रविवार, 3 मई 2026

खालवा में परिवहन विभाग का सख्त अभियान: सवारी ढोते पकड़े गए पिकअप वाहन, 15 हजार जुर्माना वसूला

खंडवा- सड़क सुरक्षा और परिवहन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खंडवा जिले में परिवहन विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में रविवार को ग्राम खालवा में विशेष चेकिंग अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए।

अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने पिकअप लोडिंग वाहनों की जांच की। जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाकर परिवहन कर रहे थे, जो कि कानूनन प्रतिबंधित है। इस गंभीर उल्लंघन को देखते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो पिकअप लोडिंग वाहनों के खिलाफ चालानी कार्यवाही की।

अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दीपक मांझी ने बताया कि इन दोनों वाहनों से कुल 15 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिकअप जैसे लोडिंग वाहनों का उपयोग केवल माल ढुलाई के लिए निर्धारित है, लेकिन इनका सवारी परिवहन में उपयोग करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बेहद खतरनाक है।

उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के वाहनों में यात्रियों के बैठने की कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं होती, जिससे दुर्घटना की स्थिति में गंभीर जनहानि की आशंका बनी रहती है। इसलिए विभाग द्वारा ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।

परिवहन विभाग ने वाहन चालकों और संचालकों को सख्त चेतावनी दी है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और मालवाहक वाहनों का उपयोग केवल माल परिवहन के लिए ही करें। नियमों का उल्लंघन करने पर भविष्य में और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल नियमों का पालन कराना है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगे भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह के चेकिंग अभियान जारी रहेंगे, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सके और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।

विजय सावनेर ने उठाई किसानों की मजबूत आवाज: गंजाल-मोरन परियोजना में छूटे गांवों को जोड़ने और मोरंड डैम स्वीकृति की मांग तेज

हरदा/नर्मदापुरम्- गंजाल-मोरन संयुक्त परियोजना को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय सिंह सावनेर ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए मोरन (मोरंड) डैम की शीघ्र स्वीकृति और छूटे हुए गांवों को परियोजना में शामिल करने की मांग को मजबूती से सामने रखा है।

रविवार को जमलपूरा में आयोजित गंजाल परियोजना पाइपलाइन के शुभारंभ अवसर पर सावनेर ने केंद्रीय जनजाति राज्य मंत्री डीडी उईके एवं पूर्व मंत्री कमल पटेल के समक्ष क्षेत्र के किसानों की चिंताओं को विस्तार से रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल गंजाल डेम से पूरे क्षेत्र की सिंचाई आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है, इसलिए मोरंड डैम को स्वीकृति दिलाना अत्यंत आवश्यक है।

विजय सावनेर की सक्रिय पहल:
सावनेर ने बताया कि प्रस्तावित मोरंड डैम नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा तहसील के वन क्षेत्र में बनाया जाना है, जो हरदा, खंडवा और नर्मदापुरम जिलों के लिए जल संचयन और सिंचाई का बड़ा स्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल जल संकट कम होगा, बल्कि किसानों की फसल उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में गंजाल डेम को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन मोरन डैम की स्वीकृति लंबित होने के कारण कई गांव अब भी योजना के लाभ से वंचित हैं। सावनेर ने इन गांवों—अंधेरीखेड़ा, बरुरघाट, उसकल्ली, कपासी, जिनवानी, जोगीखेड़ा, जामदड़, झाड़बीड़ा, पाडर, माटी, उमरदा, रहटगांव, नजरपुरा, धनपाड़ा, आमसागर, सिंघनपुर, कासरनी, खमगांव, टेमागांव, डोलरिया, झीरीखेड़ा, नादवा, सिरकमां, बहरागांव और खुशियालखेड़ी—को परियोजना में शामिल करने की मांग की।

सरकार का आश्वासन:


कार्यक्रम में पूर्व मंत्री कमल पटेल ने सावनेर की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि मोरंड डैम की स्वीकृति के लिए जल्द ही प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हरदा जिले को 100 प्रतिशत सिंचित जिला बनाने का लक्ष्य सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जाएगा।

किसानों के लिए उम्मीद की किरण:
स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि मोरंड डैम को शीघ्र स्वीकृति मिल जाती है, तो क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। गंजाल-मोरन परियोजना का संयुक्त क्रियान्वयन क्षेत्र में जल प्रबंधन को मजबूत करेगा और कृषि विकास को नई दिशा देगा।

विजय सिंह सावनेर द्वारा उठाई गई यह पहल क्षेत्र के किसानों की आवाज को मजबूती देने के साथ-साथ विकास की नई संभावनाओं को भी उजागर करती है। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस मांग पर कितनी जल्दी निर्णय लिया जाता है, जिससे क्षेत्र के सभी गांव इस महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

हँसी की गूंज से सराबोर हुआ खंडवा: विश्व हास्य दिवस पर सद्भावना मंच का प्रेरक आयोजन

