शनिवार, 31 मई 2025

महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में पधारे प्रधानमंत्री श्री मोदी का खंडवा विधायक कंचन मुकेश तनवे ने किया स्वागत, खंडवा व पंधाना विधायक ने प्रधानमंत्री को दिया खंडवा आने का निमंत्रण

खंडवा- भोपाल में देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पधारकर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को लेकर किया जा रहे कार्यों की सराहाना की एवं साथ ही करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के भूमि पूजन लोकार्पण के साथ इंदौर में मेट्रो ट्रेन की सौगात दी। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि लाखों की संख्या में भोपाल में महिलाएं उपस्थित हुई और देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी का स्वागत अभिनंदन किया। इस अवसर पर भोपाल कार्यक्रम में शामिल खंडवा विधायक कंचन मुकेश तनवे ने भोपाल में लोकमाता अहिल्याबाई के जन्म जयंती कार्यक्रम के अवसर पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को सफल कार्यक्रम की बधाई दी। खंडवा विधायक कंचन तनवे एवं पंधाना विधायक छाया मोरै ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का स्वागत अभिनंदन करते हुए दादाजी की नगरी खंडवा आने का निमंत्रण दिया।

जयपुर के दिव्यांश जैन ने स्वरांजलि प्रतियोगिता में प्रथम प्राप्त किया, सम्मान पत्र एवं 71 हजार रुपए नगद पुरस्कार से हुए सम्मानित

सागर- परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभाकर शिष्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में सुकृति कला केंद्र सैदपुर खुरई मध्यप्रदेश एवं विद्याशरणम परिवार भारत के तत्वावधान में श्रुत स्वरांजलि स्वर लेखन प्रतियोगिता जिसमें देश के अनेक प्रसिद्ध संगीतकारों ने भाग लिया, जिसमें जयपुर के दिव्यांश जैन प्रथम,अंजलि जैन द्वितीय, प्रखर जैन तृतीय स्थान प्राप्त किया। दिव्यांश जैन ने 2016 में दैनिक भास्कर अलवर द्वारा आयोजित संगीत प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर विदेश जाने का अवसर प्राप्त किया था। वर्तमान में जयपुर विश्वविद्यालय से संगीत में पीएचडी कर रहे हैं। प्रथम पुरस्कार में सम्मान पत्र के साथ 71000 की राशि से सम्मानित किए गए दिव्यांश जैन दमोह जिले की फुटेरा बटियागढ़ मध्य प्रदेश के है आपके पिताजी अजित जैन शास्त्री अलवर मैं लेक्चरर के पद पदस्थ थे और ख्याति प्राप्त विद्वान है मां श्रीमती अर्चना जैन गृहणी सागर। आयोजन समिति में देश की ख्याति प्राप्त संगीतकार रूपेश जैन इंदौर, धीरज बकरीवाल महापौर, ब्र. ऋषभ सेठी दमोह रहे। मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने सभी के लिए आशीष वचन देते हुए कहा कि आपके स्वरों के द्वारा जैन धर्म की प्रभावना होगी और आप सभी स्वयं की,समाज की और धर्म की प्रभावना में सहभागी रहेंगे। छोटी सी उम्र में संगीत के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करने वाले दिव्यांश जैन को सागर विधायक शैलेंद्र जैन, युवा उद्योगपति कपिल मलैया, एड. कमलेंद्र जैन राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारतीय जैन मिलन, क्षेत्रीय अध्यक्ष अरुण चंदेरिया, राजकुमार शास्त्री उदयपुर, डॉ महेश जैन भोपाल,रमेश शास्त्री जोबनेर, आगम जैन आईपीएस छतरपुर, नीलेश जैन रामपुरा,मनोज जैन रहली, मनीष विद्यार्थी सागर,श्रीमती भारती जैन आदि ने शुभकामनाएं दी।

एनएएफएलडी स्क्रीनिंग के लिए स्वस्थ यकृत मिशन 1 जून से

नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज की स्क्रीनिंग के लिए स्वस्थ यकृत लीवर मिशन आज से भोपाल सहित प्रदेश में शुरू किया जा रहा है। जिसमे 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की सामुदायिक स्क्रीनिंग जावेगी। 21 मई को माननीय राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया था। ये अभियान लीवर संबंधी बीमारियों की जागरुकता, प्रारंभिक पहचान, उपचार और रोकथाम के लिए चलाया जा रहा है। मिशन के लिए मध्यप्रदेश सरकार और लीवर लवर एंड बिलयरी साइंसेस इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के बीच एमओयू साइन किया गया है।
अभियान के तहत आशा कार्यकर्ताएं प्रारंभिक स्क्रीनिंग करेंगी। संदिग्ध NAFLD मामलों के लिए जांच की जाएगी। बी एम आई 23 से अधिक होने , महिलाओं में कमर का माप 80 सेमी और पुरुषों में 90 सेमी से अधिक होने, मधुमेह का इतिहास होने की जानकारी ली जाएगी। संदिग्ध मामलों की जानकारी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ साझा की जाएगी। इन लोगों को लीवर को स्वस्थ रखने के लिए घर में उपलब्ध पौष्टिक आहार के सेवन, शराब एवं धूम्रपान से दूर रहने की सलाह देकर नियमित फॉलोअप किया जाएगा।FIB-4 स्कोर की गणना के आधार पर प्लेटलेट काउंट, SGOT (AST), SGPT (ALT) जांच की जाएगी। चिकित्सकीय सलाह पर FIBROSCAN किया जायेगा। 
पूर्व में विभाग द्वारा असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए निरोगी काया अभियान संचालित किया गया था। जिसमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर के अलावा नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज स्क्रीनिंग को भी शामिल किया गया था। अभियान में 50 हजार से अधिक लोगों में नॉन एल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज की स्क्रीनिंग की गई है। इस सम्बन्ध में मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है जिसमें लीवर के कार्य, लीवर संबंधित समस्याओं, लक्षणों की पहचान, खानपान, व्यायाम एवं जीवनशैली , बी एम आई कैलकुलेशन की जानकारी दी गई है। 
लीवर का मुख्य कार्य रक्त को साफ करना, विषाक्त पदार्थों को हटाना और पोषक तत्वों को संधारित करना,शरीर में ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करना, रक्त के थक्के को बनाए रखना ,पित्त के उत्पादन, प्रोटीन, विटामिन और खनिज पदार्थों के उत्पादन जैसे कई कार्य लीवर 24 घंटे करता रहता है। लीवर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं जिसमें फैटी लिवर , लीवर फाइब्रोसिस,हेपेटाइटिस, सिरोसिस लीवर कैंसर प्रमुख हैं। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि असंचारी रोगों की नियमित जांच करवाकर बीमारियों की गंभीरता को कम किया सकता है । लीवर सम्बन्धी समस्याओं के लिए असंचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम, वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम में सेवाएं निशुल्क दी जा रही हैं।
    माननीय प्रधानमंत्री द्वारा भी खाद्य तेलों के उपयोग को 10% तक कम किए जाने का आह्वान किया गया था। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जीवन शैली संबंधी बीमारियों के उपचार के साथ-साथ इन बीमारियों की रोकथाम के लिए परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। 
एन ए एफ एल डी स्क्रीनिंग के लिए स्वस्थ यकृत मिशन आज से
नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज की स्क्रीनिंग के लिए स्वस्थ यकृत लीवर मिशन आज से भोपाल सहित प्रदेश में शुरू किया जा रहा है।जिसमे 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की सामुदायिक स्क्रीनिंग जावेगी। 21 मई को माननीय राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया था। ये अभियान लीवर संबंधी बीमारियों की जागरुकता, प्रारंभिक पहचान, उपचार और रोकथाम के लिए चलाया जा रहा है। मिशन के लिए मध्यप्रदेश सरकार और लीवर लवर एंड बिलयरी साइंसेस इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के बीच एमओयू साइन किया गया है।
अभियान के तहत आशा कार्यकर्ताएं प्रारंभिक स्क्रीनिंग करेंगी । संदिग्ध NAFLD मामलों के लिए जांच की जाएगी। बी एम आई 23 से अधिक होने , महिलाओं में कमर का माप 80 सेमी और पुरुषों में 90 सेमी से अधिक होने, मधुमेह का इतिहास होने की जानकारी ली जाएगी। संदिग्ध मामलों की जानकारी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ साझा की जाएगी। इन लोगों को लीवर को स्वस्थ रखने के लिए घर में उपलब्ध पौष्टिक आहार के सेवन, शराब एवं धूम्रपान से दूर रहने की सलाह देकर नियमित फॉलोअप किया जाएगा।FIB-4 स्कोर की गणना के आधार पर प्लेटलेट काउंट, SGOT (AST), SGPT (ALT) जांच की जाएगी। चिकित्सकीय सलाह पर FIBROSCAN किया जायेगा। 
पूर्व में विभाग द्वारा असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए निरोगी काया अभियान संचालित किया गया था। जिसमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर के अलावा नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज स्क्रीनिंग को भी शामिल किया गया था। अभियान में 50 हजार से अधिक लोगों में नॉन एल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज की स्क्रीनिंग की गई है। इस सम्बन्ध में मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है जिसमें लीवर के कार्य, लीवर संबंधित समस्याओं, लक्षणों की पहचान, खानपान, व्यायाम एवं जीवनशैली , बी एम आई कैलकुलेशन की जानकारी दी गई है। 
लीवर का मुख्य कार्य रक्त को साफ करना, विषाक्त पदार्थों को हटाना और पोषक तत्वों को संधारित करना,शरीर में ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करना, रक्त के थक्के को बनाए रखना ,पित्त के उत्पादन, प्रोटीन, विटामिन और खनिज पदार्थों के उत्पादन जैसे कई कार्य लीवर 24 घंटे करता रहता है। लीवर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं जिसमें फैटी लिवर , लीवर फाइब्रोसिस,हेपेटाइटिस, सिरोसिस लीवर कैंसर प्रमुख हैं। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि असंचारी रोगों की नियमित जांच करवाकर बीमारियों की गंभीरता को कम किया सकता है । लीवर सम्बन्धी समस्याओं के लिए असंचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम, वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम में सेवाएं निशुल्क दी जा रही हैं।
    माननीय प्रधानमंत्री द्वारा भी खाद्य तेलों के उपयोग को 10% तक कम किए जाने का आह्वान किया गया था। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जीवन शैली संबंधी बीमारियों के उपचार के साथ-साथ इन बीमारियों की रोकथाम के लिए परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है।

सघन टीबी मुक्त भारत अभियान 1 जून से भोपाल सहित पूरे प्रदेश में संचालित, वनरेबल पॉपुलेशन तक पहुंचेंगे स्वास्थ्य कार्यकर्ता

