भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) ने 24 फरवरी 2026 को कैगा न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-5 और 6 के निर्माण के लिए फर्स्ट पोर ऑफ़ कंक्रीट (FPC) की अनुमति प्रदान कर दी है। यह स्वीकृति 23 फरवरी 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक में विस्तृत सुरक्षा समीक्षा के परिणामों पर विचार के बाद दी गई।
यह मंज़ूरी केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह संकेत है कि परियोजना का डिज़ाइन, सुरक्षा विश्लेषण और गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्थाएँ निर्धारित नियामक मानकों पर खरी उतरी हैं।
क्या है फर्स्ट पोर ऑफ़ कंक्रीट (FPC)?
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में फर्स्ट पोर ऑफ़ कंक्रीट वह चरण है, जब साइट की खुदाई और आधारभूत तैयारियों के बाद रिएक्टर भवन की नींव में पहली बार संरचनात्मक कंक्रीट डाला जाता है। इसे निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
FPC की अनुमति से पहले नियामक संस्था द्वारा डिज़ाइन, सुरक्षा प्रणाली, भूकंपीय आकलन, आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं की बहु-स्तरीय समीक्षा की जाती है।
700 MWe PHWR: स्वदेशी तकनीक की उपलब्धि
कैगा-5 और 6 में 2×700 मेगावाट क्षमता वाले प्रेशराइज़्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) स्थापित किए जाएंगे। यह रिएक्टर पूर्णतः स्वदेशी डिज़ाइन पर आधारित हैं, जिन्हें न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने विकसित किया है।
इन रिएक्टरों में उन्नत सुरक्षा विशेषताएँ शामिल हैं, जो इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के नवीनतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं।
700 MWe क्षमता वाले PHWR भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि ये उच्च उत्पादन क्षमता के साथ स्वदेशी तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी दर्शाते हैं।
अन्य परियोजनाओं से समानता
कैगा-5 और 6 का डिज़ाइन गुजरात स्थित काकरापार एटॉमिक पावर स्टेशन (KAPS) की यूनिट-3 और 4 के समान है, जिन्हें जुलाई 2025 में नियमित संचालन की अनुमति दी गई थी।
इसके अलावा, राजस्थान के रावतभाटा स्थित राजस्थान एटॉमिक पावर प्रोजेक्ट (RAPP) की यूनिट-7 और 8 भी 700 MWe श्रेणी की हैं। RAPP-7 को 30 जनवरी 2026 को 100% पावर तक कमीशनिंग की स्वीकृति दी जा चुकी है।
इन सफल परियोजनाओं के अनुभव से कैगा-5 और 6 के निर्माण एवं संचालन में तकनीकी दक्षता और समयबद्ध प्रगति की अपेक्षा की जा रही है।
कैगा साइट का महत्व
कैगा परमाणु ऊर्जा केंद्र कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ ज़िले में स्थित है। यहाँ पहले से 220 MWe क्षमता की चार इकाइयाँ सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।
नई इकाइयों के जुड़ने से इस साइट की कुल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और दक्षिण भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
सुरक्षा सर्वोपरि
AERB ने स्पष्ट किया है कि यह स्वीकृति अनुमोदित डिज़ाइन, व्यापक सुरक्षा विश्लेषण और गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं के संतोषजनक पालन के आधार पर दी गई है।
AERB की बहु-स्तरीय समीक्षा प्रणाली के अंतर्गत विशेषज्ञ समितियाँ, तकनीकी मूल्यांकन समूह और बोर्ड स्तर पर अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि परमाणु ऊर्जा परियोजनाएँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित और विश्वसनीय हों।
राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में कदम
भारत ने स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोतों के विस्तार को प्राथमिकता दी है। परमाणु ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और बेस-लोड बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कैगा-5 और 6 परियोजना की FPC स्वीकृति इस दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। यह न केवल ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की तकनीकी दृष्टि को भी सुदृढ़ करेगी।
कैगा-5 और 6 के लिए FPC की मंज़ूरी भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह परियोजना सुरक्षा, स्वदेशी तकनीक और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के समन्वय का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में इसके पूर्ण संचालन से देश की ऊर्जा क्षमता और रणनीतिक मजबूती में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।