भोपाल/खंडवा- कुँवर विजय शाह का राजनीतिक जीवन केवल सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्षों की उस भट्टी का परिणाम है जहाँ स्वयं को तपाकर उन्होंने जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 176-हरसूद से आने वाले कुँवर विजय शाह आज भारतीय राजनीति में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका जन्मदिन 1 नवंबर को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के दिन आता है, जो उनके प्रदेश के प्रति समर्पण को और भी विशिष्ट बनाता है।विजय शाह जी का सिद्धांत स्पष्ट है: "विजय शाह होना आसान नहीं, तपना पड़ता है सेवा और संघर्षों की भट्टी में।
"संगठन निष्ठा: संस्कारों का आधारकुँवर विजय शाह के व्यक्तित्व में सेवा का भाव छात्र जीवन में ही पड़ गया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में रहते हुए उन्हें शोभा पैठणकर, कमलजी पटेल, और कैलाश जी विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठों का सानिध्य मिला। संगठन शास्त्र में दक्षता हासिल कर उन्होंने कांग्रेस का गढ़ रही हरसूद विधानसभा को अपनी सेवा और जन कल्याण के लिए कर्मभूमि बनाया।संगठन के प्रति उनकी निष्ठा की पराकाष्ठा उस समय दिखाई दी जब लोकसभा चुनाव में उनके दिवंगत बड़े भाई अजय शाह जी ने भाजपा के टिकट से वंचित होने पर कांग्रेस से चुनाव लड़ा।
कुँवर विजय शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया था कि पार्टी संगठन उनके लिए उनकी सगी माँ से बढ़कर है, और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा प्रत्याशी ज्योति धुर्वे के पक्ष में पूर्ण मनोवेग से काम करने का आह्वान किया।
अपराजेयता का कीर्तिमान: हरसूद का अटूट किलाकुँवर विजय शाह ने 1990 में पहला चुनाव लड़कर कांग्रेसी दिग्गज आशाराम पेटू पटेल को हराया और हरसूद में भाजपा की जीत का श्रीगणेश किया। इसके बाद से लेकर 2023 तक, उन्होंने लगातार आठ बार विधायक बनकर अपनी अपराजेयता सिद्ध की है।राजनीतिक प्रभुत्व: 1990 में हरसूद विधानसभा में सेंधमारी के बाद कांग्रेस ने कई दिग्गज उतारे, लेकिन कोई भी कुँवर विजय शाह के विजय अभियान के रथ को रोकने में सफल नहीं हो सका।
अखंड जनादेश: 1993 में मोती मनाग पटेल, 1998 में किशोरी पटेल, 2003, 2008 में प्रेमलता कासडे, 2013 में सुरजभानु सोलंकी, 2018 और 2023 में सुखराम साल्वे को हराकर उन्होंने हरसूद के किले को भाजपा के भगवा ध्वज के नीचे बनाए रखा।
विभागीय नवाचार: विकास की दूरगामी सोचवर्ष 2004 में दीदी उमा भारती की सरकार में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से, उन्होंने हर सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और अपनी अमिट छाप छोड़ी।
1. जनजातीय कार्य एवं शिक्षा का विजनवैश्विक शिक्षा पहल: आदिमजाति कल्याण मंत्री रहते हुए, उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रों के लिए विदेशों में अध्ययन की योजना बनाई, जिसका लाभ आज हरसूद के गारबेड़ि जैसे दूरस्थ ग्रामों के छात्र भी ले रहे हैं।
शैक्षणिक विस्तार: उन्होंने आशापुर में 250 सीटर आवासीय विद्यालय, रोशनी में आवासीय विद्यालय, और हरसूद तथा खार में संदीपनी विद्यालय का निर्माण कराया। उनकी दूरदृष्टि का परिणाम है कि खालवा जैसी ग्राम पंचायत स्तर पर भी शासकीय महाविद्यालय स्थापित हुआ है।
अनुकरणीय परिवहन: शासकीय महाविद्यालय हरसूद में छात्राओं को आने-जाने की परेशानी से बचाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में निःशुल्क बस सेवा का संचालन प्रारंभ किया, जो पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन गया।
राष्ट्रीय भावना: स्कूल में उपस्थिति के समय 'जय हिंद' और 'वन्देमातरम' से हाजिरी लगाने की व्यवस्था उनके शिक्षा मंत्री रहते हुए शुरू हुई थी।
