मंगलवार, 25 नवंबर 2025

सद्भावना मंच ने सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

खंडवा- हिंदी सिनेमा के महान और सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र के निधन ने उनके चाहने वालों को गहरे दुख में डाल दिया है। देशभर में उनके प्रशंसकों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में खंडवा स्थित माली कुआं क्षेत्र के सद्भावना मंच कार्यालय में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाजसेवी, वरिष्ठजन और मंच के सदस्यों ने भाग लिया।

गीत-संगीत के माध्यम से दी गई भावनात्मक श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत धर्मेंद्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई। इसके बाद मंच के सदस्यों ने उनके लोकप्रिय और सदाबहार गीतों को कराओके की धुन पर गाकर अभिनेता को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गीत-संगीत की इस प्रस्तुति ने माहौल को भावुक बना दिया और सभी ने उनकी यादों में खोकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

धर्मेंद्र—एक अभिनेता नहीं, सरल और संवेदनशील इंसान

सद्भावना मंच के सदस्य कमल नागपाल ने बताया कि धर्मेंद्र केवल बड़े परदे के सितारे नहीं थे, बल्कि एक बेहद विनम्र और संवेदनशील इंसान थे। उनकी सहजता, सरल व्यवहार और लोगों के प्रति प्रेम ने उन्हें वास्तविक अर्थों में ‘ही-मैन’ और जनता का प्रिय कलाकार बनाया।
सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने बताया कि धर्मेंद्र को साहित्य और शायरी से विशेष लगाव था। वे कई मशहूर शायरों के शेर बिना देखे सुना देते थे। उनका व्यक्तित्व उतना ही गहरा और मानवीय था, जितने भाव उनके अभिनय में दिखाई देते थे।

निमाड़ के साथ धर्मेंद्र का आत्मीय रिश्ता

प्रमोद जैन ने आगे बताया कि धर्मेंद्र का निमाड़ क्षेत्र से पुराना और आत्मीय संबंध रहा है। वे एक फिल्म की शूटिंग के दौरान लगभग 25 दिनों तक महेश्वर में रुके थे, जिससे यहां के लोगों, संस्कृति और जीवनशैली से उनका गहरा जुड़ाव बना। स्थानीय लोगों के साथ उनका सरल व्यवहार आज भी निमाड़वासियों की यादों में ताजा है।

सद्भावना मंच के गणमान्य सदस्य रहे उपस्थित

श्रद्धांजलि सभा में सद्भावना मंच के संस्थापक प्रमोद जैन, पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, डॉ. जगदीश चंद्र चौरे, त्रिलोक चौधरी, राधेश्याम शाक्य, सुरेंद्र गीते, योगेश गुजराती, ओम पिल्ले, एन.के. दवे, विजया द्विवेदी, सतीश मुदीराज, सुनील सोमानी, गणेश भावसार, कमल नागपाल, अर्जुन बुंदेला, आकांक्षा सिसोदिया और कैलाश पटेल सहित विशेषजन मौजूद रहे। सभी ने मिलकर धर्मेंद्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

सिनेमा जगत के अमर सितारे

धर्मेंद्र ने अपने लंबे फिल्मी करियर में भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। ‘शोले’ से लेकर ‘चुपके-चुपके’, ‘धरम वीर’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ और ‘सीता और गीता’ जैसी अनगिनत फिल्मों ने उन्हें करोड़ों दिलों में हमेशा के लिए अमर कर दिया। उनकी अभिनय क्षमता, एक्शन स्टाइल, सहज हाव-भाव और मानवीय संवेदनाओं से भरा प्रदर्शन सदैव याद रहेगा।

सद्भावना मंच द्वारा आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा न केवल अभिनेता धर्मेंद्र को स्मरण करने का अवसर बनी, बल्कि उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और मनुष्यता को समझने का भी माध्यम रही। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि धर्मेंद्र जैसे कलाकार पुनः जन्म लेते हैं — उनका योगदान, उनकी सरलता और उनके द्वारा छोड़ी गई यादें भारतीय सिनेमा को हमेशा रोशन करती रहेंगी।

निमाड़ उत्सव के अंतिम दिन गणगौर नृत्य की अद्भुत छटा बिखरी, कथक व काठी नृत्य ने बांधा समां, राष्ट्रकवि सम्मेलन बना विशेष आकर्षण

खरगोन- महेश्वर के ऐतिहासिक देवी अहिल्या घाट पर जारी तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव का समापन सोमवार को समृद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण रहा निमाड़ की शाश्वत पहचान गणगौर नृत्य, जिसने दर्शकों पर अद्भुत छाप छोड़ी।

मुख्य अतिथि विधायक श्री राजकुमार मेव की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य आयोजन में निमाड़ की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। हजारों दर्शकों ने घाट पर बैठकर पारंपरिक नृत्यकलाओं और देशभर के कवियों के काव्यपाठ का आनंद लिया।

गणगौर नृत्य—निमाड़ संस्कृति का स्वर्णिम सौंदर्य

इस वर्ष के निमाड़ उत्सव की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति रही गणगौर नृत्य, जिसे खंडवा की श्रीमती अनुजा जोशी और उनके समूह ने बेहतरीन ताल, नजाकत और पारंपरिक गरिमा के साथ प्रस्तुत किया।

गणगौर नृत्य निमाड़ी लोक-परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है—

  • यह गौरी-गणेश पूजा पर आधारित है।
  • सौभाग्य, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • महिलाओं की आस्था और लोकसंस्कृति का जीवंत रूप है।

समूह की रंग-बिरंगी निमाड़ी वेशभूषा, synchronized footwork और भावपूर्ण अभिव्यक्तियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट लगातार जारी रही, जिससे स्पष्ट था कि गणगौर नृत्य ने पूरे कार्यक्रम में सबसे अधिक सराहना प्राप्त की।

कथक और काठी नृत्य की शानदार प्रस्तुतियाँ

गणगौर नृत्य के बाद अन्य नृत्यों ने भी उत्सव को नई ऊंचाई दी।

काठी नृत्य — शिव-पार्वती आराधना का अनुपम दृश्य

खंडवा के श्री रामदास साकल्ले और समूह ने काठी नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें शिव-पार्वती की आराधना और उत्सवी रंगों को प्रदर्शित किया गया। सटीक लय और पारंपरिक संगीत ने दर्शकों को लोकनृत्य की गहराई का अनुभव कराया।

कथक — नर्मदा स्तुति और श्रीकृष्ण लीला

अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नृत्यांगना श्रीमती गौरी देशमुख और उनके साथियों की कथक प्रस्तुति शाम का सबसे शास्त्रीय और भव्य हिस्सा रही।

  • नर्मदाष्टकम” की प्रस्तुति में मां नर्मदा की गरिमा का अद्भुत चित्रण।
  • श्रीकृष्ण लीला” में भाव और नृत्य-तकनीक का अनूठा संगम।

दर्शकों ने दोनों प्रस्तुतियों को लगातार तालियों से सराहा।

राष्ट्रकवि सम्मेलन—कविता, व्यंग्य और राष्ट्रभावना का संगम

रात्रिकालीन सत्र में आयोजित राष्ट्रकवि सम्मेलन उत्सव के साहित्यिक पक्ष का शिखर रहा। सम्मेलन का संचालन विख्यात हास्यकवि श्री बुद्धिप्रकाश दाधीच ने किया।

कवियों ने वीररस, देशप्रेम, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक चेतना से भरपूर काव्यपाठ प्रस्तुत किया। इसमें शामिल रहे—

  • मुंबई के श्री सुदीप भोला।
  • इंदौर की डॉ. भुवन मोहिनी।
  • भोपाल के श्री राम भदावर ओज।
  • खरगोन के डॉ. शंभूसिंह मनहर।
  • महेश्वर के श्री नरेंद्र श्रीवास्तव अटल।

इनकी रचनाओं ने वातावरण को ऊर्जा, राष्ट्रभाव और मनोरंजन से भर दिया।

लाइट एंड साउंड शो—महेश्वर का इतिहास जीवंत हुआ

समापन दिवस से पहले हुए लाइट एंड साउंड शो ने महेश्वर के प्राचीन इतिहास, अहिल्याबाई होल्कर की विरासत और निमाड़ की सांस्कृतिक धरोहर को कला और तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।

विजेताओं का सम्मान और आयोजन का सफल समापन

विधायक श्री मेव ने निमाड़ उत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

उन्होंने संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन, कलाकारों और नागरिकों के सहयोग से उत्सव की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि—
"निमाड़ उत्सव ने इस बार सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा और नई पहचान दी है।"

कार्यक्रम में एसडीएम सुश्री पूर्वा मंडलोई, नोडल अधिकारी श्री नीरज अमझरे, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

निमाड़ उत्सव 2025 कला, संस्कृति, इतिहास और साहित्य का अनूठा संगम रहा। विशेष रूप से गणगौर नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति ने इस उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया, जिसने निमाड़ी लोकसंस्कृति की झलक को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य किया।

खंडवा में 350वां शहीदी दिवस : मानवता और धर्म की रक्षा हेतु दिए सर्वोच्च बलिदान को समर्पित गुरमत समागम एवं नगर कीर्तन

