शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

खंडवा में मध्यप्रदेश स्थापना दिवस का भव्य आयोजन, मुख्य अतिथि रहे जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह

खंडवा- मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर जिले में हर्षोल्लास और गौरव के साथ भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला स्तरीय यह समारोह पुलिस परेड ग्राउंड, खंडवा में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग एवं खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजन और राज्यगीत “जय जय मध्यप्रदेश” के साथ हुई। तत्पश्चात मंत्री डॉ. शाह ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।

मंत्री डॉ. शाह का उद्बोधन

अपने संबोधन में मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने प्रदेश की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा —

“मध्य प्रदेश ने बीते सात दशकों में जनसेवा, सुशासन और जनकल्याण के अनेक नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ‘आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश’ की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।”

उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि खंडवा जिला प्राकृतिक संपदा, संस्कृति और जनजातीय गौरव की भूमि है। यहाँ की जनता ने प्रदेश निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मंत्री ने सभी नागरिकों से स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं। बच्चों ने जनजातीय नृत्य, देशभक्ति गीत और लोकधुनों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध परंपरा और जनजातीय संस्कृति को सजीव किया, जिस पर दर्शक झूम उठे।

इस अवसर पर जिले के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, समाजसेवी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

समारोह में विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर ऋषव गुप्ता, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

समापन और शुभकामनाएँ

कार्यक्रम के समापन पर मंत्री डॉ. शाह ने सभी नागरिकों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा —

“यह दिन हमें हमारे गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कुँवर विजय शाह: तप, त्याग और निरंतर जनसेवा का प्रतिमान, 1 नवंबर जन्मदिन विशेष: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक अपराजेय योद्धा की गाथा

भोपाल/खंडवा- कुँवर विजय शाह का राजनीतिक जीवन केवल सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्षों की उस भट्टी का परिणाम है जहाँ स्वयं को तपाकर उन्होंने जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 176-हरसूद से आने वाले कुँवर विजय शाह आज भारतीय राजनीति में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका जन्मदिन 1 नवंबर को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के दिन आता है, जो उनके प्रदेश के प्रति समर्पण को और भी विशिष्ट बनाता है।विजय शाह जी का सिद्धांत स्पष्ट है: "विजय शाह होना आसान नहीं, तपना पड़ता है सेवा और संघर्षों की भट्टी में।
"संगठन निष्ठा: संस्कारों का आधारकुँवर विजय शाह के व्यक्तित्व में सेवा का भाव छात्र जीवन में ही पड़ गया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में रहते हुए उन्हें शोभा पैठणकर, कमलजी पटेल, और कैलाश जी विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठों का सानिध्य मिला। संगठन शास्त्र में दक्षता हासिल कर उन्होंने कांग्रेस का गढ़ रही हरसूद विधानसभा को अपनी सेवा और जन कल्याण के लिए कर्मभूमि बनाया।संगठन के प्रति उनकी निष्ठा की पराकाष्ठा उस समय दिखाई दी जब लोकसभा चुनाव में उनके दिवंगत बड़े भाई अजय शाह जी ने भाजपा के टिकट से वंचित होने पर कांग्रेस से चुनाव लड़ा। 
कुँवर विजय शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया था कि पार्टी संगठन उनके लिए उनकी सगी माँ से बढ़कर है, और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा प्रत्याशी ज्योति धुर्वे के पक्ष में पूर्ण मनोवेग से काम करने का आह्वान किया।
अपराजेयता का कीर्तिमान: हरसूद का अटूट किलाकुँवर विजय शाह ने 1990 में पहला चुनाव लड़कर कांग्रेसी दिग्गज आशाराम पेटू पटेल को हराया और हरसूद में भाजपा की जीत का श्रीगणेश किया। इसके बाद से लेकर 2023 तक, उन्होंने लगातार आठ बार विधायक बनकर अपनी अपराजेयता सिद्ध की है।राजनीतिक प्रभुत्व: 1990 में हरसूद विधानसभा में सेंधमारी के बाद कांग्रेस ने कई दिग्गज उतारे, लेकिन कोई भी कुँवर विजय शाह के विजय अभियान के रथ को रोकने में सफल नहीं हो सका।
अखंड जनादेश: 1993 में मोती मनाग पटेल, 1998 में किशोरी पटेल, 2003, 2008 में प्रेमलता कासडे, 2013 में सुरजभानु सोलंकी, 2018 और 2023 में सुखराम साल्वे को हराकर उन्होंने हरसूद के किले को भाजपा के भगवा ध्वज के नीचे बनाए रखा।
विभागीय नवाचार: विकास की दूरगामी सोचवर्ष 2004 में दीदी उमा भारती की सरकार में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से, उन्होंने हर सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और अपनी अमिट छाप छोड़ी।
1. जनजातीय कार्य एवं शिक्षा का विजनवैश्विक शिक्षा पहल: आदिमजाति कल्याण मंत्री रहते हुए, उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रों के लिए विदेशों में अध्ययन की योजना बनाई, जिसका लाभ आज हरसूद के गारबेड़ि जैसे दूरस्थ ग्रामों के छात्र भी ले रहे हैं।
शैक्षणिक विस्तार: उन्होंने आशापुर में 250 सीटर आवासीय विद्यालय, रोशनी में आवासीय विद्यालय, और हरसूद तथा खार में संदीपनी विद्यालय का निर्माण कराया। उनकी दूरदृष्टि का परिणाम है कि खालवा जैसी ग्राम पंचायत स्तर पर भी शासकीय महाविद्यालय स्थापित हुआ है।
अनुकरणीय परिवहन: शासकीय महाविद्यालय हरसूद में छात्राओं को आने-जाने की परेशानी से बचाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में निःशुल्क बस सेवा का संचालन प्रारंभ किया, जो पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन गया।
राष्ट्रीय भावना: स्कूल में उपस्थिति के समय 'जय हिंद' और 'वन्देमातरम' से हाजिरी लगाने की व्यवस्था उनके शिक्षा मंत्री रहते हुए शुरू हुई थी।
2. वन और ग्रामीण सशक्तिकरणलाभ का लाभांश: वनमंत्री रहते हुए, उन्होंने वनग्राम की वन सुरक्षा समितियों को केवल बोनस के स्थान पर शासकीय कटाई से होने वाले लाभ का सीधा लाभांश प्रदान करने की अभूतपूर्व योजना बनाई।
आत्मनिर्भरता केंद्र: आवलिया वनग्राम में वन विभाग का प्रशिक्षण केंद्र खोलकर 50 युवक और 50 युवतियों को ब्यूटी पार्लर, सिलाई और कंप्यूटर का आवासीय प्रशिक्षण दिलवाया, जिससे आदिवासी युवा स्वयं का रोजगार खोल सकें।
हरसूद: विकास की प्रयोगशाला- कुँवर विजय शाह के अथक प्रयासों से हरसूद में कृषि, सिंचाई और पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं।
सिंचाई का महाअभियान: हरसूद विधानसभा में कृषि का सिंचित रकबा बढ़ाने के लिए चार सिंचाई योजनाओं—भवानिया, खालवा, जामनी आशापुर और मुगल—पर तीव्रता से कार्य जारी है, जिससे सैकड़ों ग्रामों की कृषि भूमि सिंचित होगी।
पर्यटन का केंद्र: पुनासा डेम के बैकवाटर क्षेत्र में चारखेड़ा में तितली पार्क का निर्माण, वोटिंग की व्यवस्था, और सर्वसुविधायुक्त कॉटेज का निर्माण कराया गया है। वे टापुओं—नागरबेड़ा, बोरियामाल—को भी पर्यटन की अपार संभावनाओं के साथ विकसित कर रहे हैं।
बुनियादी ढांचा और न्याय: हरसूद के विस्थापित परिवारों को भूखंडों का मालिकाना हक दिलवाकर एक बड़ी और पुरानी समस्या का समाधान किया। डोटखेड़ा में घोड़ापछाड़ नदी पर नए पुल का निर्माण कराया, और आशापुर से बैतूल मार्ग का उन्नयन फोरलेन में तीव्र गति से चल रहा है।
खेल और स्वास्थ्य: खालवा में 100 बिस्तर के सिविल अस्पताल का निर्माण और खालवा व हरसूद विधानसभा क्षेत्रों में वातानुकूलित शव वाहिनी प्रदान करना, उनकी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति सजगता दर्शाता है। खालवा में साई (SAI) के माध्यम से सवा सौ करोड़ रुपये के खेल परिसर का निर्माण भी प्रस्तावित है।
संवेदनशीलता: जनता से जुड़े जननेताकुँवर विजय शाह संवेदनशील व्यक्ति हैं, जो अपनी सामाजिक संवेदना को सार्वजनिक जीवन में भी प्रदर्शित करते हैं:
बर्तन बैंक: आमजन को मांगलिक कार्यक्रमों में भोजन बनाने से लेकर खिलाने तक के बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए 4 बर्तन बैंक का संचालन उनके द्वारा किया जा रहा है।
रोजगार का अभिनव तरीका: एक युवा सैलून कार्यकर्ता को मंच पर अपनी दाढ़ी बनाने के लिए कहकर उन्होंने न केवल उसका व्यवसाय स्थापित करने में मदद की, बल्कि कई लोगों को चाय स्टाल लगाने के लिए गाड़ियाँ भी वितरित करवाईं।
किन्नर समाज के साथ संवाद: समाज में उपेक्षित थर्ड जेंडर के लोगों की समस्याओं को निकट से समझने के लिए वे अचानक उनके घर भोजन करने चले गए, जिससे समाज में समरसता का संदेश गया।
पारिवारिक विरासत: उनकी अनुपस्थिति में उनकी धर्मपत्नी, पूर्व महापौर खंडवा, श्रीमती भावना शाह जी, और उनके पुत्र, जिला पंचायत उपाध्यक्ष, कुँवर दिव्यादित्य शाह, भी उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को बखूबी निभाते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी व्यक्ति निराश होकर न लौटे।
कुँवर विजय शाह जी कहते हैं, "जनता ही मेरी ताकत है, जनता ही मेरी ऊर्जा है। जनता से मिला प्रेम और आत्मबल मुझे हर दिन श्रेष्ठ करने के लिए प्रेरित करती है।"उनका जीवन बताता है कि एक सफल राजनेता वह नहीं होता जो सिर्फ पद प्राप्त करे, बल्कि वह होता है जो हर परिस्थिति में ढलकर, हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाकर, जनता की ताकत को अपनी ऊर्जा बना ले। 