भोपाल- टीबी मुक्त भारत अभियान को विस्तार देते हुए सघन टी बी मुक्त भारत अभियान आज से भोपाल सहित पूरे प्रदेश में संचालित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उपचार प्रदान करना है। इसके पूर्व प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में 100 दिवसीय निक्षय शिविरों का आयोजन 7 दिसंबर से 25 मार्च 2025 तक आयोजित किया गया था। अभियान में मधुमेह के मरीजों, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को लक्षित किया जा रहा है।लक्षण वाले मरीजों में NAAT एवं एक्स-रे जैसी आधुनिक तकनीकों से जांच की जाएगी।
भारत को 2030 तक टीबी उन्मूलन किया जाना है। अभियान के माध्यम से टी बी दर में 80% कमी (43 प्रति लाख), मृत्यु दर में 90% कमी लाना है एवं टी बी मरीज पर आ रहे आर्थिक बोझ को शून्य करना है।मध्यप्रदेश ने 3000 प्रति लाख प्रति वर्ष की राष्ट्रीय वार्षिक औसत दर के लक्ष्य के मुकाबले 3342 प्रति लाख जनसंख्या प्रति वर्ष की वार्षिक अनुमानित टीबी परीक्षण दर हासिल की है। साथ ही वर्ष 2024 में भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 1.90 के विरुद्ध 1.81 टी बी के मरीजों को चिह्नांकित कर उचित उपचार प्रदान किया जा चुका है। जिसमे उपचार सफलता दर 87% रही है।
सरकार द्वारा डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सहायता राशि सीधे मरीजों के खातों में भेजी जा रही है। प्रत्येक टीबी मरीज को ₹1,000 प्रति माह पोषण आहार हेतु दिए जा रहे हैं। विशेष रूप से आदिवासी विकासखंडों के रोगियों को उपचार समाप्ति के पश्चात ₹750 अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को भी आवश्यक भुगतान की व्यवस्था की गई है। 
टीबी मुक्त भारत अभियान के 100 दिवसीय निक्षय शिविर अभियान के दौरान प्रदेश के कुल 23 जिलों में लगभग 7814791 उच्च जोखिम आबादी की टी बी हेतु स्क्रीनिंग की गई। अभियान में 18710 नवीन निक्षय मित्र बनाए गए, 28664 फूड बास्केट वितरित की गई। अभियान के अंतर्गत 30410 टी बी मरीजों को राशि DBT के द्वारा प्रदान की गई। 
इस दिशा में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। जिले में 77 पंचायतें टी बी मुक्त घोषित हो चुकी हैं । "टीबी मुक्त पंचायत" अभियान न केवल पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा दे रहा है।इस महाअभियान में जनप्रतिनिधिगण , कॉर्पोरेट हाउस, जिला कलेक्टर एवं अनेक अधिकारी सक्रिय रूप से सहभागी बन चुके हैं। 
अभियान के तहत पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, ताकि उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्योहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे, और स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा, टीबी शपथ के आयोजन, स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में "नि-क्षय सप्ताह" के आयोजन के तहत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी।
 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, क्रेशरों पर किया जायेगा, ताकि श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जन जागृति के लिए नगर में हुआ नुक्कड़ नाटक का आयोजन

खंडवा- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय,द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर शनिवार को आयोजन खंडवा के घंटाघर चौराहा, बीएस पटेल गोदाम, पॉलिटेक्निक कॉलेज,रेलवे स्टेशन,मयूर उद्योग, जलेबी चौक,रोशनाई गाँव, एवम शहर के अन्य चौराहों पर किया गया।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि इस मौके पर लोगों को नशा छोड़ने का संदेश देने के उद्देश्य से जागरूकता लाने के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया।जहां नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशे से दूर रहने के लिए विद्यार्थियो एवम शहर के नागरिकों को प्रेरित किया गया। बी.के आरती दीदी ने बताया प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों में तम्बाकू निषेध दिवस पर अनेकानेक कार्यक्रम किये गए।दीदी ने कहा कि व्यसन एक ऐसा मार्ग है जो धीमे जहर की तरह हमारे शरीर को नष्ट करता है। तंबाकू के सेवन से हमारा शरीर तो नष्ट होता ही है, बल्कि हमारा घर परिवार भी पीड़ित होता है उन्होंने कहा की भारतवर्ष में 3000 से 3500 के बीच प्रतिदिन लोगों की मृत्यु होती है, जिसका एकमात्र कारण है, तंबाकू का सेवन, धुएँ सहित या धुएँ रहित। उन्होंने स्पष्ट किया धूम्रपान का हमारे फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। 90% फेफड़े का कैंसर मुंह का कैंसर तम्बाकू के कारण होता है, तंबाकू खाने से न केवल व्यक्ति पर उसका प्रभाव पड़ता है बल्कि उसके परिवार पर भी उसका अत्यधिक प्रभाव पड़ता है जिससे परिवार की खुशियां, शांति, सुख सब कुछ नष्ट हो जाता है।इसलिए इसके सेवन से दूर रहें एवम अन्य आस-पास के नागरिकों को भी जागरूक करें दीदी ने बताया की किशोरावस्था में ही पहली बार व्यसन का प्रयोग अपने किसी मित्र के प्रभाव में आकर किया तथा सारी उम्र के लिए व्यसनी बन गए। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को इस व्यसन रुपी दलदल से बचाये।दीदी ने इससे छुटकारा पाने के लिए राजयोग ध्यान के बारे में बताया और कहा कि राजयोग के द्वारा आप सहज ही इन व्यसनों से छुटकारा पा सकते हैं।साथ ही बी.के. सुशीला दीदी द्वारा विद्यार्थीयों को नशा छोड़ने के लिए शपथ दिलाई गई। 
 बी.के किरण दीदी द्वारा नशा मुक्ति के लिए राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करवाया गया एवम संस्था का परिचय दिया गया दीदीयो ने बताया जो व्यसन से दूर हैं, वे अपने आप को मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक तथा बौद्धिक रूप से सदा काल के लिए स्वस्थ रख सकते है, अगर वह राजयोग का नियमित अभ्यास करे इससे प्रेरित होकर शहर के कई नागरिको ने व्यसनौ का त्याग किया कार्यक्रम में पोलीटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य श्रीमान मुकेश वास्कले जी, साथ ही संस्था से जुड़े हरिशंकर शर्मा, अशोक अग्रवाल, रूडमल अग्रवाल, सुनील जैन, नीलम अग्रवाल एवम सभी साथी भाई बहने मौजुद थे।

अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर सद्भावना मंच ने याद किया


खंडवा- राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की जन्म जयंती पर सद्भावना मंच ने उन्हें याद किया। मंच के सदस्य कमल नागपाल ने कहा कि माली कुआं स्थित मंच कार्यालय में हुई इस स्मृति सभा में सद्भावना मंच के अध्यक्ष प्रमोद जैन ने कहा कि देवी अहिल्याबाई न्याय की देवी थी।निमाड़ के पास मालवा की महारानी देवी अहिल्याबाई ने महेश्वर को राजधानी बनाकर शासन किया।
उल्लेखनीय है कि अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में पवित्र मन्दिर बनवाए, घाट बँधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए और काशी विश्वनाथ में शिवलिंग को स्थापित किया।
उनकी जयंती पर सद्भावना मंच उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता है।महारानी अहिल्याबाई की जन्म जयंती पर सद्भावना मंच के अध्यक्ष प्रमोद जैन,पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, सुरेंद्र गीते,गणेश भावसार,आकांक्षा सिसोदिया,एन के दवे,कमल नागपाल,त्रिलोक चौधरी,ओम पिल्ले, डॉ आशाराम पटेल,नदीम खान,मनीष सुभाष मीणा और कैलाश पटेल आदि उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस में विश्व तंबाकू निषेध दिवस युवा विद्यार्थियों ने ली शपथ

खंडवा- प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकण्ठेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय खंडवा में संस्था के संरक्षक एवं प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह के मार्गदर्शन में विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर युवा संगोष्ठी एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संयोजक श्री अमित कुमार अब्राहम, सदस्य डॉ.आशुतोष तिवारी एवं प्रो शर्मिला मीणा ने विद्यार्थियों को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के संदर्भों एवं प्रासंगिकता से विद्यार्थियों का अवगत कराया। सर्वप्रथम श्री अमित कुमार अब्राहम द्वारा विद्यार्थियों को तंबाकू का सेवन न करने एवं तंबाकू के सेवन के दुष्परिणाम से अवगत कराया गया। युवा संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया एवं विचार संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किये । छात्रा प्रीति सिंह द्वारा युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, कारण एवं निवारण पर प्रकाश डाला । छात्र सुभाष निगवाल द्वारा तंबाकू प्रयोग और उसके दुष्परिणाम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए, अपने छात्र साथियों को नशा न करने हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में श्री अमित कुमार अब्राहम द्वारा तंबाकू का प्रयोग न करने हेतु शपथ ग्रहण करवाई गई।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर तंबाकू उत्पादों का सेवन न करने की शपथ शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में दिलाई गई, नुक्कड़ नाटक के माध्यम से तंबाकू का सेवन न करने का दिया संदेश

खण्डवा - प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर 31 मई को शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थाओ व ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू उत्पादों का सेवन न करने व अपने परिजनों, मित्रों या परिचितों को भी तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं करने के लिए जागरुकता शपथ दिलाई गई व अन्य जागरुकता गतिविधियां कर पर्यावरण को भी तंबाकू उत्पादों के उपयोग से होने वालें दुष्प्रभावों से बचाने के लिए आमजन को प्रेरित किया गया।इसी क्रम में मेडिकल कॉलेज सह जिला चिकित्सालय के ए ब्लॉक में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा लोगों को तम्बाकू के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों व उनके बचाव के संबंध में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरुकता का संदेश दिया। 
   सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल ने बताया कि इस वर्ष यह दिवस ’’तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों पर उद्योग की चालों को उजागर करना’’ के विषय पर आयोजित किया गया। नोडल अधिकारी डॉ. सुजीत वर्मा ने बताया कि तंबाकू उपयोग विशेषकर गैर धूम्रपान या चबाने वाला तंबाकू अत्याधिक उपयोग की जाती है, जो कि चिंतनीय है। तंबाकू के सेवन से कैंसर समेत कई बीमारियां हो रही हैं, इसलिए तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जागरूकता लाना भी बहुत जरूरी है। सबसे आवश्यक है कि युवा पीढ़ी को तंबाकू उत्पादों का सेवन करने से बचाएं। इसके लिए सामूहिक सहभागिता जरूरी है। तम्बाकू एक धीमा जहर है, तम्बाकू खाने या धूम्रपान करने से होने वाले नुकसान बहुत है फायदा कुछ भी नहीं । कैंसर होने पर आर्थिक हानि तो होती है, पूरा परिवार भी बिखर जाता है ।तम्बाकू एवं तम्बाकू युक्त गुटको के निरंतर सेवन से मुख के अनेक प्रकार के रोगों में वृद्धि हो रही है, मुख कैंसर जैसे असाध्य रोग से ग्रस्त होकर देशवासी असमय काल के गाल में समा रहे है।राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, कोटपा अधिनियम- 2003 की समस्त धाराओं के बेहतर क्रियान्वयन और जनसमुदाय की सहभागिता और अधिनियम की जानकारी के साथ-साथ राज्य के समस्त जिलों, शैक्षणिक संस्थानों को धूम्रपान मुक्त बनाए जाने के लिए सामूहिक योगदान आवश्यक है। 
         इस दौरान अस्पताल अधीक्षक मेडिकल कॉलेज डॉ. रंजीत बड़ोले द्वारा भी तंबाकू उत्पाद का सेवन न करने के लिए अधिक से अधिक लोगों का जागरुक किया गया।चिकित्सक, स्टॉफ व मरीजों के परिजन मौजूद थे।

दूधतालाई क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया गया, अमृत 2.0 परियोजना को पुनः गति

