गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

जनगणना-2027 के लिए प्रशासन सख्त: खंडवा में अधिकारियों-कर्मचारियों के सभी अवकाश निरस्त

खंडवा- भारत की आगामी जनगणना 2027 के प्रथम चरण—मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना—को लेकर खंडवा जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और सतर्क नजर आ रहा है। 1 मई से 30 मई 2026 तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता द्वारा जिले के सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का सख्त आदेश जारी किया गया है।
जिला जनगणना अधिकारी श्री बजरंग बहादुर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जनगणना कार्य राष्ट्रीय महत्व का अत्यंत संवेदनशील एवं व्यापक अभियान है, जिसमें सटीक और अद्यतन आंकड़ों का संकलन किया जाता है। यह आंकड़े भविष्य की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपस्थिति इस कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता को प्रभावित कर सकती है।

अवकाश पर पूर्ण प्रतिबंध, आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
जारी आदेश के अनुसार, खंडवा जिले के विभिन्न विभागों, कार्यालयों एवं संस्थानों में पदस्थ सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों के पूर्व से स्वीकृत सभी प्रकार के अवकाश—चाहे वे अर्जित अवकाश हों, आकस्मिक अवकाश या अन्य—तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना अवकाश पर नहीं जा सकेगा।

मुख्यालय छोड़ने पर भी सख्ती
प्रशासन ने केवल अवकाश पर ही नहीं, बल्कि मुख्यालय छोड़ने पर भी प्रतिबंध लगाया है। आदेश में कहा गया है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कलेक्टर की अनुमति के बिना अपने मुख्यालय से बाहर नहीं जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना कार्य के दौरान सभी संबंधित अधिकारी-कर्मचारी हर समय उपलब्ध रहें और किसी भी आवश्यक स्थिति में तत्काल कार्यवाही की जा सके।

अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश
सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे 1 मई 2026 को दोपहर पूर्व तक अपने-अपने मुख्यालय पर अनिवार्य रूप से उपस्थित हो जाएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का पालन न करने पर संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जनगणना: विकास की आधारशिला
जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक आंकड़ों का एक व्यापक संग्रहण होता है। इसके आधार पर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, आधारभूत संरचना और कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करती है। इसलिए इसकी शुद्धता और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक होती है।

प्रशासन की तैयारियां और रणनीति
खंडवा जिला प्रशासन द्वारा जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विभागवार जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। फील्ड स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया गया है ताकि कार्य की निरंतर समीक्षा की जा सके।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के संकेत
प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की उदासीनता या नियमों की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनुपस्थिति, बिना अनुमति अवकाश या मुख्यालय छोड़ने की स्थिति में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

खंडवा में जनगणना-2027 को लेकर प्रशासन की यह सख्ती दर्शाती है कि जिला प्रशासन इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों की पूर्ण सहभागिता और अनुशासन के साथ ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं के लिए सटीक आधार तैयार हो सके।

सड़क सुरक्षा की ओर सख्त कदम: खंडवा में हेलमेट विशेष अभियान के तहत 294 वाहन चालकों पर कार्रवाई

खंडवा- जिले में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चलाए जा रहे “हेलमेट विशेष अभियान 2026” के तहत पुलिस प्रशासन ने यातायात नियमों के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एक दिन में 294 वाहन चालकों पर प्रकरण दर्ज किए हैं। इस कार्रवाई के दौरान कुल 96 हजार 600 रुपये का समन शुल्क वसूला गया, जो इस बात का संकेत है कि जिले में नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है।

यह अभियान पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश, भोपाल के निर्देशानुसार 26 अप्रैल से 10 मई तक संचालित किया जा रहा है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उप पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राजेश रघुवंशी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) महेंद्र तारणेकर के मार्गदर्शन तथा उप पुलिस अधीक्षक यातायात अनिल कुमार राय के नेतृत्व में जिले के सभी थाना प्रभारियों और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

सख्ती के साथ सुधारात्मक दृष्टिकोण

अभियान की खास बात यह है कि इसमें केवल दंडात्मक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सुधारात्मक दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। हेलमेट न पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई के साथ-साथ उनके ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित कराने हेतु प्रकरण परिवहन विभाग को भेजे जा रहे हैं। इसके लिए आधुनिक POS मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कार्रवाई में पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित हो रही है।

जागरूकता पर विशेष फोकस

पुलिस प्रशासन का मानना है कि केवल चालान से ही समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है, इसलिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। जिले के स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, सड़क सुरक्षा के नियमों और दुर्घटनाओं से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग

वर्तमान समय में सोशल मीडिया की पहुंच को देखते हुए पुलिस द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर यातायात नियमों से संबंधित संदेश, लघु वीडियो और जागरूकता सामग्री साझा की जा रही है। इससे अधिक से अधिक लोगों तक संदेश पहुंच रहा है और नागरिकों में जागरूकता बढ़ रही है।

सुरक्षा ही सर्वोपरि

विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों का एक बड़ा कारण हेलमेट का उपयोग न करना है। ऐसे में यह अभियान लोगों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। हेलमेट न केवल कानून का पालन है, बल्कि जीवन की सुरक्षा का एक आवश्यक साधन भी है।

नागरिकों से सहयोग की अपील

उप पुलिस अधीक्षक यातायात ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से पहनें और सुरक्षित ड्राइविंग को अपनी आदत बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है।

सुरक्षित भविष्य की दिशा में पहल

खंडवा जिले में चलाया जा रहा यह हेलमेट विशेष अभियान केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक पहल है, जो नागरिकों में जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित करने का प्रयास कर रहा है। यदि नागरिक भी इसमें सक्रिय सहयोग दें, तो निश्चित ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाकर एक सुरक्षित समाज का निर्माण किया जा सकता है।

अवैध गतिविधियों पर निगम का कड़ा प्रहार: इमलीपुरा में अवैध कारखाने पर बड़ी कार्रवाई, जवाबदेही तय


खंडवा-शहर में अवैध निर्माण और अनियमित गतिविधियों के विरुद्ध नगर निगम ने सख्ती दिखाते हुए इमलीपुरा क्षेत्र में संचालित एक अवैध कारखाने पर व्यापक तोड़फोड़ कार्रवाई प्रारंभ की है। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि नगर निगम अब अवैध गतिविधियों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कार्य कर रहा है और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।

महापौर अमृता अमर यादव ने इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि संबंधित संचालक अनवर कुरैशी को नगर निगम द्वारा स्वामित्व और वैधता संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु तीन बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर निगम ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल एक प्रकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे नगर क्षेत्र में ऐसे सभी मामलों की पहचान कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

प्रशासनिक जवाबदेही: लापरवाही पर तत्काल निलंबन

इस प्रकरण में प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही सामने आने पर नगर निगम ने दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि निगम न केवल अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई कर रहा है, बल्कि अपने तंत्र के भीतर जवाबदेही भी सुनिश्चित कर रहा है। महापौर ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन प्रतिष्ठानों के ट्रेड लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ है, उनके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से सीलिंग की कार्रवाई की जाए।

शासन की मंशा के अनुरूप सख्ती

महापौर ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन एवं मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप नगर निगम प्रशासन शहर में विधिसम्मत व्यवस्था कायम रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अवैध निर्माण, बिना अनुमति संचालित प्रतिष्ठान और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

स्लॉटर हाउस व्यवस्था में बदलाव की तैयारी

नगर निगम क्षेत्र में संचालित एकमात्र स्लॉटर हाउस, जिसमें 28 चबूतरे कार्यरत थे, को फिलहाल बंद करवा दिया गया है। इस निर्णय के पीछे स्वच्छता, स्वास्थ्य और शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। महापौर ने जानकारी दी कि आगामी बैठक में एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसके अंतर्गत स्लॉटर हाउस को शहर की सीमा से बाहर सुव्यवस्थित और नियोजित ढंग से संचालित करने पर विचार किया जाएगा।

जनभागीदारी पर जोर

नगर निगम ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया है। महापौर ने पत्रकारों के माध्यम से शहरवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत निगम प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन और जनता के बीच सहयोग आवश्यक है।

व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा कदम

इमलीपुरा में की गई यह कार्रवाई केवल एक अवैध कारखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर में सुव्यवस्थित शहरी विकास और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नगर निगम द्वारा अपनाई जा रही सख्ती आने वाले समय में शहर के समग्र विकास, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकती है।

प्रेस वार्ता के दौरान MIC सदस्य विक्की भांनवरे, निगम प्रवक्ता सुनील जैन, उपायुक्त एस.आर. सिटोले एवं सहायक जनसंपर्क अधिकारी गौरव खरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सद्भावना मंच पर आध्यात्मिक संगम: कथा व्यास सुरेश शरण शास्त्री की अमृतवाणी से गूंजा खंडवा

