शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

युवा नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से प्रदेश को सतत विकास की ओर ले जाएँ—उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल | प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान एवं सतत विकास विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ

भोपाल- प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान एवं सतत विकास विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अनुसंधान आधारित विकास दीर्घकालिक एवं लाभप्रद होता है। हमें अपनी सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों से जुड़े रहकर विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा। आर्थिक तरक्की के लिये भारतीय मूल्यों को दांव पर नहीं लगाना चाहिए।

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के एमबीए विभाग द्वारा पं. शम्भूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित इस कांफ्रेंस में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नवाचार करें, अनुसंधान को अपनाएँ और प्रदेश व देश को सतत विकास की ओर ले जाने के लिये सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा से भटकेंगे तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्राकृतिक खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भी अनुसंधान से निकला ज्ञान है, जिसके माध्यम से हम स्वयं, अपने परिवार और धरती को स्वस्थ रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि मंथन से निकला ज्ञान न केवल छात्रों बल्कि पूरे समाज के लिये लाभकारी सिद्ध होता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत 2047 तक विश्वगुरु बनेगा और आने वाले समय में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होगा। विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी कुलगुरु प्रो. सुनील तिवारी ने कहा कि सतत विकास ही सनातन की मूल परिकल्पना है। वर्तमान समय में हो रहे वर्ग संघर्ष के दौर में मानवता को संरक्षित रखना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति ही विश्व में शांति स्थापित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने टिकाऊ एवं सतत विकास की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

प्रो. पद्मेश कुमार ने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल किया गया है। प्रबंधन और वाणिज्य केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभाव आधारित अनुसंधान समाज के लिये अधिक उपयोगी होता है। उन्होंने कहा कि नवाचार के बिना विकास अधूरा है।

 

अमेरिका से आईं डॉ. प्रतिभा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आधुनिक विकास के लिये नवीन शोध और स्थायी विकास अत्यंत आवश्यक है। वहीं अडानी ग्रुप की एनेट एफ. विश्वास ने कहा कि प्रबंधन और वाणिज्य एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हैं। विकास ऐसा होना चाहिए जो आने वाली पीढ़ी के लिये वरदान बने। जिम्मेदार संस्थान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में 110 शोधार्थी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हैं तथा 85 शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे। कांफ्रेंस के दौरान 100 से अधिक शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसमें 6 देशों के प्रतिनिधि भी सहभागिता कर रहे हैं।

कार्यक्रम में कुल सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह परिहार सहित देश-विदेश के विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस ने प्रबंधन, वाणिज्य एवं सतत विकास के क्षेत्र में नवीन विचारों और अनुसंधान को नई दिशा प्रदान की।

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