खंडवा- आज दूधतालाई क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से हो रहे स्थायी अतिक्रमण को जिला प्रशासन एवं नगर निगम की संयुक्त कार्यवाही के तहत हटाया गया। इस कार्यवाही में कुल 19 मकानों को तीन जेसीबी मशीनों की मदद से तोड़ा गया।
अमृत 2.0 के तहत जलाशय पुनर्जीवन कार्य
दरअसल, अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत दूधतालाई जलाशय का पुनर्जीवन कार्य प्रस्तावित है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 60 लाख रुपये है, जिसमें बाउंड्री वॉल निर्माण, स्टोन पिचिंग, 1.5 मीटर चौड़ा पाथवे एवं पौधारोपण का कार्य शामिल है।
कैचमेंट एरिया में वर्षों से अतिक्रमण
लंबे समय से लोगों ने दूधतालाई जलाशय के कैचमेंट एरिया में अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। 10-15 साल पहले कुछ लोगों को एसडीएम कार्यालय से अस्थायी पट्टे जारी किए गए थे, जिनकी वैधता मात्र 1 वर्ष थी। वैधता समाप्त होने के बावजूद लोग यहां स्थायी मकान बनाकर रहने लगे थे। वहीं, कुछ लोग बिना किसी वैध पट्टे के भी यहां रह रहे थे।
पूर्व में दी गई सूचनाएं और नोटिस
प्रशासन द्वारा पूर्व में भी कई बार अतिक्रमण हटाने के निर्देश एवं सूचनाएं दी गई थीं। पिछले तीन माह से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे शासन की महत्त्वाकांक्षी योजना अमृत 2.0 के कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
SDM ने किया क्षेत्र का निरीक्षण, आज हटाया गया अतिक्रमण
एसडीएम श्री बजरंग बहादुर ने परसों स्वयं क्षेत्र का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया एवं आज अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया। आज नगर निगम का अमला, पुलिस बल, अग्निशमन टीम एवं चिकित्सा टीम की उपस्थिति में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सम्पन्न की गई।
अतिक्रमण प्रभावितों के लिए वैकल्पिक आवास
जिन लोगों के मकान इस कार्यवाही में तोड़े गए हैं, उन्हें IHSDP योजना के अंतर्गत बहुत ही कम कीमतों पर वैकल्पिक मकान आवंटित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसमें लोगों को 25,000 रुपये की जमा राशि एवं प्रति माह 1500 रुपये की किश्त जमा करनी होगी। कुल 1,75,000 रुपये में उन्हें वैध आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
आज की कार्यवाही में उपस्थित अधिकारीगण
आज की कार्यवाही में एसडीएम श्री बजरंग बहादुर, आयुक्त श्रीमती प्रियांका राजावत, सीएसपी, उपायुक्त श्री एस.आर. सिटोले, तहसीलदार श्री महेश सोलंकी, कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय, श्रीमती वर्षा घिड़ोड़े, सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्री गौरव खरे, सहायक अग्निशमन अधिकारी श्री कार्तिक जैन, सहायक लाइब्रेरियन श्री सापन जैन, प्रभारी राजस्व अधिकारी श्री हरीश दुबे, उपयंत्री श्री भूपेन्द्र बिसेन, श्री संजय शुक्ला, श्री मनीष झिले एवं समस्त जोन प्रभारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 30 मई 2025

जंबूरी मैदान में प्रधानमंत्रीजी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के लिए व्यापक चिकित्सा व्यवस्था, मुख्य कार्यक्रम स्थल पर महिला चिकित्सकों के हाथों में होगी कमान

भोपाल- जंबूरी मैदान में आयोजित हो रहे लोक माता देवी अहिल्या बाई महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में जनसामान्य के लिए स्वास्थ्य एवं आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग भोपाल द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई है । मुख्य कार्यक्रम स्थल जंबूरी मैदान में 10 बिस्तरीय क्लीनिक बनाया गया है , जिसमें आकस्मिक परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार देकर मरीज को शीघ्र ही रेफरल करने की व्यवस्था की गई है । यहां पर डेढ़ सौ से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है जिनमें से 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। कार्यक्रम की नोडल ऑफिसर भी महिला अधिकारियों को बनाया गया है। 
सम्मेलन को देखते हुए सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है । सीएमएचओ कार्यालय भोपाल द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अवकाश निरस्त करते हुए शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं को निर्धारित समय पर खुले रहने के आदेश जारी किए गए हैं । सभी प्रमुख मार्गों एवं चौराहों पर 108 एंबुलेंस वाहनों की तैनाती की गई है । लगभग 40 एम्बुलेंसेज विभिन्न स्थानों पर तैनात रहेंगी। इसके अलावा बड़ी संख्या में बसों की आवाजाही को देखते हुए भोपाल पहुंचने के सभी राजमार्गों पर भी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है जो मिनिमम रिस्पांस टाइम में सेवाएं देंगी। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि वी वी आई पी ड्यूटी, एयरपोर्ट, हेलीपेड इत्यादि के अतिरिक्त जनसामान्य के लिए सभी चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं की कमान महिला चिकित्सकों एवं महिला स्वास्थ्य कर्मियों के हाथों में रहेगी।

देवतलाब एवं बैड़ी के कुल 5 मतदान केन्द्रो पर मॉक पोल संपन्न हुआ

हरदा- पंचायत उप निर्वाचन 2025 के लिए पेपर लेस बूथ का आयोजन ग्राम पंचायत देवतलाब के 2 मतदान केन्द्र एवं बैड़ी के 3 मतदान केन्द्रो पर शुक्रवार को मॉकपोल का आयोजन किया गया। जिसमे श्री मनोज मालवीय, उप सचिव म०प्र०राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सभी मतदान केन्द्रा में मॉकपोल का निरीक्षण किया गया। इस दौरान श्रीमती नम्रता सोनी, प्रोग्रामर म०प्र०राज्य निर्वाचन आयोग भोपाल, श्री संजीव कुमार नागु संयुक्त कलेक्टर, श्री अशीष मिश्रा नायब तहसीलदार हंडिया भी उपस्थित रहे।

खंडवा शहर में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संपन्न

खंडवा- आज एसडीएम श्री बजरंग बहादुर, उपायुक्त श्री एस.आर. सिटोले एवं तहसीलदार के नेतृत्व में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संपन्न की गई। कार्यवाही की शुरुआत आनंद नगर क्षेत्र से की गई, जहाँ रामेश्वर पुलिया के पास से एक टब/ गुमटी को हटाया गया तथा 8-10 प्रतिष्ठानों के टीन शेड्स को जेसीबी की सहायता से तोड़ा गया। इस दौरान संबंधित लोगों को समझाइश दी गई कि वे भविष्य में अवैध अतिक्रमण न करें।
संमती नगर में भी कार्यवाही
उक्त कार्यवाही के पश्चात संमती नगर में भी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई। जहाँ मंदिर के पास एक टब रखा हुआ था तथा कुछ मवेशी बांधे हुए थे, जिससे स्थानीय निवासियों को आवाजाही में समस्या हो रही थी। टब हटाते हुए सख्त समझाइश दी गई कि भविष्य में आवागमन में कोई अवरोध उत्पन्न न हो।
अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति
अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही में एसडीएम, उपायुक्त एवं तहसीलदार के अतिरिक्त सहायक लाइब्रेरियन श्री सपन जैन , कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय, प्रभारी राजस्व अधिकारी श्री हरीश दुबे, श्री अजय सारसर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

लायन्स क्लब खण्डवा ओजस के 25-26 सर्वसम्मति से चुनाव सम्पन्न, लायन रजनी शर्मा बनी अध्यक्ष , लायन लिट्टी मैथ्यू सचिव एवं लायन इंद्रदीप कौर बनी कोषाध्यक्ष

खण्डवा- लायन्स क्लब खण्डवा ओजस के वर्ष 2025-26 के चुनाव सर्वसम्मति से सम्पन्न हुए।अध्यक्ष लायन प्रेरणा दुबे की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एवं सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से साधारण सभा मे 1 जुलाई 2025 से प्रारम्भ होने वाले नए सत्र के लिए अध्यक्ष लायन रजनी शर्मा, प्रथम उपाध्यक्ष लायन दीपाली खोती, द्वितीय उपाध्यक्ष लायन सरिता राजोरिया, लायन लिट्टी मैथ्यू सचिव व लायन इंद्रदीप कौर कोषाध्यक्ष नियुक्त। लायन्स क्लब खण्डवा ओजस के महत्वपूर्ण पदों पर सर्वसम्मति से निर्वाचित होने पर अध्यक्ष एवं डिस्ट्रिक्ट चेयर पर्सन लायन प्रेरणा दुबे, डिस्ट्रिक्ट चेयर पर्सन लायन संजना खत्री, डिस्ट्रिक्ट चेयर पर्सन लायन हर्षा शर्मा एवं सभी लायन एवं लियो साथियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाईयां दी।

भोपाल में हुए प्रशिक्षण शिविर में खंडवा की मातृशक्ति ने भाग लिया

खंडवा- सिंधी साहित्य अकादमी एवं मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा सिंधी भाषा, सिंधी गीत, सिंधु संस्कृति एवं महापुरुषों, संतो की विस्तृत जानकारी हेतु दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर "सिंधियत जी पाठशाला" प्रदेश की राजधानी भोपाल में लालघाटी स्थित एक निजी होटल के सभागृह में आयोजित किया गया।
सिंधी समाज के प्रवक्ता कमल नागपाल ने बताया कि इसमें प्रदेश के अनेक शहरों जैसे इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, इटारसी, बैतूल, नर्मदा पुरम, छतरपुर, डबरा, विदिशा, टीकमगढ़ सहित खंडवा से महिला एवं पुरुष प्रशिक्षणार्थियों ने अनुभवी प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्राप्त किया।इस आयोजन में खंडवा से दो महिला प्रशिक्षु रानी जयरामदास खेमानी एवं मनीषा संतवाणी ने भाग लिया।जिसका लाभ स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर समाज के बालक बालिकाओं को दिया जाएगा।यह शिविर एक से 15 जून तक खंडवा में आयोजित होगा।श्रीमती रानी खेमानी को सिंधी भाषा प्रशिक्षण हेतु एवं जन्म दिवस पर श्री झूलेलाल समर्थ महिला मंडल एवं लीनेस क्लब चेयर पर्सन द्वारा सम्मानित भी किया गया।

एम.पी. ट्रांसको का नवाचार: अत्याधुनिक फोटे तकनीक से सबस्टेशनों में आटोमेशन और टेलीप्रोटेक्शन को मिलेगी नई मजबूती

जबलपुर- देश की अग्रणी विद्युत ट्रांसमिशन कंपनियों में से एक एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने एक और तकनीकी नवाचार करते हुए अपने एकस्ट्रा हाई सबस्टेशनों में फाइबर ऑप्टिक टर्मिनल उपकरण (फोटे) तकनीक को स्थापित कर उसका उपयोग प्रारंभ कर दिया है। यह तकनीक चरणबद्ध तरीके से विभिन्न सबस्टेशनों में लागू की जा रही है। ट्रांसमिशन एलीमेंट्स की सुरक्षा, संचार और निगरानी व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और विश्वसनीय बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। 
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को प्रदेश में तीन जोन बनाकर पूरा किया जा रहा है। यह तकनीक अति उच्च-दाब सबस्टेशनों एवं एम.पी. ट्रांसकों से जुडे़ जनरेशन सबस्टेशनों में लागू की गई है। श्री तोमर ने इस सफलता के लिए बधाई दी है। 
रियल टाइम मॉनिटरिंग हुई आसान- एम पी ट्रांसको में इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग और टेंडरिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधीक्षण अभियंता श्री मनीष खरे ने बताया कि फोटे एक अत्याधुनिक ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसका उपयोग फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, उपकरणों और प्रणालियों के आटोमेशन, टेलीप्रोटेक्शन और ट्रांसमिशन एलिमेंटस की निगरानी के लिए किया जाता है, इस तकनीक की मदद से सबस्टेशनों में लगे ट्रांसफॉर्मर्स और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की निगरानी रियल टाइम में संभव हो सकेगी। भविष्य में इस प्रणाली से प्रोटेक्शन रिले की सेटिंग व फॉल्ट रिपोर्ट भी सेन्ट्रालाइज भी की जा सकेगी।
ट्रांसमिशन सिस्टम में ओपीजीडब्ल्यू के माध्यम से फोटे का सफल क्रियान्वयनः प्रदेश के ट्रांसमिशन सिस्टम में ओ.पी.जी.डब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) के माध्यम से फाइबर ऑप्टिक ट्रांसमिशन इक्विपमेंट (फोटे) का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। ट्रांसकों का डेडिकेटेड कम्यूनिकेशन सिस्टम होने के कारण इस तकनीक से एम.पी. ट्रांसकों प्रणाली के संचालन में रियल टाइम डेटा संप्रेषण, बेहतर निगरानी, तेज संचार और सायबर खतरों से उच्च सुरक्षा संभव हो सकी है।