जन्मदिन पर शुभकामनाओं सहित। 

लेख- निलेश कौशल, 
अधिवक्ता, नोटरी एवं विधि सलाहकार, 
ग्रामतक न्यूज समूह, हरसूद जिला खंडवा।

उप मुख्यमंत्री ने नौसेना अध्यक्ष का किया नागरिक अभिनंदन, विन्ध्य के सपूतों ने आपरेशन सिंदूर में अप्रतिम वीरता दिखाकर देश का गौरव बढ़ाया है - उप मुख्यमंत्री

एडमिरल दिनेश त्रिपाठी अपने गांव ही नहीं पूरे देश का गौरव हैं - उप मुख्यमंत्री
गांव और सैनिक स्कूल से मिले संस्कारों ने मेरे जीवन को सही दिशा दी - नौसेना अध्यक्ष
आत्मविश्वास और सतत परिश्रम से ही सफलता मिलती है - नौसेना अध्यक्ष
भोपाल- आज का दिन विन्ध्य क्षेत्र के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव का दिन रहा, जब उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सतना जिले के ग्राम महुडर में नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का भव्य नागरिक अभिनंदन किया। महुडर, एडमिरल त्रिपाठी का गृहग्राम है, और इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि विन्ध्य की माटी के सपूत का उनके घर पर नागरिक अभिनंदन करना हम सबका गौरव बढ़ा रहा है। हमारे लिए यह बहुत सौभाग्य की बात है कि नौसेना अध्यक्ष श्री त्रिपाठी और थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी विन्ध्य के सपूत हैं। दोनों ने सैनिक स्कूल रीवा से शिक्षा ग्रहण कर सेना में सर्वोच्च पद प्राप्त किया है। विन्ध्य के इन दोनों सपूतों ने आपरेशन सिंदूर में अप्रतिम साहस और वीरता दिखाकर विन्ध्य ही नहीं पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। आज इस परिसर में हर व्यक्ति के चेहरे पर खुशी और हृदय में गर्व का भाव है। ऐसा क्षण जीवन में विरले ही प्राप्त होता है।
       उप मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे से गांव से निकलकर श्री त्रिपाठी ने नौसेना अध्यक्ष जैसा बड़ा पद प्राप्त करके हम सबको गौरव की अनुभूति कराई है। नौसेना अध्यक्ष की सरलता, सहजता, पराक्रम और अपनी माटी के प्रति प्रेम अनुकरणीय है। एडमिरल त्रिपाठी आज भी अपनी गांव की माटी से जुड़े हुए हैं। भगवान की विन्ध्य और महुडर की माटी पर विशेष कृपा है जहाँ एडमिरल त्रिपाठी जैसे व्यक्ति ने जन्म लिया है। समारोह में नौसेना अध्यक्ष एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि मैं गरीब परिवार का गांव का बेटा हूँ। मुझे गांव और सैनिक स्कूल से मिले संस्कारों ने ही जीवन को नई दिशा दी। मेरे चाचा जी श्री रामलखन शर्मा ने बचपन से ही शिक्षा और अच्छे कॅरियर के लिए प्रोत्साहित किया। सैनिक स्कूल में शिक्षा के दौरान मैंने अपने कॅरियर के संबंध में महत्वपूर्ण योजना बनाई। सैनिक स्कूल के अनुशासन और परिश्रम ने मेरी सफलता का मार्ग प्रशस्त किया। मैंने हमेशा अपने सम्पर्क और संबंधों को महत्व दिया। सेना में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए मुझे इससे बहुत लाभ मिला। विन्ध्य में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हमारे क्षेत्र की कई प्रतिभाएं अलग-अलग क्षेत्रों में अपने प्रतिभा के जौहर दिखा रही हैं।
       एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने की कार्ययोजना बनाई है। इस सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। देश के विकास में हर व्यक्ति अपना योगदान दे। मैं बहुत साधारण परिवार में पैदा हुआ और नौसेना अध्यक्ष के पद तक पहुंचा। आपकी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति आपकी सफलता का प्रारंभिक बिन्दु है। सफलता की उड़ान आप कहाँ तक ले जा सकते हैं यह आप पर निर्भर है। देश के भविष्य के निर्माता, निदेशक और नायक युवा ही हैं। एडमिरल त्रिपाठी ने अपने बचपन, गांव तथा सैनिक स्कूल से जुड़ी रोचक यादें साझा की। एडमिरल त्रिपाठी ने उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल का आभार व्यक्त किया।
       समारोह में एडमिरल त्रिपाठी ने शासकीय हायर सेकण्डरी स्कूल महुडर के प्राचार्य को आईएनएस विक्रांत जलपोत प्रतिकृति भेंट की। श्री त्रिपाठी ने स्कूल में दो मॉडल कक्षों के निर्माण के लिए दो लाख रुपए की राशि प्रदान की। समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य नागरिकों ने गजमाला से एडमिरल त्रिपाठी का अभिनंदन किया। समारोह में एडमिरल त्रिपाठी की धर्मपत्नी श्रीमती शशि त्रिपाठी का भी अभिनंदन किया गया। समारोह में मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग में सफलता प्राप्त करने वाले शैलेश मिश्रा और प्रियांशु पाण्डेय को सम्मानित किया गया। समारोह में सैनिक स्कूल रीवा के प्राचार्य कर्नल अविनाश रावल ने नौसेना अध्यक्ष श्री त्रिपाठी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। समारोह की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त सीसीएफ डॉ एसपीएस तिवारी ने एडमिरल त्रिपाठी का स्वागत करते हुए बचपन की स्मृतियों के रोचक संस्मरण सुनाए। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार तथा अमर उजाला के सलाहकार संपादक संजय पाण्डेय, प्रकल्प सिंह तिवारी एवं सज्जन सिंह तिवारी ने भी एडमिरल त्रिपाठी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। समारोह में एकेएस यूनिवर्सिटी के संचालक एके सोनी ने अपने विश्वविद्यालय की पुस्तिका उप मुख्यमंत्री और एडमिरल त्रिपाठी को भेंट की। समारोह में पूर्व जनपद सदस्य श्रीमती संगीता सिंह तिवारी, सरपंच महुडर इन्द्रमनिया देवी, जनपद सदस्य आरती तिवारी, संतोष मिश्रा, राजेन्द्र शुक्ला, शशिकांत सिंह तिवारी, महेन्द्र पाण्डेय, बद्रीविशाल तिवारी, रामनरेश निष्ठुर तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार जयराम शुक्ल ने किया।

हरसूद पुलिस की बड़ी कार्रवाई- आत्महत्या के दुष्प्रेरण के मुख्य आरोपी अरबाज सहित 8 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

खंडवा- हरसूद पुलिस ने आत्महत्या के दुष्प्रेरण के एक गंभीर मामले में मुख्य आरोपी अरबाज सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को जिला जेल खंडवा भेज दिया गया।

घटना 29 अक्टूबर 2025 की है, जब सिविल अस्पताल हरसूद से सूचना प्राप्त हुई कि नेहा नामक युवती ने जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया है। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस पर थाना हरसूद में मर्ग क्रमांक 89/25 धारा 194 बीएनएसएस के तहत जांच प्रारंभ की गई।

जांच में उजागर हुआ उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन का दबाव

मृतिका नेहा की मां दीपा बाई के बयान के अनुसार, 26 अक्टूबर की रात मोहल्ले के अरबाज ने नेहा के साथ मारपीट की थी। दीपा बाई ने बताया कि अरबाज लगातार उसकी बेटी को सगाई तोड़कर धर्म परिवर्तन कर उससे विवाह करने का दबाव डाल रहा था और ऐसा न करने पर जान से मारने की धमकी दे रहा था। दबाव और उत्पीड़न से तंग आकर नेहा ने जहर खा लिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

इस आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी अरबाज पिता आदत शाह (22 वर्ष) के विरुद्ध अपराध क्रमांक 384/25, धारा 108 बीएनएस, 3/5 मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021, एवं 3(2)(v) एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

आरोपियों द्वारा धमकी और जातिगत अपमान

उसी दिन मृतका की मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपी अरबाज के पिता आदत शाह, भाई साजिम, और अन्य आरोपियों फरदीन, आसिक, मुईन, आसिल, आसिम, शायना बी और आमरीन ने उनके घर पहुंचकर जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी।
इस पर अपराध क्रमांक 385/25, धारा 296, 351(3), 191(2) बीएनएस, तथा 3(1)(द, ध), 3(2)(वा) एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।

त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (देहात) श्री राजेश रघुवंशी तथा एसडीओपी हरसूद श्री लोकेन्द्र सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी हरसूद निरीक्षक राजकुमार राठौर ने विशेष टीम गठित कर त्वरित कार्रवाई की।
टीम ने मुख्य आरोपी अरबाज सहित सभी सात अन्य आरोपियों को 30 अक्टूबर को गिरफ्तार कर 31 अक्टूबर को विशेष न्यायालय खंडवा में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।