खंडवा- शहर के माली कुआं स्थित सद्भावना मंच उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से सराबोर हो उठा, जब चित्रकूट धाम हिगनघाट के प्रसिद्ध श्रीराम कथा मर्मज्ञ कथा व्यास सुरेश शरण शास्त्री का आगमन हुआ। मंच के सदस्यों ने पारंपरिक भारतीय संस्कृति के अनुरूप शाल, श्रीफल और पुष्पमालाओं से उनका आत्मीय स्वागत किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

यह अवसर केवल स्वागत का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन के गूढ़ सत्य को समझने का भी रहा। अपने सारगर्भित प्रवचन में शास्त्री जी ने मानव जीवन के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि “सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है और मनुष्य का जीवन उसी परम तत्व की प्राप्ति के लिए मिला है।” उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधाओं और नश्वर वस्तुओं के पीछे अपनी ऊर्जा, समय और संसाधन व्यर्थ कर रहा है, जबकि वास्तविक शांति और संतोष आत्मा के भीतर स्थित परमात्मा से जुड़ने में है।

शास्त्री जी ने अपने सरल और प्रभावशाली शब्दों में समझाया कि जीवन में संतुलन, संयम और सेवा भाव अपनाकर ही मनुष्य अपने अस्तित्व को सार्थक बना सकता है। उन्होंने सद्भावना मंच द्वारा समाज में भाईचारे, एकता और निस्वार्थ सेवा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सदस्यों ने भी इस आध्यात्मिक संगम का भरपूर लाभ उठाया। सभी ने कथा व्यास के विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में सद्भाव व नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

इस अवसर पर सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन, पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, डॉ. जगदीशचन्द्र चौरे, देवेंद्र जैन, राधेश्याम शाक्य, गणेश भावसार, सुरेंद्र गीते, जीडी सराफ, निर्मल मंगवानी, महेश मूलचंदानी, अनुप शर्मा, कमल नागपाल, डॉ. एम.एम. कुरैशी, अर्जुन बुंदेल, सोनी वकील, सुभाष मीणा, केलाश पटेल सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं मंच सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ, जिसने सभी उपस्थितजनों के मन में नई प्रेरणा और उत्साह का संचार किया।

किसानों के हित में प्रशासन सख्त: कलेक्टर ऋषव गुप्ता का उपार्जन केंद्रों पर आकस्मिक निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश

खंडवा- रबी विपणन सीजन के दौरान किसानों को सुचारू और पारदर्शी उपार्जन व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने गुरुवार को खंडवा एवं पंधाना विकासखंड के विभिन्न ग्रामों—गुड़ी, सिंगोट, पिपलोद और हीरापुर—का दौरा कर गेहूं एवं चना उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सहायक कलेक्टर सुश्री शिल्पा चौहान, एसडीएम पंधाना, जिला आपूर्ति अधिकारी श्री दिनेश सांवले, एसडीएम खंडवा श्री ऋषि सिंघई सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ मिलकर व्यवस्थाओं का स्थल पर मूल्यांकन किया और किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा।

व्यवस्थाओं की पड़ताल, सुधार के स्पष्ट निर्देश

कलेक्टर श्री गुप्ता ने उपार्जन केंद्रों पर नमी मापक यंत्र, तौल कांटे और बारदानों की उपलब्धता की जानकारी लेते हुए निर्देशित किया कि सभी आवश्यक संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें। उन्होंने विशेष रूप से हम्मालों की संख्या बढ़ाने और तुलाई के लिए अतिरिक्त तौल कांटे लगाने पर जोर दिया, ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े और उपार्जन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो सके।

तुलाई में देरी पर सख्ती

निरीक्षण के दौरान किसानों ने बताया कि कई केंद्रों पर गेहूं तुलाई का कार्य देर से शुरू होता है, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों पर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से तुलाई कार्य अनिवार्य रूप से प्रारंभ किया जाए
ग्राम गुड़ी के उपार्जन केंद्र में अतिरिक्त तौल कांटे लगाने के निर्देश देते हुए उन्होंने तुलाई प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया।

किसानों से संवाद, समस्याओं का समाधान

कलेक्टर श्री गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही किसानों को उर्वरकों के अग्रिम भंडारण के लिए जागरूक करते हुए बताया कि ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से वे अपनी आवश्यकता अनुसार खाद का उठाव पहले ही कर सकते हैं।

ई-टोकन प्रणाली पर प्रशिक्षण के निर्देश

कलेक्टर ने जिला आपूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए कि ई-टोकन प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए समिति स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे किसानों को तकनीकी प्रक्रिया की बेहतर समझ होगी और वे इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठा सकेंगे।

पारदर्शिता और दक्षता पर जोर

निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिला प्रशासन उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हों और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता का यह दौरा न केवल व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने का प्रयास था, बल्कि यह किसानों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। प्रशासन की सक्रियता और सतत निगरानी से उम्मीद है कि उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी, जिससे किसानों को समय पर और सुगमता से अपनी उपज बेचने में सुविधा मिलेगी।

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर समयबद्ध क्रियान्वयन करें सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

रीवा शहर में जल प्रदाय योजना एवं सीवरेज सिस्टम कार्यों की वृहद समीक्षा की
भोपाल- उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा शहर में संचालित जल प्रदाय योजना एवं सीवरेज सिस्टम से संबंधित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समय-सीमा तथा वित्तीय प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएँ, ताकि आम नागरिकों को समय पर सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे, आयुक्त श्री संकेत भोंडवे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने जल प्रदाय व्यवस्था के शेष सभी कार्य, विशेषकर ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण एवं जल वितरण नेटवर्क का विस्तार, आगामी वर्षा ऋतु से पहले हर स्थिति में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों के दौरान नागरिकों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित न हो, इसके लिए कार्यों को सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाए। आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर उन्होंने बल दिया।
     सीवरेज सिस्टम की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने शेष पाइपलाइन बिछाने के कार्य तथा हाउस सर्विस कनेक्शनों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवरेज नेटवर्क का समय पर पूर्ण होना शहरी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है, अतः इसमें किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने एसटीपी निर्माण कार्य को भी प्राथमिकता से पूर्ण करने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।

हरदा में युवक की संदिग्ध मौत: परिजनों का आरोप—हत्या कर कुएं में फेंका, जांच में लापरवाही पर उठे सवाल

हरदा- हरदा जिले के नकवाड़ा निवासी वीरेन्द्र पिता मीठ्ठूलाल उर्फ वीरू की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। परिजनों ने इस घटना को दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है और पुलिस प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
आवेदन के अनुसार, ग्राम नकवाड़ा निवासी वीरेन्द्र पिता मीठ्ठूलाल 17 अप्रैल 2026 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। परिजनों का कहना है कि मृतक अपने रिश्तेदारों के यहां गया हुआ था, जिसके बाद 19 अप्रैल की शाम को उन्हें फोन पर उसकी मौत की सूचना दी गई।
परिजन जब मौके पर पहुंचे, तब तक पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को अस्पताल भेजा जा चुका था। बाद में जानकारी मिली कि युवक का शव गांव के एक कुएं में मिला था।
परिजनों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मृतक को तैरना आता था, ऐसे में कुएं में डूबने से मौत होना संदिग्ध प्रतीत होता है। इसके अलावा शव पर चोट के निशान मिलने से हत्या की आशंका और मजबूत हो गई है।
आवेदन में परिजनों ने कुछ व्यक्तियों पर संदेह जताते हुए उनके नाम भी पुलिस को सौंपे हैं। इनमें शिवराम सोलंकी, परसराम सोलंकी, विनोद सोलंकी, संतोष सोलंकी, सुगम सोलंकी, सुंदरलाल सोलंकी, सन्नू सोलंकी, गोलू सरवन, सुरेश, बलिराम, रवी और बसंती बाई शामिल हैं।
परिजनों का आरोप है कि अब तक पुलिस द्वारा सभी आवश्यक गवाहों के बयान नहीं लिए गए हैं और न ही संदिग्धों से गहन पूछताछ की गई है। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले को लेकर क्षेत्र में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
अब इस संवेदनशील मामले में सभी की नजरें पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

