शुक्रवार, 31 जुलाई 2020
मुख्यमंत्री की बिजली बिल माफी की अस्पष्ट घोषणा से जनता परेशान - शिवसेना
1 से 15 अगस्त 2020 तक चलाया जाएगा "एक मास्क-अनेक जिंदगी" जन जागरूकता अभियान, शहर में की जाएगी मास्क बैंक की स्थापना
खण्डवा में आज फिर एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव मिला, पॉजिटिव मरीजो की संख्या बढ़कर हुई 632...
गुरुवार, 30 जुलाई 2020
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भुपेन्द्रसिंह से पूर्व मंत्री अर्चना दीदी ने की भेंट, प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत स्वीकृत किए गए आवासों के संबंध में बुरहानपुर नगर निगम को मार्गदर्शन दिए जाने का किया आग्रह
बुधवार, 29 जुलाई 2020
आज बुधवार को 14 रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव व 84 निगेटिव आईं, कोरोना ने खालवा को भी लिया चपेट में
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में स्कूली और उच्च शिक्षा प्रणालियों में रूपांतरकारी सुधारों का रास्ते साफ करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दी, नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण बातें
- नई नीति का उद्देश्य 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% जीईआर के साथ पूर्व-विद्यालय से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा के सार्वभौमिकरण का लक्ष्य
- एनईपी 2020 स्कूल से दूर रह रहे 2 करोड़ बच्चों को फिर से मुख्य धारा में लाएगा
- 12 साल की स्कूली शिक्षा और 3 साल की आंगनवाड़ी / प्री-स्कूलिंग के साथ नए 5 + 3 + 3 + 4 स्कूली पाठ्यक्रम
- पढ़ने-लिखने और गणना करने की बुनियादी योग्यता पर ज़ोर, स्कूलों में शैक्षणिक धाराओं, पाठ्येतर गतिविधियों और व्यावसायिक शिक्षा के बीच खास अंतर नहीं; इंटर्नशिप के साथ कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा शुरू
- कम से कम 5 वीं कक्षा तक मातृभाषा / क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई
- समग्र विकास कार्ड के साथ मूल्यांकन प्रक्रिया में पूरी तरह सुधार, सीखने की प्रक्रिया में छात्रों की प्रगति पर पूरी नज़र रखना
- उच्च शिक्षा में जीईआर को 2035 तक 50% तक बढ़ाया जाना; उच्च शिक्षा में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी
- उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में विषयों की विविधता होगी
- उपयुक्त प्रमाणीकरण के साथ पाठ्यक्रम के बीच में नामांकन / निकास की अनुमति होगी
- ट्रांसफर ऑफ क्रेडिट की सुविधा के लिए अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की स्थापना की जाएगी
- ठोस अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी
- उच्च शिक्षा के आसान मगर सख्त विनियमन, विभिन्न कार्यों के लिए चार अलग-अलग कामों पर एक नियामक होगा
- महाविद्यालयों को 15 वर्षों में चरणबद्ध स्वायत्तता के साथ संबद्धता प्रणाली पूरी की जाएगी
- एनईपी 2020 में जरूरत के हिसाब से प्रौद्योगिकी के उपयोग पर ज़ोर, राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी मंच की स्थापनी की जाएगी
- एनईपी 2020 में जेंडर इंक्लूजन फंड और वंचित इलाकों तथा समूहों के लिए विशेष शिक्षा क्षेत्र की स्थापना पर ज़ोर
- नई शिक्षा नीति स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है; पाली, फारसी और प्राकृत के लिए राष्ट्रीय संस्थान, भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान की स्थापना की जाएगी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दे दी है जिससे स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रूपांतरकारी सुधार के रास्ते खुल गए हैं। यह21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और यह 34 साल पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई), 1986 की जगह लेगी। सबके लिए आसान पहुंच, इक्विटी, गुणवत्ता,वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत स्तंभों पर निर्मित यह नई शिक्षा नीति सतत विकास के लिए एजेंडा 2030के अनुकूल है और इसका उद्देश्य 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला बनाते हुए भारत को एक ज्ञान आधारित जीवंत समाज और ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति में बदलना और प्रत्येक छात्र में निहित अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाना है।
नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण बातें
स्कूली शिक्षा
स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सबकी एकसमान पहुंच सुनिश्चित करना
एनईपी 2020 स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक सबके लिए एकसमान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर देती है। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से मुख्य धारा में शामिल करने के लिए स्कूल के बुनियादी ढांचे का विकास औरर नवीन शिक्षा केंद्रों की स्थापनी की जाएगी। इस नई शिक्षा नीति में छात्रों और उनके सीखने के स्तर पर नज़र रखने, औपचारिक और गैर-औपचारिक शिक्षा सहित बच्चों की पढ़ाई के लिए बहुस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने, परामर्शदाताओं या प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं को स्कूल के साथ जोड़ने, कक्षा 3, 5 और 8के लिए एनआईओएस और राज्य ओपन स्कूलों के माध्यम से ओपन लर्निंग, कक्षा 10 और 12 के समकक्ष माध्यमिक शिक्षा कार्यक्रम, व्यावसायिक पाठ्यक्रम, वयस्क साक्षरता और जीवन-संवर्धन कार्यक्रम जैसे कुछ प्रस्तावित उपायहैं। एनईपी 2020 के तहत स्कूल से दूर रह रहे लगभग 2करोड़ बच्चों को मुख्य धारा में वापस लाया जाएगा।
नए पाठ्यक्रम और शैक्षणिक संरचना के साथ प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा
बचपन की देखभाल और शिक्षा पर जोर देते स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 उम्र के बच्चों के लिए है।इसमें अब तक दूर रखे गए 3-6 साल के बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम के तहत लाने का प्रावधान है, जिसे विश्व स्तर पर बच्चे के मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण चरण के रूप में मान्यता दी गई है। नई प्रणाली में तीन साल की आंगनवाड़ी / प्री स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा होगी।
एनसीईआरटी 8 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा(एनसीपीएफईसीसीई) के लिए एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित करेगा। एक विस्तृत और मजबूत संस्थान प्रणाली के माध्यम से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) मुहैया कराई जाएगी। इसमें आंगनवाडी और प्री-स्कूल भी शामिल होंगे जिसमें इसीसीई शिक्षाशास्त्र और पाठ्यक्रम में प्रशिक्षित शिक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता होंगे। इसीसीई की योजना और कार्यान्वयन मानव संसाधन विकास, महिला और बाल विकास (डब्ल्यूसीडी), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण(एचएफडब्ल्यू), और जनजातीय मामलों के मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त करना
बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान की प्राप्ति को सही ढंग से सीखने के लिए अत्यंत जरूरी एवं पहली आवश्यकता मानते हुए ‘एनईपी 2020’ में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा ‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन’की स्थापना किए जाने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य वर्ष 2025 तक सभी प्राथमिक स्कूलों में ग्रेड 3 तक सभी शिक्षार्थियों या विद्यार्थियों द्वारा सार्वभौमिक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त कर लेने के लिए एक कार्यान्वयन योजना तैयार करेंगे। एक राष्ट्रीय पुस्तक संवर्धन नीति तैयार की जानी है।
स्कूल के पाठ्यक्रम और अध्यापन-कला में सुधार
स्कूल के पाठ्यक्रम और अध्यापन-कला का लक्ष्य यह होगा कि 21वीं सदी के प्रमुख कौशल या व्यावहारिक जानकारियों से विद्यार्थियों को लैस करके उनका समग्र विकास किया जाए और आवश्यक ज्ञान प्राप्ति एवं अपरिहार्य चिंतन को बढ़ाने व अनुभवात्मक शिक्षण पर अधिक फोकस करने के लिए पाठ्यक्रम को कम किया जाए। विद्यार्थियों को पसंदीदा विषय चुनने के लिए कई विकल्प दिए जाएंगे। कला एवं विज्ञान के बीच, पाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच और व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच सख्त रूप में कोई भिन्नता नहीं होगी।
स्कूलों में छठे ग्रेड से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी और इसमें इंटर्नशिप शामिल होगी।
एक नई एवं व्यापक स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा ‘एनसीएफएसई 2020-21’एनसीईआरटी द्वारा विकसित की जाएगी।
बहुभाषावाद और भाषा की ताकत
नीति में कम से कम ग्रेड 5 तक, अच्छा हो कि ग्रेड 8 तक और उससे आगे भी मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा को ही शिक्षा का माध्यम रखने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत को एक विकल्प के रूप में चुनने का अवसर दिया जाएगा। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्प शामिल होगा। किसी भी विद्यार्थी पर कोई भी भाषा नहीं थोपी जाएगी। भारत की अन्य पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे। विद्यार्थियों को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत 6-8 ग्रेड के दौरान किसी समय ‘भारत की भाषाओं’ पर एक आनंददायक परियोजना/गतिविधि में भाग लेना होगा। कई विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर एक विकल्प के रूप में चुना जा सकेगा। भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज (आईएसएल) को देश भर में मानकीकृत किया जाएगा और बधिर विद्यार्थियों द्वारा उपयोग किए जाने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएंगी।
आकलन में सुधार
‘एनईपी 2020’ में योगात्मक आकलन के बजाय नियमित एवं रचनात्मक आकलन को अपनाने की परिकल्पना की गई है, जो अपेक्षाकृत अधिक योग्यता-आधारित है, सीखने के साथ-साथ अपना विकास करने को बढ़ावा देता है, और उच्चस्तरीय कौशल जैसे कि विश्लेषण क्षमता, आवश्यक चिंतन-मनन करने की क्षमता और वैचारिक स्पष्टता का आकलन करता है। सभी विद्यार्थी ग्रेड 3, 5 और 8 में स्कूली परीक्षाएं देंगे, जो उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाएंगी। ग्रेड 10 एवं 12 के लिए बोर्ड परीक्षाएं जारी रखी जाएंगी, लेकिन समग्र विकास करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इन्हें नया स्वरूप दिया जाएगा। एकनया राष्ट्रीय आकलन केंद्र ‘परख (समग्र विकास के लिए कार्य-प्रदर्शन आकलन, समीक्षा और ज्ञान का विश्लेषण) एक मानक-निर्धारक निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा।
समान और समावेशी शिक्षा