सराहनीय भूमिका

इस कार्रवाई में निरीक्षक राजकुमार राठौर, उनि चंद्रशेखर काड़े, उनि रमेश मोरे, सउनि नानाराम पाटीदार, प्र.आर. वीरसिंह राजपूत, प्र.आर. विनोद सिंह तोमर, प्र.आर. शिवशंकर उपाध्याय, प्र.आर. मंगल सिंह, आर. रोहित साहू, आर. भगवान सिंह, आर. अनिल मेहरा, एवं आर. रामविलास वामने की भूमिका सराहनीय रही।

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर जन-जन को शुभकामनाएँ, स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर मध्यप्रदेश- उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। यह दिन हमें न केवल अपने अतीत की उपलब्धियों का स्मरण कराता है, बल्कि भविष्य की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने का संकल्प भी देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ऊर्जावान नेतृत्व में मध्यप्रदेश "विकसित भारत" के विज़न को साकार करने की दिशा में दृढ़तापूर्वक अग्रसर है।
     स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बीते वर्षों में मध्यप्रदेश ने ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है। राज्य सरकार ने "स्वस्थ मध्यप्रदेश – सशक्त मध्यप्रदेश" के मंत्र को व्यवहार में उतारते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और जनसेवा में संवेदनशीलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें। इसी दृष्टि से बीते समय में चिकित्सा संस्थानों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया गया है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। इन संस्थानों के माध्यम से न केवल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँची हैं। राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, सिमुलेशन सेंटर्स और ई-लर्निंग के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक युग के अनुरूप बनाया जा रहा है।
     राज्य के स्वास्थ्य अधोसंरचना को मज़बूत करने के लिए जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन का कार्य निरंतर चल रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक भी विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त कर सकें। साथ ही, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में मातृ शिशु संजीवन मिशन और अनमोल 2.0 से समेकित प्रयास किए जा रहे हैं। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की बड़ी संख्या में नियुक्तियाँ की गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जा रहा है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि हर स्वास्थ्य केंद्र पर आवश्यक मानव संसाधन, दवाएँ और उपकरण उपलब्ध रहें।
      स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए हर संभव संसाधन पर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) को बढ़ावा दिया गया है। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमताओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँचाया जा रहा है। एयर एम्बुलेंस सेवा, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का सतत विस्तार और उन्नयन किया जा रहा हैहै। प्रदेश में "मेडिकल डिवाइस पार्क" की स्थापना की दिशा में भी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश को चिकित्सा उपकरण निर्माण का केंद्र बनाना है, जिससे आत्मनिर्भरता के साथ-साथ रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा।
      हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो और हर नागरिक को अपने जिले में ही उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ई-संजीवनी जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना ने मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और प्रभावशीलता को नया आयाम दिया है। इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष पाँच लाख रुपये तक का नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने योजना के क्रियान्वयन को और अधिक सशक्त बनाया है, जिससे गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक राहत मिली है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, चिकित्सा महाविद्यालयों और पंजीकृत निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारकों को सहज, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं। यह योजना "सबका स्वास्थ्य – सबका विकास" के संकल्प को साकार करती हुई सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुकी है।

      मध्यप्रदेश आज स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और अवसंरचना के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" के विज़न  को ध्येय मानकर सरकार सतत कर कर रही है। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम सब मिलकर अपने प्रदेश को विकास, स्वास्थ्य और खुशहाली के नए शिखरों तक पहुँचाएँ। आने वाला दशक "स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के रूप में हमारे संकल्प का साक्षी बनेगा — यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।
(लेखक मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं)

हिंदुस्तान का दिल– जहाँ संस्कृति, इतिहास और विकास मिलते हैं, राष्ट्र निर्माण के दौर में उभरा "भारत का हृदय" [विशेष लेख- मध्य प्रदेश स्थापना दिवस]