गुरुवार, 29 मई 2025

10 दिवसीय CYL समर कैंप का उत्साहपूर्वक शुभारंभ

खंडवा - खंडवा जिले के ग्राम टिमरनी, गारबेड़ी में 10 दिवसीय CYL समर कैंप का शुभारंभ सफलतापूर्वक किया गया। इस कैंप का आयोजन CYL शिवानी राठौर एवं जयराम के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बच्चों ने प्रथम दिन की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समर कैंप के पहले दिन रचनात्मक एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। शिवानी और जयराम द्वारा बच्चों को पत्तों से जानवरों और पक्षियों की आकृति निर्माण की गतिविधि में भाग लेने का अवसर दिया गया। जिससे उनकी रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को बल मिला। इसके अतिरिक्त, परिचय पत्र निर्माण गतिविधि के माध्यम से बच्चों ने स्वयं के बारे में जानकारी साझा करना सीखा और आत्म-अभिव्यक्ति के कौशल को विकसित किया।
बच्चों ने सभी गतिविधियों में अत्यंत रुचि और उत्साह दिखाया तथा अपने अनुभवों को भी खुले मन से साझा किया। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी गतिविधियाँ उन्हें बहुत पसंद आईं और वे आगामी दिनों की गतिविधियों को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीण समुदाय का सहयोग भी सराहनीय रहा, जिनके समर्थन से वातावरण और अधिक सकारात्मक और सहयोगात्मक बना। यह समर कैंप आने वाले दस दिनों तक बच्चों के सामाजिक, मानसिक और रचनात्मक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सद्भावना मंच सदस्यों ने मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा प्रताप को किया नमन

खंडवा- सदभावना सदस्यों व्दारा मंच संस्थापक प्रमोद जैन के नेतृत्व में मालीकुआं स्थित मंच कार्यालय में आयोजित सभा में वीर योद्धा महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि के अवसर पर नमन कर पुष्पांजलि अर्पित की। यह जानकारी देते हुए मंच ने बताया कि सभा के पूर्व विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित करणी सेना के राष्ट्रीय महामंत्री पंकज राज सिंह सहित मंच सदस्यों ने महाराणा प्रताप के छाया चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। पुष्पांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए श्री सिहं ने कहा कि महाराणा प्रताप मेवाड़ के वीर योद्धा थे, जिन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने जीवन भर मुगलों के खिलाफ संघर्ष किया और अपने राज्य की रक्षा की। महाराणा प्रताप की वीरता और साहस की कहानियां आज भी भारत में प्रेरणा का स्रोत हैं। वही मंच संस्थापक प्रमोद जैन ने कहा कि ऐसे योध्दा के पद चिन्हों पर चल कर हमें राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस अवसर पर मंच के प्रमोद जैन, पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, डा. जगदीशचंद्र चौरे, डा.विरेंद्र लाड, अर्जुन सिहं राठौड़, डा. आशाराम पटेल, सुरेंद्र गीते, देवेंद्र जैन, गणेश भावसार, कमल नागपाल, नारायण फरकले, निर्मल मंगवानी, राधेश्याम शाक्य, एनके दवे, अवधेश सिहं सोलंकी, जयदीप सिहं जाधम, विराज राठौड़, अनिता धोतरे, अनिष्का वैणानी, अशोक पारवानी, योगेश गुजराती आदि सहित सद्भावना मंच सदस्य उपस्थित थे।

रीवा में विकास के सभी क्षेत्रों में तेज गति से किए जा रहे हैं कार्य: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल, 2 करोड़ 63 लाख रुपए लागत से निर्मित विद्युत उपकेन्द्र का किया लोकार्पण

भोपाल: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा में विकास के सभी क्षेत्रों में तेज गति से कार्य किए जा रहे हैं। मीठे पानी की सुनिश्चितता के साथ ही बिजली की सुविधा व सड़कों के चौड़ीकरण के कार्य प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रीवा में 2 करोड़ 63 लाख रुपए की लागत से निर्मित 33/11 केव्ही विद्युत उपकेन्द्र पी.टी.एस. शहर संभाग रीवा का लोकार्पण किया। उन्होंने विभाग द्वारा निर्धारित समय से पूर्व विद्युत उपकेन्द्र की स्थापना किए जाने की प्रशंसा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विद्युत उपकेन्द्र का फीता काटकर एवं शिलापट्टिका का अनावरण कर लोकार्पण किया। उन्होंने परिसर में वृक्षारोपण भी किया।
    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हमारा यह प्रयास है कि रीवा को प्रदेश के महानगरों में स्थान मिले और लोग यहाँ के विकास को उदाहरण के तौर पर देखें। रीवा के सर्वांगीण विकास के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में देश व प्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। रीवा भी विकास की इस धारा में शामिल है। रीवा में अधोसंरचना विकास के साथ ही जनकल्याण के सभी कार्य प्राथमिकता से कराए जा रहे हैं। अध्यक्ष नगर निगम श्री व्यंकटेश पाण्डेय, अधीक्षण यंत्री श्री बृजेश कुमार सहित विद्युत मण्डल के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्थानीय जन उपस्थित रहे।

"विकसित कृषि संकल्प अभियान" के तहत ग्राम बारंगी, बारंगा मे कार्यक्रम सम्पन्न

हरदा- विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत ग्राम बारंगी व बारंगा मे गुरूवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार साहनी ने कृषि के क्षेत्र में मशीनों का उपयोग एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ड्रोन के कृषि में विभिन्न उपयोग जैसे दवाओं का छिड़काव, उर्वरक का छिड़काव, पैदावार का अनुमान, फसलों में बीमारी का अनुमान आदि के बारे में किसानों को जानकारी दी।    
          कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र हरदा के वैज्ञानिक डॉ मुकेश कुमार बंकोलिया ने किसानों को आगामी खरीफ फसल उत्पादन तकनीक,मिट्टी परीक्षण, प्राकृतिक खेती, पौध संरक्षण इत्यादि की जानकारी दी। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री टी. आर. चौहान व उद्यानिकी विभाग के अधिकारी श्री गम्भीर जाट ने विभागीय योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम सम्पन्न

हरदा- “विकसित कृषि संकल्प अभियान“ का संचालन खरीफ पूर्व 29 मई से 12 जून तक किया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम गुरूवार को जिला पंचायत हरदा के सभाकक्ष में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गजेन्द्र शाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री दर्शनसिंह गहलोद, कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती सविता झानिया सहित कृषि से संबद्ध विभागो के अधिकारी कर्मचारी एवं किसान भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने प्राकृतिक खेती एवं अन्य विषयों से संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर विकासखंडों के लिये वैज्ञानिक दलों के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
         जिला पंचायत अध्यक्ष श्री शाह ने इस अवसर पर किसानों से फसलों में रासायनिक दवाई का उपयोग कम करने और जैविक व प्राकृतिक खेती अपनाने का अनुरोध किया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री गहलोद ने किसानों को प्राकृतिक, जैविक खेती एवं अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री जैन ने किसानों को सलाह दी कि प्राकृतिक व जैविक खेती अपनाएं, इससे लागत कम होगी और आय बढ़ेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि खेतों में नरवाई न जलाये इससे पर्यावरण खराब होता है और खेतों की मिट्टी की उत्पादक क्षमता कम होती है। कार्यक्रम में भारत सरकार के वैज्ञानिको ने भी किसानों को संबोधित किया। 
         कार्यक्रम में उप संचालक कृषि श्री कास्दे ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान“ की रूप रेखा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “विकसित कृषि संकल्प अभियान“ के जिले में सफल क्रियान्वयन के लिये राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली, कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्यपालन, कृषि अभियांत्रिकी, कृषि उद्यमी एवं प्रगतिशील कृषको के माध्यम से जिले के तीनो विकासखंडों में 29 मई से 12 जून तक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान प्रत्येक विकासखंड में प्रतिदिन 3-3 ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजन किया जायेगा। उन्होने किसानों को फसल विविधीकरण और फसलों की किस्मों के सम्बन्ध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत फसलों की बुवाई की पद्धति, उन्नत कृषि व सिंचाई यन्त्र, मृदा स्वास्थ कार्ड की अनुशंसा अनुसार उर्वरको का उपयोग करने तथा विभागीय योजनाओ, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सम्बन्ध में किसानों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में आईसीएआर के वैज्ञानिक डॉ. अभिनाशदास, डॉ. राहुल मिश्र, परियोजना संचालक आत्मा श्री संजय यादव, सहायक संचालक उद्यानिकी श्री विजय सिंह, सहायक संचालक मत्स्य श्री संदीप वर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संध्या मुरे सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

बुधवार, 28 मई 2025

खंडवा विधायक कंचन तनवे ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह से की मुलाकात, खंडवा मुंदी मार्ग की निविदा एवं हापला दीपला सड़क मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण को लेकर पत्र सौंपा

खंडवा- निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का दायित्व होता है कि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र के विकास एवं जनता की सेवा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए, खंडवा विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए खंडवा विधायक कंचन मुकेश तनवे लगातार सक्रिय प्रयास कर रही है, प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि खंडवा मुंदी के आसपास की जनता काफी दिनों से खंडवा मुंदी मार्ग के नवीनीकरण की मांग कर रही है,जिसको देखते हुए विधायक कंचन तनवे द्वारा लगातार लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह से मुलाकात कर निर्माण की मांग की जा रही है। खण्डवा-मूंदी मार्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। जो वर्तमान समय में अत्यंत जर्जर अवस्था में होने के कारण रोज दुर्घटनायें हो रही है, प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि विधायक कंचन तनवे एवं मांधाता विधायक नारायण पटेल के प्रयासों से अनुपुरक बजट में पहले ही खण्डवा-मूंदी मार्ग का बजट पास हो चुका है। अत: निविदा न होने के कारण रोड का कार्य प्रारंभ होने में देरी की और माननीय मंत्री श्री राकेश सिंह जी का ध्यान आकर्षित कराते हुये, उनसे जल्द निविदा कर रोड का कार्य प्रारंभ करने का निवेदन किया गया। इस प्रयास में मांधाता विधायक नारायण पटेल भी साथ रहे। सुनील जैन ने बताया कि भोपाल प्रवास के दौरान खंडवा विधायक कंचन मुकेश तनवे नए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह से मुलाकात कर पत्र सोपते हुए मुंदी खंडवा मार्ग की निविदा शीघ्र पूर्ण करवाने एवं विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हापला दीपला को जोड़ने वाले रास्ते पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण करने का भी पत्र सौंपा।

हमारे देवी - देवताओं के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी

हिन्दू देवी-देवता
हिंदू देववाद पर वैदिक, पौराणिक, तांत्रिक और लोकधर्म का प्रभाव है। वैदिक धर्म में देवताओं के मूर्तग रूप की कल्पना मिलती है। वैदिक मान्यता के अनुसार देवता के रूप में मूलशक्ति सृष्टि के विविध उपादानों में संपृक्त रहती है। एक ही चेतना सभी उपादानों में है। यही चेतना या अग्नि अनेक स्फुर्लिंगों की तरह (नाना देवों के रूप में) एक ही परमात्मा की विभूतियाँ हैं। (एकोदेव: सर्वभूतेषु गूढ़:)।
महत्त्वपूर्ण जानकारी
वैदिक देवताओं का वर्गीकरण तीन कोटियों में किया गया है - पृथ्वीस्थानीय, अंतरिक्ष स्थानीय और द्युस्थानीय। अग्नि, वायु और सूर्य क्रमश: इन तीन कोटियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हीं त्रिदेवों के आधार पर पहले 33 और बाद को 33 कोटि देवताओं की परिकल्पना की गई है। 33 देवताओं के नाम और रूप में ग्रंथभेद से बड़ा अंतर है। ‘शतपथ ब्राम्हण’ (4.5.7.2) में 33 देवताओं की सूची अपेक्षाकृत भिन्न है जिनमें 8 वसुओं, 11 रुद्रों, 12 आदित्यों के सिवा आकाश और पृथ्वी गिनाए गए हैं। 33 से अधिक देवताओं की कल्पना भी अति प्राचिन है। ऋग्वेद के दो मंत्रों में (3.9.9; 10. 52. 6) 3339 देवताओं का उल्लेख है। इस प्रकार यद्यपि मूलरूप में वैदिक देववाद एकेश्वरवाद पर आधारित है, किंतु बाद को विशेष गुणवाचक संज्ञाओं द्वारा इनका इस रूप में विभेदीकरण हो गया कि उन्होंने धीरे धीरे स्वतंत्र चारित्रिक स्वरूप ग्रहण कर लिया। उनका स्वरूप चरित्र में शुद्ध प्राकृतिक उपादानात्मक न रहकर धीरे धीरे लोक आस्था, मान्यता और परंपरा का आधार लेकर मानवी अथवा अतिमानवी हो गया।
वेदोत्तर काल में पौराणिक तांत्रिक साहित्य और धर्म तथा लोक धर्म का वैदिक देववाद पर इतना प्रभाव पड़ा कि वैदिक देवता परवर्ती काल में अपना स्वरूप और गुण छोड़कर लोकमानस मे सर्वथा भिन्न रूप में ही प्रतिष्ठापित हुए। परवर्ती काल में बहुत से वैदिक देवता गौण पद को प्राप्त हुए तथा नए देवस्वरूपों की कल्पनाएँ भी हुई। इस परिस्थिति से भारतीय देववाद का स्वरूप और महत्व अपेक्षाकृत अधिक व्यापक हो गया।
हिंदू धर्म में कोई भी उपासक अपनी रुचि के अनुसार अपने देवता के चुनाव के लिये स्वतंत्र था। तथापि शास्त्रों में इस बात की व्यवस्था भी बताई गई कि कार्य और उद्देश्य के अनुसार भी देवता की उपसना की जा सकती है।
इस प्रकार नृपों के देवता विष्णु और इंद्र, ब्राह्मणों के देवता अग्नि, सूर्य, ब्रह्मा, शिव निर्धारित किए गए है। एक अन्य व्यवस्था के अनुसार विष्णु देवताओं के, रुद्र ब्राह्मणों के, चंद्रमा अथवा सोम यक्षों और गंधर्वो के, सरस्वती विद्याधरों के, हरि साध्य संप्रदायवालों के, पार्वती किन्नरों के, ब्रह्मा और महादेव ऋषियों के, सूर्य, विष्णु और उमा मनुओं के, ब्रह्मा ब्रह्मचारियों के, अंबिका वैखानसों के, शिव यतियों के, गणपति या गणेश कूष्मांडों या गणों के विशेष देवता निर्धारित किए गए हैं। किंतु समान्य गृहस्थों के लिये इस प्रकार का भेदभाव नहीं लक्षित है। उनके लिये सभी देवता पूजनीय हैं। (गृहस्थानाञ्च सर्वेस्यु:)
हिंदू देवपरिवार का उद्भव ब्रह्मा से माना जाता है। त्रिदेव में ब्रह्मा प्रथम हैं। भारतीय धारणा के अनुसार ब्रह्मा ही स्त्रष्टा हैं और वे ही प्रजापति हैं।
वे एक हैं और उनकी इच्छा कि मैं बहुत हो जाऊँ (एकोऽहं बहु स्याम्‌) ही विश्व की समृद्धि का कारण है। मंडूक उपनिषद् में ब्रह्मा को देवताओं में प्रथम, विश्व का कर्ता और संरक्षक कहा गया है। कर्ता के रूप में वैदिक साहित्य में ब्रम्हा का परिचय विभिन्न नामों से दिया गया है, यथा विश्वकर्मन्‌, ब्रह्मस्वति, हिरणयगर्भ, प्रजापति, ब्रह्मा और ब्रह्मा। पुराणों में इन नामों के अतिरिक्त धाता, विधाता, पितामह आदि भी प्रचलित हुए। वैदिक साहित्य की अपेक्षा पौराणिक साहित्य में ब्रह्मा का महत्व गौण है। उपासना की दृष्टि से जो महत्ता विष्णु, शिव, यहाँ तक की गणपति और सूर्य को प्राप्त है, वह भी ब्रह्मा को नहीं मिला, किंतु वैदिक देवताओं में प्रजापति के रूप में ब्रह्मा सर्वमान्य हैं और इस रूप में वे आकाश और पृथ्वी को स्थापित करने वाले तथा अंतरिक्ष में व्याप्त रहते हैं। ये समस्त विश्व और समस्त प्राणियों को अपनी भुजाओं में आबद्ध किए रहते है। इस प्रकार ऋग्वेद में ब्रह्मा का अमूर्त रूप ही अथर्व मान्य है। मानवी रूप में इनकी कल्पना भी बड़ी प्राचीन है। अथर्व और बाजसनेयी संहिता में भी वे सर्वोपरि देवता के रूप में स्वीकार किए गए हैं। शतपथ ब्राह्मण (11। 1। 6। 14।) में उन्हें देवों के पिता तथा इसी ग्रंथ में अन्यत्र (2। 2। 4। 1) कहा गया है कि सृष्टि के आदि में भी ब्रह्मा का अस्तित्व था। मैत्रयणी संहिता में (4। 212।) प्रजापति के अपनी पुत्री उषस पर आसक्त होने की कथा मिलती है जो परवर्ती साहित्य में विस्तृत रूप से दुहराई गई है। इस कथा के प्रति नैतिक दृष्टिकोण के कारण परवर्ती समाज में ब्रह्मा की मान्यता घटती गई। ब्रह्मा का स्वभाव भी उनकी लोकप्रियता में बाधक हुआ। संप्रदाय देवता के रूप में वे विष्णु और शिव की तरह लोकप्रिय न हुए तथा तपस्‌ और यज्ञ के विशेष हिमायती होने के कारण भक्ति के विशेष पात्र न हो सके। साथ हीं विष्णु और शिव का विरोध करनेवाले असुर और देवों पर भी वे सहज ही अनुकंपा करते थे अतएव दोनों ही संप्रदायवालों ने इनकी उपेक्षा की है। ब्रह्मा धीरे धीरे हिंदू पुराकथा में इतना महत्वहीन हो जाते हैं कि जैसा मधु कैटभ की कथा से पता चलता है, वे अपनी ही सुरक्षा में असमर्थ सिद्ध होते हैं तथा विष्णु की कृपा की अपेक्षा करते हैं। वैष्णव और शैव दोनों ही संप्रदायवाले अपने आराध्य देव विष्णु और शिव को ब्रह्मा का आराध्य देव मानते हैं। इस प्रकार के दृष्टिकोण का प्रभाव भारतीय धर्म पर यह पड़ा कि उस देवता के आधार पर भारत में न तो कोई धार्मिक संप्रदाय खड़ा हो सका और न उपास्य देव के रूप में ब्रह्मा की पृथक मूर्तियाँ ही प्रचुरता से स्थापित हुई। ब्रह्मा के मंदिर बहुत ही कम मिलते हैं। शास्त्रविधान के अनुसार उपास्य देव के रूप में ब्रह्मा का पूजा केवल वैदिक ब्राह्मणों को ही करनी चाहिए।
पुराणों तथा शिल्पशास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा चतुर्मुख हैं। इनके चार हाथों में अक्षमाला, श्रुवा, पुस्तक और कमंडलु प्रदर्शित कराने का विधान है। ग्रंथभेद से ब्रह्मा के आयुधभेद भी हैं। युगभेद के अनुसार इन्हें कलि में कमलासन, द्वापर में विरंचि, त्रेता में पितामह और सतयुग में ब्रह्मा के नाम से कहा गया है। इनकी सावित्री और सरस्वती दो शक्तियाँ हैं। सावित्री का स्वरूप विधान ब्रह्मा के अनुरूप ही निश्चित किया गया है। ब्रह्मा के अष्ट प्रतिहारों को सत्य, धर्म, प्रियोद्भव, यज्ञ विजय, यज्ञभद्रक, भव और विभव के नाम से जाना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की स्थिति में विष्णु की ‘इच्छा’ ही प्रधान है। सृष्टि का परिपालन विष्णु अपनी शक्ति लक्ष्मी के सहयोग से करते हैं। विष्णु ‘इच्छा’ के प्रतीक हैं, लक्ष्मी ‘भूति’ और ‘क्रिया’ की। इस प्रकार इच्छा, ‘भूति’ और ‘क्रिया’ से षड्गुणों की उत्पत्ति हेती हैं। षड्गुण ज्ञान, ऐश्वर्य, शक्ति, बल, वीर्य और तेजस्‌ हैं। ये ही सृष्टि के उपादान हैं। इन्हीं में से दो दो गुणों से तीन मूर्त रूप बनते हैं जो लोक में संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हैं। वासुदेव में सभी गुण हैं। आदि वासुदेव के आधार पर गुप्तयुग में चतुर्विशति विष्णुओं की कल्पना की गई। इनके नाम क्रमश: वासुदेव, केशव, नारायण, माधव, पुरुषोत्तम, अधोक्षज, संकर्षण, गोविंद, विष्णु, मधुसुदन, अच्युत, उपेंद्र, प्रद्युम्न, त्रिविक्रम, नरसिंह, जनार्दन, वामन, श्रीधर, अनिरुद्ध, हृषीकेश, पद्मनाभ, दामोदर, हरि और कृष्ण हैं।
विष्णु के अवतार भारतीय धर्म और आस्था पर विशेष प्रभाव रखते हैं। अवतारवाद की भावना वैदिक है। ‘शतपथ’ और ‘ऐतरेय’ ब्राह्मणों में विष्णु के मत्स्य, कूर्म और वाराह अवतारों की चर्चा है। ग्रंथभेद से विष्णु के अवतारों और उनकेक्रम आदि में बड़ा अंतर है किंतु सामान्यतया अवतारों की संख्या दस मानी जाती है। मूर्तिविधान की दृष्टि से दशावतार का विवेचन करते हुए शिल्पशास्त्रों ने मत्स्य और कूर्म को यथाकृति बनाने का निर्देश किया है। नरसिंह का मुख सिंह की तरह और भयंकर दाँतों तथा भौंहों से युक्त बनाना चाहिए। वाराह वाराहमुख हैं और उनके आयुध गदा और कमल हैं। नरसिंह के भी यह आयुध हैं। वाराह के दंष्ट्राग्र पर पृथ्वी स्थित है। गुप्त युग में वाराह के इस स्वरूप का अत्यंत कलात्मक प्रदर्शन उरयगिरि गुहा (भिलसा) में किया गया है। वामन को शिखा सहित और श्याम वर्णवाला कहा गया है। उनके एक हाथ में दंड और दूसरे में जल पात्र प्रदर्शित किया जाता है वे छत्र भी धारण करते हैं। तक्षशिला से प्राप्त वामन विष्णु की एक प्रतिमा चतुर्भुज है जिनमें पद्म, शंख, चक्रश् और गदा धारण किया है। परशुराम को जटाधारी तथा बाण और परशु सहित प्रदर्शित करना चाहिए। दाशरथि राम श्याम वर्ण के हैं और धनुष बाण धारण करते है। बलराम का आयुध मूसल है। बुद्ध हिंदू शिल्पशास्त्रों के अनुसार पद्मासनस्थ हैं, काषायवस्त्र धारण करते हैं, रक्त वर्ण के तथा द्विभुज हैं और त्यक्त आभूषण हैं। कल्कि को शास्त्रों ने अश्वारूढ़ और खड्गधारी कहा है।
विष्णु के कुछ विशिष्ट स्वरूप भी हैं। जलशायी विष्णु का स्वरूप गुप्तयुग में भी विशेष मान्यता प्राप्त था। देवगढ़ के मंदिर में जलशायी विष्णु की बड़ी सुंदर प्रतिमा अंकित है। जलशायी बिष्णु को सुप्तदर्शित किया जाता है। वे दाएँ करवट लेटे दिखाए जाते हैं और बाएँ हाथ में पुष्प लिए रहते है। नाभि से एक कमल निकला होता है जिस पर ब्रह्मा आसीन होते हैं। पाँयताने उनकी शक्तियाँ श्री और ‘भूमि’ प्रदर्शित की जाती हैं तथा पार्श्व में मधुकैटभ भी प्रदर्शित किया जाता है।
चतुर्मुख प्रकार की कुछ विष्णुमूर्तियाँ, बैकुंठ, अनंत, त्रैलोक्य मोहन और विश्वमुख के नाम से जानी जाती हैं। वैकुंठ अष्ठभुज, अनंत द्वादशभुज, त्रैलोक्य मोहन, श् षोडशभुज और विश्वमुख विंशति भुज होते हैं। वैकुंठ, त्रैलोक्य मोहन और अनंत और विश्वमुख के चार मुख क्रमश: नर, नारसिंह, स्त्रीमुख और वराहमुख होते हैं। त्रैलोक्य मोहन की प्रतिमा में वराह आनन की जगह कभी कभी कपिलानन बनाया जाता है।
विष्णु का वाहन गरुड़ है और उनके अष्ट प्रतिहारों के नाम चंड, प्रचंड, जय, विजय, धाता, विधाता, भद्र और समुद्र हैं।
मूर्तिशास्त्र की दृष्टि से विष्णु और सूर्य के मूल स्वरूप में बड़ी समानता है। किंतु पंचदेवों में इनका विष्णु से पृथक्‌ स्थान है। वैदिक काल से ही सूर्य का महत्व हिंदू देववाद में स्वीकर किया गया। ई0 पू0 प्रथम शती से सूर्योपासना के प्रति निष्ठा सांप्रदायिक रूप ले बैठी। गुप्तयुग में भी सूर्य की पूजा के प्रति लोकरुचि उग्रतर होती गई। मध्यकाल में, विशेषकर बंगाल में सूर्य का विष्णु के समान ही महत्व माना गया। बौद्ध और जैन धर्म में सूर्य के प्रति उपासना का भाव व्यापक हुआ। भाजा बौद्ध गुफा में तथा अनंत (उड़ीसा) की जैन गुफा में सूर्य की प्राचीन मूर्तियाँ अंकित हैं।
प्रतिमाविधान की दृष्टि से सूर्य के स्वरूप में कई भेद हैं। कमलासन मूर्तियाँ प्राय: द्विभुज होती हैं, जिनमें श्वेत कमल होता है तथा वे सप्ताश्वरथ मे प्रदर्शित की जाती हैं। पुराणों उदीच्यवेशी सूर्य की प्रतिमा का विशेष वर्णन मिलता है, जिनमें सूर्य ईरानी देवताओं की तरह लंबा कोट और बूट भी धारण करते है। ऐसी उदीच्यवेशी सूर्यप्रतिमाएँ रथारूढ़ भी प्रदर्शित होती हैं। मथुरा कला में सूर्य का यह रूप विशेष लोकप्रिय हुआ। दाक्षिणात्य परंपरा में सूर्य लंबा कोट और बूट नहीं धारण करते। सूर्य के साथ उनकी पत्नियाँ निशभा (या छाया) तथा राज्ञी (अथवा प्रभा वा वचंसा) भी प्रदर्शित की जाती हैं। सूर्य के सात घोड़े सूर्य की सात रश्मियों के प्रतीक हैं।
सूर्य का नवग्रह में प्रथम स्थान है। शेष आठ ग्रह, सोम, कुज, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु हैं। सभी ग्रह किरीट और रत्नकुंडल धारण करते हैं। उनके वर्ण और वाहन भिन्न भिन्न हैं।
शिव का त्रिदेव में विशिष्ट स्थान है। वैदिक रुद्र का पौराणिक शिव से प्रत्यक्ष मेल तो नहीं बैठता किंतु इसके आधार पर शिवोपासना वेदोत्तर भी नहीं मानी जा सकती। सिंधुघाटी की सभ्यता में ध्यानयोगी और पशुपति शिव का आकलन हुआ है। शिव संहार के प्रतीक हैं, किंतु सांप्रादायिक भावुकता की अतिरेकता में इन्हें सृष्टि की स्थिति और स्थायित्व का भी कारण समझा जाता है। शिव के दो रूप हैं -एक सौम्य और दूसरा उग्र। सौम्य रूप में शिव गुणातीत हैं और ‘शिव’ हैं। उनका वाहन नंदी ‘धर्म’ का प्रतीक है। उग्र रूप में शिव भैरव हैं और संहार के प्रतीक हैं। दे0 ‘महादेव’।
शिव परिवार में गणेश और कार्तिकेय आते हैं। किंतु इनकी पूजा प्रधान देवों के रूप में भी होती है। दे0 ‘गणेश’तथा ‘कार्तिकेय’।
लोकदेवता के रूप में अष्ट लोकपालों की विशेष मान्यता है। इनमें अधिकांश वैदिक देवता है जो पौराणिक युग में अपना पूर्वमहत्व खोकर अष्टदिक्‌पालों की केटि में आ गए। फिर भी इनका महत्व निरंतर बना रहा। ये बौद्ध तथा जैन देवपरिवार में भी मान्यताप्राप्त हुए। इनके नाम, आयुध और वाहन निम्नतालिका से स्पष्ट किए जाते हैं:

नाम--- आयुध और मुद्रा--- वाहन

इंद्र--- वरद, बज्र, अंकुश, कुंडी--- गज

अग्नि--- वरद, शक्ति, कमल, कमंडलु--- मेष

यम--- लेखनी, पुस्तक, कुक्कुट, दंड--- महिष

नैर्भृत--- खड्ग, खेटक, कर्तिका, मस्तक--- श्वान

वरुण--- वर, पाश, उत्पल, कुंडी--- नक्र

पवन--- वर, ध्वज, पताका, कमंडलु--- गज अथवा नर

ईशान--- वर, त्रिशुल, नाग, बीजपूरक--- वृष

देवियाँ
भारतीय देवताओं की तरह देवियों की भी संख्या असंख्य है। प्राय: सभी देवताओं की शक्तियाँ उनकी पत्नियों के रूप में प्रसिद्ध हैं। बहुत सी देवियों की अपनी स्वतंत्र सत्ता है और उनके आधार पर संप्रदाय भी संचालित हुए। किंतु मत्स्यपुराण में लोकदेवियों के रूप में लगभग दो सौ देवियों की सूची है। इसी प्रकार काश्यप संहिता, रेवती कल्प में भी देवियों की सूची है। मूर्तिशास्त्र की दृष्टि से देवपत्नी के रूप में देवियों का स्वरूप प्राय: उनके देवता के अनुरूप ही होता है अथवा वे अपने देवता के ही आयुध, मुद्रा और प्रतीक स्वीकार करती हैं। किंतु देवियों के कुछ विशिष्ट स्वरूप भी लोकप्रीय हैं। वैष्णवों में लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा अधिक प्रचलित है। ये क्रमश: श्री और विद्या की अधिष्ठात्री हैं। लक्ष्मी के दो स्वरूप श्री और वैष्णवी शिल्पशास्त्र में वर्णित हैं। वैष्णवी के रुप में वे चतुर्भुज हैं और अपने हाथों में विष्णु के आयुध शंख, ध्वज गदा और पद्म धारण करती हैं। महालक्ष्मी के रूप में देवी के चार हाथों में एक वरद मुद्रा में और शेष तीन में त्रिशूल, खेटक और पानपात्र बनाने का विधान है। महालक्ष्मी के रूप में देवी स्वयं स्वतंत्र सत्ता हैं, शक्ति के रूप में किसी अन्य की सहयिका नहीं श्री के रूप में लक्ष्मी कमलासना हैं और सुखसमृद्धि की प्रतीक हैं। श्री देवी प्राय: द्विभुज है और अपने हाथों में सनाल कमल धारण करती हैं। कभी कभी एक हाथ में कमल और दूसरे में बिल्व फल धारण करती हैं। श्री लक्ष्मी को दो हाथी स्नान भी कराते रहते है। श्री देवी की मूर्तियाँ बौद्ध कला में भी लोकप्रिय थीं। साँची की कला में श्री की कतिपय विशिष्ट मूर्तियाँ हैं।
सरस्वती का पूजन विद्या की अधिष्ठात्री देवी के रूप मेंश् होता है। इनकी प्रतिमा ब्रह्मा के साथ पत्नी रूप में भी बनती है और पृथक्‌ रूप में भी। सरस्वती चतुर्भुजी हैं और उनके आयुध पुस्तक, अक्षमाला, वीणा या कमंडलु हैं। एक हाथ प्राय: वरद मुद्रा में रहता है। कमंडलु का विधान ब्रह्मा की पत्नी के रूप में है किंतु पृथक्‌ प्रतिमा में सरस्वती के हाथ में वीणा ही रहती है और कभी कभी कमल रहता है। इनका वाहन हंस है। महाविद्या सरस्वती के रूप में देवी के आयुध अक्षा, अब्ज, वीणा और पुस्तक हैं। मध्यकालीन ध्यान और मूर्तिविधान में एक सरस्वती के आधार पर दश या द्वादश सरस्वतियों की कल्पना महाविद्या, महावाणी, भारती, सरस्वती, आर्या, ब्राह्मी, महाधेनु, वेदगर्भा, ईश्वरी, महलक्ष्मी, महकाली और महासरस्वती के नाम से भी की गई है।
शिव की पत्नी गौरी मूर्तिशास्त्र में अनेक नाम और आयुधों से जानी जाती हैं। द्वादश गौरी की सूची में उमा, पार्वती, गौरी, ललिता, श्रियोत्तमा, कृष्णा, हेमवती, रंभा, सावित्री, श्रीखंडा, तोतला और त्रिपुरा के नाम से प्रसिद्ध हैं।
देवियों में आदि शक्ति के रूप में कात्यायनी की बड़ी महिमा है। इन्हें चंडी, अंबिका, दुर्गा, महिषासुरमर्दिनी आदि नामों से जाना जाता है। सामान्यतया कात्यायनी देवी दशभुजी हैं अैर इनके दाहिने हाथों में त्रिशूल, खड्ग, चक्र, वाण और शक्ति तथा बाएँ हाथों में खेटक, चाप, पाश, अंकुश और घंटा है। ग्रंथभेद से कात्यायनी के आयुधभेद भी कहे गए हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में कत्यायनी का स्वरूप उनके सामान्य स्वरूप से थोड़ा भिन्न हो जाता है; अर्थात्‌ सिंहारूढ़ देवी त्रिभंगमुद्रा में दैत्य का संहार करती हैं, एक पैर से उसे पदाक्रांत करती हैं और दो हाथों में शूल पकड़े हुए उसे दैत्य की छाती में चुभोती हैं। इनके आठ प्रतिहार हैं जिनके नाम बेताल, कोटर, पिंगाक्ष, भृकुटि, धुम्रक, कंकट, रक्ताक्ष और सुलोचन अथवा त्रिलोचन हैं। चामुंडा या काली क्रोध की प्रतिमूर्ति हैं। इनका रूप क्रूर है, शरीर में मांस नहीं है और मुख विकृत है। आँखें लाल और केश पीले हैं। इनका वाहन शव और वर्ण कला है। भुजंग भूषण है और वे कपाल की माला धारण करती हैं। किंतु चामुंडा के रूप में देवी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कृशोदरी हैं। मूर्तिशास्त्रीय परंपरा के अनुसार ये षोडशभुजी हैं तथा इनके आयुध त्रिशूल, खेटक, खड्ग, धनुष, अंकुश, शर, कुठार, दर्पण, घटा, शंख, वस्त्र, गदा, वज्र, दंड और मुद्गर हैं। चामुंडा के रूप में देवी का स्वरूप, जैसा उपलब्ध मूर्तियों से पता चलता है, द्विभुज और चतुर्भुज भी है।
मातृकाएँ भारतीय मूर्तिविधान और उपासना परंपरा में विशेष मान्यता रखती हैं। इनकी संख्या ग्रंथभेद से सात, आठ और सोलह तक गिनाई गई है। सामान्यतया सप्तमातृकाएँ ही विशेष मान्यता प्राप्त हैं और इनमें ब्राम्ही, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वारही, इंद्राणी और चामुंडा की गणना होती है। सप्तमातृका पट्ट में आरंभ में गणेश और अंत में वीरेश्वर या वीरभद्र भी स्थान पाते हैं। विकल्प से कभी कभी चामुंडा की जगह नारसिंही स्थान पाती हैं। किंतु अष्टमातृका पट्ट में चामुंडा और नारसिंही दोनों का हीं अंकन होता है।