अंत:करण : आत्मा की आवाज़ और जीवन का सच्चा मार्गदर्शक

मनुष्य का जीवन केवल बाहरी क्रियाओं और उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके भीतर एक गहरी, सूक्ष्म और शक्तिशाली चेतना कार्य करती है—इसी को अंत:करण कहा जाता है। यह वह आंतरिक शक्ति है जो हमें यह समझने में सहायता करती है कि क्या उचित है और क्या अनुचित। अंत:करण ही हमारे व्यक्तित्व की वह धुरी है, जिसके आधार पर हमारा आचरण, विचार और निर्णय निर्धारित होते हैं।
अंत:करण की मूल अवधारणा
भारतीय दार्शनिक परंपरा में अंत:करण को मनुष्य की आंतरिक संरचना का प्रमुख अंग माना गया है। यह चार तत्वों से मिलकर बना होता है—मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार।
• मन इच्छाओं और भावनाओं का केंद्र है, जो निरंतर संकल्प-विकल्प करता रहता है।
• बुद्धि निर्णय लेने और विवेक प्रदान करने का कार्य करती है।
• चित्त हमारे पिछले अनुभवों, स्मृतियों और संस्कारों का संग्रह है।
• अहंकार ‘मैं’ की पहचान और स्वत्व का अनुभव कराता है।
जब ये चारों तत्व संतुलित होते हैं, तब व्यक्ति का अंत:करण स्पष्ट, शांत और सशक्त बनता है।
अंत:करण का महत्व
अंत:करण मनुष्य का आंतरिक मार्गदर्शक है। यह किसी बाहरी नियम या कानून से अधिक प्रभावशाली होता है, क्योंकि इसकी आवाज़ भीतर से आती है।
जब हम कोई गलत कार्य करते हैं, तो अंत:करण हमें ग्लानि और बेचैनी का अनुभव कराता है। वहीं, अच्छे कर्म हमें संतोष, प्रसन्नता और आत्मशांति प्रदान करते हैं।
अंत:करण ही हमें सत्य, करुणा, प्रेम और ईमानदारी जैसे मानवीय मूल्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। यह हमारे व्यक्तित्व को निखारता है और हमें समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है।
अंत:करण और नैतिकता का संबंध
नैतिकता का वास्तविक आधार अंत:करण ही है। समाज के नियम बदल सकते हैं, लेकिन अंत:करण की आवाज़ स्थायी और सार्वभौमिक होती है। यह हमें केवल लाभ-हानि के आधार पर नहीं, बल्कि न्याय और सत्य के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
एक जागृत अंत:करण वाला व्यक्ति दूसरों के प्रति संवेदनशील होता है। वह अपने कर्मों की जिम्मेदारी समझता है और किसी भी स्थिति में अनैतिक मार्ग नहीं अपनाता। इसके विपरीत, जब अंत:करण दब जाता है, तो व्यक्ति स्वार्थ, लालच और अनैतिकता की ओर बढ़ने लगता है।
अंत:करण का विकास और शुद्धि
अंत:करण को सशक्त और निर्मल बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है। यह जन्म से पूर्ण विकसित नहीं होता, बल्कि जीवनभर के अनुभवों और संस्कारों से परिपक्व होता है।
• सत्संग और सद्विचार अंत:करण को शुद्ध और सकारात्मक बनाते हैं।
• ध्यान और आत्मचिंतन इसे जागृत करते हैं और आत्मबोध को बढ़ाते हैं।
• सत्कर्म और अनुशासन अंत:करण को स्थिर और दृढ़ बनाते हैं।
• ईमानदारी और सत्यनिष्ठा इसे और अधिक प्रखर बनाती हैं।
• नियमित आत्मविश्लेषण से व्यक्ति अपने दोषों को पहचानकर उन्हें सुधार सकता है, जिससे अंत:करण अधिक स्पष्ट और मजबूत होता है।
आधुनिक जीवन में अंत:करण की प्रासंगिकता
आज का युग तेज़ प्रतिस्पर्धा, भौतिक आकर्षण और त्वरित सफलता का युग है। ऐसे में व्यक्ति अक्सर बाहरी उपलब्धियों के पीछे भागते हुए अपने आंतरिक मूल्यों को नजरअंदाज कर देता है।
यहीं पर अंत:करण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची सफलता केवल धन, पद या प्रसिद्धि में नहीं, बल्कि आंतरिक संतोष और नैतिक संतुलन में निहित है।

अंत:करण ही हमें सही दिशा में बनाए रखता है और जीवन को सार्थक बनाता है।
अंत:करण मनुष्य के जीवन का वह अदृश्य मार्गदर्शक है, जो उसे सत्य, नैतिकता और आत्मबोध की ओर ले जाता है। यह न केवल हमारे व्यक्तित्व को सशक्त बनाता है, बल्कि समाज में सद्भाव और नैतिकता को भी बनाए रखता है।
इसलिए आवश्यक है कि हम अपने अंत:करण की आवाज़ को सुनें, उसे समझें और उसके अनुसार अपने जीवन को ढालें। जब अंत:करण शुद्ध और जागृत होता है, तब जीवन न केवल सफल होता है, बल्कि वास्तव में सार्थक और संतुलित भी बन जाता है।

Rural Tourism and Nari Vandan Transforming Madhya PradeshRising employment opportunities in villages; women becoming self-reliant and empowered

Madhya Pradesh has made remarkable progress in the tourism sector over the past few years, with rural tourism emerging as a key pillar of this growth. This model—offering close experiences of natural beauty, folk culture, traditions, and the simplicity of rural life—not only attracts tourists but also strengthens the rural economy. It has especially opened new avenues for women, giving a fresh direction to their empowerment. In this context, initiatives like “Nari Vandan” have the potential to make this transformation even more impactful and far-reaching.
Rural Tourism: A New Foundation for Development
The primary objective of rural tourism is to connect village culture, traditions, cuisine, handicrafts, and lifestyle with tourism. Many villages in Madhya Pradesh are now gaining recognition on the tourism map. Tourists not only enjoy the natural surroundings but also experience the lives of local communities by staying with them.
This model has created new sources of income in rural areas. Where employment opportunities were once limited, people are now earning through homestays, guide services, folk performances, handicraft sales, and traditional food offerings. This has reduced migration and promoted self-reliance at the local level.
Achievement in Rural Tourism: Three Villages Receive National Recognition
Madhya Pradesh has achieved another milestone in promoting rural tourism. On the occasion of International Tourism Day, three villages—Pranpur, Sawarvani, and Ladpura Khas—were honored in the “Best Tourism Village Competition 2024” organized by the Ministry of Tourism, Government of India. Pranpur received the award in the Craft category, while Sawarvani and Ladpura Khas were recognized in the Responsible Tourism category.
The competition aims to promote tourism in rural areas and preserve cultural and natural heritage. This recognition highlights the rich traditions, cleanliness, community participation, and commitment to sustainable development in these villages.
Sawarvani attracts tourists with its natural beauty, clean environment, and authentic rural experiences, while Pranpur near Chanderi is known for its weaving tradition and handicrafts. These villages offer visitors a chance to closely experience local culture, cuisine, and art.
This recognition is a matter of pride not only for these villages but also positions Madhya Pradesh as a strong and inspiring model in rural tourism.
A New Identity of Women Empowerment: ‘MPT Amaltas’ and Pranpur Café
Madhya Pradesh is continuously setting new benchmarks in women empowerment. ‘MPT Amaltas’ in Pachmarhi is the state’s first hotel entirely operated by women, showcasing their leadership, capability, and self-reliance. Women’s participation in tourism is strengthening both their economic independence and their social standing.
Similarly, a women-run café in Pranpur village of Chanderi is emerging as an inspiring initiative. It is providing employment to rural women and giving a new direction to local tourism. Visitors enjoy local cuisine, especially the Bundeli thali, while experiencing rural life and the traditions of weavers.
These initiatives have enhanced women’s income, confidence, and social participation, proving that with the right opportunities and support, women can excel in every field. These efforts are not only a matter of pride for Madhya Pradesh but also a source of inspiration for the entire country.
Expanding Opportunities for Women
Rural tourism has had the most positive impact on women. Traditionally confined to household roles, they are now actively participating in economic activities—running homestays, preparing local cuisine, and showcasing their talent through handicrafts and folk art.
This participation signifies a broader social transformation. Women are gaining confidence, developing decision-making skills, and strengthening their role in families and society. Through Self Help Groups (SHGs), they are working collectively, increasing both income and recognition.
Joint Initiative by Police and Tourism Department for Women’s Safety
Ensuring women’s safety has become a top priority in Madhya Pradesh. A joint initiative by the police and tourism department is making tourist destinations safer and more attractive. With the vision of “Safe Women – Empowered Madhya Pradesh,” the state is moving toward establishing itself as a safe tourist destination for women.
Measures such as active police deployment, women help desks, CCTV surveillance, and quick-response systems are being strengthened. Training is also being provided to guides, hotel staff, and local communities to ensure sensitivity and prompt assistance in emergencies.
A safe environment will encourage more women to participate in tourism, strengthening both social empowerment and the state’s economy. This initiative boosts women’s confidence and builds Madhya Pradesh’s identity as a trusted destination for women travelers.
Nari Vandan: Accelerating Empowerment
“Nari Vandan” is not just a program but a comprehensive campaign for women’s dignity and empowerment. It encourages women to move forward in all spheres of life. When integrated with rural tourism, its impact becomes even more extensive.
Through this initiative, women can receive training, financial support, and employment opportunities. They can develop skills in hospitality, communication, management, and entrepreneurship, enabling them to manage businesses effectively and explore new opportunities.
Economic Empowerment and Self-Reliance
The combined impact of rural tourism and Nari Vandan is making women economically independent. As women begin to earn, their self-esteem grows, and they actively participate in family financial decisions.
This also strengthens the rural economy. Villages are becoming hubs of economic activity, and local products such as handicrafts, textiles, and organic foods are gaining new markets, promoting the “Vocal for Local” initiative.
Role of Women in Cultural Preservation
The rural culture of Madhya Pradesh is rich and diverse, with traditions like folk songs, dances, and handicrafts. Women play a vital role in preserving and promoting this heritage.
Through rural tourism, as visitors experience these traditions, their importance increases. Women are not only keeping these traditions alive but also passing them on to future generations, ensuring the preservation of cultural heritage.
Challenges and Opportunities
Despite significant progress, challenges such as lack of training, limited market access, digital illiteracy, and inadequate infrastructure remain in some areas.
Addressing these challenges requires continuous efforts and collaboration between the government, private sector, and society. With proper planning, Madhya Pradesh can become a national model for rural tourism and women empowerment.
The synergy between rural tourism and Nari Vandan in Madhya Pradesh presents a powerful story of positive transformation. It is not only creating employment opportunities but also empowering women and making them self-reliant.
This initiative is strengthening the state’s economy and bringing positive social change. By providing respect and opportunities to women, Madhya Pradesh has carved out a new identity. With continued efforts, rural tourism and Nari Vandan can together become an inspiring model of development and empowerment for the entire nation.
By Journalist Syed Asim Ali.

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने भर्ती प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ समय पर करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल

नर्सिंग कॉलेजों की छात्राओं की नियुक्ति में उपलब्ध सभी जिलों का विकल्प करें प्रदान,
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की वृहद समीक्षा की
भोपाल-  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, लंबित प्रस्तावों एवं आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाहियों की प्रगति की समीक्षा कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ समय पर पूर्ण किया जाए, जिससे आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।
     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बुधनी, दमोह एवं छतरपुर मेडिकल कॉलेजों में टीचर्स के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य संस्थाओं में लंबित आउटसोर्स पदों पर भर्ती के लिए सभी जिलों में आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा। उन्होंने नर्सिंग कॉलेजों में नर्सिंग शिक्षकों के 59 राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए मांग पत्र लोक सेवा आयोग को शीघ्र प्रेषित करने के निर्देश भी दिए गए। जिला चिकित्सालय राजगढ़ में रैन बसेरे के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की स्वीकृति की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित नर्सिंग कॉलेजों की उत्तीर्ण छात्राओं को नियुक्ति में सभी जिलों का विकल्प प्रदान करने संबंधी कार्यवाही भी प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए।
     उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने परियोजना परीक्षण समिति एवं व्यय वित्त समिति को भेजे जाने वाले प्रस्तावों की वृहद समीक्षा की। उन्होंने नवीन स्वास्थ्य संस्थाओं की स्वीकृति एवं उन्नयन, सागर में कैंसर अस्पताल और सिंगरौली में अस्पताल उन्नयन के प्रस्ताव के संबंध में आवश्यक कार्यवाही की पूर्ति के निर्देश दिए। कैबिनेट अनुमोदन के लिए एयर एम्बुलेंस संचालन में नई शर्तों का समावेश, शव वाहन के संभागीय संचालन की अनुमति, विशेषज्ञों की सीधी भर्ती, 16 जिला अस्पतालों में नए पदों का सृजन, सी.सी.एच.बी. अंतर्गत पदों की स्वीकृति के प्रस्तावों को आवश्यक औपचारिकताओं की पूर्ति कर शीघ्र अग्रेषित करने के लिए कहा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने चिकित्सकों की पदोन्नति के लिए लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 से छूट, विशेषज्ञों की सीधी भर्ती के लिए अनुमति, नर्सिंग ऑफिसर एवं ट्यूटर के 2 हजार 317 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने और अस्पताल सहायकों के 1200 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित करने हेतु आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
     उप मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज रीवा एवं सतना के भ्रमण के दौरान आए विषयों पर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रीवा में आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान को तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, जिला चिकित्सालय मैहर के लिए भूमि चिन्हांकन प्रक्रिया पूर्ण कर आगामी कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के लिए कहा। बैठक में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन श्री संजय कुमार शुक्ल उपस्थित थे।

रूरल टूरिज्म और नारी वंदन से बदल रहा मध्यप्रदेश, गाँवों में बढ़े रोजगार के अवसर, महिलाएँ बन रहीं आत्मनिर्भर और सशक्त

विशेष लेख - पत्रकार सय्यद असीम अली 
मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में जिस तरह से प्रगति की है, उसमें रूरल टूरिज्म (ग्रामीण पर्यटन) एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। प्राकृतिक सौंदर्य, लोक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन की सादगी को करीब से अनुभव कराने वाला यह पर्यटन मॉडल न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह एक नया अवसर बनकर सामने आया है, जिसने उनके सशक्तिकरण को एक नई दिशा दी है। इसी कड़ी में “नारी वंदन” जैसे कार्यक्रम इस बदलाव को और अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाने की क्षमता रखते हैं।
रूरल टूरिज्म: विकास का नया आधार
रूरल टूरिज्म का मुख्य उद्देश्य गाँवों की संस्कृति, परंपरा, खान-पान, हस्तशिल्प और जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ना है। मध्यप्रदेश के अनेक गाँव अब पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना रहे हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के साथ रहकर उनके जीवन को भी समझते हैं।
इस मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। पहले जहाँ रोजगार के अवसर सीमित थे, वहीं अब होम-स्टे, गाइड सेवा, लोक कला प्रदर्शन, हस्तशिल्प बिक्री और पारंपरिक भोजन जैसे कार्यों से ग्रामीणों को नियमित आय प्राप्त हो रही है। इससे पलायन में कमी आई है और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
ग्रामीण पर्यटन में मध्यप्रदेश की उपलब्धि: तीन गाँवों को राष्ट्रीय सम्मान
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित “बेस्ट टूरिज्म विलेज प्रतियोगिता 2024” में राज्य के तीन गाँव—प्रणपुर, सावरवानी और लाडपुरा खास—को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें प्रणपुर को क्राफ्ट श्रेणी में, जबकि सावरवानी और लाडपुरा खास को रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म श्रेणी में पुरस्कार मिला।
यह प्रतियोगिता ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक व प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस उपलब्धि से मध्यप्रदेश के गाँवों की समृद्ध परंपरा, स्वच्छता, सामुदायिक भागीदारी और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
सावरवानी गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण और ग्रामीण जीवन के अनुभव के लिए पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, वहीं चंदेरी के पास स्थित प्रणपुर अपनी बुनकरी परंपरा और हस्तशिल्प के लिए विशेष पहचान रखता है। यहाँ पर्यटकों के लिए स्थानीय संस्कृति, खान-पान और कला को करीब से जानने का अवसर मिलता है।
यह सम्मान न केवल इन गाँवों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि मध्यप्रदेश को ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में एक मजबूत और प्रेरणादायक मॉडल के रूप में स्थापित करता है।
महिला सशक्तिकरण की नई पहचान: ‘एमपीटी अमलतास’ और प्रणपुर का कैफे
मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। पचमढ़ी में शुरू हुआ ‘एमपीटी अमलतास’ राज्य का पहला ऐसा होटल है, जिसका संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। यह पहल महिलाओं की क्षमता, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। पर्यटन क्षेत्र में उनकी भागीदारी न केवल आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका को भी मजबूत कर रही है।
इसी कड़ी में चंदेरी के प्रणपुर गाँव में शुरू हुआ महिला संचालित कैफे भी एक प्रेरणादायक पहल है। यह कैफे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रहा है और स्थानीय पर्यटन को नई दिशा दे रहा है। यहाँ आने वाले पर्यटक स्थानीय व्यंजनों, विशेष रूप से बुंदेली थाली का आनंद लेते हुए ग्रामीण जीवन और बुनकरों की परंपरा को करीब से अनुभव कर रहे हैं।
इन पहलों से महिलाओं की आय, आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में वृद्धि हुई है। साथ ही, यह साबित हो रहा है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएँ हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। मध्यप्रदेश की ये पहलें न केवल राज्य के लिए गर्व का विषय हैं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।
महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार
रूरल टूरिज्म का सबसे सकारात्मक प्रभाव महिलाओं पर देखने को मिला है। परंपरागत रूप से घर तक सीमित रहने वाली महिलाएँ अब आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे होम-स्टे संचालित कर रही हैं, स्थानीय व्यंजन बनाकर पर्यटकों को परोस रही हैं, हस्तशिल्प और लोक कला के माध्यम से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर रही हैं।
महिलाओं की यह भागीदारी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी संकेत है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है और परिवार एवं समाज में उनकी भूमिका अधिक सशक्त हुई है। स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से महिलाएँ संगठित होकर काम कर रही हैं, जिससे उनकी आय और पहचान दोनों में वृद्धि हो रही है। 
महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त पहल
मध्यप्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पर्यटन स्थलों को और अधिक सुरक्षित एवं आकर्षक बनाने की दिशा में पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त पहल एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। “सुरक्षित महिला–सशक्त मध्यप्रदेश” के संकल्प के साथ राज्य अब खुद को “सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर वीमेन” के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस पहल के अंतर्गत प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पुलिस की सक्रिय तैनाती, महिला हेल्प डेस्क, सीसीटीवी निगरानी और त्वरित सहायता प्रणाली को सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही, पर्यटन विभाग द्वारा गाइड्स, होटल स्टाफ और स्थानीय नागरिकों को महिला सुरक्षा के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाया जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध हो सके।
महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनने से उनकी पर्यटन में भागीदारी बढ़ेगी, जिससे सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। परिणामस्वरूप, मध्यप्रदेश एक भरोसेमंद और “सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर वीमेन” के रूप में नई पहचान बना रहा है।
नारी वंदन: सशक्तिकरण को नई गति
“नारी वंदन” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक अभियान है। यह पहल महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। जब इस अभियान को रूरल टूरिज्म के साथ जोड़ा जाता है, तो इसका प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है।
नारी वंदन के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। उन्हें पर्यटन से जुड़े कौशल—जैसे आतिथ्य (hospitality), संचार (communication), प्रबंधन और उद्यमिता—में प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे वे न केवल अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से चला पाएंगी, बल्कि नए अवसर भी तलाश सकेंगी।
आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता
रूरल टूरिज्म और नारी वंदन का संयुक्त प्रभाव महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जब महिलाएँ अपनी आय स्वयं अर्जित करती हैं, तो उनका आत्मसम्मान बढ़ता है और वे अपने परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी भागीदारी करने लगती हैं।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। छोटे-छोटे गाँव अब आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन रहे हैं। स्थानीय उत्पादों—जैसे हस्तशिल्प, वस्त्र, जैविक खाद्य पदार्थ—को नया बाजार मिल रहा है। इससे “वोकल फॉर लोकल” की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सांस्कृतिक संरक्षण में महिलाओं की भूमिका
मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। लोकगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और परंपराएँ यहाँ की पहचान हैं। इन सभी के संरक्षण और संवर्धन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
रूरल टूरिज्म के माध्यम से जब पर्यटक इन परंपराओं को देखते और अनुभव करते हैं, तो इनका महत्व और बढ़ जाता है। महिलाएँ अपनी कला और संस्कृति को न केवल जीवित रख रही हैं, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक भी पहुँचा रही हैं। इससे सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।
चुनौतियाँ और संभावनाएँ
हालांकि रूरल टूरिज्म और महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी प्रगति हुई है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं। प्रशिक्षण की कमी, बाजार तक पहुँच, डिजिटल साक्षरता और बुनियादी ढाँचे की सीमाएँ अभी भी कई क्षेत्रों में देखी जाती हैं।
इन चुनौतियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। सरकार, निजी क्षेत्र और समाज के संयुक्त सहयोग से इन बाधाओं को कम किया जा सकता है। यदि सही दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो मध्यप्रदेश रूरल टूरिज्म और महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।
मध्यप्रदेश में रूरल टूरिज्म और नारी वंदन का समन्वय एक सकारात्मक परिवर्तन की कहानी प्रस्तुत कर रहा है। यह न केवल पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ा रहा है, बल्कि महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर भी बना रहा है।
इस पहल से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और सामाजिक संरचना में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है। महिलाओं को सम्मान और अवसर देकर मध्यप्रदेश ने पूरे देश में अपनी एक नई पहचान बनाई है।
आने वाले समय में यदि इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहे, तो नारी वंदन और रूरल टूरिज्म मिलकर न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए विकास और सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकते हैं।

