शनिवार, 2 मई 2026
बुद्ध पूर्णिमा पर सद्भावना मंच में चिंतन: शांति, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान
शुक्रवार, 1 मई 2026
“पेरिस में गूंजा मध्यप्रदेश का ‘बाग प्रिंट’: फ़ोयर डे पेरिस में भारतीय शिल्प का जलवा”
धार के शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने किया प्रतिनिधित्व, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय परंपरा का शानदार प्रदर्शन
भोपाल- मध्यप्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प कला ‘बाग प्रिंट’ आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही है। फ्रांस की राजधानी में आयोजित प्रतिष्ठित मेले (फ़ोयर डे पेरिस) में बाग प्रिंट का परचम लहराता नजर आ रहा है। इस आयोजन में भारतीय कला और संस्कृति का भव्य प्रदर्शन वैश्विक दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।
बाग प्रिंट से हुआ भव्य स्वागत
इस अवसर पर भारतीय दूतावास की थर्ड सेक्रेटरी ने भारतीय पवेलियन का उद्घाटन किया। उनका स्वागत मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र के प्रसिद्ध शिल्पकार ने पारंपरिक बाग प्रिंट अंगवस्त्र पहनाकर किया। बिलाल खत्री ने इस दौरान बाग प्रिंट की विशेषताओं, प्राकृतिक रंगों की प्रक्रिया और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की विस्तार से जानकारी दी।
शिल्प कला का सजीव अनुभव
उद्घाटन के बाद वर्धा खान ने भारतीय स्टालों का भ्रमण किया और बाग प्रिंट कला में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने स्वयं लकड़ी के नक्काशीदार ब्लॉक्स की मदद से एक रुमाल तैयार कर इस कला को करीब से अनुभव किया। उन्होंने भारतीय शिल्पकारों के कौशल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भारत का प्रतिनिधित्व, मध्यप्रदेश का गौरव
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के हस्तशिल्प विभाग द्वारा बाग प्रिंट को इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए चुना गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पी मोहम्मद बिलाल खत्री को इस जिम्मेदारी के साथ पेरिस भेजा गया है। वे 30 अप्रैल से 11 मई 2026 तक आयोजित इस मेले में बाग प्रिंट का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दे रहे हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय दर्शक इस पारंपरिक कला को प्रत्यक्ष देख और समझ रहे हैं।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कैसे साधारण कपड़े पर प्राकृतिक रंगों और हस्तनिर्मित ब्लॉक्स के माध्यम से उत्कृष्ट डिजाइन तैयार किए जाते हैं। पारंपरिकता और आधुनिकता का यह संगम बाग प्रिंट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहा है।
‘फ़ोयर डे पेरिस’: कला और नवाचार का वैश्विक मंच
यूरोप का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित मल्टीपर्पज़ मेला है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1904 में हुई थी। यह मेला हर साल पेरिस के पोर्टे डे वर्साय प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित होता है। इस वर्ष के आयोजन में 47 से अधिक देशों के 1,400 से ज्यादा प्रदर्शक और लगभग 6 लाख आगंतुक भाग ले रहे हैं। यहां घरेलू उत्पादों, फैशन, सजावट और हस्तशिल्प की विविधता देखने को मिलती है।
बाग प्रिंट का फ़ोयर डे पेरिस जैसे वैश्विक मंच पर प्रदर्शन न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय पारंपरिक शिल्प कला आज भी अपनी मौलिकता और आकर्षण के दम पर दुनिया को प्रभावित कर रही है। ऐसे प्रयास न केवल शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर मजबूती से स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
“बरगी क्रूज हादसा: पीड़ितों के बीच पहुंचे सीएम डॉ. मोहन यादव, कहा—दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा”
बच्चों को गले लगाकर और बेटियों को सांत्वना देकर मुख्यमंत्री ने बंधाया ढांढस, 9 की मौत, 28 की बचाई गई जान
भोपाल/जबलपुर- मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद पूरे प्रदेश में शोक और संवेदना का माहौल है। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 मई को जबलपुर पहुंचे और हादसे में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका दुख साझा किया। इस दौरान मुख्यमंत्री का संवेदनशील और भावुक रूप देखने को मिला, जब उन्होंने बच्चों को गले लगाया और बेटियों के सिर पर हाथ रखकर उन्हें ढांढस बंधाया।
भावनाओं से भरा रहा माहौल
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान माहौल अत्यंत गमगीन था। परिजन अपने प्रियजनों को खोने के दर्द से टूटे हुए थे। मुख्यमंत्री जब मृतक नीतू सोनी के घर पहुंचे, तो वहां मौजूद परिवार की बेटी अपने आंसू नहीं रोक सकी। इस दृश्य को देखकर मुख्यमंत्री भी भावुक हो गए और उन्होंने बेटी के सिर पर हाथ रखकर उसे सांत्वना दी। उन्होंने छोटे बच्चों को गले लगाकर उनके दुख को बांटने का प्रयास किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री रियाज हुसैन के घर भी पहुंचे, जो इस हादसे में चमत्कारिक रूप से बच गए थे। रियाज ने बताया कि वे कई घंटों तक क्रूज में फंसे रहे और उन्हें अपनी जान बचने की उम्मीद नहीं थी।
राहत और बचाव कार्य की विस्तृत जानकारी
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि नर्मदा नदी के किनारे हुए इस हादसे में अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया था। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और सेना के प्रशिक्षित गोताखोरों ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्य को अंजाम दिया।
घटना स्थल के पास जल जीवन मिशन का कार्य चल रहा था, जिसके कारण वहां मौजूद श्रमिकों और कर्मचारियों ने भी तुरंत मदद पहुंचाई और कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
सरकार ने बढ़ाया मदद का हाथ
मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित की गई है।
साथ ही, जिन स्थानीय नागरिकों ने साहस दिखाते हुए लोगों की जान बचाई, उन्हें 51-51 हजार रुपये की सम्मान राशि देने का भी ऐलान किया गया है।
उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस हादसे के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जा रही है, जिसमें होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के महानिदेशक, मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ सचिव और जबलपुर संभाग के आयुक्त शामिल होंगे।
यह समिति तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच करेगी—
1. हादसे के मूल कारणों की विस्तृत पड़ताल
2. घटना के समय की परिस्थितियों का विश्लेषण
3. सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं
भविष्य के लिए सख्त SOP की तैयारी
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार अब क्रूज पर्यटन, नौका विहार और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए एक सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करेगी। इसका उद्देश्य भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने आमजन से भी अपील की कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।
बरगी डैम क्रूज हादसा न केवल एक दुखद दुर्घटना है, बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। मुख्यमंत्री का पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर संवेदना व्यक्त करना मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है, वहीं दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नई SOP बनाने की घोषणा भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
अब प्रदेशवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच रिपोर्ट कब सामने आती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो सके।
“भुसावल–नागपुर एक्सप्रेस बहाली की मांग: खंडवा नहीं, दादाजी धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की जरूरत”
खंडवा- भुसावल से नागपुर के बीच संचालित होने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के लंबे समय से बंद रहने का मुद्दा अब व्यापक जनभावना का विषय बनता जा रहा है। इस संबंध में स्पष्ट किया गया है कि यह मांग केवल खंडवा शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी हुई है, जो विश्व प्रसिद्ध दादाजी धाम, खंडवा के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
समाजसेवी मनोहर श्यामनानी ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भुसावल–नागपुर एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन पहले श्रद्धालुओं के लिए सबसे सुविधाजनक माध्यम हुआ करता था। भुसावल, इटारसी, बैतूल, पांढुरना और नागपुर सहित कई प्रमुख शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ट्रेन के माध्यम से खंडवा पहुंचते थे। खासकर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यह ट्रेन श्रद्धालुओं की जीवनरेखा साबित होती थी, जब लाखों की संख्या में भक्त दादाजी धाम में दर्शन के लिए आते हैं।
उन्होंने बताया कि इस ट्रेन के बंद होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो न केवल समयसाध्य हैं बल्कि आर्थिक रूप से भी अधिक बोझिल हैं। सीधे रेल संपर्क के अभाव में बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
खंडवा की सामाजिक एवं धार्मिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए श्यामनानी ने कहा कि यह शहर अपनी सेवा भावना और मेहमाननवाजी के लिए पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान यहां पांच दिनों तक बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन, नाश्ता और ठहरने की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क की जाती है। शहर का प्रत्येक नागरिक श्रद्धा और सेवा भाव से इस आयोजन में भागीदारी निभाता है, जो इसे अन्य तीर्थ स्थलों से अलग बनाता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अन्य धार्मिक स्थलों पर विशेष अवसरों पर जहां श्रद्धालुओं को महंगाई का सामना करना पड़ता है, वहीं खंडवा में सेवा की परंपरा आज भी जीवंत है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
समाजसेवी श्यामनानी ने रेल मंत्रालय से अपील करते हुए कहा कि इस मांग को किसी एक जिले या शहर की मांग के रूप में न देखा जाए। यह भुसावल से नागपुर तक के विभिन्न विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों के लाखों लोगों की सामूहिक आवश्यकता है। इस ट्रेन की पुनः शुरुआत से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
भुसावल–नागपुर एक्सप्रेस ट्रेन की बहाली केवल एक रेल सेवा की पुनः शुरुआत नहीं, बल्कि आस्था, सुविधा और जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय होगा। यदि इस दिशा में शीघ्र कदम उठाए जाते हैं, तो यह लाखों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी और खंडवा जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्र की पहुंच और अधिक सुलभ हो सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: 2 माह में हजारों पदों पर भर्ती पूरी करने के निर्देश
बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक, अंतर्विभागीय समन्वय और विधिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय पक्ष को तत्काल प्रस्तुत कर सभी औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वीकृत पदों की मांग संबंधित चयन एजेंसियों को समय पर भेजना सुनिश्चित किया जाए।
भर्ती प्रक्रिया में तेजी के लिए रणनीतिक निर्देश
उप मुख्यमंत्री ने भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन के प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार कर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि बदलती जरूरतों के अनुसार नियमों में सुधार करना आवश्यक है, ताकि योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पदों के लिए परीक्षाएं पहले ही संपन्न हो चुकी हैं, उनके परिणाम शीघ्र घोषित किए जाएं। वहीं जिन पदों की परीक्षाएं अभी शेष हैं, उन्हें जल्द से जल्द आयोजित कर पूरी प्रक्रिया को गति दी जाए।
स्वास्थ्य सेवाएं: सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं नागरिकों का मूल अधिकार हैं। इसके लिए केवल आधुनिक अधोसंरचना और उन्नत उपकरण ही नहीं, बल्कि पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता भी अनिवार्य है। उन्होंने विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने पर भी जोर दिया, जिससे चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता बढ़ सके।
हजारों पदों पर जारी है भर्ती प्रक्रिया
बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न श्रेणियों के हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। इनमें बायोमेडिकल इंजीनियर, ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट सहित 31 पद, मेडिकल सोशल वर्कर, क्लिनिकल साइकियाट्रिस्ट और सहायक अस्पताल प्रबंधक के 200 पद, स्टाफ नर्स, कंपाउंडर और पैरामेडिकल स्टाफ के 373 पद, नर्सिंग ऑफिसर के 2099 पद, सिस्टर ट्यूटर के 218 पद तथा अस्पताल सहायक के 1200 पद शामिल हैं।
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन सभी पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगामी दो माह के भीतर पूर्ण कर नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे।
समन्वय और जवाबदेही पर विशेष जोर
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि चयन एजेंसियों के साथ सतत समन्वय बनाए रखा जाए और पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। अधिकारियों को जिम्मेदारी तय कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए।
राज्य सरकार का यह कदम स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि निर्धारित समय-सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी होती है, तो प्रदेश के अस्पतालों में स्टाफ की कमी दूर होगी और आम नागरिकों को बेहतर एवं त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
बरगी डेम हादसा: ममता की अमर गाथा, जब माँ ने मौत के सामने भी नहीं छोड़ा बेटे का साथ
15 घंटे बाद सामने आई तस्वीर ने झकझोरा समाज, माँ के निस्वार्थ प्रेम और त्याग की अनकही कहानी
जबलपुर के बरगी डेम में हुआ दर्दनाक हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना बनकर सामने आया है। इस हादसे के करीब 15 घंटे बाद सामने आई एक तस्वीर ने पूरे समाज को भावुक कर दिया है। यह तस्वीर सिर्फ एक दृश्य नहीं, बल्कि माँ की ममता, त्याग और अटूट प्रेम का जीवंत दस्तावेज बन चुकी है।
बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान जब हालात बेहद भयावह हो चुके थे और चारों ओर संकट ही संकट था, तब भी एक माँ ने अपने छोटे बेटे का साथ नहीं छोड़ा। मौत सामने खड़ी थी, लेकिन माँ ने अपने लाल को अपनी बाहों में कसकर थामे रखा। यह दृश्य उस असहनीय क्षण की कहानी कहता है, जब जीवन और मृत्यु के बीच जूझती एक माँ अपने बच्चे के लिए ढाल बनकर खड़ी रही।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि माँ का प्रेम किसी भी परिस्थिति से बड़ा होता है। वह अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करती है, चाहे इसके लिए उसे अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े। बरगी डेम की यह घटना इसी सत्य को उजागर करती है कि माँ का स्थान इस दुनिया में सर्वोपरि है।