साभार~ पं देव शर्मा💐

रामेश्वर पुलिया के पास नाले पर किए गए स्थायी अतिक्रमण को नगर निगम ने हटाया

खंडवा- बुधवार को रामेश्वर पुलिया के पास नाले पर किए गए स्थायी अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही नगर निगम द्वारा उपायुक्त श्री एस. आर. सिटोले के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न की गई।
क्षेत्रवासियों के अनुसार, जिन स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था, वहाँ नवरात्रि के अवसर पर देवीजी की स्थापना की जाती रही है। साथ ही, वहाँ एक छोटे आकार की भगवान शंकर की प्रतिमा भी रखी गई थी। नगर निगम द्वारा इस धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय को बुलाकर विधिपूर्वक पूजा-पाठ कराया गया एवं प्रतिमा को समीपस्थ मंदिर में सम्मानपूर्वक स्थानांतरित किया गया।
नाले के अवरुद्ध होने से तीन पुलिया पर हो रहा था जल प्रवाह प्रभावित
स्थानीय नाले पर अतिक्रमण होने के कारण जल निकासी में बाधा उत्पन्न हो रही थी। संकरे स्थान पर नाले का प्रवाह रुक रहा था, जिससे तीन पुलियाओं पर जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही थी। इस गंभीर स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए नगर निगम ने जेसीबी मशीन की सहायता से संपूर्ण स्थायी अतिक्रमण हटाया।
स्थानीय निवासियों को दी गई समझाइश
अवैध अतिक्रमण की पुनरावृत्ति रोकने हेतु निगम अधिकारियों द्वारा स्थानीय रहवासियों को स्पष्ट रूप से समझाया गया कि भविष्य में इस प्रकार के अतिक्रमण न करें।
नगर निगम अमले की उपस्थिति में हुई कार्यवाही
कार्यवाही में उपायुक्त श्री एस. आर. सिटोले एवं कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय के अतिरिक्त सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्री गौरव खरे, सहायक लाइब्रेरियन श्री सपन जैन, प्रभारी अतिक्रमण अधिकारी श्री अजय सारसर सहित नगर निगम का समस्त अमला उपस्थित रहा।

मेडिकल कॉलोनी स्थित गार्डन में अवैध रूप से मवेशी रखने एवं अतिक्रमण की शिकायत पर निगम की सख्त कार्रवाई

खंडवा- मेडिकल कॉलोनी स्थित गार्डन में एक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से मवेशी रखने एवं अतिक्रमण करने की शिकायत प्राप्त होने पर उपायुक्त श्री एस. आर. सिटोले के नेतृत्व में स्थल का निरीक्षण किया गया।
गार्डन में मवेशी बांधने व खाद बनाने की गतिविधियाँ पाई गईं
निरीक्षण के दौरान देखा गया कि गार्डन में 3-4 मवेशी बांधे गए हैं तथा दो स्थानों पर खाद के ढेर बनाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थायी अतिक्रमण भी वहां पाए गए। यह स्थिति न केवल गार्डन की सौंदर्यता और उपयोगिता को प्रभावित कर रही थी, बल्कि स्थानीय बच्चों को खेल गतिविधियाँ करने में बाधा भी उत्पन्न कर रही थी।
उपायुक्त द्वारा दी गई स्पष्ट चेतावनी
उपायुक्त श्री सिटोले ने मौके पर ही संबंधित व्यक्ति को बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिए कि 24 घंटे के भीतर मवेशियों एवं अतिक्रमण को वहां से हटा लिया जाए, अन्यथा नगर निगम स्वयं कार्रवाई करेगा और अतिक्रमण हटवाएगा।
पुनः निरीक्षण का निर्णय
उक्त निर्देश के साथ यह तय किया गया कि अगले दिन पुनः स्थल का निरीक्षण किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्देशों का पालन किया गया है या नहीं।
निरीक्षण में नगर निगम का अमला रहा उपस्थित
निरीक्षण के समय उपायुक्त श्री एस. आर. सिटोले के साथ कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय, सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्री गौरव खरे, सहायक लाइब्रेरियन श्री सपन जैन सहित अन्य निगम कर्मी उपस्थित रहे।

भारत संतों और ऋषियों की भूमि, संत और ऋषि करते हैं सही मार्गदर्शन: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल, ओरछा में श्रीमद्भागवत कथा में हुए शामिल

भोपाल: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि भारत संतों, ऋषियों और मनीषियों की भूमि है। संत और ऋषि हमें जीवन जीने का सही रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे श्रीमद्जगतगुरु राजेन्द्र दास जी महाराज श्री धाम वृन्दावन के दर्शन प्राप्त हुए हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल निवाड़ी जिले के प्रवास के दौरान कनक भवन मंदिर, भक्तमाली आश्रम ओरछा में श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने कथावाचक श्रीमद्जगतगुरु राजेन्द्र दास जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने उपस्थित जनों से गौसेवा और गौपूजन के महत्व पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि गौ पूजन भारतीय धर्म, संस्कृति और जीवनदृष्टि का मूल आधार है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समस्त प्राणीमात्र के प्रति करुणा, सहअस्तित्व और प्रकृति-मैत्री के भाव का प्रतीक है। विधायक निवाड़ी श्री अनिल जैन सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

खुशियों की दास्तां- महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर पूजा बनी ‘‘लखपति दीदी’’

हरदा- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘‘लखपति दीदी’’ की अवधारणा हरदा जिले में साकार हो रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिला स्वसहायता समूह से जुड़कर जिले की बहुत सी महिलाएं लखपति दीदी की श्रेणी में आ गई है। खिरकिया विकासखण्ड के ग्राम साक्ट्या की निवासी पूजा कलम बताती है कि ग्रामीण आजीविका मिशन की योजना के तहत ट्रेक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल के रूप में 10.50 लाख रूपये की मदद समूह को मिली। माँ संतोषी स्वसहायता समूह की महिलाएं आसपास के गांवों के किसानों की मांग पर उन्हें ट्रेक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल की सेवाएं उपलब्ध कराती है, जिससे सभी महिलाओं को सम्मानजनक आय होने लगी है और समूह की महिलाएं लखपति दीदी की श्रेणी में आ गई हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबन्धक श्री रामनिवास कालेश्वर ने बताया कि पूजा कलम की ही तरह जिले की अन्य महिलाएं भी ट्रेक्टर व कृषि यंत्र किराये पर देकर अच्छी आय प्राप्त कर रही है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो गई हैं। पूजा कलम और उसके समूह की सभी महिलाएं अपने परिवार के पालन पोषण अच्छी तरह कर पा रही है।

मंगलवार, 27 मई 2025

मध्य प्रदेश में MDR TB के इलाज के लिए BPLM regime की शुरुआत भोपाल से 28 मई से

भोपाल - 28 मई से एम डी आर टीबी मरीजों के लिए पहले से अधिक प्रभावी दवाइयां की सुविधा शुरू की जा रही है। प्रदेश में इसकी शुरुआत भोपाल जिले से की जा रही है। यह दवाइयां मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस मरीजों के लिए बेहद उपयोगी है। बीपालएम उपचार पद्धति में चार दवाओं बेडाक्विलाइन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन शामिल है। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि अनुसंधानों में पाया गया है कि इन दवाइयों का डोज पिछली एमडीआर-टीबी उपचार प्रक्रिया की तुलना में अधिक प्रभावी और तेज़ उपचार विकल्प साबित हुआ है। पारंपरिक एमडीआर-टीबी उपचार 20 महीने तक चल सकते हैं, जबकि बीपीएएलएम उपचार पद्धति दवा प्रतिरोधी टीबी को केवल छह से नौ महीने में ठीक कर सकती है। यह दवाइयां मरीज की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय परामर्श के अनुरूप प्रदान की जावेगी।

सद्भावना मंच ने यातायात समस्या को लेकर दिया ज्ञापन

खंडवा- खंडवा में यातायात की विभिन्न समस्याओं को लेकर सद्भावना मंच का प्रतिनिधि मंडल स्थानीय यातायात थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह परिहार से मिला और उन्हें मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र में सद्भावना मंच के अध्यक्ष प्रमोद जैन ने मुख्य रूप से खंडवा जंक्शन रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित ट्रैफिक प्रीपेड बूथ को पुनः प्रारंभ करने की मांग की। इसके साथ ही खंडवा में अनावश्यक बने स्पीड ब्रेकर्स की संख्या कम करने, यातायात सुगम करने के लिए व्यवस्थित पार्किंग पर पुरजोर ध्यान केंद्रित करने और अनावश्यक चालानी कार्रवाई न करने आदि विषयों पर भी श्री परिहार से चर्चा की।कुछ स्थानों पर ट्रकों और डंपरों से अवैध वसूली की मिल रही शिकायतों की भी उन्हें जानकारी दी। इस अवसर पर सद्भावना मंच के अध्यक्ष प्रमोद जैन, उपाध्यक्ष पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, सुरेन्द्र गीते, गणेश भावसार,‌ कमल नागपाल, निर्ममंगवानी, राधेश्याम शाक्य, नरेंद्र दवे, राजेश पोरपंथ, सुभाष मीणा आदि सदस्य उपस्थित रहे।

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर जागरूकता कार्यशाला कल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और पोषण पर ख्यातनाम विशेषज्ञ देंगे जानकारी

मासिक धर्म से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने एवं इस अवधि में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता हेतु 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस का आयोजन किया जा रहा है।इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया है। 
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग , पत्रकार कॉलोनी लिंक रोड 3 में आयोजित कार्यशाला में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ प्रिया भावे चित्तावर एवं वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ अमिता सिंह द्वारा स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण पर जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा व सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहेंगे।
अधिकांश महिलाओं और युवतियों को 5 दिन मासिक धर्म होता है। पीरियड साइकल का औसत अंतराल भी 28 दिन का होता है। इसी को देखते हुए साल के 5 वें महीने की 28 तारीख को यह दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस " टुगेदर फ़ॉर अ पीरियड फ्रेंडली वर्ल्ड " की थीम पर मनाया जा रहा है। इस अवसर पर बालिकाओं और महिलाओं के लिए आयोजित जागरूकता कार्यशाला में सेनेटरी पैड के उपयोग और निस्तारण, पोषण आहार, आयरन फोलिक एसिड के लाभ सम्बन्धी जानकारी दी जाएगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि माहवारी महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण कर समाज में इस विषय पर तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे।