रीवा एयरपोर्ट उन्नयन: विंध्य के विकास को मिलेगी नई उड़ान

भोपाल/रीवा- मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र को देश के प्रमुख हवाई नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल के निर्देश पर रीवा एयरपोर्ट के व्यापक उन्नयन की योजना तैयार की जा रही है, जिससे भविष्य में यहां से ए-320 जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव हो सकेगा। यह पहल न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सशक्त करेगी, बल्कि आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।

बैठक के दौरान विमानन विभाग के अधिकारियों ने एयरपोर्ट विस्तार की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें रनवे का विस्तार, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की स्थापना, टर्मिनल सुविधाओं का उन्नयन और सुरक्षा मानकों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। इन सुधारों के बाद रीवा एयरपोर्ट बड़े वाणिज्यिक विमानों के संचालन के लिए सक्षम बन सकेगा, जिससे देश के प्रमुख शहरों से सीधी हवाई सेवाएं शुरू होने की संभावना बढ़ेगी।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत और औद्योगिक संभावनाओं से समृद्ध है। ऐसे में यहां की अधोसंरचना को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से निवेश के नए अवसर खुलेंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

रीवा एयरपोर्ट का उन्नयन विंध्य क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो सकता है। वर्तमान में सीमित क्षमता के कारण बड़े विमानों का संचालन संभव नहीं है, लेकिन प्रस्तावित विस्तार के बाद यह बाधा दूर हो जाएगी। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन श्री संजय कुमार शुक्ल, आयुक्त विमानन श्री चंद्रमौली शुक्ला और अपर सचिव श्री धरणेन्द्र कुमार जैन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

समग्र रूप से, रीवा एयरपोर्ट का उन्नयन विंध्य क्षेत्र को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर विस्फोट कांड: खंडवा में आरोपी को 6 वर्ष सश्रम कारावास, रेलवे सुरक्षा में सख्ती का बड़ा संदेश

खंडवा- रेल सुरक्षा बल (RPF) थाना खंडवा द्वारा दर्ज एक संवेदनशील एवं गंभीर मामले में माननीय रेलवे न्यायालय खंडवा ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी साबिर उर्फ शब्बीर को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में कुल 6 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर विस्फोट कर सेना की विशेष ट्रेन को रोकने से जुड़ा था, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक चिंता उत्पन्न की थी।

घटना: सेना की विशेष ट्रेन को रोकने की साजिश

यह घटना 18 सितंबर 2024 की है, जब जम्मू-कश्मीर से कर्नाटक की ओर जा रही सेना की विशेष ट्रेन को खंडवा जिले के डोंगरगांव और सागफाटा स्टेशनों के बीच अप ट्रैक पर लगाए गए डेटोनेटर के विस्फोट के कारण अचानक रोकना पड़ा। यह घटना रेलवे सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गंभीर मानी गई, क्योंकि इसमें सेना की विशेष ट्रेन को निशाना बनाया गया था।

घटना के बाद तत्कालीन वरिष्ठ खंड अभियंता (रेलपथ) श्री आशुतोष कुमार की शिकायत पर RPF थाना खंडवा में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 06/2024 दर्ज किया गया। इसमें रेल संपत्ति (विधिविरुद्ध कब्जा) अधिनियम, 1966 एवं रेल अधिनियम, 1989 की प्रासंगिक धाराएं शामिल की गईं।

जांच: तकनीकी साक्ष्य और श्वान दस्ते की अहम भूमिका

मामले की जांच उप निरीक्षक श्री अरविंद कुमार सिंह को सौंपी गई। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर डेटोनेटर के फटे हुए टुकड़े एवं खोखे जब्त किए गए, जो जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हुए।

रेल सुरक्षा बल के श्वान दस्ते के प्रशिक्षित डॉग ‘जेम्स’ ने इस केस में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। जेम्स ने घटनास्थल से लगभग 8 किलोमीटर तक सर्चिंग कर आरोपी तक पहुंचने में पुलिस की मदद की। इसके आधार पर रेलवे कर्मचारी (ट्रैकमैन) साबिर उर्फ शब्बीर की पहचान हुई।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में खुफिया ब्यूरो (IB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), राज्य एटीएस एवं स्थानीय पुलिस भी शामिल रही, जिससे जांच और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हुई।

न्यायिक प्रक्रिया और सजा

जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर प्रकरण रेलवे न्यायालय खंडवा में प्रस्तुत किया गया। 28 अप्रैल 2026 को माननीय न्यायालय ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने विशेष रूप से इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि आरोपी स्वयं रेलवे कर्मचारी था, इसके बावजूद उसने रेलवे सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य किया।

सुनाई गई सजा:

धारा 3(अ), रेल संपत्ति अधिनियम 1966: 3 वर्ष सश्रम कारावास + ₹3000 अर्थदंड।

धारा 174(सी), रेल अधिनियम 1989: 1 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 अर्थदंड।

