मंगलवार, 25 नवंबर 2025

निमाड़ उत्सव के अंतिम दिन गणगौर नृत्य की अद्भुत छटा बिखरी, कथक व काठी नृत्य ने बांधा समां, राष्ट्रकवि सम्मेलन बना विशेष आकर्षण

खरगोन- महेश्वर के ऐतिहासिक देवी अहिल्या घाट पर जारी तीन दिवसीय निमाड़ उत्सव का समापन सोमवार को समृद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण रहा निमाड़ की शाश्वत पहचान गणगौर नृत्य, जिसने दर्शकों पर अद्भुत छाप छोड़ी।

मुख्य अतिथि विधायक श्री राजकुमार मेव की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य आयोजन में निमाड़ की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। हजारों दर्शकों ने घाट पर बैठकर पारंपरिक नृत्यकलाओं और देशभर के कवियों के काव्यपाठ का आनंद लिया।

गणगौर नृत्य—निमाड़ संस्कृति का स्वर्णिम सौंदर्य

इस वर्ष के निमाड़ उत्सव की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति रही गणगौर नृत्य, जिसे खंडवा की श्रीमती अनुजा जोशी और उनके समूह ने बेहतरीन ताल, नजाकत और पारंपरिक गरिमा के साथ प्रस्तुत किया।

गणगौर नृत्य निमाड़ी लोक-परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है—

  • यह गौरी-गणेश पूजा पर आधारित है।
  • सौभाग्य, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • महिलाओं की आस्था और लोकसंस्कृति का जीवंत रूप है।

समूह की रंग-बिरंगी निमाड़ी वेशभूषा, synchronized footwork और भावपूर्ण अभिव्यक्तियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट लगातार जारी रही, जिससे स्पष्ट था कि गणगौर नृत्य ने पूरे कार्यक्रम में सबसे अधिक सराहना प्राप्त की।

कथक और काठी नृत्य की शानदार प्रस्तुतियाँ

गणगौर नृत्य के बाद अन्य नृत्यों ने भी उत्सव को नई ऊंचाई दी।

काठी नृत्य — शिव-पार्वती आराधना का अनुपम दृश्य

खंडवा के श्री रामदास साकल्ले और समूह ने काठी नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें शिव-पार्वती की आराधना और उत्सवी रंगों को प्रदर्शित किया गया। सटीक लय और पारंपरिक संगीत ने दर्शकों को लोकनृत्य की गहराई का अनुभव कराया।

कथक — नर्मदा स्तुति और श्रीकृष्ण लीला

अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नृत्यांगना श्रीमती गौरी देशमुख और उनके साथियों की कथक प्रस्तुति शाम का सबसे शास्त्रीय और भव्य हिस्सा रही।

  • नर्मदाष्टकम” की प्रस्तुति में मां नर्मदा की गरिमा का अद्भुत चित्रण।
  • श्रीकृष्ण लीला” में भाव और नृत्य-तकनीक का अनूठा संगम।

दर्शकों ने दोनों प्रस्तुतियों को लगातार तालियों से सराहा।

राष्ट्रकवि सम्मेलन—कविता, व्यंग्य और राष्ट्रभावना का संगम

रात्रिकालीन सत्र में आयोजित राष्ट्रकवि सम्मेलन उत्सव के साहित्यिक पक्ष का शिखर रहा। सम्मेलन का संचालन विख्यात हास्यकवि श्री बुद्धिप्रकाश दाधीच ने किया।

कवियों ने वीररस, देशप्रेम, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक चेतना से भरपूर काव्यपाठ प्रस्तुत किया। इसमें शामिल रहे—

  • मुंबई के श्री सुदीप भोला।
  • इंदौर की डॉ. भुवन मोहिनी।
  • भोपाल के श्री राम भदावर ओज।
  • खरगोन के डॉ. शंभूसिंह मनहर।
  • महेश्वर के श्री नरेंद्र श्रीवास्तव अटल।

इनकी रचनाओं ने वातावरण को ऊर्जा, राष्ट्रभाव और मनोरंजन से भर दिया।

लाइट एंड साउंड शो—महेश्वर का इतिहास जीवंत हुआ

समापन दिवस से पहले हुए लाइट एंड साउंड शो ने महेश्वर के प्राचीन इतिहास, अहिल्याबाई होल्कर की विरासत और निमाड़ की सांस्कृतिक धरोहर को कला और तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।

विजेताओं का सम्मान और आयोजन का सफल समापन

विधायक श्री मेव ने निमाड़ उत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

उन्होंने संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन, कलाकारों और नागरिकों के सहयोग से उत्सव की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि—
"निमाड़ उत्सव ने इस बार सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा और नई पहचान दी है।"

कार्यक्रम में एसडीएम सुश्री पूर्वा मंडलोई, नोडल अधिकारी श्री नीरज अमझरे, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

निमाड़ उत्सव 2025 कला, संस्कृति, इतिहास और साहित्य का अनूठा संगम रहा। विशेष रूप से गणगौर नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति ने इस उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया, जिसने निमाड़ी लोकसंस्कृति की झलक को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य किया।

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