बुधवार, 22 जुलाई 2026

मध्यप्रदेश में बस किराया वृद्धि की मांग ने पकड़ा जोर, 26 जुलाई को सागर में जुटेंगे प्रदेशभर के बस संचालक, आगे की रणनीति होगी तय

भोपाल- मध्यप्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लंबे समय से किराया संशोधन की मांग कर रहे बस संचालकों का कहना है कि सरकार की ओर से लगातार आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे प्रदेशभर के निजी बस संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी के मद्देनजर मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने 26 जुलाई को सागर में प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें भविष्य की रणनीति पर महत्वपूर्ण फैसला लिया जाएगा।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, बैठक में मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों से कम से कम पांच-पांच प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। प्रदेशभर से आने वाले बस संचालक मौजूदा परिवहन व्यवस्था, किराया संशोधन, सरकारी नीतियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बस किराया वृद्धि रहेगा। बस संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल की कीमतों, वाहनों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स, टायर, बीमा, टैक्स, परमिट शुल्क और कर्मचारियों के वेतन सहित लगभग सभी परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। इसके बावजूद बस किराए में अपेक्षित संशोधन नहीं किया गया, जिससे निजी परिवहन व्यवसाय आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

बैठक में 7 जुलाई को प्रकाशित राजपत्र में राष्ट्रीयकरण की स्कीम पर भी विस्तार से चर्चा होगी। बस संचालकों का मानना है कि इस विषय का निजी परिवहन व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सामूहिक राय बनाई जाएगी और आवश्यक होने पर सरकार के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

इसके अलावा परमिट संबंधी समस्याएं, कर व्यवस्था, परिवहन विभाग की नीतियां, बढ़ती संचालन लागत, यात्री सुविधाएं तथा निजी बस संचालकों के समक्ष आने वाली अन्य प्रशासनिक और व्यावसायिक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में इन सभी मुद्दों पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना है।

बस ओनर्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही किराया संशोधन और अन्य लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आगामी दिनों में आंदोलन सहित अन्य लोकतांत्रिक विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय 26 जुलाई को सागर में होने वाली प्रदेश स्तरीय बैठक में प्रतिनिधियों की राय के आधार पर लिया जाएगा।

परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल किराया वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश की निजी बस परिवहन व्यवस्था के भविष्य, सरकारी नीतियों और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने जैसे व्यापक विषयों पर भी महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है। ऐसे में इस बैठक पर बस संचालकों के साथ-साथ परिवहन विभाग और आम यात्रियों की भी नजर बनी हुई है।

सोमवार, 20 जुलाई 2026

साईं भक्ति की गूंज से गूंजेगा नागचुन: 13वें स्थापना दिवस पर पालकी यात्रा, महाआरती और विशाल आम भंडारे का होगा आयोजन

खंडवा- ग्राम नागचुन स्थित श्री साईं मंदिर में 21 जुलाई को 13वां स्थापना दिवस श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे दिन धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और आयोजन को लेकर साईं भक्तों एवं ग्रामीणों में उत्साह का वातावरण है। आयोजकों को उम्मीद है कि खंडवा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल होकर साईं बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

साईं परिवार के प्रवक्ता कमल नागपाल ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ सुबह 8 बजे बाबा की भव्य पालकी यात्रा से होगा। पालकी यात्रा श्री साईं मंदिर से प्रारंभ होकर ग्राम नागचुन के प्रमुख मार्गों से निकलेगी और पुनः मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन, साईं नाम संकीर्तन और जयकारों के साथ बाबा की पालकी के पीछे चलेंगे। पूरे मार्ग में भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा और स्वागत की भी तैयारियां की गई हैं।

उन्होंने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सेवा और प्रसाद वितरण की परंपरा को निभाते हुए दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक विशाल आम भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। आयोजन समिति ने भंडारे में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि सभी श्रद्धालु सुगमता से प्रसादी ग्रहण कर सकें।

शाम 7 बजे बाबा की महाआरती पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव से संपन्न होगी। महाआरती में साईं बाबा के भक्त एक साथ आरती कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। इसके बाद रात्रि 8 बजे स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में केक वितरण किया जाएगा। यह आयोजन मंदिर की स्थापना के 13 वर्ष पूर्ण होने की खुशी और साईं परिवार की एकजुटता का प्रतीक होगा।