ब्लेक स्पॉट्स को मिशन मोड पर लें और ट्राफिक इंजीनियरिंग से उसका परिशोधन करें :- संभागायुक्त श्री सिंह, इंदौर (ग्रामीण) जोन के अंतर्गत ब्लेक स्पॉट्स के विश्लेषण एवं परिशोधन के संबंध में बैठक सम्पन्न

खण्डवा - संभागायुक्त श्री दीपक सिंह की अध्यक्षता में आज संभागायुक्त कार्यालय में इंदौर (ग्रामीण) जोन के अंतर्गत ब्लेक स्पॉट्स के विश्लेषण एवं परिशोधन के संबंध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में संभागायुक्त श्री सिंह ने इंदौर (ग्रामीण) अंतर्गत 91 चिन्हित ब्लेक स्पॉट्स के विश्लेषण एवं परिशोधन की प्रगति रिपोर्ट देखी और उसकी समीक्षा की। बैठक में आईजी श्री अनुराग, डीआईजी श्री निमिष कुमार, संयुक्त आयुक्त विकास श्री डी.एस. रणदा, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इंदौर के परियोजना निदेशक श्री सुमेश बांझल, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता श्री सी.एस. खरत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
      बैठक में संभागायुक्त श्री सिंह ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि इंदौर (ग्रामीण) जोन में सभी सड़कें फ्लायओवर, पुल-पुलिया आदि अच्छे बन रहे हैं। इससे सड़कों पर चलने वाले वाहन चालकों सहित नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल रही है। इन सबके बावजूद इंदौर (ग्रामीण) जोन में सड़क हादसे हो रहे हैं। श्री सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे ऐसी कार्ययोजना बनाएं जिससे ब्लेक स्पॉट्स की संख्या में कमी आएं। कार्ययोजना शार्ट टर्म और लॉग टर्म दोनों प्रकार की हो सकती है। जैसे कहीं पर रोड़ संकेतक, डिवायडर, बेरिकेट आदि भी लगा सकते हैं। 
       श्री सिंह ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, प्रशासन आदि विभाग समन्वय स्थापित कर कार्य करें और एक निश्चित समयावधि में उसे पूरा करें। इस कार्य को मिशन मोड पर लें और प्राथमिकता के साथ उसे पूरा करें। अधिकारी ब्लेक स्पॉट्स पर जाकर देखें कि वहां पर किस तरह की ट्राफिक इंजीनियर की आवश्यकता है और उसे किस प्रकार दूर किया जा सकता है। सभी अधिकारी ब्लेक स्पॉट्स के परिशोधन की लगातार मॉनीटरिंग करें और उसकी हर माह समीक्षा भी करें। बैठक में श्री सिंह ने धार और खरगोन जिले के ऐसे ब्लेक स्पॉट्स पर सबसे अधिक चिंता व्यक्त की, जहां सड़क हादसे अधिक हो रहे है। गांव की जो रोड़ मुख्य मार्ग से मिलती है या कहीं घुमावदार मार्ग है, ऐसी जगह पर भी हादसे हो रहे है। उस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने भी अपने विचार और सुझाव रखें।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल से बूटेक्स इम्पेक्स टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट, नेट जीरो एमिशन बिल्डिंग्स के क्षेत्र में संभावनाओं पर हुई चर्चा

भोपाल: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का पर्यावरण अनुकूल, सतत एवं संवहनीय विकास का विजन भारत को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में समर्थ बना रहा है। इस दिशा में पूरे भारत में प्रयास किये जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल से निवास कार्यालय भोपाल में बूटेक्स इम्पेक्स टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। 
     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों को सभी आवश्यक सुविधाएं एवं नीति-गत सहयोग देने के लिए सतत कार्य कर रही है। राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाने और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए ठोस रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की गति अब सतत विकास के सिद्धांतों से जुड़कर तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों का अध्ययन करे और ग्रीन बिल्डिंग्स व पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचनाओं की दिशा में राज्य सरकार के साथ सहभागिता करे।
      कंपनी प्रतिनिधियों ने उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल को भारत में नेट जीरो एमिशन बिल्डिंग्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों एवं पूर्ण किए गए प्रोजेक्ट्स की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बूटेक्स इम्पेक्स टेक द्वारा निर्मित भवन पूरी तरह से सेल्फ-सस्टेनेबल होते हैं और उन्हें ग्रिड कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे भवन नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों पर आधारित होते हैं, जो पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतिनिधि मंडल में कंपनी के महाप्रबंधक श्री सुखवंत सोना सिंह सैनी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

खंडवा की शहरी सीमा विस्तार को लेकर उपायुक्त श्री एस.आर. सिटोले की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित, शहरी सीमा में नए क्षेत्रों को शामिल करने पर चर्चा एवं निर्णय


खंडवा - आज खंडवा नगर की शहरी सीमा विस्तार को लेकर उपायुक्त श्री एस.आर. सिटोले की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करते हुए सर्वसम्मति से निम्नलिखित निर्णय लिए गए-
 1. मोकलगांव से पूर्व स्थित डोंडवाड़ा एवं ताकलीमोरी को शहरी सीमा में सम्मिलित किया जाए।
 2. हरसूद रोड पर ग्राम रूधी से सटे इंडस्ट्रियल एरिया, पावरग्रिड एवं जुनापानी क्षेत्र को भी नगर सीमा में शामिल किया जाए।
सीमा विस्तार हेतु भ्रमण, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के बजट पर चर्चा
बैठक में सीमा विस्तार प्रक्रिया के अंतर्गत प्रस्तावित क्षेत्रों के भौतिक भ्रमण, वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी से संबंधित बजट पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
पूर्व में जो ड्रोन कैमरे का उपयोग भ्रमण के दौरान किया गया था, उसके भुगतान से संबंधित विषय पर भी चर्चा की गई।
आपत्तियों की सुनवाई एवं निपटारा
बैठक में ग्राम पंचायत बोरगांव खुर्द एवं कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई कर उनका निराकरण करने का निर्णय लिया गया, ताकि सीमा विस्तार की प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
नाजुल अधिकारी एवं टीएनसीपी से जानकारी प्राप्त करने के निर्देश
बैठक में नाजुल अधिकारी, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग को पत्र प्रेषित कर शामिल किए जाने वाले ग्रामों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का निर्णय लिया गया।
29 मई 2025 को भ्रमण एवं निरीक्षण का कार्यक्रम निर्धारित
दिनांक 29 मई 2025 को प्रस्तावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण एवं मापन किया जाएगा। इसके लिए टेप एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
बैठक में अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता
इस बैठक में उपायुक्त श्री एस.आर. सिटोले, कार्यपालन यंत्री श्री राधेश्याम उपाध्याय, प्रभारी राजस्व अधिकारी श्री हरीश दुबे, सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्री गौरव खरे, उप यंत्री श्री संजय शुक्ला, श्री अशोक तारे, श्री धर्मेंद्र वर्मा, श्री गोपाल सिंह चौहान सहित अन्य निगम कर्मचारी उपस्थित रहे।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक, मंदिर में अर्पित फूलों और बेलपत्रों का हो रहा पुनर्चक्रण

 


  • स्थानीय महिलायें हो रहीं आत्मनिर्भर व मिल रहा स्वच्छता को बढ़ावा

खंडवा - मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का पवित्र तीर्थ स्थल, श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ने आध्यात्मिकता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनूठा कदम उठाया है।श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने जिला प्रशासन और पुष्पांजलि इकोनिर्मित के सहयोग से मंदिर में अर्पित फूलों और बेलपत्रों के पुनर्चक्रण की एक अभिनव पहल शुरू की है, जो न केवल स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

        प्रतिदिन मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले फूलों और अन्य पूजन सामग्री को अब बेकार नहीं जाने दिया जाता। ट्रस्ट द्वारा इन फूलों को एकत्र कर स्थानीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के हाथों में सौंपा जा रहा है, जो इन्हें मूल्यवर्धित उत्पादों में बदल रही हैं।



        पुष्पांजलि इकोनिर्मित संस्था इन महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, मशीनें और आवश्यक सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे वे अगरबत्ती, धूपबत्ती, हवन सामग्री, प्राकृतिक जैविक खाद और प्राकृतिक रंग जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। 

       ये उत्पाद न केवल मंदिर परिसर में, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जिससे इन महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। फूलों के कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर यह मॉडल स्वच्छ भारत मिशन को भी सशक्त रूप से समर्थन दे रहा है।

       श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के इस प्रयास को जिला प्रशासन का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त है। यह साझेदारी न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रही है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है।यह मॉडल तीर्थ स्थल पर आस्था, पर्यावरण और आत्मनिर्भरता के संगम को दर्शाता है।श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग अब केवल भक्ति का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक ऐसा उदाहरण बन रहा है जो यह साबित करता है कि आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं, और इस राह पर महिलाएं समाज की नई शक्ति बनकर उभर रही हैं।



वर्ष 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को लेकर ट्रांसकों की युवा पीढ़ी करे तैयारी:- भविष्य की चुनौतियों से निपटने मुख्यालय में एम.डी. सुनील तिवारी ने किया कार्मिकों से सीधा संवाद

जबलपुर- एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक इंजी. सुनील तिवारी ने मुख्यालय जबलपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कंपनी के लेखाधिकारियों, विधि अधिकारी,जबलपुर के विभिन्न कार्यालयों में पदस्थ असिस्टेंट इंजीनियरों , प्रोग्रामर, एच आर मैनेजर और जूनियर इंजीनियरों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि एम पी ट्रांसको की युवा पीढ़ी को केंद्र सरकार के विकसित भारत 2047 लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा, जिससे न केवल कंपनी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रख सकेगी, बल्कि वह राष्ट्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगी।उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का संघर्ष आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनेगा।
प्रो-एक्टिव और इनोवेटिव सोच अपनाने पर जोर:-
इंजी. सुनील तिवारी ने कहा कि आने वाला समय अनेक चुनौतियों से भरा होगा, इसलिए प्रत्येक अधिकारी व कर्मचारी को प्रो-एक्टिव (सक्रिय) और इनोवेटिव (नवाचार ) सोच के साथ टीमवर्क में कार्य करना होगा। उन्होंने सभी कार्मिकों से बहुआयामी एवं सकारात्मक कार्यशैली अपनाने का आग्रह किया।
फील्ड की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करें:-
प्रबंध संचालक ने यह भी उल्लेख किया कि मुख्यालय के अधिकारियों को फील्ड की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी कार्यशैली में लचीलापन लाना होगा। वर्तमान युग आउटसोर्सिंग का है, अतः ठेकेदारों और आउटसोर्स कर्मचारियों की छोटी-छोटी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
83 कार्मिकों की भागीदारी, सुझाव भी लिए गए:-
इस संवाद कार्यक्रम में मुख्यालय के लगभग 83 कार्मिक शामिल हुए। कार्यक्रम में अधिकारियों से फीडबैक लिया गया और विभिन्न सुझावों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन अधीक्षण अभियंता श्री सुनील यादव और श्री आर.के. शर्मा द्वारा किया गया। दोनों अधिकारियों ने संवाद की आवश्यकता और उपयोगिता पर भी अपने विचार साझा किए।