‘एनईपी 2020’ का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा अपने जन्म या पृष्ठभूमि से जुड़ी परिस्थितियों के कारण ज्ञान प्राप्ति या सीखने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के किसी भी अवसर से वंचित नहीं रह जाए। इसके तहत विशेष जोर सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित समूहों (एसईडीजी) पर रहेगा जिनमें बालक-बालिका,सामाजिक-सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधी विशिष्ट पहचान एवं दिव्यांगता शामिल हैं। इसमें बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों एवं समूहों के लिए बालक-बालिका समावेशी कोष और विशेष शिक्षा जोन की स्थापना करना भी शामिल है। दिव्यांग बच्चों को बुनियादी चरण से लेकर उच्च शिक्षा तक की नियमित स्कूली शिक्षा प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम बनाया जाएगा जिसमें शिक्षाविशारद का पूरा सहयोग मिलेगा और इसके साथ ही दिव्यांगता संबंधी समस्त प्रशिक्षण, संसाधन केंद्र,आवास, सहायक उपकरण, प्रौद्योगिकी-आधारित उपयुक्त उपकरण और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सहायक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रत्येक राज्य/जिले को कला-संबंधी, कैरियर-संबंधी और खेलकूद-संबंधी गतिविधियों में विद्यार्थियों के भाग लेने के लिए दिन के समय वाले एक विशेष बोर्डिंग स्कूल के रूप में ‘बाल भवन’ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। स्कूल की नि:शुल्क बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उपयोग सामाजिक चेतना केंद्रों के रूप में किया जा सकता है।
प्रभावकारी शिक्षक भर्ती और करियर प्रगति मार्ग
शिक्षकों को प्रभावकारी एवं पारदर्शी प्रक्रियाओं के जरिए भर्ती किया जाएगा। पदोन्नति योग्यता आधारित होगी जिसमें कई स्रोतों से समय-समय पर कार्य-प्रदर्शन का आकलन करने और करियर में आगे बढ़कर शैक्षणिक प्रशासक या शिक्षाविशारद बनने की व्यवस्था होगी।शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय प्रोफेशनल मानक (एनपीएसटी) राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा वर्ष2022 तक विकसित किया जाएगा, जिसके लिए एनसीईआरटी, एससीईआरटी, शिक्षकों और सभी स्तरों एवं क्षेत्रों के विशेषज्ञ संगठनों के साथ परामर्श किया जाएगा।
स्कूल प्रशासन
स्कूलों को परिसरों या क्लस्टरों में व्यवस्थित किया जा सकता है जो प्रशासन (गवर्नेंस) की मूल इकाई होगा और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं, शैक्षणिक पुस्तकालयों और एक प्रभावकारी प्रोफेशनल शिक्षक-समुदाय सहित सभी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
स्कूली शिक्षा के लिए मानक-निर्धारण एवं प्रत्यायन
एनईपी 2020 नीति निर्माण, विनियमन, प्रचालनों तथा अकादमिक मामलों के लिए एक स्पष्ट, पृथक प्रणाली की परिकल्पना करती है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्वतंत्र स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथारिटी (एसएसएसए) का गठन करेगे। सभी मूलभूत नियामकीय सूचना का पारदर्शी सार्वजनिक स्व-प्रकटन, जैसाकि एसएसएसए द्वारा वर्णित है, का उपयोग व्यापक रूप से सार्वजनिक निगरानी एवं जवाबदेही के लिए किया जाएगा। एससीईआरटी सभी हितधारकों के परामर्श के जरिये एक स्कूल गुणवत्ता आकलन एवं प्रत्यायन संरचना (एसक्यूएएएफ) का विकास करेगा।
उच्चतर शिक्षा
2035 तक जीईआर को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना
एनईपी 2020 का लक्ष्य व्यवसायिक शिक्षा सहित उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 26.3 प्रतिशत(2018) से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करना है। उच्चतर शिक्षा संस्थानों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी।
समग्र बहुविषयक शिक्षा
नीति में लचीले पाठ्यक्रम, विषयों के रचनात्मक संयोजन, व्यावसायिक शिक्षा एवं उपयुक्त प्रमाणन के साथ मल्टीपल एंट्री एवं एक्जिट बिन्दुओं के साथ व्यापक, बहुविषयक, समग्र अवर स्नातक शिक्षा की परिकल्पना की गई है। यूजी शिक्षा इस अवधि के भीतर विविध एक्जिट विकल्पों तथा उपयुक्त प्रमाणन के साथ 3या 4 वर्ष की हो सकती है। उदाहरण के लिए, 1 वर्ष के बाद सर्टिफिकेट, 2 वर्षों के बाद एडवांस डिप्लोमा, 3 वर्षों के बाद स्नातक की डिग्री तथा 4 वर्षों के बाद शोध के साथ स्नातक।
विभिन्न एचईआई से अर्जित डिजिटल रूप से अकादमिक क्रेडिटों के लिए एक एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की स्थापना की जानी है जिससे कि इन्हें अर्जित अंतिम डिग्री की दिशा में अंतरित एवं गणना की जा सके।
देश में वैश्विक मानकों के सर्वश्रेष्ठ बहुविषयक शिक्षा के माडलों के रूप में आईआईटी, आईआईएम के समकक्ष बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय(एमईआरयू)स्थापित किए जाएंगे
पूरी उच्च शिक्षा में एक मजबूत अनुसंधान संस्कृति तथा अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन का सृजन किया जाएगा।
विनियमन
चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए एक एकल अति महत्वपूर्ण व्यापक निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन किया जाएगा।
एचईसीआई के चार स्वतंत्र वर्टिकल होंगे- विनियमन के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय परिषद(एनएचईआरसी), मानक निर्धारण के लिए सामान्य शिक्षा परिषद (जीईसी), वित पोषण के लिए उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (एचईजीसी) और प्रत्यायन के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी)। एचईसीआई प्रौद्योगिकी के जरिये चेहरारहित अंतःक्षेपों के माध्यम से कार्य करेगा और इसमें नियमों तथा मानकों का अनुपालन न करने वाले एचईआई को दंडित करने की शक्ति होगी। सार्वजनिक एवं निजी उच्चतर शिक्षा संस्थान विनियमन, प्रत्यायन एवं अकादमिक मानकों के उसी समूह द्वारा शासित होंगे।
विवेकपूर्ण संस्थागत संरचना
उच्चतर शिक्षा संस्थानों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षण,अनुसंधान एवं सामुदायिक भागीदारी उपलब्ध कराने के जरिये बड़े, साधन संपन्न, गतिशील बहु विषयक संस्थानों में रूपांतरित कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय की परिभाषा में संस्थानों की एक विस्तृत श्रेणी होगी जिसमें अनुसंधान केंद्रित विश्वविद्यालयों से शिक्षण केंद्रित विश्वविद्यालय तथा स्वायत्तशासी डिग्री प्रदान करने वाले महाविद्यालय शामिल होंगे।
