शुक्रवार, 29 मई 2026

सरपंच घर-घर साफ पानी पहुंचाकर कमाएं पुण्य और यश : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल | कहा- हर घर में शुद्ध पानी पहुंच गया तो अस्पतालों की आधी भीड़ अपने आप कम हो जाएगी

भोपाल/रीवा- उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ग्राम पंचायतों को जल जीवन मिशन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि सरपंच यदि संकल्प के साथ काम करें तो हर घर तक नल से स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ पानी पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा और जनकल्याण का बड़ा कार्य है, जिससे सरपंचों को पुण्य और यश दोनों प्राप्त होंगे।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम में आयोजित जल जीवन मिशन की प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन संचालित किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से गांवों तक शुद्ध और फिल्टर किया हुआ पानी पहुंचाने की आधारभूत व्यवस्था तैयार कर दी गई है। अब इसे प्रत्येक घर तक पहुंचाने और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में ग्राम पंचायतों को पेयजल संबंधी छोटे कार्यों के लिए अधिक अधिकार दिए हैं। नए एसओआर प्रावधानों के तहत पंचायतें 10 हजार रुपये तक के पेयजल कार्य बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के करा सकती हैं। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग और अन्य योजनाओं की राशि का उपयोग भी पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है।

“साफ पानी मिलेगा तो अस्पतालों की भीड़ घटेगी”

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बीमारियां दूषित पानी के कारण फैलती हैं। यदि प्रत्येक परिवार को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो जाए तो अस्पतालों में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और पेयजल का सीधा संबंध है। स्वच्छ पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर जीवन का आधार है। इसलिए ग्राम पंचायतों को जल आपूर्ति व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

पंचायतों को मिलेगा पूरा तकनीकी सहयोग

श्री शुक्ल ने कहा कि जल जीवन मिशन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के इंजीनियर ग्राम पंचायतों को पूरा तकनीकी सहयोग देंगे। जहां पाइपलाइन का काम अधूरा है, उसे पूरा कराया जाएगा। लेकिन अंतिम रूप से घर-घर पानी पहुंचाने और व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी पंचायतों को ही निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि यदि पंचायतें पारदर्शिता और नियमितता के साथ जल आपूर्ति करेंगी तो जल कर संग्रहण में भी कोई कठिनाई नहीं आएगी। इसके लिए महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा सकती है।

“चुनाव जीतने वाला सरपंच पेयजल व्यवस्था भी संभाल सकता है”

अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री ने सरपंचों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो व्यक्ति ग्राम पंचायत का कठिन चुनाव जीत सकता है, उसके लिए गांव में बेहतर पेयजल व्यवस्था स्थापित करना कोई कठिन कार्य नहीं है। आवश्यकता केवल इच्छाशक्ति और जनसेवा की भावना की है।

उन्होंने कार्यशाला में दी जा रही तकनीकी जानकारियों को गंभीरता से आत्मसात करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार की शंका हो तो उसका तत्काल समाधान कराया जाए और हर घर तक नल से जल पहुंचाने का संकल्प लिया जाए।

रीवा जिले में दो हजार करोड़ रुपये के कार्य

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि केवल रीवा जिले में ही जल जीवन मिशन के तहत लगभग दो हजार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। यह निवेश ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सफल सरपंचों और कर्मचारियों का हुआ सम्मान

कार्यशाला के दौरान जल जीवन मिशन के अंतर्गत नल-जल योजनाओं का सफल संचालन करने वाले सरपंचों, ग्राम पंचायत सचिवों तथा वाल्व ऑपरेटरों को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, प्रभारी कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन, जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नल-जल योजनाओं के संचालन, रखरखाव, जल संरक्षण, जल कर वसूली तथा जल स्रोतों के पुनर्भरण (रिचार्ज) जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।

जल जीवन मिशन की यह कार्यशाला केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य और आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुई।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें