खंडवा- बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर शहर के सद्भावना मंच कार्यालय में भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के उपलक्ष्य में एक सारगर्भित विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में शांति, करुणा और सद्भावना के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का एक सार्थक प्रयास भी रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बुद्ध के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान बुद्ध के विचार आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने बताया कि बुद्ध का जीवन हमें यह सिखाता है कि बाहरी परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण हमारा आंतरिक संतुलन और आत्म-जागरण है।
उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश “अप्प दीपो भव” यानी स्वयं अपना प्रकाश बनो, हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर और आत्मचिंतनशील बनने की प्रेरणा देता है। यह संदेश आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक जीवन में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भगवान बुद्ध ने मानव जीवन के दुखों के कारणों और उनके निवारण का जो मार्ग बताया, वह आज भी उतना ही प्रभावी और वैज्ञानिक है। उनका अष्टांगिक मार्ग न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन है, बल्कि सामाजिक संतुलन और नैतिक जीवन की भी आधारशिला है।
पूर्व डीएसपी आनंदपाल तोमर, केबी मनसारे और अनुप शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा, असहिष्णुता और मानसिक तनाव के बीच भगवान बुद्ध के सिद्धांत समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में करुणा, अहिंसा और सहनशीलता को अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता लाने और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर प्रमोद जैन, आनंदपाल तोमर, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, सुरेन्द्र गीते, केबी मनसारे, गणेश भावसार, राधेश्याम शाक्य, त्रिलोक चौधरी, पं. प्रशांत व्यास, अनुप शर्मा, अर्जुन बुंदेला, राहुल वाध, निर्मल मंगवानी, सत्येंद्र सोहनी, रजत सोहनी, अशोक पारवानी, नारायण फरकले, विजया दिवेदी, कमल नागपाल, डॉ. एमएम कुरैशी, सुभाष मीणा एवं कैलाश पटेल सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी सहभागी अपने जीवन में भगवान बुद्ध के आदर्शों को अपनाते हुए समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देंगे। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक श्रद्धांजलि था, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी था कि मानवता का मार्ग ही सच्चा मार्ग है।
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