शनिवार, 30 मई 2026

गौ सेवा और प्राकृतिक खेती मानवता की सबसे बड़ी सेवा : उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल | प्राकृतिक खेती से मिट्टी को मिलेगा नया जीवन, किसानों और भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य की होगी रक्षा

रीवा- आधुनिक कृषि पद्धतियों के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच प्राकृतिक खेती आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। यदि धरती की उर्वरा शक्ति को बचाना है, पर्यावरण को सुरक्षित रखना है और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन देना है, तो प्राकृतिक खेती को व्यापक रूप से अपनाना होगा। यह विचार उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में आयोजित प्राकृतिक खेती जागरूकता कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक उत्पादन की दौड़ में वर्षों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया गया है, जिसके कारण मिट्टी की प्राकृतिक शक्ति कमजोर हो रही है। भूमि कठोर और अनुपजाऊ होती जा रही है तथा कृषि उत्पादों में मौजूद रासायनिक तत्व मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज अनेक नई और गंभीर बीमारियों के पीछे खाद्यान्न, फल एवं सब्जियों में बढ़ते रासायनिक अवशेष भी एक प्रमुख कारण हैं।

श्री शुक्ल ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। इसके लिए गौपालन को बढ़ावा देना आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक खेती का आधार गोवंश और जैविक संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि “मानवता की सेवा का सबसे बड़ा कार्य गौ सेवा और प्राकृतिक खेती है।”

उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने के शुरुआती वर्षों में उत्पादन कुछ कम हो सकता है, लेकिन समय के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में सुधार होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी भूमि के एक छोटे हिस्से में प्राकृतिक खेती शुरू करें, ताकि परिवार के लिए शुद्ध और सुरक्षित अनाज तथा सब्जियां उपलब्ध हो सकें। इसके सकारात्मक परिणाम देखकर किसान स्वयं बड़े स्तर पर इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और कृषि के संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। कैंसर अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में जटिल उपचार और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। लेकिन केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बीमारियों के मूल कारणों को भी समाप्त करना होगा। स्वच्छ पेयजल और रसायनमुक्त खाद्यान्न उपलब्ध होने से अनेक बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि बसामन मामा गौ अभ्यारण्य और हिनौती गौधाम में प्राकृतिक खेती के मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, जो किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। स्वयं उन्होंने भी अपनी पांच एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती प्रारंभ की है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है और इसे विकासखंड स्तर तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि गांव-गांव तक इस अभियान को पहुंचाया जा सके।

कार्यक्रम का आयोजन व्यावसायिक संस्थान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने संस्थान द्वारा संचालित स्वयंसेवी संस्था समृद्धि सरोज फाउंडेशन का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एस.के. त्रिपाठी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों को सम्मानित किया।

समारोह में समाजसेवी राम सिंह ने प्राकृतिक खेती की आवश्यकता और रीवा जिले में कृषि विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संस्थान के संचालक शैलेन्द्र सिंह पटेल ने अतिथियों का स्वागत किया। वहीं डॉ. के.एस. बघेल, डॉ. अजय पाण्डेय, डॉ. बृजेश तिवारी, डॉ. संजय सिंह और अखिलेश पटेल सहित कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तकनीकों, लाभों और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और प्राकृतिक खेती के माध्यम से स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण का संकल्प लिया। यह आयोजन कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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