धारा 151, रेल अधिनियम 1989: 2 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 अर्थदंड।

कुल सजा: 6 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹5000 अर्थदंड।

जांच और अभियोजन टीम की सराहनीय भूमिका- इस मामले के सफल अनावरण और दोषसिद्धि में निरीक्षक RPF खंडवा श्री संजीव कुमार, जांच अधिकारी श्री अरविंद कुमार सिंह, सहायक उप निरीक्षक श्री जगदीश नेहेते, वरिष्ठ लोक अभियोजक श्री अजय सिंह एवं RPF श्वान दस्ते के डॉग ‘जेम्स’ की विशेष एवं सराहनीय भूमिका रही।

संदेश: रेलवे सुरक्षा से समझौता नहीं

यह फैसला रेलवे सुरक्षा के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को स्पष्ट करता है। खासकर जब मामला सेना की ट्रेन से जुड़ा हो, तो इस तरह की घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती हैं।

खंडवा में आया यह निर्णय न केवल अपराधियों के लिए सख्त चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और सजग हैं।

कर्मवीर विद्यापीठ बचाने खंडवा में जनजागरण, पंधाना विधायक छाया मोरे की पहल बनी मिसाल, विरासत बचाने उठी आवाज, शहर में एकजुट हुआ समाज

खंडवा- निमाड़ की ऐतिहासिक पहचान कर्मवीर विद्यापीठ को बंद किए जाने की आशंकाओं ने पूरे जिले में जनभावनाओं को आंदोलित कर दिया है। पत्रकार संगठनों से लेकर सामाजिक संस्थाओं तक, हर वर्ग इस मुद्दे पर एकजुट होकर सामने आ रहा है। सभी का मानना है कि यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि खंडवा की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है, जिसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा।
पंधाना विधायक की सक्रियता ने दिखाई दिशा
इस संवेदनशील मुद्दे पर पंधाना विधायक छाया मोरे की सक्रियता और स्वप्रेरित पहल ने पूरे आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। बिना किसी राजनीतिक दबाव के, स्वयं आगे बढ़कर उन्होंने इस विषय को राज्य के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाया। उनकी यह पहल जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है, जिसकी व्यापक सराहना हो रही है।
सीएम से सीधी मुलाकात, मजबूती से रखी बात
विधायक मोरे ने भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की और उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का खंडवा परिसर कर्मवीर विद्यापीठ, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रख्यात पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि से जुड़ी अमूल्य धरोहर है।
“माखन दादा” की विरासत सहेजना नैतिक दायित्व
विधायक मोरे ने मुख्यमंत्री के समक्ष जोरदार तरीके से यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस संस्थान को बंद करना न केवल निमाड़ के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय होगा, बल्कि यह माखन दादा की ऐतिहासिक विरासत के प्रति भी उपेक्षा होगी। उन्होंने मांग की कि खंडवा परिसर को यथावत संचालित रखा जाए और यहां सर्वसुविधायुक्त स्थायी भवन निर्माण की दिशा में शीघ्र कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री का सकारात्मक आश्वासन
इस महत्वपूर्ण पहल का परिणाम भी सकारात्मक रूप में सामने आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए विधायक मोरे को आश्वस्त किया कि इस मामले में संवेदनशीलता के साथ विचार कर उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि क्षेत्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
जनभावनाओं को मिला मजबूत नेतृत्व
खंडवा में चल रही इस मुहिम को विधायक छाया मोरे के नेतृत्व ने नई दिशा और मजबूती प्रदान की है। पत्रकार संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी उनकी इस पहल की सराहना करते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधि यदि इसी तरह सक्रिय रहें, तो क्षेत्र की बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है।
आंदोलन की चेतावनी, पर उम्मीद भी कायम
सामाजिक संगठनों ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि इस संस्थान को बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो व्यापक जनआंदोलन होगा। हालांकि मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख के बाद अब लोगों में उम्मीद भी जगी है कि सरकार खंडवा की इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए ठोस निर्णय लेगी।
निमाड़ की पहचान, भविष्य की नींव
कुल मिलाकर कर्मवीर विद्यापीठ अब केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि निमाड़ की पहचान और युवाओं के भविष्य की नींव बन चुका है। ऐसे में इसे बचाने की यह मुहिम जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसमें विधायक छाया मोरे की भूमिका एक निर्णायक कड़ी के रूप में सामने आई है।

खंडवा में किसान कल्याण वर्ष 2026 अभियान: 0% ब्याज ऋण, 3 लाख तक लोन से किसानों को नई संजीवनी

छनेरा सहकारी समिति का विशेष सदस्यता अभियान जारी, 15 मई तक मिलेगा लाभ; खेती के साथ पशुपालन व अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा

खंडवा- जिले में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से “किसान कल्याण वर्ष 2026” अभियान तेजी से संचालित किया जा रहा है। के मार्गदर्शन में बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को सस्ती और सुलभ वित्तीय सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर की गई, जो 14 अप्रैल से 15 मई तक जारी रहेगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को सहकारी तंत्र से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

किसानों को मिल रही प्रमुख सुविधाएं

अभियान के तहत किसानों को कई लाभकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं—

  • 0% ब्याज पर ऋण सुविधा।
  • 3 लाख रुपये तक का आसान लोन।
  • समय पर खाद (उर्वरक) की उपलब्धता।
  • पशुपालन, मत्स्य पालन, ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरणों के लिए ऋण।

इन योजनाओं से किसानों को खेती के साथ-साथ आय के अन्य स्रोत विकसित करने में मदद मिल रही है।

प्रबंधक ने दी जानकारी

बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित छनेरा के प्रभारी प्रबंधक श्री दीपक जोशी ने बताया कि “किसान कल्याण वर्ष 2026 अभियान के तहत अधिक से अधिक किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से किसानों को 0% ब्याज पर ऋण, 3 लाख रुपये तक लोन और समय पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन एवं कृषि उपकरणों के लिए भी आसान ऋण सुविधा दी जा रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।”

सहकारिता से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को सस्ती दरों पर ऋण और संसाधन उपलब्ध होने से उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

किसानों के लिए सुनहरा अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर है। कम ब्याज दर और आसान प्रक्रिया के कारण किसान बिना आर्थिक दबाव के खेती और अन्य व्यवसायों में निवेश कर सकते हैं।

खंडवा जिले में चल रहा “किसान कल्याण वर्ष 2026” अभियान किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। सहकारिता, सस्ती वित्तीय सहायता और आधुनिक कृषि दृष्टिकोण के माध्यम से यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर को विकास का बड़ा पैकेज: सड़कों से आजीविका तक, 8000 करोड़ से अधिक की योजनाओं से बदलेगी तस्वीर

श्रीनगर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बोले—तेजी से होगा काम, दिखेगा बदलाव

श्रीनगर- जम्मू-कश्मीर के समग्र विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे, ग्रामीण आजीविका और कृषि क्षेत्र में एक साथ कई बड़ी घोषणाएं की हैं। श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत 3566 करोड़ रुपये की सड़कों की स्वीकृति का पत्र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सौंपा। इसके साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए 4568.23 करोड़ रुपये की मदर सैंक्शन जारी की गई, जिससे कुल मिलाकर 8000 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को हरी झंडी मिली है।

ग्रामीण कनेक्टिविटी: विकास की पहली सीढ़ी

PMGSY-IV के तहत स्वीकृत सड़क परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ेंगी। बेहतर सड़क नेटवर्क से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान होगी। इससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि “हर गांव को सड़क से जोड़ना ही वास्तविक विकास का आधार है।”

महिला सशक्तिकरण को मिली मजबूती

दीनदयाल अंत्योदय योजना—राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत जारी 4568.23 करोड़ रुपये की राशि देशभर के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाएगी।

इस पहल से लाखों महिलाओं को स्वरोजगार, छोटे उद्योग और वित्तीय स्वतंत्रता के नए अवसर मिलेंगे। जम्मू-कश्मीर में भी महिला समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कृषि क्षेत्र में नई रणनीति

कृषि विकास को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, क्लीन प्लांट प्रोग्राम और वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

विशेषज्ञों की टीम गांव-गांव जाकर किसानों को आधुनिक खेती के तरीके सिखाएगी, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

“दिल और दिल्ली दोनों खुले हैं”

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भावनात्मक संदेश देते हुए कहा कि कश्मीर के विकास के लिए “दिल के दरवाजे भी खुले हैं और दिल्ली के दरवाजे भी।” यह बयान केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता और सहयोग की भावना को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का भरोसा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि एक ही चरण में 8000 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति मिलना ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा, जिससे जम्मू-कश्मीर के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

बदलेगी जम्मू-कश्मीर की विकास तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क, आजीविका और कृषि क्षेत्र में एक साथ किए जा रहे निवेश से जम्मू-कश्मीर में समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह पहल न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि रोजगार, आय और सामाजिक स्थिरता को भी नई दिशा देगी।