खंडवा- तेजी से भागती जिंदगी, बढ़ता तनाव और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मुस्कान कहीं पीछे छूटती जा रही है। ऐसे समय में विश्व हास्य दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी कड़ी में खंडवा में सद्भावना मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि हँसी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन की आधारशिला है।

विश्व हास्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मंच के सदस्यों ने एकत्र होकर न केवल ठहाके लगाए, बल्कि समाज को सकारात्मक सोच और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह उल्लासपूर्ण और जीवंत रहा, जहां हर चेहरे पर मुस्कान और हर दिल में हल्कापन महसूस किया गया।

मंच के संस्थापक प्रमोद जैन ने अपने उद्बोधन में हँसी के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हँसना एक प्राकृतिक उपचार है। यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, तनाव हार्मोन को कम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से हँसने वाले व्यक्ति अधिक स्वस्थ, ऊर्जावान और मानसिक रूप से संतुलित रहते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हँसी एक ऐसा सरल माध्यम है जो बिना किसी खर्च के जीवन को आनंदमय बना सकता है। विश्व हास्य दिवस हमें यही सिखाता है कि खुश रहना कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान सदस्यों ने हास्य-व्यंग्य, चुटकुले और रोचक प्रसंगों के माध्यम से माहौल को खुशनुमा बनाए रखा। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने न केवल लोगों को हँसाया, बल्कि उनके मन का तनाव भी दूर किया। यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और सकारात्मकता का संदेश भी देता रहा।

इस अवसर पर पूर्व डीएसपी आनंद तोमर, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, देवेंद्र जैन, राधेश्याम शाक्य, गणेश भावसार, सुरेंद्र गीते, सुनील सोमानी, निर्मल मंगवानी, मनोज जोशी, अनुप शर्मा, अशोक जैन, कृष्ण कुमार व्यास, डॉ. एमएम कुरैशी, अर्जुन बुंदेला, सुभाष मीणा, कैलाश पटेल सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम का समापन इस प्रेरक संदेश के साथ हुआ कि हँसी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में थोड़ी-सी जगह हँसी के लिए निकाल ले, तो न केवल उसका व्यक्तिगत जीवन बेहतर होगा, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

विश्व हास्य दिवस पर सद्भावना मंच का यह आयोजन यह साबित करता है कि सच्ची खुशी बड़ी चीजों में नहीं, बल्कि छोटी-छोटी मुस्कानों और साझा ठहाकों में छिपी होती है।

शनिवार, 2 मई 2026

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल ने किया प्राकृतिक खेती का निरीक्षण

भोपाल- उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने आज हरिहर धाम स्थित अपने निजी खेत का भ्रमण कर वहां अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खेत में इस्तेमाल हो रहे प्राकृतिक खाद और जीवामृत के निर्माण व प्रयोग की प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया। श्री शुक्ल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जल संरक्षण के लिए अपनाए गए विशेष उपायों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना अनिवार्य है।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित सहायकों और कृषि विशेषज्ञों को रसायन मुक्त खेती की तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों का न्यूनतम उपयोग न केवल लागत कम करता है, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी दीर्घकालिक लाभ पहुँचाता है। श्री शुक्ल ने प्राकृतिक कृषि को आधुनिक समय की मांग बताते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में प्रसारित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध आहार और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

हिनौती गौधाम बनेगा प्राकृतिक खेती का मॉडल: उप मुख्यमंत्री ने किया भूमि पूजन, दिए समय पर निर्माण के निर्देश

भोपाल- मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने हिनौती गौधाम को प्राकृतिक खेती के केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की है।

उन्होंने हिनौती गौधाम में दो गौशाला शेड एवं भूसा हाउस के निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन किया। यह निर्माण कार्य सीएमपीवी इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। भूमि पूजन के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन तीनों गौशालाओं को शीघ्र पूर्ण कर लोकार्पण करने के निर्देश दिए, ताकि निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सके।

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिनौती गौधाम को प्राकृतिक खेती का एक आदर्श केंद्र बनाया जाएगा। यहां गोबर गैस संयंत्र स्थापित कर ऊर्जा की आवश्यकता पूरी की जाएगी और उससे प्राप्त जैविक खाद का उपयोग खेती में किया जाएगा। अतिरिक्त खाद को आसपास के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गौ सेवा को बताया पुण्य कार्य

उप मुख्यमंत्री ने गौ सेवा को एक बड़ा सामाजिक और धार्मिक दायित्व बताते हुए कहा कि निराश्रित गौवंश को आश्रय देना अत्यंत पुण्य का कार्य है। उन्होंने निर्माण एजेंसी को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए प्रशासन को हर संभव सहयोग सुनिश्चित करने को कहा।

जल जीवन मिशन की भी समीक्षा

बैठक के दौरान जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने पंपिंग स्टेशन निर्माण के लिए वन विभाग से शीघ्र अनुमति लेकर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। इस परियोजना के पूरा होने से 128 गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा, साथ ही हिनौती गौधाम को भी पानी की सुविधा मिल सकेगी।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर विधायक इंजी. नरेंद्र प्रजापति, जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी, पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी, राजेश पाण्डेय, वन मंडलाधिकारी लोकेश निरापुरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