महाविद्यालयों की संबद्धता 15 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो जाएगी तथा महाविद्यालयों को क्रमिक स्वायत्ता प्रदान करने के लिए एक राज्य वार तंत्र की स्थापना की जाएगी। ऐसी परिकल्पना की जाती है कि कुछ समय के बाद प्रत्येक महाविद्यालय या तो एक स्वायत्तशासी डिग्री प्रदान करने वाले महाविद्यालय में विकसित हो जाएंगे या किसी विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालय बन जाएंगे।
प्रेरित, ऊर्जाशील और सक्षम संकाय
एनईपी सुस्पष्ट रूप से परिभाषित, स्वतंत्र, पारदर्शी नियुक्ति, पाठ्यक्रम/अध्यापन कला डिजाइन करने की स्वतंत्रता, उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने, संस्थागत नेतृत्व के जरिये प्रेरक, ऊर्जाशील एवं संकाय के क्षमता निर्माण की अनुशंसा करता है। इन मूलभूत नियमों का पालन न करने वाले संकायों को जबावदेह ठहराया जाएगा।
अध्यापक शिक्षण
एनसीईआरटी के परामर्श से, एनसीटीई के द्वारा अध्यापकशिक्षण के लिए एक नया और व्यापक राष्ट्रीय पाठ्यक्रमढांचा, एनसीएफटीई 2021 तैयार किया जाएगा। वर्ष2030 तक, शिक्षण कार्य करने के लिए कम से कमयोग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड डिग्री हो जाएगी।गुणवत्ताविहीन स्वचालित अध्यापक शिक्षण संस्थान(टीईओ) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परामर्श मिशन
एक राष्ट्रीय सलाह मिशन की स्थापना की जाएगी, जिसमेंउत्कृष्टता वाले वरिष्ठ/सेवानिवृत्त संकाय का एक बड़ा पूलहोगा- जिसमें भारतीय भाषाओं में पढ़ाने की क्षमता वालेलोग शामिल होंगें- जो कि विश्वविद्यालय/कॉलेज केशिक्षकों को लघु और दीर्घकालिक परामर्श/व्यावसायिकसहायता प्रदान करने के लिए तैयार करेंगे।
छात्रों के लिए वित्तीय सहायता
एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य विशिष्ट श्रेणियों से जुड़ेहुए छात्रों की योग्यता को प्रोत्साहित करने का प्रयासकिया जाएगा। छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले छात्रों की प्रगतिको समर्थन प्रदान करना, उसे बढ़ावा देना और उनकीप्रगति को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल काविस्तार किया जाएगा। निजी उच्च शिक्षण संस्थानों कोअपने यहां छात्रों को बड़ी संख्या में मुफ्त शिक्षा औरछात्रवृत्तियों की पेशकश करने के लिए प्रोत्साहित कियाजाएगा।
खुली और दूरस्थ शिक्षा
जीईआर को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने केलिए इसका विस्तार किया जाएगा। ऑनलाइन पाठ्यक्रमोंऔर डिजिटल संग्रहों, अनुसंधान के लिए वित्तपोषण,बेहतर छात्र सेवाएं, एमओओसी द्वारा क्रेडिट आधारितमान्यता आदि जैसे उपायों को यह सुनिश्चित करने के लिएअपनाया जाएगा कि यह उच्चतम गुणवत्ता वाले इन-क्लासकार्यक्रमों के समतुल्य हों।
ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल शिक्षा:
हाल ही में महामारी और वैश्विक महामारी में वृद्धि होने केपरिणामस्वरूप ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिएसिफारिशों के एक व्यापक सेट को कवर किया गया है,जिससे जब कभी और जहां भी पारंपरिक और व्यक्तिगतशिक्षा प्राप्त करने का साधन उपलब्ध होना संभव नहीं हैं,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के वैकल्पिक साधनों की तैयारियों कोसुनिश्चित करने के लिए, स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों कोई-शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए एमएचआरडीमें डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल कंटेंट और क्षमतानिर्माण के उद्देश्य से एक समर्पित इकाई बनाई जाएगी।
शिक्षा में प्रौद्योगिकी
सीखने, मूल्यांकन करने, योजना बनाने, प्रशासन कोबढ़ावा देने के लिए, प्रौद्योगिकी का उपयोग करने परविचारों का मुक्त आदान-प्रदान करने हेतु एक मंच प्रदानकरने के लिए एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय शैक्षिकप्रौद्योगिकी मंच ( एनईटीएफ) का निर्माण कियाजाएगा। शिक्षा के सभी स्तरों में, प्रौद्योगिकी का सही रूपसे एकीकरण करके, उसका उपयोग कक्षा प्रक्रियाओं मेंसुधार लाने, पेशेवर शिक्षकों के विकास को समर्थन प्रदानकरने, वंचित समूहों के लिए शैक्षिक पहुंच बढ़ाने औरशैक्षिक योजना, प्रशासन और प्रबंधन को कारगर बनाने केलिए किया जाएगा।
भारतीय भाषाओं को बढ़ावा
सभी भारतीय भाषाओं के लिए संरक्षण, विकास औरजीवंतता सुनिश्चित करने के लिए, एनईपी द्वारा पाली,फारसी और प्राकृत भाषाओं के लिए एक इंडियनइंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसलेशन एंड इंटरप्रिटेशन(आईआईटीआई), राष्ट्रीय संस्थान (या संस्थान) कीस्थापना करने, उच्च शिक्षण संस्थानों में संस्कृत और सभीभाषा विभागों को मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादाउच्च शिक्षण संस्थानों के कार्यक्रमों में, शिक्षा के माध्यम केरूप में मातृभाषा/ स्थानीय भाषा का उपयोग करने कीसिफारिश की गई है।
शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण को संस्थागत रूप से सहयोगऔर छात्र और संकाय की गतिशीलता दोनों के माध्यम सेसुगम बनाया जाएगा और हमारे देश में परिसरों को खोलनेके लिए शीर्ष विश्व रैंकिंग रखने वाले विश्वविद्यालयों केप्रवेश करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
व्यावसायिक शिक्षा
सभी व्यावसायिक शिक्षाओं को उच्च शिक्षा प्रणाली काअभिन्न अंग बनाया जाएगा। स्वचलित तकनीकीविश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालयों, कानूनीऔर कृषि विश्वविद्यालयों आदि को उद्देश्य बहु-विषयकसंस्थान बनना होगा।
प्रौढ़ शिक्षा
