खंडवा- हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों, दायित्वों और सामाजिक सरोकारों को पुनः आत्मसात करने का अवसर है। इसी उद्देश्य के साथ सद्भावना मंच कार्यालय में हिंदी पत्रकारिता दिवस का आयोजन किया गया, जहां पत्रकारिता के महत्व, उसकी सामाजिक भूमिका और लोकतंत्र में उसकी जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दादा माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, कर्मवीर पीठ खंडवा के कैंपस प्राचार्य डॉ. मनोज निवारिया ने कहा कि पत्रकारिता केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का एक सशक्त संकल्प है। उन्होंने कहा कि विचारों की स्वतंत्रता, कलम की ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही ही पत्रकारिता की असली पहचान है। जब पत्रकार निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करता है, तब वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनता है।
डॉ. निवारिया ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ भारत का पहला हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र था। यह केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि हिंदी भाषी समाज की चेतना और अभिव्यक्ति का प्रारंभिक मंच था। इसी ऐतिहासिक विरासत को स्मरण करते हुए प्रतिवर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है।
सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। पत्रकार समाज और शासन के बीच संवाद का सेतु बनकर कार्य करता है। सत्य को सामने लाना, जनहित के मुद्दों को प्रमुखता देना तथा सामाजिक चेतना को जागृत करना पत्रकारिता का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि कलम की शक्ति किसी भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है और यही शक्ति लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करती है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान डिजिटल युग में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। सोशल मीडिया और त्वरित सूचना के दौर में सत्य, विश्वसनीयता और तथ्यपरकता को बनाए रखना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे समाज तक प्रमाणिक और संतुलित जानकारी पहुंचाएं।
वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का विकास करना भी है। निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर सकती है और जनता के विश्वास को बनाए रख सकती है।
इस अवसर पर पूर्व डीएसपी आनंदपाल तोमर, केबी मनसारे, गणेश भावसार, ओम पिल्लै, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, देवेंद्र जैन, डॉ. एम.एम. कुरैशी, अनूप शर्मा, राधेश्याम शाक्य, निर्मल मंगवानी, सुभाष मीणा, नदीम रायल, कैलाश पटेल सहित अनेक मंच सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए और हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन पत्रकारिता के आदर्शों, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनसेवा की भावना को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ।
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