आयोजन को सफल बनाने में साईराम ग्रुप, पांडव ग्रुप, सियाराम ग्रुप तथा ग्राम नागचुन के सभी ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समिति के सदस्यों ने पिछले कई दिनों से तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। मंदिर परिसर की सजावट, प्रकाश व्यवस्था, पालकी यात्रा का मार्ग, भंडारे की व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं।

आयोजन समिति ने खंडवा और आसपास के क्षेत्रों के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह स्थापना दिवस केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा और सद्भाव का भी संदेश देता है। साईं बाबा की शिक्षाओं—श्रद्धा और सबूरी—को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर वर्ष यह आयोजन पूरे उत्साह के साथ किया जाता है।

श्री साईं मंदिर नागचुन का स्थापना दिवस क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल हो चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं और भक्ति, सेवा तथा सामूहिक सहभागिता के इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। इस वर्ष भी आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर एक यादगार अनुभव प्राप्त हो सके।

रविवार, 19 जुलाई 2026

रीवा में शिक्षा अधोसंरचना को मिलेगी नई पहचान: उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मार्तण्ड स्कूल और सेंट्रल लाइब्रेरी निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

रीवा- मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शनिवार को रीवा में शासकीय मार्तण्ड उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 तथा निर्माणाधीन सेंट्रल लाइब्रेरी का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता से कोई समझौता न करने तथा सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मार्तण्ड विद्यालय के निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्माण एजेंसी को समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस दौरान पूर्व पार्षद सतीश सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल मिश्रा, प्राचार्य सुदामालाल गुप्ता एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इसके बाद उपमुख्यमंत्री ने बैजू धर्मशाला के समीप निर्माणाधीन सेंट्रल लाइब्रेरी के नए भवन का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भवन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर 15 अगस्त तक इसका लोकार्पण सुनिश्चित किया जाए।

श्री शुक्ल ने कहा कि आधुनिक समय की आवश्यकताओं को देखते हुए नई लाइब्रेरी में पारंपरिक पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं के साथ ई-लाइब्रेरी की भी समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट आधारित अध्ययन पर अधिक निर्भर हैं, इसलिए कंप्यूटर, डिजिटल संसाधन और प्रशिक्षित कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था भी समय पर सुनिश्चित की जाए।

निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने लाइब्रेरी में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह लाइब्रेरी विद्यार्थियों के लिए आधुनिक ज्ञान संसाधनों का महत्वपूर्ण केंद्र बने।

गौरतलब है कि सेंट्रल लाइब्रेरी का नया भवन पुनर्धनत्वीकरण योजना के अंतर्गत 23 करोड़ 69 लाख रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसमें 160 विद्यार्थियों के बैठकर अध्ययन करने की सुविधा, आधुनिक फर्नीचर, डिजिटल संसाधन तथा अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

निरीक्षण के दौरान पार्षद समीर शुक्ला, राजगोपाचारी मिश्रा, लोक निर्माण विभाग, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। यह परियोजना रीवा में शिक्षा एवं ज्ञान संसाधनों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नेफ्रों आईसीयू का निर्माण सात दिवस में पूरा करायें - उप मुख्यमंत्री

भोपाल- उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल रीवा का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने विभिन्न वार्डों में रोगियों से भेंटकर उनका हालचाल जाना। उप मुख्यमंत्री ने अस्पताल की दूसरी मंजिल में नेफ्रोंलाजी विभाग का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इसकी आईसीयू का सात दिन निर्माण करायें। कार्यपालन यंत्री लोकनिर्माण विभाग तथा अधीक्षक सुपरस्पेशलिटी अस्पताल दोनों कक्षों की साफ सफाई कराकर आवश्यक उपकरण और बेड तत्काल लगायें।
यहां 15 बेडों का आईसीयू यूनिट शुरू करायें। अस्पताल के नये भवन का निर्माण कार्य पूरा हो जाने पर लगभग 200 बेड की वृद्धि होगी। तब तक पूराने भवन में रोगियों के लिए आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करें। निरीक्षण के समय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव, संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा, डॉ. रोहन द्विवेदी, डॉ. बीडी त्रिपाठी तथा अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।