इस नीति का लक्ष्य, 2030 तक 100% युवा और प्रौढ़साक्षरता की प्राप्ति करना है।
वित्तपोषण शिक्षा
शिक्षा पहले की तरह 'लाभ के लिए नहीं' व्यहार पर आधारित होगी जिसके लिए पर्याप्त रूप से धन मुहैया कराया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे जिससे जीडीपी में इसका योगदान जल्द से जल्द 6% हो सके।
अभूतपूर्व परामर्श
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को, परामर्शों की अभूतपूर्वप्रक्रियाओं के बाद तैयार किया गया है जिसमें 2.5 लाखग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉकों, 6,000 यूएलबी, 676जिलों से प्राप्त हुए लगभग 2 लाख से ज्यादा सुझावों कोशामिल किया गया है। एमएचआरडी द्वारा, जनवरी 2015से इस अभूतपूर्व सहयोगात्मक, समावेशी और अत्यधिकभागीदारी वाली परामर्श प्रक्रिया की शुरूआत की गई। मई2016 में, ‘नई शिक्षा नीति के विकास के लिए गठितसमिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसकी अध्यक्षतास्वर्गीय श्री टी.एस. आर. सुब्रमण्यन, पूर्व कैबिनेट सचिव नेकी थी। उसने इसके आधार पर, मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षानीति, 2016 के लिए कुछ इनपुट तैयार किए। जून 2017में, प्रख्यात वैज्ञानिक, पद्म विभूषण डॉ के कस्तूरीरंगनकी अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे के लिए एकसमिति का गठन किया गया था, जिसने 31 मई,2019 को माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री कोराष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2019 का मसौदा प्रस्तुत किया।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 का मसौदा, एमएचआरडी की वेबसाइट पर और 'माईगव इनोवेट' पोर्टल पर अपलोडकिया गया, जिसमें आम नागरिक सहित हितधारकों केविचारों/सुझावों/टिप्पणियों को प्राप्त किया गया।
एडीजे और बेटे की मौत का खुलासा, महिला मित्र ने आटे में दिया था जहर, पत्रकारवार्ता में आरोपियों के साथ किया घटना का खुलासा
मंगलवार, 28 जुलाई 2020
पंधाना विधायक राम दांगोरे ने बोरगांव बुजुर्ग में किया गौशाला का भूमि पूजन
सोमवार, 27 जुलाई 2020
माध्यमिक शिक्षा मंडल परिणाम- कक्षा 12वीं में जीव विज्ञान समूह में अंशिका, कॉमर्स में रितिका ने प्रदेश की मेरिट लिस्ट में बनाया स्थान, इस बार भी बालिकाओं ने मारी बाजी
रविवार, 26 जुलाई 2020
सांसद शंकर लालवानी ने सूचना-प्रसारण मंत्री से मुलाकात की, इंदौर के लिए कई सुविधाओं की मांग रखी, फेक न्यूज से बचने के भी सुझाव दिए
- लालवानी की प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात
- आकाशवाणी को पॉडकास्ट शुरू करने का सुझाव दिया
- दूरदर्शन को नए प्लेटफॉर्म पर आने की राय दी
- इंदौर के लिए कई सुविधाओं की मांग रखी
शनिवार, 25 जुलाई 2020
खण्डवा जिले में 9 मरीज कोरोना पॉजिटिव मिले, जबकि कोविड केयर सेंटर से 12 मरीजों को संक्रमण मुक्त होने पर किया डिस्चार्ज
कोरोना संक्रमण मुक्त होने पर 12 मरीजों को किया गया डिस्चार्ज
खण्डवा - कोरोना संक्रमण से मुक्त होने पर शनिवार को कुल 12 कोरोना विजेताओं को जिला अस्पताल के कोविड केयर सेंटर से डिस्चार्ज किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी एस. चौहान ने बताया कि जो कोरोना विजेता डिस्चार्ज किए गए, उनमें आषा उम्र 60 वर्ष निवासी रामनगर, विष्णु कुमार सेन उम्र 53 निवासी इन्दौर नाका, सेवंतीबाई उम्र 77 वर्ष निवासी गांधवा, गुंजन गोयल उम्र 38 वर्ष निवासी कुण्डलेष्वर वार्ड, दिपीका वर्मा उम्र 27 वर्ष निवासी लाल चौकी, कामिनी घाटोले उम्र 52 निवासी लाल चौकी, शोभा वर्मा उम्र 55 वर्ष निवासी कुण्डलेष्वर वार्ड, रंजना कुषवाह उम्र 28 वर्ष निवासी पिपलौद खुर्द, योगवेन्द्र मिश्रा उम्र 24 वर्ष निवासी पड़ावा, शकिल खान उम्र 31 वर्ष निवासी नया हरसूद, रिजवा उम्र 27 वर्ष निवासी नया हरसूद, नफीसा बी उम्र 27 वर्ष निवासी नया हरसूद शामिल है। इस दौरान वहां उपस्थित चिकित्सकों तथा स्टॉफ कर्मचारियों द्वारा पुष्पवर्षा कर व तालियॉं बजाकर कोरोना विजेताओं को घर के लिए विदा किया। इन डिस्चार्ज मरीजों ने जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं तथा अस्पताल के चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशंसा की।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु जागरूक करें, व मरीजों का बेहतर उपचार करें|वाणिज्य कर आयुक्त श्री राघवेन्द्र सिंह ने अधिकारियों की बैठक में दिए निर्देश
खण्डवा - जिला प्रशासन खण्डवा द्वारा कोरोना संक्रमण की रोकथाम तथा कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए व्यवस्थित कार्य योजना बनाकर बेहतर ढंग से कार्य किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि खण्डवा जिले में कोरोना संक्रमण के फैलाव पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। यह बात प्रदेश के वाणिज्य कर आयुक्त तथा कोविड-19 संबंधी मॉनिटरिंग के लिए खण्डवा जिले के प्रभारी सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित अधिकारियों की बैठक में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नागरिकों को कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। सभी को फेस मास्क लगाने तथा सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की समझाइश दी जायें तथा जो उल्लंघन करें उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाये। बैठक में कलेक्टर श्री अनय द्विवेदी ने जिले में कोरोना संक्रमण की रोकथाम व उपचार के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत प्रजेन्टेंशन प्रस्तुत किया। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री विवेक सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रोशन कुमार सिंह, अपर कलेक्टर श्रीमती नंदा भलावे कुशरे , एसडीएम हरसूद डॉ. परीक्षित झाडे सहित विभिन्न अधिकारीगण मौजूद थे।
चिकित्सक, अधिकारी व कर्मचारी संक्रमण से बचें और अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखे
वाणिज्यकर आयुक्त श्री सिंह ने कोविड-19 के उपचार में लगे मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के डॉक्टर्स को समझाइश दी कि वे कोरोना संक्रमित मरीजों का बेहतर उपचार करें। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अनंत पंवार से कहा कि वे गंभीर मरीजों के उपचार की मॉनिटरिंग खुद करें तथा गंभीर मरीजों की प्रतिदिन आवश्यकता जांच कराई जाये तथा उन्हें स्वस्थ्य रखने के लिए जो भी जरूरी हो सभी आवश्यक कदम उठाये जायें। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि वे कोरोना संबंधी ड्यूटी करते समय कोरोना संक्रमण से अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें तथा घरों में नियमित रूप से योगाभ्यास व प्राणायाम कर एवं आयुर्वेदिक काढ़े का नियमित उपयोग कर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाये रखें। वाणिज्यकर आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि कोरोना संक्रमण संबंधी उपचार के साथ साथ जिला अस्पताल में हृदय रोग सहित अन्य रोगों के गंभीर मरीजों को भी समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाये।
ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण की मॉनिटरिंग के लिए ग्रामीण कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौपें
वाणिज्यकर आयुक्त श्री सिंह ने बैठक में कहा कि किल कोरोना अभियान की तरह ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ कर्मचारियों, पंचायत सचिव , स्वास्थ्य कार्यकर्ता, रोजगार सहायक आदि के माध्यम से गांव गांव की जानकारी जिला प्रशासन को मिलती रहे। इसके लिए इन कर्मचारियों को निर्देश दे कि यदि उनके गांव में कोई जुकाम, खांसी या कोरोना संक्रमण संबंधी अन्य लक्षणों वाला मरीज देखने में आता है तो उसकी सूचना जनपद पंचायत के माध्यम से जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तक प्रतिदिन नियमित रूप से आती रहे, ताकि समय पर मरीज का उपचार हो सके। उन्होंने कहा कि अभी तक देखने में आया है कि कोरोना संक्रमण की समय पर सूचना मिलने तथा सही समय पर उपचार मिलने पर मरीज ठीक हो जाते है तथा उपचार में देरी के लिए घातक सिद्ध होती है।
कलेक्टर श्री द्विवेदी ने बैठक में बताया कि जिले में जुकाम, खांसी, बुखार के लक्षण वाले मरीजों को चिन्हित करने के लिए मेडिकल स्टोर्स, पैथोलॉजी लेब, प्रायवेट क्लीनिक्स जाने वाले मरीजों की जानकारी प्रतिदिन निर्धारित प्रारूप में आ रही है और इन मरीजों को क्वारेंटाइन कर इनके सेम्पल भी लिए जा रहे है, जिनमें पॉजिटिव मरीज भी सामने आएं है। उन्होंने बताया कि जिले में लॉकडाउन इन्फोर्समेंट टीम, सपोर्ट टीम, रेपीड रिस्पोंस टीम, स्टेटिक पैरामीटर, मोबाइल मेडिकल टीम, इन्सेंट मेडिकल चैकअप टीम, होम क्वारेंटीन टीम, सुपरवाइजर्स टीम सहित विभिन्न दल गठित कर कोविड-19 संबंधी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जा रही है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना पॉजीटिव, ट्वीट कर दी जानकारी
भोपाल- शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं कोरोना पॉजिटिव हो गया हूं। मेरी सभी साथियों से अपील है कि जो भी मेरे संपर्क में आए हैं वह अपना कोरोना टेस्ट करवा लें। मेरे निकट संपर्क वाले कोरेंनटाइन में चले जाएं। मैं कोरोना गाइड लाइन का पूरा पालन कर रहा हूं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वयं को कोरेनटाइन करूंगा और इलाज कराऊंगा। मेरी प्रदेश की जनता से अपील है कि सावधानी रखें, जरा सी असावधानी कोरोना को निमंत्रण देती है। मैंने कोरोना से सावधान रहने के हर संभव प्रयास किए लेकिन समस्याओं को लेकर के लोग मिलते ही थे । मेरी उन सब को सलाह है कि जो मुझसे मिले वह अपना टेस्ट करवा ले। कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना का समय पर इलाज होता है तो कोरोना बिल्कुल ठीक हो जाता है। मैं 25 मार्च से प्रत्येक शाम को कोरोना की समीक्षा बैठक करता रहा हूँ। मैं यथासंभव अब वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोरोना की समीक्षा करने का प्रयास करूंगा और मेरी अनुपस्थिति में यह बैठक गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह , स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभु राम चौधरी करेंगे। मैं स्वयं भी कोरेण्टाइन रहते हुए इलाज के दौरान प्रदेश में कोरोना नियंत्रण के हर संभव प्रयास करता रहूंगा। आप सब सावधान रहें, सुरक्षित रहे और गाइडलाइन का पालन जरूर करे।
शुक्रवार, 24 जुलाई 2020
अयोध्या - राम मंदिर भूमि पूजन पर रोक लगाने के लिए लगी याचिका, कोर्ट ने सुनाया यह फैसला
अयोध्या में राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को प्रस्तावित भूमि पूजन पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस डी सिंह की खंडपीठ ने साकेत गोखले की जनहित याचिका पर दिया है।