समाज में अक्सर माँ के त्याग और समर्पण की बातें कही जाती हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं उन बातों को वास्तविकता में बदल देती हैं। यह हादसा हमें यह एहसास कराता है कि माँ केवल एक पारिवारिक संबंध नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो हर संकट में अपने बच्चे के लिए कवच बन जाती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इस तरह की घटनाएं प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी हैं। जलाशयों और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा उपायों को और सख्त किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके। लोगों को भी सतर्कता और सावधानी बरतनी चाहिए, विशेष रूप से ऐसे स्थानों पर जहां खतरे की संभावना अधिक होती है।
बरगी डेम हादसे की यह तस्वीर अब एक प्रतीक बन चुकी है—माँ के असीम प्रेम, त्याग और बलिदान का प्रतीक। यह कहानी आने वाले समय में भी लोगों के दिलों को छूती रहेगी और हर किसी को यह याद दिलाएगी कि माँ का प्यार इस दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है।
ऐसी महान, त्यागमयी और ममतामयी माँ को विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।
औचक निरीक्षण से सख्त संदेश: ऊर्जा मंत्री ने बानमोर सबस्टेशन की व्यवस्थाओं परखी, निर्बाध बिजली आपूर्ति पर दिया जोर
जबलपुर- मध्यप्रदेश में बढ़ती गर्मी और उससे उत्पन्न हो रही उच्च विद्युत मांग के बीच राज्य सरकार विद्युत व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। इसी क्रम में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मुरैना जिले के बानमोर स्थित मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के 132 केवी सबस्टेशन का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
यह निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मंत्री ने तकनीकी और प्रबंधन स्तर पर हर महत्वपूर्ण पहलू की गहन समीक्षा की। उन्होंने कंट्रोल रूम में स्थापित पैनलों की कार्यप्रणाली, बैटरी बैकअप सिस्टम, स्विचयार्ड में लगे ट्रांसफार्मर एवं अन्य उपकरणों की स्थिति को विस्तार से देखा और मौके पर मौजूद अधिकारियों से उनकी कार्यक्षमता एवं रखरखाव को लेकर सवाल-जवाब भी किए।
तकनीकी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा
निरीक्षण के दौरान श्री तोमर ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सबस्टेशन में लगे सभी उपकरण पूरी क्षमता और दक्षता के साथ कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नियमित मेंटेनेंस, समय पर परीक्षण और तकनीकी खामियों की त्वरित मरम्मत सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की विद्युत बाधा उत्पन्न न हो।
उन्होंने यह भी जाना कि गर्मी के मौसम में ओवरलोडिंग से बचने के लिए किस प्रकार की रणनीति अपनाई जा रही है और आपात स्थिति से निपटने के लिए क्या बैकअप व्यवस्था मौजूद है।
क्षमता वृद्धि: मजबूत हो रही विद्युत व्यवस्था
ऊर्जा मंत्री ने सबस्टेशन की क्षमता 70 एमवीए से बढ़ाकर 100 एमवीए किए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल सकेगी। यह कदम भविष्य की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक दूरदर्शी निर्णय है।
गर्मी में बढ़ती मांग, प्रशासन की चुनौती
गर्मी के मौसम में बिजली की खपत अपने चरम पर होती है, ऐसे में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे देखते हुए मंत्री श्री तोमर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी आवश्यक तकनीकी सुधार और मेंटेनेंस कार्य समयबद्ध रूप से पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जवाबदेही तय, लापरवाही पर सख्ती के संकेत
औचक निरीक्षण के माध्यम से मंत्री ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार किसी भी तरह की कोताही स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने और हर स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।
आमजन को राहत देने की दिशा में प्रयास
इस निरीक्षण के जरिए राज्य सरकार ने यह दर्शाया है कि वह आम जनता को गर्मी के मौसम में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बानमोर सबस्टेशन की व्यवस्थाओं की समीक्षा और क्षमता वृद्धि जैसे कदम इस दिशा में सकारात्मक पहल माने जा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री का यह दौरा न केवल विभागीय कार्यप्रणाली की समीक्षा का माध्यम बना, बल्कि इससे यह भी सुनिश्चित हुआ कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था हर परिस्थिति में मजबूत और भरोसेमंद बनी रहे।
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