शनिवार, 4 जुलाई 2026

एमपी ट्रांसको के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर को मिला अंतरराष्ट्रीय ISO प्रमाणन, सूचना सुरक्षा में मध्यप्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान

जबलपुर- मध्यप्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के जबलपुर स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) को सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रतिष्ठित आईएसओ/आईईसी 27001:2022 अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश का एसएलडीसी देश के बड़े राज्य भार प्रेषण केंद्रों में यह महत्वपूर्ण प्रमाणन हासिल करने वाले अग्रणी केंद्रों में शामिल हो गया है।

ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एमपी ट्रांसको ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि यह प्रमाणन दिल्ली स्थित क्वालिटी एशिया सर्टिफिकेशन संस्था द्वारा विस्तृत मूल्यांकन, तकनीकी परीक्षण और स्वतंत्र ऑडिट के बाद प्रदान किया गया है। ऑडिट में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानक आईएसओ/आईईसी 27001:2022 की सभी आवश्यकताओं के अनुरूप पाया गया।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आज के दौर में विद्युत ग्रिड का संचालन पूरी तरह डिजिटल तकनीक, आधुनिक संचार नेटवर्क और रियल-टाइम डेटा पर आधारित है। ऐसे में साइबर सुरक्षा, सूचना सुरक्षा तथा परिचालन संबंधी आंकड़ों की गोपनीयता और उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश का स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर वैश्विक स्तर के सूचना सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए प्रदेश की विद्युत प्रणाली का सुरक्षित और विश्वसनीय संचालन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से न केवल प्रदेश की बिजली व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एमपी ट्रांसको की पहचान भी मजबूत होगी। भविष्य में स्मार्ट ग्रिड, डिजिटल पावर मैनेजमेंट और साइबर सुरक्षा से जुड़े नवाचारों को लागू करने में भी यह प्रमाणन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर, जबलपुर के अतिरिक्त मुख्य अभियंता एवं मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान केंद्र की सूचना सुरक्षा व्यवस्था का अत्यंत सूक्ष्मता से परीक्षण किया गया। इसके अंतर्गत नियमित एवं आउटसोर्स कर्मचारियों, कार्यप्रणालियों, सूचना परिसंपत्तियों, रियल-टाइम ग्रिड संचालन, विद्युत प्रणाली की शेड्यूलिंग, निगरानी एवं नियंत्रण प्रणाली, संचार नेटवर्क, आईएसडी एवं आईएसपी से संबंधित गतिविधियों के साथ-साथ संपूर्ण ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अवसंरचना का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

उन्होंने बताया कि सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक मानकों पर एसएलडीसी सफलतापूर्वक खरा उतरा, जिसके बाद यह अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन प्रदान किया गया। यह उपलब्धि भविष्य में सूचना सुरक्षा जोखिमों के बेहतर प्रबंधन, साइबर खतरों से सुरक्षा तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल तकनीक पर आधारित आधुनिक विद्युत प्रणाली में सूचना सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में एमपी ट्रांसको के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर को मिला यह अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन प्रदेश की तकनीकी क्षमता, दक्षता और वैश्विक मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। इससे मध्यप्रदेश के पावर सेक्टर की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

ऑपरेशन सहयोग बना भरोसे की मिसाल: खंडवा पुलिस ने 22 लाख रुपये के 123 गुम मोबाइल लौटाकर लौटाई लोगों की मुस्कान

खंडवा- आधुनिक दौर में मोबाइल फोन केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के निजी, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मोबाइल गुम हो जाना किसी भी व्यक्ति के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का कारण बनता है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित "ऑपरेशन सहयोग" अभियान के तहत खंडवा पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। अभियान के अंतर्गत एक बार फिर खंडवा पुलिस ने उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए करीब 22 लाख रुपये मूल्य के 123 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिए। इस उपलब्धि ने पुलिस की तकनीकी दक्षता, त्वरित कार्रवाई और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है।

शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम, खंडवा में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने स्वयं मोबाइल धारकों को उनके फोन सौंपे। वर्षों पहले गुम हुए मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ चुके कई लोगों के चेहरे पर उस समय खुशी साफ दिखाई दी, जब उनका मोबाइल उन्हें वापस मिला। उपस्थित नागरिकों ने खंडवा पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए इसे जनहित में एक सराहनीय पहल बताया।