न्यायालय ने कहा है कि याचिका कल्पनाओं पर आधारित है। फिर भी न्यायालय ने आयोजकों व राज्य सरकार से अपेक्षा की है कि वे शारीरिक दूरी बनाये रखने के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्यक्रम करेंगे। न्यायालय ने कहा है कि कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने की आशंका का कोई आधार नहीं है। याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस ने लेटर पिटीशन को जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करते हुए भूमि पूजन के कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग में दाखिल याचिका की सुनवाई की। मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता साकेत गोखले की ओर से भेजी गई लेटर पीआईएल में कहा गया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाला भूमि पूजन कोविड -19 के अनलॉक- 2 की गाइडलाइन का उल्लंघन है। कहा गया था कि भूमि पूजन में लगभग 300 लोग एकत्र होंगे, जो कोविड-19 के नियमों के विपरीत होगा। लेटर पिटीशन के माध्यम से भूमि पूजन के कार्यक्रम पर रोक लगाए जाने की मांग की गई थी। कहा गया था कि भूमि पूजन का कार्यक्रम होने से कोरोना के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ेगा। यह भी कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र की गाइडलाइन में छूट नहीं दे सकती। कोरोना संक्रमण के कारण ही बकरीद पर सामूहिक नमाज की इजाजत नहीं दी गई है और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में कार्यक्रम होने जा रहा है।
आँगनवाड़ी सहायिका की मृत्यु पर, परिवार की महिला सदस्य को मिलेगी नौकरी
भोपाल - राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत यदि आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका की ड्यूटी लगाई जाती है और ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार की महिला सदस्य को आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका के पद पर नियुक्ति दी जायेगी। महिला सदस्य निर्धारित अर्हताएँ पूर्ण करती है, तो ऐसी स्थिति में नियुक्तिकर्ता अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा उन्हें सीधे नियुक्त किया जायेगा। इस संबंध में महिला बाल विकास विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए है।
बिना पात्रता पर्ची वाले गरीबों को भी मिलेगा अब उचित मूल्य का राशन
भोपाल- प्रदेश के ऐसे 36 लाख 86 हजार 856 गरीब जिनके पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पात्रता पर्ची नहीं है, उन्हें भी अब पात्रता पर्ची जारी कर उचित मूल्य राशन प्रदाय किया जाएगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के गरीबों के हित में लिया है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में 5 करोड़ 44 लाख 24 हजार उचित मूल्य उपभोक्ता हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल के मंत्रालय में ष्वन नेशन-राशन कार्डष् संबंधी बैठक में कहा कि प्रदेश में अब हरेक गरीब को उचित मूल्य राशन मिलेगा। कोरोना काल में पता चला कि प्रदेश में बहुत से ऐसे गरीब हैं जिनके पास पात्रता पर्ची न होने से उचित मूल्य पर राशन नहीं मिल रहा था। पहले तो प्रदेश में तुरंत उनके राशन की व्यवस्था की गई, साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए भी राशन की व्यवस्था की गई। अब ऐसे सभी 36 लाख 86 हजार गरीबों की पहचान कर ली गई है तथा उन्हें पात्रता पर्ची जारी करने का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। अब ये सभी उचित मूल्य राशन उपभोक्ताओं के रूप में पंजीकृत हो जाएंगे तथा इन्हें अगस्त माह से उचित मूल्य राशन मिल सकेगा। प्रदेश की धरती पर कोई भी गरीब उचित मूल्य राशन से वंचित नहीं रहेगा।
विशेष अभियान के तहत किया जायेगा आधार सीडिंग का कार्य
वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए सभी उचित मूल्य हितग्राहियों की आधार सीडिंग का कार्य विशेष अभियान चलाकर पूरा किया जाए। सभी पात्र व्यक्तियों को जोड़े जाने एवं पात्रता पर्ची वितरण का कार्य तत्परता के साथ किया जाए।
वन नेशन-वन राशनकार्ड
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को अंतर राज्यीय पोर्टेबिलिटी के माध्यम से खाद्यान्न प्रदाय किया जाना है। इसके अंतर्गत उचित मूल्य दुकान का 100 प्रतिशत ऑटोमेशन तथा 100 प्रतिशत आधार सीडिंग की जानी है। इसकी समय-सीमा 31 दिसंबर तक निर्धारित है।
शंकर लालवानी ने सैनिकों को भेजी स्वदेशी सामान से बनी 21,000 'सांसद राखी', कहा वीर जवानों के हाथों पर चीनी राखी नहीं बंधेगी
- आत्मनिर्भर भारत के तहत अनूठी पहल
- सांसद कर रहे हैं चीनी राखियों का बहिष्कार
- कृष्णपुरा छत्री पर हुआ बड़ा कार्यक्रम
अकोला-खण्डवा गेज परिवर्तन में मेलघाट टाईगर रिजर्व के बाहर से रेल बायपास बनाने पर आपत्ति, जनमंच ने केंद्रीय रेल मंत्री के नाम पत्र भेजा
गुरुवार, 23 जुलाई 2020
गुजरात के काकरापर स्थित प्रथम 700MWe दाबित भारी पानी रिएक्टर को प्राप्त हुई क्रांतिकता
आज कोरोना जांच संबंधी 1 रिपोर्ट पॉजिटिव, 271 के लिए सेम्पल
खण्डवा- कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला जारी, एक और विधायक का इस्तीफा, अब 27 सीट पर होंगे उपचुनाव
वन मंत्री विजय शाह को हाईकोर्ट से राहत, निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
भागवत कथा
खंडवा जिले की हरसूद विधानसभा सीट से विजय शाह विजयी घोषित हुए थे. उन्होंने अपना चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था और 80556 मत प्राप्त किए थे. याचिका में बताया गया था कि विजय शाह ने 26 अक्टूबर 2018 से 1 नवंबर 2018 तक भागवत कथा का आयोजन किया था और धार्मिक आधार पर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी. याचिकाकर्ता की दलील पर विजय शाह ने बताया कि उनके द्वारा चुनाव का नाम निर्देशन पत्र 1 नवंबर 2011 के बाद 5 नवंबर 2018 को दाखिल किया था. वो 1 नवंबर 2018 तक भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी भी नहीं थे इसलिए चुनाव प्रभावित करने का प्रश्न ही नहीं उठता.
बुधवार, 22 जुलाई 2020
पूर्व मंत्री अर्चना दीदी ने सुदूर ग्रामों का दौरा कर ग्रामीणों की सुनी समस्याएं, किया निराकरण
मंगलवार, 21 जुलाई 2020
जुर्म की नई दास्ताँ- नो मोटिव फ़ॉर मर्डर ऑफ हफ़ीज़...
