साधारण परिवार, असाधारण सपने
देवराज कलमें, स्वर्गीय हीरालाल कलमें के सुपुत्र हैं। परिवार में माता, तीन भाई और एक बहन हैं। सभी भाई-बहनों का विवाह हो चुका है और देवराज सबसे छोटे हैं। बड़े भाई नानकराम कलमें पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन बड़े भाइयों ने हमेशा देवराज को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। घर की जिम्मेदारियों का भार स्वयं उठाकर उन्होंने छोटे भाई को आगे बढ़ने का अवसर दिया। यही पारिवारिक संस्कार और सहयोग आगे चलकर देवराज की सबसे बड़ी ताकत बने।
शिक्षा और संघर्ष का दौर
देवराज ने प्राथमिक शिक्षा ग्राम झिंझरी से प्राप्त की। 6वीं से 10वीं तक की पढ़ाई पुष्पा हाई स्कूल रोशनी में की तथा 11वीं और 12वीं सेंट थॉमस स्कूल, खंडवा से पूरी की। आगे की पढ़ाई उन्होंने मप्र भोज ओपन यूनिवर्सिटी से की।
वर्ष 2015 में पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्हें कॉलेज बीच में छोड़ना पड़ा और वे भोपाल जाकर भवन निर्माण कार्य में मजदूरी करने लगे। एक वर्ष तक कठिन श्रम किया, लेकिन भीतर की आग और कुछ कर गुजरने की चाह ने उन्हें पढ़ाई फिर से शुरू करने के लिए प्रेरित किया। 2017 में उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण की और अपनी दिशा तय कर ली—देश सेवा।
वर्दी का सफर: 35वीं वाहिनी से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप तक
वर्ष 2018 में देवराज कलमें ने टेम्रूखोद्रा के सुरेंद्र मार्को के साथ 35वीं वाहिनी मंडला में ज्वाइनिंग ली। उनकी बेसिक ट्रेनिंग BSF इंदौर में हुई, जहां अनुशासन, रणनीति और कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की विशेष ट्रेनिंग मिली।
2020 में कोरोना काल के बाद वे मध्यप्रदेश पुलिस की हॉक फोर्स, बालाघाट में प्रतिनियुक्ति पर पहुंचे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी आसान नहीं होती, लेकिन देवराज ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया।
अगस्त 2024 में उन्होंने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ज्वॉइन किया। जंगल ड्यूटी, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और हर पल खतरे की आशंका—इन सबके बीच वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहने को तत्पर रहे।
14 जून 2025: ऐतिहासिक मुठभेड़
14 जून 2025 को थाना रूपझर क्षेत्र के पचामादादर-कटेझिरिया पहाड़ी जंगल में पुलिस और प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के बीच मुठभेड़ हुई।
इस ऑपरेशन में देवराज और उनकी टीम ने असाधारण साहस का परिचय दिया। GRB डिवीजन के मलाजखंड दलम के चार एरिया कमेटी सदस्य—
- रीटा उर्फ तुब्बी।
- सुमन।
- ईमला उर्फ तुलसी।
- रवि उर्फ बद्रे।
को पुलिस टीम ने मार गिराया। यह ऑपरेशन रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। देवराज की टीम ने निर्णायक स्ट्राइक कर ऑपरेशन को सफल बनाया।
मौत से सामना, लेकिन जज्बा कायम
सफलता के बाद भी चुनौतियां कम नहीं हुईं।
बोरबन जंगल का ऑपरेशन
थाना किरणापुर क्षेत्र के बोरबन जंगल में 5 दिन 6 रात तक बारिश के बीच ऑपरेशन चला। इसी दौरान आकाशीय बिजली गिरने से 8 में से 6 जवान घायल हो गए। देवराज बाल-बाल बचे। वह क्षण ऐसा था जब जीवन और मृत्यु के बीच केवल कुछ सेकंड का अंतर था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दिन मन में नौकरी छोड़ने का विचार आया, लेकिन देश सेवा का जज्बा भारी पड़ा।
19 नवंबर 2025: संयुक्त ऑपरेशन
मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की संयुक्त पुलिस टीम ने थाना बोरतलाव क्षेत्र के कौवापानी-कुर्रेझार जंगल में ऑपरेशन चलाया। देवराज अग्रिम पंक्ति में चौथे स्थान पर थे। गोलियां सिर के ऊपर से गुजर रही थीं।
इस दौरान पार्टी प्रभारी निरीक्षक श्री आशीष शर्मा को गोली लगी और वे शहीद हो गए। यह पल पूरी टीम के लिए भावनात्मक और साहस की परीक्षा का क्षण था। देवराज और उनके साथियों ने संयम और रणनीति से स्थिति को संभाला।
वीरता का सम्मान: मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व पदोन्नति
14 जून 2025 की ऐतिहासिक सफलता के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस बल के 60 जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति प्रदान की। देवराज कलमें भी इस सम्मान से अलंकृत हुए। यह केवल पदोन्नति नहीं, बल्कि उनके साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की आधिकारिक स्वीकृति थी।
सफलता का श्रेय और जीवन दर्शन
देवराज अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, बड़े भाइयों, गुरुजनों और सभी साथियों को देते हैं। उनका मानना है कि कोई भी व्यक्ति अकेले सफलता हासिल नहीं करता; परिवार और टीम का सहयोग ही असली ताकत है।
युवाओं के लिए संदेश
देवराज कलमें का स्पष्ट संदेश है—
“ईमानदारी और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है। अपने कार्य के प्रति सच्चे रहिए और लगातार प्रयास करते रहिए। मुश्किल समय में मुस्कुराते हुए डटे रहना ही असली बहादुरी है।”
देवराज कलमें की कहानी यह साबित करती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में देश सेवा का भाव हो, तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है।
ग्राम झिंझरी का यह सपूत आज प्रदेश और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है। मजदूरी से लेकर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप तक का सफर यह दर्शाता है कि परिस्थितियां नहीं, बल्कि संकल्प इंसान की पहचान बनाता है।
उनकी गाथा आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिलाती है कि साहस, अनुशासन और ईमानदारी के साथ हर सपना साकार किया जा सकता है।
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