तकनीक और समन्वय से मिली बड़ी सफलता

इस अभियान के तहत जिला साइबर सेल और जिले के सभी थाना प्रभारियों ने आपसी समन्वय स्थापित कर आधुनिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया। मोबाइलों की लोकेशन ट्रेस करते हुए उन्हें गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से बरामद किया गया। कई मामलों में मोबाइल अलग-अलग लोगों के पास पहुंच चुके थे, लेकिन पुलिस ने लगातार तकनीकी निगरानी और समन्वय के माध्यम से उन्हें सफलतापूर्वक रिकवर किया।

बरामद किए गए मोबाइलों में कुछ वर्ष 2023, 2024 और 2025 में गुम हुए थे, जबकि कुछ मोबाइल वर्ष 2026 में मात्र 20 से 25 दिन पहले ही खोए थे। इससे स्पष्ट होता है कि पुलिस पुराने मामलों को भी गंभीरता से लेकर लगातार कार्रवाई कर रही है।

जिले के विभिन्न थानों से जुड़े हैं मामले

रिकवर किए गए 123 मोबाइलों में थाना कोतवाली के 12, मोघट रोड के 4, पदमनगर के 4, छैगांव माखन के 9, जावर का 1, पिपलौद के 5, पंधाना के 6, धनगांव के 8, नर्मदानगर के 11, मांधाता के 16, मूंदी के 15, हरसूद के 10, खालवा के 18 तथा किल्लौद के 4 मोबाइल शामिल हैं। इन सभी की कुल अनुमानित कीमत लगभग 22 लाख रुपये है।

साइबर जागरूकता पर भी दिया गया विशेष जोर

मोबाइल वितरण कार्यक्रम केवल मोबाइल लौटाने तक सीमित नहीं रहा। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने उपस्थित नागरिकों को "सेफ क्लिक" अभियान के बारे में जानकारी देते हुए साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए। साथ ही मोबाइल गुम होने की स्थिति में तत्काल संचार साथी ऐप और CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल का उपयोग करने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि समय पर शिकायत दर्ज कराने और CEIR पोर्टल पर मोबाइल ब्लॉक कराने से मोबाइल की रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है तथा उसका दुरुपयोग भी रोका जा सकता है।

वर्ष 2026 में अब तक 46 लाख रुपये के 274 मोबाइल बरामद

खंडवा पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 में अब तक पुलिस ने 274 गुम हुए मोबाइल फोन, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 46 लाख रुपये है, बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंप दिए हैं। यह उपलब्धि न केवल जिले की साइबर सेल की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पुलिस आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

टीमवर्क बना सफलता की कुंजी

इस पूरी कार्रवाई में जिला साइबर सेल के प्रधान आरक्षक जितेंद्र राठौर, विक्रम वर्मा तथा आरक्षक सुनील लाडगे, रामनरेश यादव, उदयसिंह राठौर और नरेंद्र मुकाती सहित जिले के सभी थानों के तकनीकी रूप से प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सतत मेहनत, तकनीकी विशेषज्ञता और समर्पण के कारण इतने बड़े स्तर पर मोबाइल रिकवरी संभव हो सकी।

पुलिस और जनता के बीच बढ़ा विश्वास

"ऑपरेशन सहयोग" केवल गुम मोबाइल वापस दिलाने का अभियान नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी भी बनता जा रहा है। जिन लोगों को अपना खोया मोबाइल वापस मिला, उनके लिए यह केवल एक उपकरण की वापसी नहीं थी, बल्कि उससे जुड़ी यादें, महत्वपूर्ण दस्तावेज, संपर्क और व्यक्तिगत जानकारी भी सुरक्षित लौट आई। खंडवा पुलिस की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि तकनीक, संवेदनशीलता और प्रभावी पुलिसिंग के माध्यम से आम नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

गुरुवार, 2 जुलाई 2026

एमपी ट्रांसको ने बढ़ाई पारेषण क्षमता: श्यामपुर सबस्टेशन में 50 एमवीए का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर हुआ ऊर्जीकृत