खंडवा- धर्म, मानवता और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी, तथा उनके तीन वीर संगियों भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहीदी शताब्दी के उपलक्ष्य में खंडवा शहर में आज भावपूर्ण श्रद्धा और उत्साह के साथ नगर कीर्तन व गुरमत समागम का आयोजन किया जा रहा है। इन संत शहीदों ने अत्याचार, जबरन धर्म परिवर्तन और अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर संपूर्ण मानव जाति की रक्षा के लिए अपना शीश न्यौछावर कर दिया। इसलिए उन्हें ‘‘धर्म की चादर’’ और ‘‘मानव अधिकारों के महान संरक्षक’’ के रूप में विश्वभर में आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है।

सुबह का गुरमत समागम : श्री गुरु सिंह सभा, खंडवा

25 नवंबर, मंगलवार को प्रातः कालीन कार्यक्रमों की शुरुआत गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, खंडवा में हुई।
सुबह 7:30 से 8:30 बजे तक भाई ईश्वर सिंह जी हजूरी रागी जत्था ने शबद-कीर्तन द्वारा वातावरण को गुरुवाणी की मधुर धुनों से गुंजायमान किया।
इसके बाद 8:30 से 9:00 बजे तक गुरमत विचार सत्र में जसवीर सिंह राणा जी ने गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी की शिक्षाओं, त्याग और मानव सेवा से जुड़े उच्च आदर्शों पर विस्तृत प्रकाश डाला।

मुख्य कीर्तन सत्र 9:00 बजे से 10:15 बजे तक भाई हरदीप सिंह जी (अंबाला वाले) द्वारा संपन्न हुआ। उन्होंने अपनी राग विद्या और भावपूर्ण गायन से संगत को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। भाई हरदीप सिंह जी ने अपने कीर्तन में गुरु साहिब का यह मार्मिक संदेश भी प्रस्तुत किया—
“तेग़ बहादुर सीमरियें, घर नव निध थाये। सब थाई होवे सहाये...”
और आगे कहते हैं—
“धर्म हेतु साका जिन किया, शीश दिया पर सिर नहीं दिया।”
यह संदेश गुरु साहिब की अडिग निष्ठा, साहस और मानवता के उत्थान हेतु उनके द्वारा दिए गए अप्रतिम बलिदान को स्मरण कराता है।

संगत से अपील

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार जोगेंद्र सिंह कुकरेजा तथा सचिव सरदार दलजीत सिंह सवन्नी ने शहरवासियों और संगत से समय पर कार्यक्रमों में पहुँचकर गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करने की अपील की है।
गुरुद्वारा कलगिधर, आनंद नगर के अध्यक्ष सरदार रविंदर सिंह सलूजा ने भी सभी धर्मप्रेमियों से समागम के दोनों सत्रों में शामिल होकर अपने आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करने का आह्वान किया है।

रात्रिकालीन मुख्य समागम : गुरुद्वारा श्री कलगीधर, आनंद नगर

शाम का समागम गुरुद्वारा श्री कलगीधर, आनंद नगर में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का क्रम इस प्रकार है—

  • 7:00 से 8:00 बजे — कीर्तन, भाई करतार सिंह जी
  • 8:00 से 8:30 बजे — गुरमत विचार, भाई जसवीर सिंह राणा जी
  • 8:30 से 10:00 बजे — मुख्य कीर्तन सत्र, भाई हरदीप सिंह जी (अंबाला वाले)

इन सत्रों में गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के जीवन, बलिदान और उनके मानवतावादी दर्शन पर चर्चा की जाएगी, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी का बलिदान : विश्व मानवता के लिए संदेश

1675 में दिल्ली के चांदनी चौक पर गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश दे दिया, परंतु आतंक के आगे सिर नहीं झुकाया। उनके साथ तीन महान वीरों — भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी — ने भी अमानवीय यातनाएँ सहते हुए धर्म, सत्य और न्याय के लिए अपनी शहादत दी।
यह शहादत केवल सिख इतिहास का गौरव अध्याय नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अधिकारों की रक्षा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

समागम की जानकारी प्रदान करने वाले

कार्यक्रम संबंधी विस्तृत जानकारी गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रवक्ता एवं कोषाध्यक्ष सरदार भूपेंद्र सिंह कुकरेजा, सरदार दलजीत सिंह खनुजा एवं इक़बाल सिंह भाटिया द्वारा दी गई।

यह समागम न केवल गुरु साहिब की शहादत का स्मरण है, बल्कि समाज को सत्य, साहस, त्याग और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी प्रदान करता है। खंडवा की संगत ने श्रद्धा और भक्ति के साथ इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने का संकल्प लिया है।