केंद्र सरकार की यह बहुआयामी पहल जम्मू-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ाने का संकेत है। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी विकास के नए मानक स्थापित कर सकता है।

फोकटपुरा सड़क हादसा: एक मौत, कई सवाल — सड़क सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर प्रश्न

खंडवा (खालवा क्षेत्र)- खंडवा जिले के खालवा थाना अंतर्गत फोकटपुरा क्षेत्र में सोमवार रात हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि क्षेत्र में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में ग्राम संदलपुर निवासी 42 वर्षीय मेवालाल पिता अभय परते की मौके पर ही मौत हो गई।

हादसे की भयावह तस्वीर

यह दुर्घटना 27 अप्रैल 2026 को रात लगभग 8:45 बजे मैन रोड फोकटपुरा स्थित पेट्रोल पंप के सामने हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि मेवालाल को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

हालांकि दुर्घटना के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है, लेकिन प्रारंभिक आशंका है कि यह किसी तेज रफ्तार वाहन की टक्कर का परिणाम हो सकता है। पुलिस इस पहलू सहित अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, लेकिन जवाब अभी बाकी

घटना की सूचना मिलते ही चौकी रोशनी पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मर्ग क्रमांक 29/2026 के तहत धारा 194 BNSS में प्रकरण दर्ज किया गया है।
कायमीकर्ता के रूप में राजेश ठाकरे और महेश परमार के नाम दर्ज हैं, जबकि आरक्षक उमेश चौहान द्वारा सूचना को आधिकारिक रूप दिया गया।

शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

एक और जिंदगी खतरे में, मानवता की मिसाल भी सामने आई

इस हादसे में एक मोटरसाइकिल सवार महिला भी घायल हुई। गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय निवासी वीरेन्द्र सिंह भाटी ने बिना देर किए अपनी निजी वाहन से महिला को रोशनी स्थित शासकीय अस्पताल पहुंचाया।
यह घटना जहां एक ओर सड़क सुरक्षा की लापरवाही को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर समाज में जीवित मानवता की मिसाल भी पेश करती है।

बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं: सिस्टम और समाज दोनों जिम्मेदार

फोकटपुरा जैसे व्यस्त मार्गों पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं यह संकेत देती हैं कि समस्या केवल एक हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संकट का रूप ले चुकी है।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना
  • सड़क संकेतों और स्ट्रीट लाइट की कमी
  • यातायात नियमों के प्रति उदासीनता
  • संवेदनशील स्थानों पर पुलिस निगरानी का अभाव

यदि समय रहते इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।

परिवार और गांव में शोक, प्रशासन से मांग तेज

मेवालाल की असमय मृत्यु ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्राम संदलपुर में शोक का माहौल है और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फोकटपुरा जैसे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ठोस सुरक्षा उपाय किए जाएं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क सुरक्षा के प्रति गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आम होते जाएंगे।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय सतर्क रहें, गति सीमा का पालन करें और यातायात नियमों को गंभीरता से लें।

वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा।

एक हादसा, कई सबक

फोकटपुरा की यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—प्रशासन, समाज और हर वाहन चालक के लिए।
सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही भी किसी की जिंदगी छीन सकती है।

अब जरूरत है कि इस घटना को एक सबक के रूप में लिया जाए और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर सख्ती—इंदौर जोन में आईजी अनुराग की समीक्षा बैठक में दिए गए व्यापक निर्देश

इंदौर- इंदौर जोन (ग्रामीण) में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक द्वारा संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में निमाड़ रेंज के डीआईजी सहित इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी जिलों के पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।

बैठक में वर्ष 2025 के दौरान घटित अपराधों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आईजी ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण के लिए केवल आंकड़ों का विश्लेषण ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यवाही और सतत मॉनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शरीर संबंधी अपराध, संपत्ति संबंधी अपराध, महिला अपराध, चिन्हित अपराधों तथा साइबर फ्रॉड जैसे मामलों के लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर समय-सीमा में निराकृत करने के निर्देश दिए।

महिला संबंधी अपराधों पर विशेष गंभीरता व्यक्त करते हुए आईजी ने कहा कि ऐसे मामलों में शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप त्वरित जांच पूर्ण कर समय पर चालान प्रस्तुत किया जाए, ताकि आरोपियों को शीघ्र सजा मिल सके। उन्होंने न्यायालय में लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग कर दोषसिद्धि दर बढ़ाने पर भी जोर दिया।
संपत्ति संबंधी अपराध—जैसे चोरी, वाहन चोरी और लूट—पर नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने के निर्देश दिए गए। आईजी ने कहा कि इन अपराधों में संलिप्त आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और अधिक से अधिक मशरूका बरामद किया जाए। साथ ही, भीड़भाड़ वाले बाजारों और संवेदनशील स्थानों पर जनसहयोग से सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, रात्रि एवं प्रभात गश्त तथा पूर्व में चोरी के मामलों में संलिप्त आरोपियों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर चोरी की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए आईजी अनुराग ने के प्रभावी संचालन पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि थानों में तकनीकी रूप से दक्ष पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए और डिजिटल फ्रॉड से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई कर पीड़ितों को राहत प्रदान की जाए। साथ ही आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल, कॉलेज, सार्वजनिक स्थलों और सोशल मीडिया के माध्यम से निरंतर अभियान चलाने पर जोर दिया।

बैठक में एनडीपीएस एक्ट, एससी/एसटी एक्ट तथा अन्य गंभीर अपराधों की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। आईजी ने कहा कि अनुसंधान कार्य में गुणवत्ता बनाए रखते हुए समय-सीमा का पालन किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

इसके अलावा, लंबित शिकायतों, सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों और जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन की समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

आईजी ने माइक्रो बीट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि इसके माध्यम से गुंडा, निगरानी बदमाशों और संदिग्ध व्यक्तियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया जाए, जिससे अपराधों की रोकथाम में मदद मिल सके। साथ ही लंबे समय से लंबित स्थायी वारंटों की तामिली के लिए विशेष टीमें गठित कर कार्रवाई तेज करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के अंत में आईजी अनुराग ने आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधिकारियों को सतर्कता, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए हर स्तर पर समन्वय, अनुशासन और सक्रियता जरूरी है।

यह समीक्षा बैठक इंदौर जोन में अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश की ‘बाग प्रिंट’ कला को पेरिस में मिलेगा वैश्विक मंच, अन्तर्राष्ट्रीय मेले 'फोयर डे पेरिस' में होगी प्रदर्शित

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय कला को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिये निरंतर प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश की विशिष्ट 'बाग प्रिंट' कला को फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित मेले ‘’फ़ोयर डे पेरिस”  में प्रदर्शित किया जायेगा। यह मेला 30 अप्रैल से 11 मई 2026 तक पेरिस के पोर्टे डे वर्साय प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित किया जाएगा। केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा देशभर से चयनित पांच श्रेष्ठ शिल्पकारों में प्रदेश के नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री को शामिल किया गया है। वे इस मेले में प्रदेश की ‘बाग प्रिंट’ कला का प्रतिनिधित्व करते हुए मास्टर क्राफ्ट्समैन के रूप में शामिल होंगे। 'बाग प्रिंट' हस्तशिल्प भौगोलिक संकेत (GI) के अंतर्गत संरक्षित है।
लाइव डेमोंस्ट्रेशन से रूबरू होंगे दर्शक
इस अन्तर्राष्ट्रीय मेले में बिलाल खत्री ‘बाग प्रिंट’ कला का लाइव प्रदर्शन करेंगे। पारंपरिक प्राकृतिक रंगों, नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स और हस्तनिर्मित तकनीकों के माध्यम से कपड़ों पर उभरती कलाकृतियों को अन्तर्राष्ट्रीय दर्शक प्रत्यक्ष देख सकेंगे। यह भारतीय हस्तशिल्प की गहराई और सौंदर्य को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा।
परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समावेश
इस विशेष प्रदर्शनी के लिए तैयार किए गए डिज़ाइन में भारतीय पारंपरिक शिल्प और आधुनिक वैश्विक सौंदर्यबोध का समन्वय किया गया है। यूरोपीय बाज़ार की पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई ये कृतियां ‘बाग प्रिंट’ को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देंगी।
’बाग प्रिंट’ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठ भूमि
‘बाग प्रिंट’ मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र की पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग कला है। बाग एक छोटा जनजातीय कस्बा है, जहां भील और भिलाला समुदाय निवास करते हैं और  प्राचीन बाघ गुफाएं भी स्थित हैं। इस कला की परंपरा खत्री समुदाय द्वारा लगभग 400 वर्ष पूर्व सिंध के लरकाना क्षेत्र से आकर स्थापित की गई मानी जाती है।
इस शिल्प में सूती और रेशमी कपड़ों को पारंपरिक प्राकृतिक प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। लोहे के संक्षारण, धवाड़ी फूल और मायरोबालन के मिश्रण के साथ-साथ फिटकरी और एलिज़ारिन का उपयोग किया जाता है। कुशल कारीगरों द्वारा लकड़ी के ब्लॉक्स से डिज़ाइन तैयार कर उन्हें हाथ से भरा जाता है। तैयार वस्त्रों को बहते पानी में धोकर धूप में सुखाया जाता है, जिससे उन्हें विशिष्ट फिनिश प्राप्त होती है। ‘बाग प्रिंट’ में लाल और काले रंग के ज्यामितीय एवं पुष्पीय रूपांकन प्रमुख होते हैं।