जबलपुर- मध्यप्रदेश में विद्युत पारेषण व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और भविष्य की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने सीहोर जिले के 132 केवी श्यामपुर सबस्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक स्थापित कर उसे ऊर्जीकृत कर दिया है। इस नई क्षमता के जुड़ने से न केवल क्षेत्र में बढ़ते विद्युत भार का प्रभावी प्रबंधन संभव होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री राजेश शांडिल्य ने बताया कि प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को ध्यान में रखते हुए कंपनी चरणबद्ध तरीके से अपने पारेषण नेटवर्क का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। श्यामपुर सबस्टेशन में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे सबस्टेशन पर बढ़ते लोड का संतुलित वितरण किया जा सकेगा और विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में एमपी ट्रांसको प्रदेशभर में 417 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण का कार्य कर रही है। इनमें 400 केवी के 14 सबस्टेशन, 220 केवी के 88 सबस्टेशन तथा 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं। यह व्यापक पारेषण नेटवर्क प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक निर्बाध बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रदेश में वर्तमान समय में एमपी ट्रांसको के 1,053 पावर ट्रांसफार्मर संचालित हैं। इनमें 400 केवी स्तर के 41, 220 केवी स्तर के 220 तथा 132 केवी स्तर के 792 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। श्यामपुर सबस्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत होने के बाद कंपनी की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 85,298 एमवीए हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्युत पारेषण अवसंरचना का लगातार विस्तार प्रदेश में औद्योगिक विकास, कृषि क्षेत्र, शहरीकरण और घरेलू बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। एमपी ट्रांसको द्वारा समय-समय पर क्षमता वृद्धि और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से प्रदेश की बिजली व्यवस्था को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाया जा रहा है।

श्यामपुर सबस्टेशन में अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से सीहोर जिले और आसपास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी, ओवरलोड की समस्या कम होगी तथा भविष्य में बढ़ने वाली बिजली की मांग को भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा। यह उपलब्धि प्रदेश की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में एमपी ट्रांसको के सतत प्रयासों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

बुधवार, 1 जुलाई 2026

मेहनत की कमाई से दान करें, बेईमानी की नहीं: आध्यात्म की कसौटी पर दान की पवित्रता | "दान की महानता उसकी राशि में नहीं, बल्कि उसे कमाने के चरित्र में होती है।"

भारतीय संस्कृति में दान को केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और आत्मशुद्धि का माध्यम माना गया है। हमारे शास्त्रों में दान को यज्ञ, तप और सेवा के समान महत्व दिया गया है। वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता और पुराणों में बार-बार यह संदेश मिलता है कि दान तभी सार्थक है, जब वह ईमानदारी से अर्जित धन, निष्काम भावना और योग्य पात्र के लिए किया जाए। दान का उद्देश्य कभी भी प्रतिष्ठा अर्जित करना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर करुणा, त्याग और विनम्रता का विकास करना रहा है।

लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में दान की अवधारणा भी बदलती दिखाई दे रही है। आज दान कई बार सेवा से अधिक प्रचार, सामाजिक प्रभाव और प्रतिष्ठा का साधन बन गया है। बड़े-बड़े चेक, सम्मान समारोह, मंचों पर मालाएं और सोशल मीडिया पर तस्वीरें दान की भावना से अधिक उसके प्रदर्शन को महत्व देने लगी हैं। परिणामस्वरूप दान का आध्यात्मिक पक्ष धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है।

एक समय था जब यदि किसी व्यक्ति पर बेईमानी से धन कमाने का आरोप लगता था, तो वह सार्वजनिक रूप से दान देने में भी संकोच करता था। समाज भी ऐसे दान को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखता था। क्योंकि यह माना जाता था कि अधर्म से अर्जित धन धर्म का आधार नहीं बन सकता। लेकिन आज स्थिति उलटती दिखाई देती है। कई लोग अनैतिक साधनों से अर्जित संपत्ति का एक हिस्सा दान कर स्वयं को समाजसेवी, धर्मरक्षक और दानी कहलाने में गौरव का अनुभव करते हैं। मानो दान की राशि उनके कर्मों का प्रायश्चित नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान प्राप्त करने का माध्यम बन गई हो।

यही वह प्रवृत्ति है, जिस पर समय-समय पर व्यंग्य भी किया जाता है। व्यंग्य का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करना नहीं होता, बल्कि समाज को आईना दिखाना होता है। जब बेईमानी की कमाई से किया गया दान सम्मान का कारण बनने लगे और मेहनत की कमाई से किया गया छोटा-सा सहयोग अनदेखा रह जाए, तब यह चिंता का विषय बन जाता है।