राज्यों के पुनर्गठन से ‘दिल’ बनने तक की कहानी
जब ट्रेन भोपाल से निकलती है और सतपुड़ा की हरी-भरी पहाड़ियों को चीरते हुए बिलासपुर की दिशा में बढ़ती है, तो बाहर की हर झलक मानो भारत के दिल की धड़कन बन जाती है। खिड़की से झाँकते हुए कभी खेतों में झूमती सरसों की सुनहरी चादर दिखाई देती है, तो कभी घने साल और सागौन के जंगल अपनी हरियाली से मन को मोह लेते हैं। यह वह धरती है जहाँ प्रकृति, संस्कृति और इतिहास का संगम एक मधुर राग की तरह गूँजता है।
यहाँ खजुराहो की नक्काशीदार मूर्तियाँ केवल कला की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मानव जीवन के सौंदर्यबोध की कथा कहती हैं। साँची का शांत स्तूप बौद्ध करुणा और ध्यान की अमिट छाप छोड़ता है, जबकि भीमबेटका की प्राचीन शिलाचित्र गुफाएँ मानव सभ्यता की आरंभिक यात्रा की गवाही देती हैं। कान्हा और बांधवगढ़ के जंगलों में बाघ की गर्जना हमें प्रकृति की अदम्य शक्ति का स्मरण कराती है, तो नर्मदा के किनारे बहती ठंडी हवा इस प्रदेश के जीवनदायिनी स्वर को प्रकट करती है।
मध्य प्रदेश की पहचान केवल उसके भौगोलिक केंद्र होने से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और मानवीय संवेदनाओं से बनी है। यहाँ की मिट्टी में लोकगीतों की धुन, लोकनृत्यों की ताल और लोककथाओं की गर्मजोशी घुली हुई है। यहाँ के आदिवासी समुदायों ने अपने जीवन में प्रकृति को पूजा का दर्जा दिया है और पर्यावरण के साथ गहरे तालमेल की मिसाल पेश की है।
आज़ादी के बाद इस प्रदेश ने कई बार खुद को नए रूप में गढ़ा है। 1956 में राज्य पुनर्गठन के बाद जब मध्य भारत, भोपाल और विंध्य प्रदेश एक होकर “मध्य प्रदेश” बने, तब इस भूभाग की पहचान केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं रही — यह एक जीवंत सांस्कृतिक प्रदेश बन गया। यहाँ की राजधानी भोपाल ने आधुनिकता और परंपरा दोनों को अपनाया, जहाँ झीलों का सौंदर्य और स्थापत्य की सादगी ने एक नया शहरी चरित्र गढ़ा।
“भारत का हृदय” कहलाने की यह पहचान किसी प्रचार का परिणाम नहीं, बल्कि उस गहराई का प्रतीक है जो इस प्रदेश की आत्मा में बसती है — जीवन की सहजता, संस्कृति की विविधता, और प्रकृति की धड़कन।
यह प्रदेश भारत के नक्शे में भले बीचोंबीच स्थित हो, लेकिन इसकी भूमिका पूरे देश के लिए जीवनरस जैसी है — जैसे दिल शरीर के हर हिस्से में रक्त प्रवाहित करता है, वैसे ही मध्य प्रदेश अपनी संस्कृति, ऊर्जा और जीवंतता से पूरे भारत को जोड़ता है।
क्यों कहा जाता है मध्य प्रदेश को ‘भारत का हृदय’?
मध्य प्रदेश को “भारत का हृदय” कहा जाना केवल इसके भौगोलिक केंद्र में स्थित होने का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उपाधि इसकी आत्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गहराई का प्रतीक है। देश के मानचित्र के ठीक मध्य में बसे इस प्रदेश ने उत्तर-दक्षिण और पूरब-पश्चिम भारत को जोड़ने का सेतु बनने का गौरव पाया है। यहाँ की मिट्टी में विविधता के साथ एकता की भावना रची-बसी है।
यह भूमि वीरता, त्याग और संघर्ष की कहानियों से भरी है — झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का अंतिम रण, तांत्या भील का जनआंदोलन, और लोकनायक तात्या टोपे की वीरता इसकी पहचान हैं। साथ ही, यहाँ की संस्कृति, इतिहास और प्रकृति का संगम अद्भुत है — खजुराहो की कला, साँची की शांति, कान्हा के जंगल और नर्मदा की अविरल धारा इसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र बनाते हैं।
मालवा की गेर से लेकर गोंड जनजातियों के नृत्य तक, उज्जैन के महाकाल लोक से लेकर भोपाल की झीलों तक — मध्य प्रदेश में भारत की आत्मा की झलक मिलती है। यही कारण है कि यह प्रदेश केवल नक्शे का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की धड़कन है — सचमुच, “भारत का हृदय”।
आज जिस मध्य प्रदेश को हम जानते हैं, वह कई ऐतिहासिक चरणों से गुज़रकर अस्तित्व में आया।
1947 – स्वतंत्रता के बाद : नया भारत, बँटा हुआ मध्य प्रदेश
1947 में जब भारत ने आज़ादी का सूरज देखा, तब वर्तमान मध्य प्रदेश की तस्वीर वैसी नहीं थी जैसी आज है। उस समय यह क्षेत्र चार अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित था — मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल राज्य और मध्य प्रांत-बरार। इन सभी क्षेत्रों की अपनी-अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान थी।
मध्य भारत मुख्य रूप से ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन और अन्य रियासतों का संघ था, जहाँ मराठा और बुंदेली प्रभाव गहराई से मौजूद थे। विंध्य प्रदेश रीवा, सतना और छतरपुर जैसे बुंदेलखंडी इलाकों को समेटे हुए था। भोपाल राज्य, जो नवाबों के शासन में एक स्वतंत्र इकाई रहा था, नवाबी तहज़ीब और इस्लामी स्थापत्य का केंद्र था। वहीं मध्य प्रांत-बरार में नागपुर, जबलपुर और छिंदवाड़ा जैसे क्षेत्र शामिल थे, जिनका प्रशासनिक ढाँचा ब्रिटिश काल में विकसित हुआ था।
इन चारों क्षेत्रों की अलग-अलग शासन प्रणालियाँ, भाषाएँ और सांस्कृतिक परंपराएँ थीं। आज़ादी के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी — इन विविध हिस्सों को एक साझा पहचान और एक संगठित राज्य के रूप में जोड़ना। यही यात्रा आगे चलकर 1956 के राज्य पुनर्गठन का आधार बनी, जिसने “भारत के हृदय” यानी मध्य प्रदेश को जन्म दिया।
1956 – राज्य पुनर्गठन : ‘भारत के हृदय’ का नया जन्म
1956 का वर्ष मध्य प्रदेश के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ लेकर आया। स्वतंत्रता के बाद भारत में भाषाई और प्रशासनिक आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य से गठित राज्य पुनर्गठन आयोग ने देशभर की सीमाओं को नई परिभाषा देने की सिफारिशें कीं।
इन सिफारिशों के अनुसार मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य को मिलाकर एक नया राज्य बनाया गया, जिसे नाम दिया गया “मध्य प्रदेश”। इस पुनर्गठन से पहले ये सभी क्षेत्र अपनी अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयाँ थीं, लेकिन सांस्कृतिक रूप से एक ही धारा से जुड़े हुए थे — हिंदी भाषा, साझा इतिहास और मध्य भारतीय परंपराओं से।
हालाँकि, इस प्रक्रिया में नागपुर और बरार के कुछ हिस्सों को अलग कर महाराष्ट्र में सम्मिलित कर दिया गया। नए राज्य की राजधानी पहले जबलपुर निर्धारित की गई, जो ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से केंद्र में स्थित थी। लेकिन शीघ्र ही प्रशासनिक सुविधा, भू-स्थिति और राजनीतिक संतुलन को देखते हुए भोपाल को स्थायी राजधानी का दर्जा दिया गया।
1956 का यह पुनर्गठन केवल सीमाओं का नहीं, बल्कि एक एकीकृत पहचान के जन्म का प्रतीक था — जिसने मध्य प्रदेश को “भारत का हृदय” बनने की दिशा में अग्रसर किया।
2000 – छत्तीसगढ़ का गठन : नए राज्य की नई पहचान
1 नवंबर 2000 का दिन मध्य भारत के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय लेकर आया। इसी दिन मध्य प्रदेश से अलग होकर ‘छत्तीसगढ़’ एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह विभाजन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं, सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास की मांग का परिणाम था।
छत्तीसगढ़ क्षेत्र, जो पहले मध्य प्रदेश का हिस्सा था, अपनी विशिष्ट भाषा, परंपरा और सामाजिक संरचना के कारण अलग पहचान रखता था। यहाँ की गोंड, बैगा, और हल्बा जैसी जनजातियाँ, लोककला, नृत्य और त्योहार इस भूभाग को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते थे। लेकिन लंबे समय तक यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। लोगों की यही भावना थी कि अलग राज्य बनने पर उनकी स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत यह ऐतिहासिक फैसला लागू हुआ। भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी बनी रही, जबकि रायपुर को छत्तीसगढ़ की राजधानी का गौरव मिला। इस विभाजन ने दोनों राज्यों को अपनी-अपनी राह पर आगे बढ़ने का अवसर दिया — एक ओर मध्य प्रदेश ने प्रशासनिक स्थिरता और विकास को गति दी, वहीं छत्तीसगढ़ ने अपने प्राकृतिक संसाधनों और लोकसंस्कृति के बल पर नई पहचान गढ़नी शुरू की।
2025– नया आत्मविश्वासी मध्य प्रदेश : विकास और विरासत का संगम
2025 का मध्य प्रदेश एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। यह प्रदेश अब केवल भारत का भौगोलिक केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और पर्यावरणीय संतुलन का सशक्त प्रतीक बन चुका है। स्मार्ट शहरों, विकसित अवसंरचना और पर्यटन विस्तार के साथ-साथ यह अपनी लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर को भी संजोए हुए है। ‘अजब है, ग़जब है एमपी’ अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि उसकी जीवंत पहचान है — एक ऐसा प्रदेश जो विकास और विरासत दोनों को दिल से जीता है।
नायक और नायिकाएँ : जिन्होंने पहचान गढ़ी
मध्य प्रदेश की मिट्टी में शौर्य और त्याग की असंख्य कहानियाँ समाई हैं।
रानी लक्ष्मीबाई: ग्वालियर की धरती पर 1857 की क्रांति की अमर वीरांगना, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी।
तात्या टोपे: स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे सेनानी, जिन्होंने रणनीति और साहस से इतिहास में अमर स्थान पाया।
तांत्या भील: जिन्हें ‘भारत का रॉबिनहुड’ कहा गया — एक आदिवासी योद्धा, जिसने शोषण के खिलाफ हथियार उठाया।
हबीब तनवीर: रायपुर के रंगकर्मी, जिन्होंने लोकनाट्य और थिएटर को विश्व मंच तक पहुँचाया।
हरिवंश राय बच्चन: हिंदी कविता के स्तंभ, जिनकी रचनाओं ने साहित्य को नई ऊँचाई दी।
इन सबने मिलकर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और वैचारिक चेतना को दिशा दी।
प्रधानमंत्री ने भी माना – “एमपी अजब है, ग़जब है”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन — “एमपी अजब है, ग़जब है” — केवल एक प्रचार वाक्य नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की आत्मा का सार है। यह नारा अपने भीतर उस भाव को समेटे हुए है, जो इस प्रदेश की मिट्टी, संस्कृति, लोगों और प्रकृति में गहराई से धड़कता है।
मध्य प्रदेश, भारत के केंद्र में स्थित वह भूमि है जहाँ इतिहास और वर्तमान साथ-साथ चलते हैं। एक ओर साँची के शांत स्तूप हैं, जो सम्राट अशोक के बौद्ध युग की गवाही देते हैं, तो दूसरी ओर इंदौर और भोपाल जैसे आधुनिक शहर हैं, जो स्मार्ट सिटी की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। यह प्रदेश परंपरा और प्रगति का अद्भुत संगम है — जहाँ प्राचीनता पीछे नहीं छूटती और आधुनिकता अपनी जड़ें खोती नहीं।
प्रधानमंत्री का यह कथन इस सच्चाई को रेखांकित करता है कि मध्य प्रदेश “अजब” है अपनी विविधता में — यहाँ आदिवासी संस्कृति, मराठी प्रभाव, बुंदेली बोली, और मालवी मिठास सब एक साथ मिलकर एक अनोखा सामाजिक ताना-बाना बुनते हैं। और “ग़जब” है अपनी क्षमता में — यहाँ का कृषि विकास, औद्योगिक प्रगति, पर्यटन विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के प्रयास, सब मिलकर इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत स्तंभ बनाते हैं।
उज्जैन का महाकाल लोक और ओंकारेश्वर का ज्योतिर्लिंग जहाँ आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं, वहीं इंदौर की सफाई और सुशासन मॉडल आधुनिक भारत के लिए प्रेरणा हैं। भोपाल की झीलें और उसका हरित परिवेश पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हैं। कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच जैसे राष्ट्रीय उद्यान न केवल जैव विविधता के केंद्र हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय आजीविका के स्रोत भी हैं।
प्रधानमंत्री का यह वाक्य प्रदेशवासियों के आत्मविश्वास को और भी गहराई से छूता है। यह केवल शब्दों की गूंज नहीं, बल्कि उस सच्चाई का स्वीकार है कि मध्य प्रदेश सचमुच “भारत का दिल” है — एक ऐसा प्रदेश जो अपनी धड़कन से पूरे देश को ऊर्जा देता है।
मध्य प्रदेश की यही खासियत है — यहाँ जीवन में सादगी है पर आत्मा में गहराई, यहाँ संस्कृति में परंपरा है पर सोच में आधुनिकता, और यही उसे बनाती है “अजब” भी और “ग़जब” भी।
विकास की राह : आधुनिक मध्य प्रदेश की नई पहचान
आज का मध्य प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। राज्य ने बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सड़क, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने न केवल उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है, बल्कि गाँव-गाँव तक विकास की रोशनी पहुँचाई है।
स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर आधुनिक शहरी प्रबंधन और स्वच्छता के मॉडल बनकर उभरे हैं। वहीं, नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं ने सिंचाई और जल संरक्षण में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, जिससे कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है।
महिलाओं के सशक्तिकरण में लाड़ली बहना योजना और महिला स्वावलंबन मिशन जैसी योजनाएँ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा में नवाचार और पर्यटन स्थलों के उन्नयन से प्रदेश का समग्र विकास स्पष्ट रूप से झलकता है।
नतीजतन, मध्य प्रदेश आज न सिर्फ “भारत का दिल” कहलाता है, बल्कि “विकास का प्रतीक” बनकर देश की प्रगति यात्रा में अपना अहम योगदान दे रहा है।
दिल से जुड़ा प्रदेश 
मध्य प्रदेश का सफर केवल राजनीतिक सीमाओं या नक्शे की लकीरों से तय नहीं हुआ। यह सफर उन लोगों के साहस, श्रम और संस्कृति से बना, जिन्होंने इस भूमि को अपनी पहचान दी।आज जब हम ‘मध्य प्रदेश स्थापना दिवस ’ मनाते हैं, तो यह केवल एक प्रशासनिक तारीख नहीं, बल्कि उस आत्मा का उत्सव है जो इस प्रदेश की धड़कनों में बसी है।यह प्रदेश न केवल भौगोलिक रूप से भारत का केंद्र है, बल्कि इसकी संस्कृति, संगीत, लोककला और प्रकृति भारत की आत्मा को धारण करती है। इसलिए जब प्रधानमंत्री कहते हैं — “एमपी अजब है, ग़जब है” — तो यह केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि इस दिल की धड़कन की पहचान है, जो पूरे देश की रगों में बहती है।
मध्य प्रदेश- जहाँ हर पर्व, हर परंपरा, हर धुन में बसा है भारत का दिल।
✍️पत्रकर सय्यद असीम अली।

सरदार पटेल के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेकर दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है - उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल

सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन संपन्न
भोपाल- उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेकर दृढ़ इच्छा के साथ लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद भारत की रियासतों का विलय कराया। उनके इस फौलादी निर्णय से ही उन्हें लौह पुरूष कहा जाता है। उप मुख्यमंत्री समान चौराहा में आयोजित विचार गोष्ठी में शामिल हुए।
लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने श्री पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनका स्मरण किया। विचार गोष्ठी में श्री शुक्ल ने कहा कि हमें लंबे संघर्ष के बाद आजादी प्राप्त हुई। सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उनके इस निर्णय से देश में एकता एवं अखण्डता को अक्षुण्ण बनाए रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ। श्री शुक्ल ने कहा कि हमारा देश आने वाले समय में विश्वगुरू बनकर विश्व का नेतृत्व करेगा और सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापित होगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आपरेशन सिंदूर ने भारत का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है।
आज रीवा के लिए गर्व का दिन है जबकि देश की सेना के दो महानायक यहाँ हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि आगामी वर्ष में एकता दिवस के अवसर पर समान चौराहा में और भी भव्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री जनार्दन मिश्र ने कहा कि सरदार पटेल का कृतित्व हमेशा अमर रहेगा। उनके यश पौरूष को इतिहास हमेशा याद रखेगा। इस अवसर पर विधायक मनगवां इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, जिला भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संभ्रांतजन उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय एकता दौड़ को उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने दिखाई हरी झंडी, सरदार पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस उत्साह और जोश के साथ मनाया गया

भोपाल- लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस का आयोजन प्रदेशभर में बड़े उत्साह और जोश के साथ किया गया। राजधानी भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय एकता दौड़ का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से हरी झंडी दिखाकर किया।

कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में किया गया। इस एकता दौड़ का उद्देश्य देश में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की भावना को सशक्त बनाना तथा नागरिकों में देशभक्ति का संदेश फैलाना रहा।

अटल पार्क तक निकाली गई एकता दौड़

यह दौड़ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अटल पार्क तक निकाली गई। पूरे मार्ग में युवाओं, खिलाड़ियों, अधिकारियों और नागरिकों ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के नारों से वातावरण को देशभक्ति की भावना से भर दिया।

जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक बड़ी संख्या में हुए शामिल

कार्यक्रम में सांसद श्री जनार्दन मिश्र, विधायक सिरमौर श्री दिव्यराज सिंह, विधायक मनगवां इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, जिला भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गुप्ता, कमिश्नर बी.एस. जामोद, आईजी गौरव राजपूत, डीआईजी हेमंत चौहान, सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी, खिलाड़ी एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए।

राष्ट्रीय एकता की शपथ और खिलाड़ियों का सम्मान

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने उपस्थितजनों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें यह सिखाता है कि जब देशहित सर्वोपरि हो, तो सभी भेदभाव और मतभेद समाप्त हो जाते हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे खेल और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित हों।

कार्यक्रम के दौरान स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स परिसर में अभ्यासरत खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन और चयन पर सम्मानित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को मेहनत, अनुशासन और देश के गौरव के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा दी।

राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर दौड़ी युवा शक्ति

राष्ट्रीय एकता दौड़ में शामिल युवा, अधिकारी और नागरिक सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में योगदान को नमन करते हुए एकजुटता का संदेश देते दिखाई दिए। पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति, उत्साह और एकता का अनुपम दृश्य देखने को मिला।

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल सरदार पटेल के विचारों को जीवंत करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब देश के नागरिक एकजुट होते हैं, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने पूर्व मंत्री डॉ. चौधरी की माताजी के निधन पर व्यक्त की संवेदना

भोपाल- उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने पूर्व मंत्री एवं सांची विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी की पूज्य माताजी श्रीमती सुमित्रा देवी जी के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में विश्वविद्यालय स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता संपन्न, विधायक श्रीमती कंचन तनवे ने किया शुभारंभ — खिलाड़ियों को दिया उत्साह और प्रेरणा

खंडवा- मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग एवं क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय, खरगोन के तत्वावधान में संभाग स्तरीय महिला एवं पुरुष कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में किया गया। यह प्रतियोगिता क्षेत्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

मुख्य अतिथि विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तनवे का उद्बोधन

कार्यक्रम का शुभारंभ खंडवा विधानसभा क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तनवे के मुख्य आतिथ्य में हुआ। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया और उपस्थित खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
विधायक तनवे ने कहा कि कुश्ती भारत की आत्मा में बसने वाला पारंपरिक खेल है। यह न केवल शारीरिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि मानसिक अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का भी परिचायक है।
उन्होंने कहा कि आज भारत खेलों के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में "खेलो इंडिया" जैसी योजनाओं से नई प्रतिभाओं को मंच मिल रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे समर्पण और परिश्रम से अपने जिले, राज्य और देश का नाम रोशन करें।

प्राचार्य डॉ. एस.पी. सिंह का संदेश — समर्पण ही सफलता की कुंजी

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.पी. सिंह ने कहा कि सच्चा खिलाड़ी वही होता है जो अपने खेल के प्रति निष्ठा और अनुशासन रखता है। खेल जीवन का अभिन्न अंग है, जो व्यक्ति को मजबूत, संयमित और आत्मनिर्भर बनाता है। उन्होंने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि जीत और हार से ऊपर उठकर खेल को जीवन का साधन मानें।

संभागभर के खिलाड़ियों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग

इस प्रतियोगिता में खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी और सेंधवा जिलों से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का संचालन और आयोजन पूर्ण रूप से खेल नियमों के अनुरूप किया गया, जिसमें खिलाड़ियों की उत्कृष्टता, तकनीक और शारीरिक कौशल का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।

विजेता खिलाड़ियों का विश्वविद्यालय दल में चयन

महिला वर्ग फ्रीस्टाइल कुश्ती में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए —
कु. नंदिनी पाटीदार, कु. मुस्कान पटेल, कु. सामिया बानो, कु. मोनालिका टुंडलाए एवं कु. राधिका बृजवासी का चयन विश्वविद्यालय दल में किया गया।

वहीं पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग में —
विशाल कुशवाहा, हर्ष शर्मा, समीर अली, सलमान खान, दानिश एवं हर्षित पाल ने शानदार प्रदर्शन कर स्थान बनाया।

ग्रीको-रोमन वर्ग में —
योगेश जाधव, प्रेम महाजन एवं राकेश मीणा का चयन विश्वविद्यालय दल में हुआ।

पर्यवेक्षक और समिति सदस्य

प्रतियोगिता के सफल संचालन हेतु पर्यवेक्षक डॉ. अनीश पटेल तथा विश्वविद्यालय चयन समिति के सदस्य डॉ. गगन चौधरी, डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह और श्री उमेश प्रजापति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति

इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला अध्यक्ष श्री हरीश कोटवाले, श्री सेवादास पटेल, श्री भावेश बिल्लौरे, श्री विशाल छाबड़ा, श्री देवा भावसार एवं श्री संदेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महाविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. परविंदर कौर खनूजा, डॉ. महेश अग्रवाल, डॉ. टी.आर. ब्राह्मणे, डॉ. महेश भाबोर एवं डॉ. गजानन वास्केल ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम का कुशल संचालन क्रीड़ा अधिकारी श्री अमित कुमार अब्राहम ने किया, वहीं आभार प्रदर्शन डॉ. एस.एस. डाबर ने व्यक्त किया। आयोजन के सफल संचालन में संपूर्ण महाविद्यालय परिवार का योगदान सराहनीय रहा।

खेल भावना और अनुशासन का मिला संदेश

यह विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता न केवल खिलाड़ियों की प्रतिभा का प्रदर्शन मंच बनी, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि खेल जीवन में अनुशासन, सहयोग और आत्मबल का निर्माण करते हैं। इस आयोजन से खंडवा जिले में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा मिली है और भविष्य में इस तरह के आयोजनों से क्षेत्रीय स्तर पर खेलों का नया अध्याय शुरू होगा।

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025

राष्ट्रीय एकता दिवस पर खंडवा में ‘रन फॉर साइबर अवेयरनेस’ रैली का भव्य आयोजन

खंडवा- राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन खंडवा द्वारा “रन फॉर साइबर अवेयरनेस” रैली का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के मंत्री माननीय डॉ. कुंवर विजय शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
रैली का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अधिकारी-कर्मचारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हुए।
मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि “भारत विविधताओं से भरा देश है, लेकिन हमारी असली शक्ति हमारी एकता में निहित है। हमें एकजुट रहकर देश की अखंडता और सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए। आज के डिजिटल युग में साइबर जागरूकता भी राष्ट्र की सुरक्षा का एक आवश्यक हिस्सा बन गई है।”

रैली के दौरान प्रतिभागियों ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” और “साइबर सुरक्षित भारत” के नारे लगाते हुए राष्ट्रीय एकता और डिजिटल जागरूकता का संदेश पूरे शहर में प्रसारित किया।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर खंडवा में निकली यह रैली न केवल एकता और अखंडता का प्रतीक बनी, बल्कि समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता बढ़ाने का भी माध्यम बनी।
सरदार श्री वल्लभ भाई पटेल का 150वां जन्मोत्सव शुक्रवार को ‘‘राष्ट्रीय एकता दिवस‘‘ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर ‘‘रन फॉर यूनिटी‘‘ का आयोजन किया गया। "रन फॉर यूनिटी" को प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने नगर निगम चौराहे से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। "रन फॉर यूनिटी" दौड़ नगर निगम चौराहे से प्रारम्भ होकर, घंटाघर, बाम्बे बाजार, केवलराम चौराहा, बस स्टैण्ड, कहारवाड़ी, जलेबी चौक, होते हुए नगर निगम चौराहे पर सम्पन्न हुई। इस कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्रा, खिलाड़ी, शासकीय व अशासकीय कार्यालयों के अधिकारी कर्मचारी व अन्य गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
         मंत्री डॉ. विजय शाह ने उपस्थित नागरिकों को राष्ट्रीय एकता और अखंडता संबंधी शपथ दिलाई। इस अवसर पर खंडवा विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी सुदेश वानखेड़े, कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार राय, अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा, जिला पंचायत के सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री राजपाल सिंह तोमर, पूर्व जिला अध्यक्ष श्री सेवादास पटेल व श्री हरीश कोटवाले एवं श्री धर्मेंद्र बजाज सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद थे।