2. वन और ग्रामीण सशक्तिकरणलाभ का लाभांश: वनमंत्री रहते हुए, उन्होंने वनग्राम की वन सुरक्षा समितियों को केवल बोनस के स्थान पर शासकीय कटाई से होने वाले लाभ का सीधा लाभांश प्रदान करने की अभूतपूर्व योजना बनाई।
आत्मनिर्भरता केंद्र: आवलिया वनग्राम में वन विभाग का प्रशिक्षण केंद्र खोलकर 50 युवक और 50 युवतियों को ब्यूटी पार्लर, सिलाई और कंप्यूटर का आवासीय प्रशिक्षण दिलवाया, जिससे आदिवासी युवा स्वयं का रोजगार खोल सकें।
हरसूद: विकास की प्रयोगशाला- कुँवर विजय शाह के अथक प्रयासों से हरसूद में कृषि, सिंचाई और पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं।
सिंचाई का महाअभियान: हरसूद विधानसभा में कृषि का सिंचित रकबा बढ़ाने के लिए चार सिंचाई योजनाओं—भवानिया, खालवा, जामनी आशापुर और मुगल—पर तीव्रता से कार्य जारी है, जिससे सैकड़ों ग्रामों की कृषि भूमि सिंचित होगी।
पर्यटन का केंद्र: पुनासा डेम के बैकवाटर क्षेत्र में चारखेड़ा में तितली पार्क का निर्माण, वोटिंग की व्यवस्था, और सर्वसुविधायुक्त कॉटेज का निर्माण कराया गया है। वे टापुओं—नागरबेड़ा, बोरियामाल—को भी पर्यटन की अपार संभावनाओं के साथ विकसित कर रहे हैं।
बुनियादी ढांचा और न्याय: हरसूद के विस्थापित परिवारों को भूखंडों का मालिकाना हक दिलवाकर एक बड़ी और पुरानी समस्या का समाधान किया। डोटखेड़ा में घोड़ापछाड़ नदी पर नए पुल का निर्माण कराया, और आशापुर से बैतूल मार्ग का उन्नयन फोरलेन में तीव्र गति से चल रहा है।
खेल और स्वास्थ्य: खालवा में 100 बिस्तर के सिविल अस्पताल का निर्माण और खालवा व हरसूद विधानसभा क्षेत्रों में वातानुकूलित शव वाहिनी प्रदान करना, उनकी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति सजगता दर्शाता है। खालवा में साई (SAI) के माध्यम से सवा सौ करोड़ रुपये के खेल परिसर का निर्माण भी प्रस्तावित है।
संवेदनशीलता: जनता से जुड़े जननेताकुँवर विजय शाह संवेदनशील व्यक्ति हैं, जो अपनी सामाजिक संवेदना को सार्वजनिक जीवन में भी प्रदर्शित करते हैं:
बर्तन बैंक: आमजन को मांगलिक कार्यक्रमों में भोजन बनाने से लेकर खिलाने तक के बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए 4 बर्तन बैंक का संचालन उनके द्वारा किया जा रहा है।
रोजगार का अभिनव तरीका: एक युवा सैलून कार्यकर्ता को मंच पर अपनी दाढ़ी बनाने के लिए कहकर उन्होंने न केवल उसका व्यवसाय स्थापित करने में मदद की, बल्कि कई लोगों को चाय स्टाल लगाने के लिए गाड़ियाँ भी वितरित करवाईं।
किन्नर समाज के साथ संवाद: समाज में उपेक्षित थर्ड जेंडर के लोगों की समस्याओं को निकट से समझने के लिए वे अचानक उनके घर भोजन करने चले गए, जिससे समाज में समरसता का संदेश गया।
पारिवारिक विरासत: उनकी अनुपस्थिति में उनकी धर्मपत्नी, पूर्व महापौर खंडवा, श्रीमती भावना शाह जी, और उनके पुत्र, जिला पंचायत उपाध्यक्ष, कुँवर दिव्यादित्य शाह, भी उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को बखूबी निभाते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी व्यक्ति निराश होकर न लौटे।
कुँवर विजय शाह जी कहते हैं, "जनता ही मेरी ताकत है, जनता ही मेरी ऊर्जा है। जनता से मिला प्रेम और आत्मबल मुझे हर दिन श्रेष्ठ करने के लिए प्रेरित करती है।"उनका जीवन बताता है कि एक सफल राजनेता वह नहीं होता जो सिर्फ पद प्राप्त करे, बल्कि वह होता है जो हर परिस्थिति में ढलकर, हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाकर, जनता की ताकत को अपनी ऊर्जा बना ले।
जन्मदिन पर शुभकामनाओं सहित।
लेख- निलेश कौशल,
अधिवक्ता, नोटरी एवं विधि सलाहकार,
ग्रामतक न्यूज समूह, हरसूद जिला खंडवा।