स्वागत बोर्ड हटाने से भड़का किसान असंतोष, पुनः स्थापना को लेकर प्रशासन को चेतावनी

खंडवा- भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत, जिला खंडवा की तहसील इकाई पुनासा द्वारा क्षेत्र में लगाए गए स्वागत बोर्ड को हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। संगठन ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को पत्र प्रेषित कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही, समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारतीय किसान संघ द्वारा प्रांत स्तर पर एक व्यापक योजना के अंतर्गत मालवा क्षेत्र की 115 तहसीलों में गांव एवं शहर स्तर पर स्वागत बोर्ड स्थापित किए जा रहे हैं। इसी योजना के तहत पुनासा तहसील में ओंकारेश्वर मार्ग पर सड़क किनारे, बिजली के पोल के सहारे एक स्वागत बोर्ड लगाया गया था। इस बोर्ड का उद्घाटन 5 अप्रैल 2026 को प्रांत मंत्री के कर-कमलों द्वारा किया गया था, जो संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक पहल मानी जा रही थी।

हालांकि, कुछ समय बाद उक्त स्वागत बोर्ड को अज्ञात कारणों से हटा दिया गया। इस कार्रवाई से संगठन के पदाधिकारियों एवं स्थानीय किसानों में असंतोष की स्थिति निर्मित हो गई है। किसान संघ का कहना है कि बिना पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के इस प्रकार बोर्ड हटाना न केवल संगठन की भावना को आहत करता है, बल्कि प्रशासनिक समन्वय की कमी को भी दर्शाता है।

संगठन ने अपने पत्र में जिला कलेक्टर एवं तहसीलदार ओंकारेश्वर से आग्रह किया है कि हटाए गए स्वागत बोर्ड को उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि समय रहते इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भारतीय किसान संघ तहसील इकाई पुनासा आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

किसान संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आंदोलन की स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। संगठन के इस कड़े रुख को देखते हुए क्षेत्र में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है।

पत्र की प्रतिलिपि क्षेत्रीय सांसद एवं विधायक को भी प्रेषित की गई है, जिससे मामले में जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप सुनिश्चित हो सके और शीघ्र समाधान निकल सके।

अब सभी की नजर प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा किसान आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे क्षेत्रीय प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

रविवार, 26 अप्रैल 2026

15 दिन में पूरा होगा बायपास पुल सुधार, रीवा की ट्रैफिक व्यवस्था को मिलेगा नया रोडमैप — उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल

भोपाल/रीवा- मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए बायपास मार्ग पर स्थित पुल के मरम्मत कार्य को 15 दिनों के भीतर हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। नवीन सर्किट हाउस सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विकास कार्यों में देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बायपास पुल की खराब स्थिति के कारण भारी वाहनों का दबाव शहर के भीतर के मार्गों पर बढ़ गया है, जिससे रोजाना जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैवाहिक सीजन के चलते रात के समय भी यातायात का दबाव बढ़ गया है, ऐसे में बायपास मार्ग का सुचारू संचालन अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पुल सुधार के साथ-साथ बायपास रोड के चौड़ीकरण कार्य को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि शहर को जाम मुक्त बनाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित रूप से चालानी कार्यवाही जारी रखी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जाए, ताकि सड़कों पर अनावश्यक अतिक्रमण और अव्यवस्था को रोका जा सके। इसके साथ ही ऑटो रिक्शा के लिए निर्धारित पार्किंग स्थलों का चिन्हांकन कर उन्हें व्यवस्थित किया जाए, जिससे यातायात सुगम बन सके।

महानगरों की तर्ज पर विकसित होगी यातायात प्रणाली

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा तेजी से विकसित हो रहा शहर है और आने वाले समय में इसकी जनसंख्या और वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। ऐसे में आवश्यक है कि वर्तमान से ही शहर की यातायात व्यवस्था को महानगरों की तर्ज पर विकसित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक समग्र और व्यवहारिक ‘रोडमैप’ तैयार किया जाए, जिसमें रिंग रोड, बायपास, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक प्रबंधन के सभी पहलुओं को शामिल किया जाए।

उन्होंने प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को ‘फील्ड’ में सक्रिय रहने के निर्देश देते हुए कहा कि केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का निरीक्षण करें और उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। जनता को सुगम, सुरक्षित और निर्बाध यातायात उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

रीवा संभाग में तेज रफ्तार से होंगे बुनियादी ढांचे के कार्य

उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रीवा संभाग मध्यप्रदेश का पहला ऐसा संभाग बनने जा रहा है, जहां रिंग रोड सहित अन्य प्रमुख आधारभूत संरचना के कार्य रिकॉर्ड समय में पूर्ण किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि जनता को लंबे समय तक बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

बैठक में रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान, नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन, एडीएम सपना त्रिपाठी, उप मुख्यमंत्री के सहयोगी राजीव पांडेय सहित लोक निर्माण विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समयसीमा और गुणवत्ता पर सख्ती: पेयजल–सीवरेज कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं — उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल

भोपाल- मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने रीवा नगर निगम द्वारा संचालित पेयजल एवं सीवरेज निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि पेयजल और सीवरेज जैसी आधारभूत सुविधाएं सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन और सीवरेज लाइन निर्माण के दौरान आपसी समन्वय बनाए रखते हुए तकनीकी चुनौतियों का समाधान किया जाए, ताकि पहले से स्थापित संरचनाओं को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि निर्माण कार्यों के दौरान पेयजल पाइपलाइन को क्षति नहीं होनी चाहिए।

उप मुख्यमंत्री ने जयंती कुंज, बाबा घाट, बिछिया और विवेकानंद वार्ड में निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों को शीघ्र पूर्ण कर उनके लोकार्पण के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि सीवरेज लाइन के लिए खुदाई कार्य जहां संभव हो, मैन्युअल तरीके से कराया जाए, क्योंकि मशीनों से खुदाई करने पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है।

सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के कार्य की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए श्री शुक्ल ने निर्माण एजेंसियों को मैनपावर बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खुदाई के कारण प्रभावित सड़कों की तत्काल मरम्मत और डामरीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन को आवागमन में परेशानी न हो।

अमृत योजना के तहत हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाने पर जोर

बैठक में के अंतर्गत शहर के सभी वार्डों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइन विस्तार और जल शोधन संयंत्रों की कार्यक्षमता की समीक्षा भी की गई। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भीषण गर्मी को देखते हुए जलापूर्ति में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं आना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों के दौरान आमजन को कम से कम असुविधा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। जहां-जहां सड़कें खोदी गई हैं, वहां शीघ्र मरम्मत कर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए। साथ ही, तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए कार्यों की नियमित समीक्षा और समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए।

बैठक में नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, आयुक्त अक्षत जैन, श्री शैलेन्द्र शुक्ला सहित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि और नगर निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री ने सुना मन की बात कार्यक्रम का 133वां एपिसोड

भोपाल- उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मन की बात कार्यक्रम का 133वां एपिसोड सुना। इस दौरान गौरव पांडेय, वार्ड पार्षद राजीव शर्मा, डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, प्रदीप सोहगौरा, कुंवर बहादुर सिंह, विजय शुक्ल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि मन की बात प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रेडियो पर प्रसारित होने वाला एक मासिक कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को सुबह 11 बजे से प्रसारित होता है। इस कार्यक्रम को रेडियो के साथ-साथ दूरदर्शन, यूट्यूब सहित विभिन्न न्यूज पोर्टल्स पर भी लाइव सुना और देखा जा सकता है। 
यह कार्यक्रम हिंदी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में अनुवादित कर प्रसारित किया जाता है। इस कार्यक्रम की शुरूआत 3 अक्टूबर 2014 से हुई थी। तब से यह अनवरत रूप से जारी है। इस रविवार के कार्यक्रम को मिलाकर इसके 133वें एपिसोड पूरे हो चुके हैं। इस कार्यक्रम ने अप्रैल 2023 में अपने 100 एपिसोड पूरे किए थे।