जेपी अस्पताल के नवनिर्मित भवन में शीघ्र चिकित्सा सेवाएं प्रारंभ करें: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल, स्वच्छता और चिकित्सकों की समय पर उपलब्धता के दिए निर्देश

चिकित्सालय परिसर का निरीक्षण कर चिकित्सकों से की वन-टू-वन चर्चा
भोपाल: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल जयप्रकाश जिला चिकित्सालय (जे.पी. अस्पताल) भोपाल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न विभागों में दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने चिकित्सालय में स्वच्छता व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता, मरीजों के उपचार की प्रक्रिया और चिकित्सकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल के सभी प्रमुख विभागों के चिकित्सकों से वन-टू-वन चर्चा कर सेवाओं की गुणवत्ता का फीडबैक लिया और मरीजों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि अस्पताल के नवनिर्मित भवन में चिकित्सा सेवाएं शीघ्र प्रारंभ की जाएं, ताकि मरीजों को और अधिक सुसंगठित एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि नवनिर्मित भवन का शीघ्र उपयोग प्रारंभ किया जाए और आवश्यक संसाधन एवं उपकरण की समय पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अस्पताल में संचालित प्रसूति सेवाओं, बच्चों के उपचार हेतु पी.आई.सी.यू. एवं एस.एन.सी.यू., जनरल सर्जरी, ईएनटी, आर्थोपेडिक सर्जरी, दंत सेवाओं, नेत्र सेवाओं और जनरल मेडिसिन विभाग की कार्यप्रणाली की जानकारी ली।
     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा उनके नजदीकी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ही उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें उच्चस्तरीय चिकित्सा परामर्श के शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन, आर.एम.ओ. डॉ. प्रेमेंद्र शर्मा सहित सभी विभागों के चिकित्सक उपस्थित रहे।
      अस्पताल प्रबंधन ने उप मुख्यमंत्री को आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से संचालित निशुल्क पैथोलॉजी, सी.टी. स्कैन और एम.आर.आई. सेवाओं की जानकारी दी। बताया गया कि वर्तमान में अस्पताल के ब्लड बैंक में होल ब्लड की सुविधा उपलब्ध है और इसके विस्तार के लिए कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट की स्थापना की जा रही है, जिससे मरीजों को रक्त के सभी आवश्यक घटक (ब्लड कॉम्पोनेंट्स) अस्पताल से ही उपलब्ध हो सकेंगे।

विंध्य क्षेत्र की प्रगति में आईटी पार्क होगा एक महत्वपूर्ण सोपान: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल, आईटी कंपनियाँ टियर-2 शहरों की ओर बढ़ रही हैं, इस अवसर का उठायें अधिकतम लाभ

रीवा में प्रस्तावित आईटी पार्क निर्माण की प्रगति की समीक्षा की
भोपाल: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में रीवा में प्रस्तावित आईटी पार्क के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आईटी पार्क को स्टेट ऑफ द आर्ट सुविधाओं से युक्त किया जाये, ताकि देश और विदेश की अग्रणी कंपनियाँ यहाँ सुविधाजनक रूप से कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि रीवा में वायु परिवहन सेवाओं का तीव्र गति से विस्तार हो रहा है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, शांतिपूर्ण वातावरण और आवश्यक नागरिक सुविधाएँ इसे आईटी एवं सेवा क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में आईटी कंपनियाँ टियर-2 शहरों की ओर बढ़ रही हैं, ऐसे में हमें इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के औद्योगिक एवं तकनीकी विकास का एक नया अध्याय सिद्ध होगी।
      उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने औद्योगिक पार्क गुढ़ के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अधोसंरचना विस्तार कार्य, विशेषकर जल सुविधा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। तकनीकी समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि उद्योगों को शीघ्र सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। बैठक में एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ल तथा निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
      बताया गया कि प्रस्तावित आईटी पार्क में एक लाख वर्गफीट से भी अधिक कार्यस्थल (वर्कस्पेस) विकसित किया जा रहा है। लगभग 2,500 व्यक्ति यहाँ कार्य कर सकेंगे। 10 मंज़िला इस अत्याधुनिक भवन में 4,500 वर्गफीट के 25 मॉड्यूल होंगे, जिन्हें कंपनियों की आवश्यकता अनुसार कस्टमाइज़ किया जा सकेगा। स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर, प्लग एंड प्ले सुविधा तथा रेंटल मॉड्यूल्स जैसी व्यवस्थाएँ भी पार्क में उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पटाजन व राई खुटवाल के ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाया ‘बोरी बंधान‘

खंडवा- कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने जिले की सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा सभी नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को वर्षा ऋतु की समाप्ति के साथ ही अपने क्षेत्र के नदी नालों में बहते पानी को रोकने के उद्देश्य से बोरी बंधान संरचनाएं बनवाने के निर्देश दिए हैं। बोरी बंधान के कारण रुके हुए पानी से आसपास के जल स्रोतों में पानी का स्तर बढ़ेगा। 
इसी क्रम में म.प्र. जन अभियान परिषद की नवांकुर संस्था उदय एकता सामाजिक विकास संस्था द्वारा ग्राम राई ख़ुटवाल के पास बढ़खलिया नाले के पास ग्रामवासियों के सहयोग से नाले पर 50 बोरियों से पानी को रोक कर बोरीबंधान बनाया गया। जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक जगदीश पटेल ने बताया कि ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियां नवांकुर संस्थाएं अपने गांव के छोटे छोटे नालों पर बोरी बंधान बनाकर जल संरक्षण का कार्य रही हैं। राई ख़ुटवाल में श्रमदान कार्यक्रम में जिला समन्वयक श्री जगदीश पटेल, विकासखंड समन्वयक श्री राजकुमार मालाकार, संस्था प्रमुख श्री रामकुमार वर्मा, श्री निपट फूलमाली, अजय राठौर पूर्व सरपंच राकेश कोटवार, सोनेलाल, गौरीशंकर, आशीष चौहान, कुणाल चौहान और ग्रामवासी उपस्थित थे।
जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री पटेल ने बताया कि विकासखंड खालवा के रोशनी सेक्टर अंतर्गत ग्राम पटाजन में नवांकुर संस्था, ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति एवं मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं तथा परामर्शदाताओं व स्थानीय ग्रामीणों ने श्रमदान कर ग्राम पटाजन के समीप नाले पर 150 बोरियों का बोरी बंधान बनाया गया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत सरपंच श्री दिनेश इरपचे, सहायक सचिव श्री रामदीन इवने, विकासखंड समन्वयक श्री ललित पवार, परामर्शदाता श्री मोहन रोकड़े, श्री तीरथ सिंह देवड़ा, श्री नेपाल सिंह पवार, श्री राजकुमार मालाकार, ग्रामीणजन एवं पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कैबिनेट मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने दिलाया न्याय का भरोसा, हरसूद की दलित बेटी की दर्दनाक घटना पर बोले मंत्री — दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है

खंडवा- हरसूद क्षेत्र की दलित बेटी की दर्दनाक आत्महत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि युवती लव जिहाद के जाल में फँस गई थी और लंबे समय से उसे प्रताड़ना तथा धमकियों का सामना करना पड़ रहा था। मानसिक और सामाजिक दबाव से परेशान होकर उसने दुखद कदम उठाया।

इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलने पर मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह स्वयं पीड़िता के घर पहुँचे और शोकाकुल परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा —

“मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने मुझे आपके पास भेजा है। आप चिंता न करें, दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। न्याय की इस लड़ाई में सरकार आपके साथ खड़ी है।”

डॉ. शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों को जल्द से जल्द न्यायालय के कटघरे तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी स्वयं इस प्रकरण पर गंभीर हैं और किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मंत्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार नारी सम्मान और दलित अधिकारों की रक्षा के प्रति संकल्पबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पीड़ित परिवार को आवश्यक आर्थिक सहायता और कानूनी मदद तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

स्थानीय लोगों ने मंत्री शाह की संवेदनशील पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस घटना ने समाज को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है। सभी ने एक सुर में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

डॉ. शाह ने इस दौरान कहा —

“राज्य सरकार किसी भी बेटी के साथ अन्याय या अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह सरकार न्याय और सुरक्षा की सरकार है।”

इस मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने पीड़िता की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा और न्याय की लड़ाई में परिवार के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया।

लव जिहाद प्रकरण में युवती की आत्महत्या से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। इस दुखद घटना की जानकारी मिलते ही प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक विजय शाह स्वयं मौके पर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “यह अत्यंत पीड़ादायक घटना है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, न्याय हर हाल में मिलेगा।” मंत्री शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा संबंधित दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के भी निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम हरसूद, एसडीओपी, भाजपा महामंत्री संतोष सोनी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दिव्यादित्य शाह, निलेश कौशल, कमल खंडेलवाल, राम पंवार सहित अनेक जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। भाजपा महामंत्री संतोष सोनी ने कहा कि

जनता के बीच मंत्री विजय शाह की उपस्थिति ने एक बार फिर यह साबित किया कि वे गरीबों के मसीहा और सच्चे जनसेवक हैं, जो हर संकट की घड़ी में लोगों के साथ मजबूती से खड़े रहते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट कर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने व्यक्त किया आभार, रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं के शुभारंभ के लिए दी शुभकामनाएँ

