शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

शांतिकुंज हरिद्वार से लौटीं समयदानी बहनों का खंडवा में ऐतिहासिक स्वागत, सेवा-समर्पण का हुआ सम्मान

खंडवा— अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार में अखंड ज्योति पत्रिका के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह-2026 में सेवा एवं समयदान कर लौट रही समयदानी बहनों का खंडवा रेलवे स्टेशन पर गायत्री शक्तिपीठ परिवार द्वारा भव्य, भावपूर्ण और गरिमामय स्वागत किया गया। इस अवसर पर बहनों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया गया तथा स्नेहपूर्वक भोजन व्यवस्था भी की गई।

शांतिकुंज हरिद्वार के बैरागी द्वीप से लौटी इन देवकन्याओं ने 31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक शांतिकुंज में निवास कर विभिन्न सेवाओं के माध्यम से समयदान किया। शताब्दी समारोह के दौरान इन बहनों ने अनुशासित दिनचर्या, सेवा-भाव और आध्यात्मिक समर्पण के साथ अनेक दायित्वों का निर्वहन किया, जिससे आयोजन की गरिमा और सफलता में महत्वपूर्ण योगदान मिला।

इस सेवा दल में खंडवा सहित प्रदेश के 34 जिलों— जुलवानिया, किशनपुरा, टोकरखेड़ा, सिरसौद, माथपुर, आमोदा, अटूट भिकारी, सनावद, रामपुर, सुल्तानपुर, सोमला डाबी, ओझरा, बामंदी, खड़कवानी, सोनखेड़ी मथडाई, बड़वाह, कटार, कोदला खेड़ी, सागर, सीहोर, सिंगरौली, खरगोन सहित अनेक क्षेत्रों से आई सेवा धारी कन्याएं शामिल रहीं। सभी ने एकजुट होकर गायत्री परिवार के आदर्शों के अनुरूप सेवा, साधना और संस्कार के कार्यों में सहभागिता निभाई।

गायत्री परिवार के श्री देवा भावसार ने जानकारी देते हुए बताया कि देवकन्या पूर्णिमा पवार एवं बृजेश पटेल का विशेष स्वागत ट्रस्टी श्री आनंदीलाल सोनी, श्रीमती अरुणा शर्मा एवं उमा सोलंकी द्वारा किया गया। वहीं खंडवा गायत्री शक्तिपीठ के अजय लाड़, देवा भावसार, संजय महाजन एवं श्री सोनटके बाबूजी सहित अनेक गायत्री परिजनों ने सभी देवकन्याओं का पुष्प वर्षा कर अभिनंदन किया।

स्वागत समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समयदान और सेवा भावना गायत्री परिवार की पहचान है। शांतिकुंज में दी गई सेवाएं न केवल व्यक्तिगत आत्मविकास का माध्यम हैं, बल्कि समाज में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी कार्य करती हैं। समयदानी बहनों का यह समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

अंत में सभी समयदानी बहनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए गायत्री परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे सेवा-आधारित आयोजन सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को और अधिक मजबूत करेंगे।

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