आध्यात्म की दृष्टि से दान

सनातन दर्शन में दान की शुद्धता का आधार केवल दान की राशि नहीं, बल्कि उसकी कमाई की पवित्रता और दानदाता की भावना मानी गई है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने दान के तीन प्रकार—सात्त्विक, राजसिक और तामसिक—का वर्णन किया है।

सात्त्विक दान वह है जो कर्तव्य समझकर, बिना किसी प्रतिफल की इच्छा के, योग्य पात्र को और धर्मसम्मत कमाई से दिया जाए। इसके विपरीत केवल प्रसिद्धि, सम्मान या किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिए किया गया दान राजसिक माना गया है। वहीं अनुचित उद्देश्य, अनुचित समय या अपवित्र साधनों से किया गया दान तामसिक कहा गया है।

स्पष्ट है कि धर्म पहले कमाई की पवित्रता पर बल देता है, उसके बाद दान की मात्रा पर।

क्या दान से पाप समाप्त हो जाता है?

यह प्रश्न आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था। क्या बेईमानी, भ्रष्टाचार, छल, शोषण या अनैतिक तरीकों से अर्जित धन का एक हिस्सा दान कर देने मात्र से व्यक्ति नैतिक रूप से निर्दोष हो जाता है?

आध्यात्मिक दृष्टि से इसका उत्तर नकारात्मक है। दान पुण्य का कार्य अवश्य है, लेकिन वह अधर्म से अर्जित संपत्ति को धर्म में परिवर्तित नहीं कर सकता। गलत साधनों से कमाया गया धन यदि समाज सेवा में लगाया भी जाए, तब भी उसके अर्जन की प्रक्रिया नैतिक प्रश्नों से मुक्त नहीं हो जाती।

ईमानदारी का दान सबसे बड़ा दान

एक किसान, मजदूर, शिक्षक, कर्मचारी या छोटा व्यापारी अपनी मेहनत की कमाई से यदि किसी जरूरतमंद की सहायता करता है, तो उसका दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं होता, बल्कि उसके परिश्रम, त्याग और संवेदनशीलता का प्रतीक होता है। ऐसे दान में आत्मसम्मान भी होता है और आध्यात्मिक संतोष भी।

इसके विपरीत यदि दान केवल प्रतिष्ठा प्राप्त करने, आलोचना से बचने या सामाजिक छवि चमकाने का माध्यम बन जाए, तो उसका वास्तविक उद्देश्य समाप्त हो जाता है। धर्म में दान का मूल्य उसकी राशि से नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे चरित्र, नीयत और परिश्रम से निर्धारित होता है।

समाज को भी बदलनी होगी सोच

यह केवल दानदाता की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी परीक्षा है। यदि समाज केवल बड़ी राशि देखकर सम्मान देगा और यह नहीं पूछेगा कि धन किस प्रकार अर्जित किया गया है, तो अनजाने में वह गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा देगा।

सम्मान उस व्यक्ति का होना चाहिए जिसने ईमानदारी से कमाया और उसी कमाई का एक हिस्सा समाज के हित में लगाया। यदि सम्मान का आधार केवल धन होगा, तो चरित्र और नैतिकता का महत्व धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।

दान का भविष्य—चरित्र से तय होगा

आज आवश्यकता दान की राशि बढ़ाने की नहीं, बल्कि दान की पवित्रता बचाने की है। धर्म हमें पहले सत्य, ईमानदारी और न्यायपूर्ण जीवन जीना सिखाता है, उसके बाद दान की प्रेरणा देता है। इसलिए यह समझना होगा कि दान कभी भी बेईमानी का प्रायश्चित-पत्र नहीं हो सकता।

मेहनत की कमाई से दिया गया एक छोटा-सा अन्न का दाना, एक पुस्तक, एक वस्त्र, एक पौधा या एक रुपया भी उस विशाल दान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, जिसके पीछे छल, भ्रष्टाचार और अन्याय छिपा हो।

समाज को यह तय करना होगा कि वह मेहनत की कमाई का सम्मान करेगा या बेईमानी की कमाई के प्रदर्शन का। क्योंकि जिस दिन सम्मान का आधार चरित्र बन जाएगा, उसी दिन दान फिर से धर्म बन जाएगा, प्रदर्शन नहीं।