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सौजन्य भेंट कर रीवा एयरपोर्ट से प्रारंभ होने वाली रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के सर्वांगीण विकास के इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अधोसंरचना विकास सहित प्रदेश में हर क्षेत्र में तेज गति से विकास कार्य हो रहे हैं। सड़क, एयर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं।
      उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में क्षेत्रीय संपर्क सेवाओं का तेज गति से विस्तार हो रहा है, जिससे प्रदेश के विभिन्न अंचलों को नई गतिशीलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं के प्रारंभ से विंध्य क्षेत्र के नागरिकों को राजधानी दिल्ली एवं वाणिज्यिक नगरी इंदौर से सीधा हवाई संपर्क प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र के औद्योगिक, आर्थिक एवं पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी।

जलीय वन्यजीव संरक्षण: जलीय पारिस्थितिक तंत्र एवं जल प्रवाह होगा सुदृढ़, राज्य सरकार जीवों के संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध है- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माँ नर्मदा नदी के पावन जल में 6 मगरमच्छों का कराया जलप्रवेश
खंडवा- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार जीवों के संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध है। माँ नर्मदा का वाहन माने जाने वाले मगरमच्छों को उनके नैसर्गिक आवास में पुनर्स्थापित करना, हमारी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी है। मगरमच्छों के आवास के लिए यह अत्यंत अनुकूल है और उनकी उपस्थिति से नदी का पारिस्थितिक तंत्र एवं जल प्रवाह और अधिक सुदृढ़ होगा। यह महत्वपूर्ण पहल प्रदेश में चल रहे व्यापक वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला का एक हिस्सा है। विदित है कि, गुरूवार को खंडवा जिले के नर्मदानगर (पुनासा) में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधिवत रूप से पूजन कर वन विहार भोपाल से लाये गये 6 मगरमच्छों को मां नर्मदा नदी के सलिल जल में स्वच्छंद छोड़ा।
मध्यप्रदेश में वन्यजीवों के साथ ही मगरमच्छ जलीय जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन में निरंतर वृद्धि होगी। प्रदेश में सभी प्रकार के जीवों के संरक्षण अभियान के तहत भारतीय संस्कृति में मनुष्य एवं वन्यजीव परस्पर एक दूंसरे पर निर्भर हैं। मगरमच्छ जलीय पारिस्थितिक तंत्र की अहम कड़ी है। इंदिरा सागर परियोजना के बैक वाटर क्षेत्र में माँ नर्मदा के वाहन के संरक्षण एवं संवर्धन की दृष्टि से पूर्ण अनुकुल माहौल उपलब्ध है।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष वन विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तावित ओंकारेश्वर अभ्यारण के संबंध में विस्तृत कार्ययोजना एवं जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि सामान्य वनमण्डल खण्डवा के कुल वनक्षेत्र- 283773.23 हेक्टेयर अंतर्गत प्रस्तावित ओंकारेश्वर अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 61407.09 हेक्टेयर है। जिसमें खंडवा वनमंडल अंतर्गत पुनासा, मूंदी, चांदगढ़, बलडी परिक्षेत्र शामिल हैं, वहीं देवास वनमंडल के सतवास, कॉटाफोड, पुंजापुरा, उदयनगर आदि परिक्षेत्र शामिल हैं। इस अवसर पर जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, सांसद श्री ज्ञानेश्वर पाटिल, खंडवा की विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, मांधाता विधायक श्री नारायण पटेल, पंधाना विधायक श्रीमती छाया मोरे, खंडवा की महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी सुदेश वानखेड़े और जिला भाजपा अध्यक्ष श्री राजपाल सिंह तोमर, संभागायुक्त श्री सुदाम खाड़े, आईजी श्री अनुराग, डीआईजी श्री सिद्धार्थ बहुगुणा, कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता, मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक श्री शुभ रंजन सेन, मध्यप्रदेश के वन बल प्रमुख श्री वी.एन. अंबाड़े, वन संरक्षक खंडवा सुश्री वासु कनौजिया, वन मंडल अधिकारी श्री राकेश डामोर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

माँ नर्मदा के वाहन मगरमच्छ को माँ नर्मदा में बसाने का संकल्प पूर्ण- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

खंडवा- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार पुण्य सलिला माँ नर्मदा के वाहन मगरमच्छ को पुनः माँ नर्मदा में बसाने के अपने संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार, 30 अक्टूबर को खंडवा जिले के नर्मदानगर क्षेत्र में माँ नर्मदा के पवित्र जल में मगरमच्छों को छोड़ा गया, जो जलजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक परंपरा के सम्मान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा नदी की धारा मगरमच्छों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास है, और राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जलजीवों की पुनर्स्थापना पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रकार के जीव-जंतुओं और वन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष चंबल नदी में घड़ियाल छोड़े गए थे, जिससे राज्य में जलीय जैवविविधता बढ़ाने की दिशा में नई पहल हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मनुष्य और प्रकृति का संबंध अभिन्न है। वन्य जीव, जलीय जीव और मानव—तीनों एक-दूसरे पर परस्पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि “माँ नर्मदा के निर्मल जल में अब उनका वाहन मगरमच्छ पुनः अठखेलियाँ करता दिखाई देगा। यह न केवल श्रद्धा और आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ संकेत है।”

उन्होंने बताया कि मगरमच्छों को ऐसे स्थानों पर छोड़ा गया है जहाँ जनसुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है। वन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा चयनित क्षेत्रों में जल की गहराई, प्रवाह और भोजन की उपलब्धता का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मगरमच्छ की मौजूदगी माँ नर्मदा की जैवविविधता और जलधारा की सशक्तता का प्रतीक बनेगी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश वन संपदा और जीव विविधता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। सरकार का उद्देश्य है कि यह प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को भी समृद्ध रूप में प्राप्त हो। नर्मदा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति और संस्कृति की आत्मा है, इसलिए इसका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खंडवा सांसद श्री ज्ञानेश्वर पाटिल, खंडवा विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, मांधाता विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर, पूर्व जिलाध्यक्ष सेवादास पटेल, भाजपा महामंत्री धर्मेंद्र बजाज, भरत पटेल, तथा बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने माँ नर्मदा के तट पर आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण और आस्था के इस प्रयास का स्वागत किया।

मुख्य बिंदु:

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा माँ नर्मदा के जल में मगरमच्छों का पुनर्वास।
  • राज्य सरकार वन्य और जलीय जीव संरक्षण के लिए पूर्णतः संकल्पित।
  • जनसुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन को ध्यान में रखकर की गई वैज्ञानिक प्रक्रिया।
  • कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक और अनेक जनप्रतिनिधियों की सहभागिता।
  • माँ नर्मदा के संरक्षण को राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बताया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों के भविष्य को दी नई उड़ान- ₹300 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि सिंगल क्लिक से जारी

भोपाल- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल करते हुए समत्व भवन से प्रदेश के विद्यार्थियों को बड़ी सौगात दी।

उन्होंने “समेकित छात्रवृत्ति योजना” के अंतर्गत ₹300 करोड़ की राशि का सिंगल क्लिक ट्रांसफर किया, जिससे प्रदेश के 52 लाख से अधिक विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।

यह कदम न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता का उदाहरण है, बल्कि राज्य सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

विद्यार्थियों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यार्थी को आर्थिक अभाव के कारण अपनी पढ़ाई न छोड़नी पड़े।
सरकार यह मानती है कि शिक्षा ही सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव है।

“समेकित छात्रवृत्ति योजना” इसी सोच का परिणाम है — जो विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को एकीकृत कर विद्यार्थियों तक समय पर, पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से सहायता पहुंचाने का काम करती है।

डिजिटल भारत की दिशा में मजबूत कदम

सिंगल क्लिक के माध्यम से करोड़ों रुपये की राशि विद्यार्थियों के खातों में ट्रांसफर करना इस बात का प्रमाण है कि शासन अब कागज़ी प्रक्रिया से डिजिटल प्रणाली की ओर तेजी से अग्रसर है।
यह पहल न केवल समय और संसाधनों की बचत करती है, बल्कि छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें परिश्रम, अनुशासन और निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में गरिमामय उपस्थिति

समत्व भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, शिक्षकगण, विद्यार्थी, अभिभावक और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण रहा — विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति प्राप्त कर मुख्यमंत्री का आभार जताया और अपने सपनों को साकार करने की नई प्रेरणा पाई।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि “राज्य सरकार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और भी नवाचार देखने को मिलेंगे।”

भविष्य की नींव – समान अवसरों की गारंटी

“समेकित छात्रवृत्ति योजना” केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समान अवसर और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
इस योजना के माध्यम से शासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि समाज के हर वर्ग का बच्चा — चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र से हो या शहरी, आर्थिक रूप से कमजोर हो या सामान्य — शिक्षा के समान अधिकार का लाभ उठा सके।

मुख्य बिंदु एक नजर में

  • ₹300 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण।
  • 52 लाख से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित
  • समत्व भवन, भोपाल से मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ।
  • डिजिटल माध्यम से पारदर्शी वितरण प्रणाली
  • शिक्षा मंत्री, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं। जनप्रतिनिधि उपस्थित।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के प्रति विश्वास और प्रोत्साहन की भावना का प्रतीक है।
यह प्रयास निस्संदेह मध्य प्रदेश को “शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य” बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
“समेकित छात्रवृत्ति योजना” से जुड़ा यह सशक्तिकरण अभियान भविष्य के उन उज्जवल चेहरों की कहानी लिख रहा है जो आगे चलकर प्रदेश और देश का गौरव बनेंगे।

बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं से विंध्य को मिलेगी नई उड़ान- उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री नायडू से की मुलाकात

भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू किन्जारपु से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच प्रदेश, विशेषकर विंध्य क्षेत्र के विकास, हवाई संपर्क विस्तार और रीवा एयरपोर्ट से प्रारंभ होने वाली नई हवाई सेवाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय पहल के फलस्वरूप रीवा-दिल्ली और रीवा-इंदौर हवाई सेवाओं का शुभारंभ संभव हो पाया है। इन सेवाओं के प्रारंभ से विंध्य क्षेत्र की राजधानी रीवा को देश की राजधानी दिल्ली तथा औद्योगिक नगरी इंदौर से सीधा हवाई संपर्क प्राप्त होगा। यह पहल क्षेत्र के आर्थिक, औद्योगिक, शैक्षणिक एवं पर्यटन विकास के लिए एक नया अध्याय साबित होगी।

श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा और संपूर्ण विंध्य क्षेत्र लंबे समय से हवाई कनेक्टिविटी की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब इन सेवाओं से व्यापार, उद्योग और निवेश के नए अवसर सृजित होंगे तथा यात्रा समय में भारी कमी आएगी। यह सुविधा न केवल प्रदेश के नागरिकों को लाभान्वित करेगी, बल्कि प्रदेश की समग्र प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने प्रदेश की जनता की ओर से केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री नायडू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के दृष्टिकोण का परिणाम है कि आज देश के दूरस्थ क्षेत्रों को भी आधुनिक हवाई संपर्क से जोड़ा जा रहा है।

इस अवसर पर श्री शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से केंद्रीय मंत्री श्री नायडू को रीवा एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं के शुभारंभ समारोह में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस समारोह में केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति विंध्यवासियों के लिए गर्व का क्षण होगी।

रीवा-दिल्ली और रीवा-इंदौर हवाई सेवाएं न केवल क्षेत्र की भौगोलिक सीमाओं को पाटेंगी, बल्कि विकास की नई उड़ान का प्रतीक बनेंगी। यह कदम प्रधानमंत्री श्री मोदी के नए भारत और विकसित मध्य प्रदेश के विज़न को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

पंधाना विधायक छाया मोरे ने कृषि मंडी में पाई लापरवाही, कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू


खंडवा (ग्राम तक न्यूज)- पंधाना क्षेत्र की विधायक छाया मोरे ने मंगलवार को पंधाना कृषि उपज मंडी का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंडी परिसर में कई गंभीर अनियमितताएं पाईं, जिनमें सबसे प्रमुख थी — नमी जांचने की मशीन (मॉइश्चराइज़र) का अभाव।

विधायक ने इस संबंध में मंडी सचिव हरे सिंह सोलंकी से जब जवाब मांगा, तो वे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इस पर विधायक ने मौके पर ही सचिव को फटकार लगाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों के हितों से कोई भी समझौता स्वीकार नहीं होगा।

संसाधनों की कमी और किसानों की बढ़ी परेशानी

विधायक छाया मोरे ने कहा कि मंडी को शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन किसानों की उपज की गुणवत्ता जांचने के संसाधन आज तक नहीं लगाए गए। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि मंडी में चौकीदार मौजूद होने के बावजूद फसलों की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा।

किसानों ने विधायक को बताया कि मंडी सचिव हरे सिंह सोलंकी और एसडीएम दीक्षा भमोरे की लापरवाही के चलते मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

किसानों की उपज 15 दिनों से मंडी में पड़ी, व्यापारियों की मनमानी

किसानों ने विधायक को बताया कि पिछले 15 दिनों से उनकी मक्का की फसल मंडी में पड़ी हुई है, लेकिन व्यापारी वर्ग बाहर से अनाज खरीद रहा है और स्थानीय किसानों की उपज को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
इस स्थिति से किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

विधायक ने किसानों को आश्वस्त किया कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू

निरीक्षण के बाद विधायक छाया मोरे ने स्थिति की जानकारी खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता को दी।
कलेक्टर के निर्देश पर अपर कलेक्टर अरविंद चौहान ने पंधाना कृषि मंडी का निरीक्षण किया और मौके पर मंडी सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित रहे जनप्रतिनिधि

निरीक्षण के समय मंडी परिसर में कई जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मंडल अध्यक्ष फकीरचंद कुशवाहजिला उपाध्यक्ष आनंद सिंह चौहाननगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप जगधन्नेमहामंत्री बंटी दादाकोषाध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर, चुन्नीलाल माणिकचंदानी एवं जगदीश एकले शामिल थे।

विधायक का संदेश

विधायक छाया मोरे ने कहा —

“किसानों के अधिकार और सम्मान की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंडी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

हीरालाल लोंगरे, संपादक
ग्राम तक न्यूज, खंडवा
📞 संपर्क: 9301488500 | 9926603992

नगर परिषद पंधाना में विकास की नई दिशा- सभी वार्डों में निर्माण कार्य प्रारंभ, बकाया दुकानों की नीलामी से होगी आर्थिक मजबूती

पंधाना (खंडवा)- नगर परिषद पंधाना में अध्यक्ष सुनीता प्रदीप जगधन्ने के नेतृत्व में विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। परिषद ने न केवल शहर के सभी वार्डों में कायाकल्प, अमृत एवं मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजनाओं के अंतर्गत निर्माण कार्य प्रारंभ किए हैं, बल्कि आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु ठोस कदम भी उठाए हैं।

नगर परिषद ने निर्णय लिया है कि वर्षों से बकाया राशि नहीं जमा करने वाले दुकानदारों की दुकानें निरस्त कर पुनः नीलामी प्रक्रिया की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य परिषद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और विकास कार्यों की गति को निरंतर बनाए रखना है।

मुख्य मार्गों पर सीसी रोड निर्माण से जनता को मिली राहत

पंधाना नगर का मुख्य मार्ग — महाराष्ट्र बैंक से लेकर मंडी तिराहे तक — वर्षों से धूल और गड्ढों से भरा हुआ था, जिससे आमजन को आवागमन में भारी कठिनाई होती थी। परिषद की पहल पर अब इस मार्ग पर सीसी रोड का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जिससे नागरिकों को स्थायी राहत मिली है।

इसी प्रकार, नगर का एकमात्र बायपास मार्ग भी अध्यक्ष एवं परिषद के सतत प्रयासों से सीसी रोड में परिवर्तित किया गया है, जिससे यातायात सुगम हुआ है।

अमृत मुक्तिधाम में हुआ सौंदर्यीकरण — सुविधाओं से सुसज्जित हुआ परिसर

नगर का अमृत मुक्तिधाम, जहाँ पहले सड़क और मूलभूत सुविधाओं का अभाव था, अब पूरी तरह विकसित रूप में सामने आ रहा है।
यहाँ सीसी रोड, टीनशेड, ओटले निर्माण के साथ-साथ सौंदर्यीकरण कार्य भी प्रगति पर है। परिषद के इस कार्य की नगरवासियों द्वारा सराहना की जा रही है।

अमृत योजना से हर वार्ड में विकास — पार्क, टंकी और पाइपलाइन कार्य प्रगति पर

वार्ड क्रमांक 14, दुर्गा कॉलोनी में अमृत योजना के अंतर्गत पार्क का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा सभागृह का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जो अब नगर का नया आकर्षण केंद्र बन गया है।

इसी योजना के अंतर्गत वार्ड सिलतिया, कुंडिया सहित समस्त वार्डों में पेयजल टंकियों का निर्माण कार्य जारी है। साथ ही जलावर्धन योजना के तहत पेयजल पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। जहां सड़कों को पाइपलाइन से नुकसान हुआ है, वहां रिपेयरिंग कार्य भी परिषद की निगरानी में किया जा रहा है।

कायाकल्प और अधोसंरचना योजनाओं से हर वार्ड में निर्माण की लहर

नगर के सभी वार्डों में सीसी रोड, नालियां, पार्क और अन्य आधारभूत ढांचागत निर्माण किए जा रहे हैं। परिषद ने शेष वार्डों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ली है और शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ होंगे।

आर्थिक सुदृढ़ता के लिए ठोस कदम — बकाया दुकानों की नीलामी

अध्यक्ष सुनीता प्रदीप जगधन्ने ने बताया कि नगर परिषद की आर्थिक स्थिति पूर्व में अत्यंत कमजोर थी, जिसके कारण कर्मचारियों के वेतन और विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ रहा था।
इस स्थिति को सुधारने के लिए परिषद द्वारा सम्मेलन आयोजित कर यह निर्णय लिया गया कि जिन दुकानदारों ने वर्षों से किराया या बकाया राशि जमा नहीं की, उनकी दुकानें निरस्त कर पुनः नीलाम की जाएंगी।

साथ ही, नगर में नए स्थानों पर दुकानों का निर्माण किया जाएगा ताकि नगर परिषद के आय स्रोतों में वृद्धि हो सके।

बाजार वसूली में पारदर्शिता लाने हेतु प्रतिदिन कर की रसीदें जारी की जा रही हैं, जिससे परिषद का राजस्व बढ़ रहा है।

गुणवत्ता पर सख्त निगरानी — भुगतान से पहले जांच अनिवार्य

सीएमओ मंशाराम बड़ोले ने बताया कि परिषद द्वारा किए जा रहे सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच वरिष्ठ कार्यालयों द्वारा नियमित रूप से की जा रही है।
प्रत्येक कार्य की कोर कटिंग और तकनीकी परीक्षण के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया की जाती है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता बनी रहे।

सीएमओ ने यह भी कहा कि —

“नगर परिषद अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए दुकानों की नीलामी, वसूली और नए आय स्रोतों पर सख्ती से काम कर रही है। साथ ही, हर वार्ड में विकास कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जा रहे हैं।”

नगर परिषद पंधाना ने अध्यक्ष सुनीता प्रदीप जगधन्ने और सीएमओ मंशाराम बड़ोले के नेतृत्व में विकास और आर्थिक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
जहाँ एक ओर सड़कों, नालियों और पेयजल व्यवस्था में व्यापक सुधार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक पारदर्शिता और सुदृढ़ता की नई पहलें नगर के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही हैं।


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