मंगलवार, 25 नवंबर 2025

खंडवा में 350वां शहीदी दिवस : मानवता और धर्म की रक्षा हेतु दिए सर्वोच्च बलिदान को समर्पित गुरमत समागम एवं नगर कीर्तन

खंडवा- धर्म, मानवता और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी, तथा उनके तीन वीर संगियों भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहीदी शताब्दी के उपलक्ष्य में खंडवा शहर में आज भावपूर्ण श्रद्धा और उत्साह के साथ नगर कीर्तन व गुरमत समागम का आयोजन किया जा रहा है। इन संत शहीदों ने अत्याचार, जबरन धर्म परिवर्तन और अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर संपूर्ण मानव जाति की रक्षा के लिए अपना शीश न्यौछावर कर दिया। इसलिए उन्हें ‘‘धर्म की चादर’’ और ‘‘मानव अधिकारों के महान संरक्षक’’ के रूप में विश्वभर में आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है।

सुबह का गुरमत समागम : श्री गुरु सिंह सभा, खंडवा

25 नवंबर, मंगलवार को प्रातः कालीन कार्यक्रमों की शुरुआत गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, खंडवा में हुई।
सुबह 7:30 से 8:30 बजे तक भाई ईश्वर सिंह जी हजूरी रागी जत्था ने शबद-कीर्तन द्वारा वातावरण को गुरुवाणी की मधुर धुनों से गुंजायमान किया।
इसके बाद 8:30 से 9:00 बजे तक गुरमत विचार सत्र में जसवीर सिंह राणा जी ने गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी की शिक्षाओं, त्याग और मानव सेवा से जुड़े उच्च आदर्शों पर विस्तृत प्रकाश डाला।

मुख्य कीर्तन सत्र 9:00 बजे से 10:15 बजे तक भाई हरदीप सिंह जी (अंबाला वाले) द्वारा संपन्न हुआ। उन्होंने अपनी राग विद्या और भावपूर्ण गायन से संगत को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। भाई हरदीप सिंह जी ने अपने कीर्तन में गुरु साहिब का यह मार्मिक संदेश भी प्रस्तुत किया—
“तेग़ बहादुर सीमरियें, घर नव निध थाये। सब थाई होवे सहाये...”
और आगे कहते हैं—
“धर्म हेतु साका जिन किया, शीश दिया पर सिर नहीं दिया।”
यह संदेश गुरु साहिब की अडिग निष्ठा, साहस और मानवता के उत्थान हेतु उनके द्वारा दिए गए अप्रतिम बलिदान को स्मरण कराता है।

संगत से अपील

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार जोगेंद्र सिंह कुकरेजा तथा सचिव सरदार दलजीत सिंह सवन्नी ने शहरवासियों और संगत से समय पर कार्यक्रमों में पहुँचकर गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करने की अपील की है।
गुरुद्वारा कलगिधर, आनंद नगर के अध्यक्ष सरदार रविंदर सिंह सलूजा ने भी सभी धर्मप्रेमियों से समागम के दोनों सत्रों में शामिल होकर अपने आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करने का आह्वान किया है।

रात्रिकालीन मुख्य समागम : गुरुद्वारा श्री कलगीधर, आनंद नगर

शाम का समागम गुरुद्वारा श्री कलगीधर, आनंद नगर में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का क्रम इस प्रकार है—

  • 7:00 से 8:00 बजे — कीर्तन, भाई करतार सिंह जी
  • 8:00 से 8:30 बजे — गुरमत विचार, भाई जसवीर सिंह राणा जी
  • 8:30 से 10:00 बजे — मुख्य कीर्तन सत्र, भाई हरदीप सिंह जी (अंबाला वाले)

इन सत्रों में गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के जीवन, बलिदान और उनके मानवतावादी दर्शन पर चर्चा की जाएगी, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी का बलिदान : विश्व मानवता के लिए संदेश

1675 में दिल्ली के चांदनी चौक पर गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश दे दिया, परंतु आतंक के आगे सिर नहीं झुकाया। उनके साथ तीन महान वीरों — भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी — ने भी अमानवीय यातनाएँ सहते हुए धर्म, सत्य और न्याय के लिए अपनी शहादत दी।
यह शहादत केवल सिख इतिहास का गौरव अध्याय नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अधिकारों की रक्षा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

समागम की जानकारी प्रदान करने वाले

कार्यक्रम संबंधी विस्तृत जानकारी गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रवक्ता एवं कोषाध्यक्ष सरदार भूपेंद्र सिंह कुकरेजा, सरदार दलजीत सिंह खनुजा एवं इक़बाल सिंह भाटिया द्वारा दी गई।

यह समागम न केवल गुरु साहिब की शहादत का स्मरण है, बल्कि समाज को सत्य, साहस, त्याग और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी प्रदान करता है। खंडवा की संगत ने श्रद्धा और भक्ति के साथ इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने का संकल्प लिया है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें