खंडवा, मध्यप्रदेश- खंडवा जिले की नर्मदा नगर थाना पुलिस ने एक संवेदनशील मामले में तेज़ और सटीक कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग बालिका को अपहरण और यौन शोषण के आरोपी के कब्जे से सकुशल बरामद कर लिया है। आरोपी को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार राय द्वारा जिलेभर में चलाए जा रहे "नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा और बरामदगी अभियान" के तहत की गई। अभियान का उद्देश्य है— गुमशुदा या अपहृत बालिकाओं को जल्द से जल्द खोज निकालना और उनके साथ हुए किसी भी प्रकार के अपराध पर तत्काल प्रभाव से कठोर कानूनी कार्रवाई करना।
घटना का संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण विवरण
दिनांक 1 अगस्त 2025 को एक नाबालिग बालिका घर से बिना बताए लापता हो गई। परिजनों द्वारा खोजबीन के बावजूद जब उसका कोई पता नहीं चला, तो 4 अगस्त को थाना नर्मदा नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। परिजन ने आशंका जताई कि कोई अज्ञात व्यक्ति उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है।
पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एफआईआर क्रमांक 194/25 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) में मामला दर्ज कर लिया और विवेचना प्रारंभ की। प्रारंभिक जांच के दौरान मिले सुरागों और तकनीकी सहायता से यह स्पष्ट हुआ कि बालिका को एक युवक अपने साथ इंदौर जिले की ओर ले गया है।
जांच में तकनीकी सहायता और टीमवर्क बना सफलता की कुंजी
जांच की कमान एसडीओपी मूंदी श्री मनोहर सिंह गवली और थाना प्रभारी विकास खिंची ने संभाली। उनके नेतृत्व में पुनासा चौकी प्रभारी उनि. राजेन्द्र सयदे, प्र. आर. 413 अरविंद बालके सहित एक विशेष टीम गठित की गई। सायबर सेल की सहायता से मोबाइल लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधियों को ट्रैक कर टीम ने आरोपी और बालिका की लोकेशन का पता लगाया।
30 अगस्त 2025 को टीम ने थाना सिमरोल (जिला इंदौर) से नाबालिग बालिका को आरोपी के कब्जे से सकुशल दस्तयाब कर लिया। आरोपी की पहचान विजय पिता मुन्नालाल पुरी (उम्र 23 वर्ष, जाति गोस्वामी, निवासी चौरल, जिला इंदौर) के रूप में हुई।
पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
पुलिस द्वारा बालिका के बयान लिए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया। बालिका के अनुसार आरोपी ने उसके साथ बलात्कार किया, जिसके बाद प्रकरण में पॉक्सो एक्ट की धाराएं 87, 64(2)m, और 5L/6 जोड़ी गईं। आरोपी विजय पुरी ने पूछताछ में अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर 31 अगस्त 2025 को विशेष न्यायालय खंडवा में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जिला जेल खंडवा भेजने के आदेश दिए।
पुलिस की सक्रियता और जिम्मेदारी की मिसाल
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जो सक्रियता देखने को मिली, वह काबिल-ए-तारीफ है। न सिर्फ़ जांच में तेजी दिखाई गई, बल्कि तकनीकी संसाधनों का कुशल उपयोग कर आरोपी तक पहुँचना और बालिका को सकुशल लाना अपने-आप में प्रशंसनीय है।
इस सराहनीय कार्रवाई में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका अहम रही, वे हैं:
निरीक्षक विकास खिंची (थाना प्रभारी, नर्मदा नगर)
उप निरीक्षक राजेन्द्र सयदे (चौकी प्रभारी, पुनासा)।
उप निरीक्षक सरोज मुवेल।
प्रधान आरक्षक: अरविंद बालके, जितेंद्र।
आरक्षक: नन्हीलाल यादव, अन्य।
सायबर सेल टीम: प्र. आर. जितेंद्र राठौर, विक्रम वर्मा, सुनील लांडके।
कानून व्यवस्था की मजबूती के साथ समाज को संदेश
इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक चेतावनी होती हैं, लेकिन जब पुलिस इतनी तत्परता से कार्रवाई करती है, तो यह न सिर्फ़ पीड़ित परिवार के लिए न्याय का मार्ग खोलता है, बल्कि समाज को यह भरोसा भी दिलाता है कि कानून और व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और जागरूक है।
यह भी ज़रूरी है कि अभिभावक, स्कूल, और समाज सभी मिलकर बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता के लिए प्रयास करें। टेक्नोलॉजी जहां सुविधा का माध्यम है, वहीं उसके दुरुपयोग से बच्चों को खतरे में डालने वाले लोग भी सक्रिय हैं।
खंडवा पुलिस की यह त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई एक आदर्श उदाहरण है कि यदि पुलिस, तकनीकी संसाधन और सामाजिक सहयोग मिलकर काम करें, तो सबसे कठिन मामलों में भी न्याय और सुरक्षा संभव है।