25 कोरोना विजेता संक्रमण से मुक्त होकर जिला अस्पताल से हुए डिस्चार्ज
सोमवार, 20 जुलाई 2020
कोरोना का कहर- खण्डवा का चार वर्षीय मासूम बालक आया कोरोना के चपेट में, जिले में पॉजिटिव मरीजो की संख्या बढ़कर 538 हुई
कोरोना का कहर- खण्डवा का चार वर्षीय मासूम बालक आया कोरोना के चपेट में, जिले में पॉजिटिव मरीजो की संख्या बढ़कर 538 हुई
कोरोना का कहर- खण्डवा का चार वर्षीय मासूम बालक आया कोरोना के चपेट में, जिले में मरीजो की संख्या बढ़कर 538 हुई
मुख्यमंत्री की बिजली बिल माफी की अस्पष्ट घोषणा से जनता परेशान - शिवसेना
साप्ताहिक समीक्षा बैठक - सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का त्वरित निराकरण करें अधिकारी- खण्डवा कलेक्टर
खण्डवा - सीएम हेल्पलाइन में दर्ज नागरिकों की शिकायतों का प्राथमिकता से समय सीमा में निराकरण किया जाये। यह कोशिश की जाना चाहिए कि आवेदन का एल-1 स्तर के अधिकारी द्वारा ही निराकरण कर दिया जाये। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। यह निर्देश कलेक्टर श्री अनय द्विवेदी ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारियों को दिए। बैठक में जिला पंचायत के सीईओ श्री रोशन कुमार सिंह, अपर कलेक्टर श्रीमती नंदा भलावे कुशरे सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी मौजूद थे।
बैठक में कलेक्टर श्री द्विवेदी ने अधिकारियों से कहा कि वे कोरोना संक्रमण काल में उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बिना अनुमति के मुख्यालय न छोड़े। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण तथा लीड बैंक मेनेजर को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में प्राप्त आवेदनों में से पात्र आवेदकों को छांटकर उनके प्रकरण तत्काल स्वीकृत करायें। उन्होंने जिला आपूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए कि पहुंचविहीन क्षेत्रों में उचित मूल्य की दुकानों पर वितरण के लिए खाद्यान्न, केरोसीन व शक्कर एडवांस में पहुंचायें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित होने वाला खाद्यान्न व केरोसीन संबंधित उचित मूल्य की दुकानों तक हर माह के अंत में पहुंचा दिया जाये, ताकि अगले माह में उसका समय पर ग्रामीणों को वितरण हो सके। कलेक्टर श्री द्विवेदी ने लोक निर्माण विभाग व प्रधानमंत्री सड़क योजना के कार्यपालन यंत्रियों को निर्देश दिए कि वर्षा को ध्यान में रखते हुए पुल पुलिया व रपटों की मरम्मत समय समय की जाती रहे।
रविवार, 19 जुलाई 2020
कोरोना का कहर- खण्डवा जिले में आज फिर 10 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले
कोविड19 संक्रमण के चलते विशाल सांई भंडारा व भव्य पालकी कार्यक्रम स्थगित
जंगल एवं वनकर्मियों की सुरक्षा हेतु आधुनिक संसाधन उपलब्ध करायेंगे, वन मंत्री डॉ. शाह ने दूरस्थ ग्राम आंवल्या में वन विभाग के अधिकारियों की बैठक ली
खण्डवा - प्रदेश में जंगलों की सुरक्षा व वनवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जायेंगे। साथ ही वनों की रक्षा के लिए तैनात वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जायेगा। जंगलों एवं वन कर्मियों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध कराये जायेंगे। यह बात प्रदेश के वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने रविवार को आदिवासी बहुल विकासखण्ड खालवा के दूरस्थ ग्राम आंवल्या में वन विभाग के अधिकारियों की बैठक में कही। बैठक में मुख्य वन संरक्षक श्री एस.एस. रावत के साथ साथ खण्डवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी जिलों के वन मण्डलाधिकारी भी मौजूद थे। वन मंत्री डॉ. शाह ने बैठक में कहा कि जंगलों की सुरक्षा के लिए नाईट विजन कैमरे युक्त ड्रोन क्रय किए जायेगे, जिनसे दिन में व रात में दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित जंगलों की सुरक्षा की मॉनिटरिंग आसानी से की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों व वन रक्षकों की सुरक्षा के लिए हथियार व वायरलेस सेट की व्यवस्था भी की जायेगी।
वन मंत्री डॉ. शाह ने बैठक में कहा कि 3 वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ वन अमले को स्थानांतरित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सभी वन रक्षकों का हर साल में एक बार रिफ्रेशर कोर्स प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जायेगा। वन मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि वे हर माह में दो बार वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों से वन अधिकारियों से चर्चा कर नियमित रूप से समीक्षा करेंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन व वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए सख्त कार्यवाही की जायें। उन्होंने सभी वन मण्डलाधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 15 अगस्त तक सभी पात्र परिवारों को वनाधिकार पट्टे हर हाल में वितरित कर दिए जायें। उन्होंने कहा कि वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी परम्परागत कार्यो के साथ साथ वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के कल्याण के लिए नवाचार भी करें। उन्होंने कहा कि वनवासी भाईयों को उनके गांव में ही आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार स्थापित करने हेतु मदद दी जायेगी। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवारों को उद्यानिकी, मछली पालन, सब्जी उत्पादन जैसे व्यवसायों का प्रशिक्षण दिलाकर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
वन मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि आंवल्या में वन कर्मचारियों को इन व्यवसायों के संबंध में प्रशिक्षण दिया जायेगा, ताकि ये वन रक्षक अपने अपने गांव में वनवासियों को प्रशिक्षित कर सकें। उन्होंने सभी वन रक्षकों से कहा कि वे अपने अपने गांव में हर सप्ताह वनवासियों की बैठक लें, साथ ही वन ग्रामों में पदस्थ अन्य विभागों के कर्मचारियों के साथ सामंजस्य स्थापित करने हेतु उनसे नियमित रूप से सम्पर्क करें, ताकि उन विभागों की गतिविधियों से वनवासी लाभान्वित हो सके। वन मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए पत्थर की बाउन्ड्रीवाल बनाने को प्राथमिकता दी जाये, क्योंकि इससे ग्रामीणों को अधिक रोजगार मिलता है तथा पत्थर की बाउन्ड्रीवाल अधिक समय तक सुरक्षित रहती है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के काष्ठागारों में रखी कीमती लकड़ी की सुरक्षा के लिए सभी डिपो में फायर फायटर व अग्नि शामक यंत्र उपलब्ध कराये जायेंगे। बैठक में मुख्य वनसंरक्षक श्री रावत ने बताया कि वन वृत्त खण्डवा में चार जिले के 6 डिवीजन शामिल है। वन वृत्त खण्डवा में 18 सब डिवीजन तथा 24 रेंज है। उन्होंने बताया कि वन वृत्त खण्डवा में वनों की सुरक्षा के लिए 33 वन चौकी तथा 8 जल चौकी स्थित है। इससे पूर्व मुख्य वन संरक्षक श्री रावत ने वन मंत्री डॉ. शाह को पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया।
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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की तहसील खालवा के ग्राम झिंझरी का एक साधारण युवक आज बहादुरी, समर्पण और राष्ट्रसेवा का प्रतीक बन चुका है...
































