भोपाल/रीवा- मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है और अब राज्य सरकार इसे और नीचे लाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग का पूरा अमला समर्पण भाव से कार्य करे तो मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा आयोजित मातृ मृत्यु दर में कमी लाने संबंधी कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2018-20 के दौरान मातृ मृत्यु दर 173 थी, जो वर्ष 2022-24 में घटकर 135 रह गई है। यह 38 अंकों अर्थात लगभग 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक प्रगति को दर्शाती है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से यह सफलता मिली है। अब आवश्यकता है कि इस अभियान को और गति देकर मातृ मृत्यु दर को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ स्थिति तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में चिकित्सकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आशा कार्यकर्ताओं से प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
राजेन्द्र शुक्ल ने वरिष्ठ चिकित्सकों से स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और टेलीमेडिसिन सेवाओं को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाकर ही मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थायी सुधार संभव है।
कार्यक्रम में उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रीवा तेजी से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कैंसर अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है, जो मुंबई के टाटा अस्पताल की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा। साथ ही रीवा संभागीय मुख्यालय ऐसा पहला शहर बनने जा रहा है, जहां चारों ओर रिंग रोड और बायपास जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
कार्यशाला में श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि उप मुख्यमंत्री के प्रयासों से रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हुआ है और यह कार्यशाला मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पद्मा शुक्ला ने कहा कि कार्यशाला में हुए विचार-विमर्श से चिकित्सकों और मैदानी अमले को नई दिशा मिलेगी, जिससे रीवा जिले में मातृ मृत्यु दर को और कम करने में सफलता प्राप्त होगी।
कार्यक्रम में डॉ. नरेश बजाज, डॉ. शशि जैन, संयुक्त संचालक डॉ. अवधिया, अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, तकनीक आधारित निगरानी, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में मातृ मृत्यु दर में और अधिक कमी लाने में सफल हो सकता है।
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