनसहयोग से आगे बढ़ाया जाए, तो प्रदेश में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।