हिनौती गौधाम को प्राकृतिक खेती के केंद्र के रूप में विकसित करने की यह पहल न केवल गौसंवर्धन बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे क्षेत्र में टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

संजय गांधी अस्पताल बना उन्नत इलाज का केंद्र: एक माह में 61 जटिल जीवन-रक्षक प्रक्रियाएँ सफल, मरीजों को मिली बड़ी राहत

भोपाल- मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संजय गांधी अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम के सहयोग से चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विभाग ने हाल ही में स्थापित आधुनिक मशीनों की सहायता से एक माह से भी कम समय में 61 से अधिक जटिल एवं जीवन-रक्षक प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर नई मिसाल कायम की है।

अत्याधुनिक तकनीक से सशक्त हुआ विभाग

अस्पताल में स्थापित ‘एडवांस्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्किल लैब’ ने उपचार की गुणवत्ता और गति दोनों में क्रांतिकारी सुधार किया है। इस लैब के माध्यम से अब ईआरसीपी, एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, कोलैन्जियोस्कोपी और लिथोट्रिप्सी जैसी जटिल प्रक्रियाएँ स्थानीय स्तर पर ही संभव हो गई हैं। ये सभी तकनीकें पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों के सटीक निदान और उपचार में अत्यंत प्रभावी मानी जाती हैं।

जीवन-रक्षक प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय सफलता

हाल ही में संपन्न 61 प्रक्रियाओं में बड़ी संख्या उन मरीजों की रही, जो गंभीर रक्तस्राव जैसी जानलेवा स्थिति से जूझ रहे थे। इन मामलों में समय रहते एंडोस्कोपिक हीमोस्टेसिस कर मरीजों की जान बचाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तो मरीजों को अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता, जिससे उपचार में देरी और जोखिम बढ़ जाता।

नेतृत्व और टीमवर्क का परिणाम

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एम. एच. उस्मानी के कुशल नेतृत्व और सह-प्राध्यापक डॉ. प्रदीप निगम के सहयोग से यह विभाग अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य कर रहा है। प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और आधुनिक उपकरणों का समन्वय इस सफलता की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वयं अस्पताल पहुंचकर इन अत्याधुनिक सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मशीनों की कार्यप्रणाली का अवलोकन करते हुए विभाग की कार्यक्षमता और उपलब्धियों की सराहना की।

मरीजों को स्थानीय स्तर पर मिल रही राहत

इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र के मरीजों को मिल रहा है। अब जटिल बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ता। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।

स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

संजय गांधी अस्पताल अब इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी सेवाओं में आत्मनिर्भर बन चुका है। यह उपलब्धि न केवल विंध्य क्षेत्र, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती प्रदान करती है।

संजय गांधी अस्पताल की यह सफलता आधुनिक तकनीक, कुशल चिकित्सकीय नेतृत्व और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि संसाधनों का सही उपयोग और विशेषज्ञता का समुचित समन्वय हो, तो क्षेत्रीय स्तर पर भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

यह पहल न केवल मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, बल्कि प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

तूफान के बीच आग का तांडव: बर्राढाना में 10 घर राख, सिलेंडर ब्लास्ट से दहला गांव

बैतूल- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शनिवार शाम आए तेज आंधी-तूफान ने एक बड़े हादसे को जन्म दे दिया। भैंसदेही तहसील के ग्राम पंचायत बाशिंदा अंतर्गत बर्राढाना गांव में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और महज आधे घंटे के भीतर 10 मकानों को पूरी तरह खाक कर दिया। इस घटना ने ग्रामीणों को गहरे संकट में डाल दिया है।

कैसे भड़की आग और बढ़ी तबाही

जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 6 बजे पूरे क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान का दौर चल रहा था। इसी दौरान बर्राढाना में एक घर में अज्ञात कारणों से आग लग गई। तेज हवाओं के कारण आग ने तेजी से फैलना शुरू कर दिया और आसपास के मकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

स्थिति तब और भयावह हो गई जब आग की चपेट में आए घरों में रखे लगभग 5 गैस सिलेंडर एक-एक कर ब्लास्ट हो गए। इन विस्फोटों ने आग को और अधिक भड़काया, जिससे लपटें दूर-दूर तक फैल गईं और बचाव कार्य कठिन हो गया।

भारी नुकसान, गृहस्थी हुई राख

इस भीषण आगजनी में करीब 10 परिवारों की पूरी गृहस्थी जलकर राख हो गई। घरों में रखा अनाज, नकदी, कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके अलावा 5 मोटरसाइकिलें भी आग की भेंट चढ़ गईं।

सिर्फ संपत्ति ही नहीं, बल्कि इस हादसे में पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ। करीब एक दर्जन मवेशी आग में झुलस गए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता

आग की भयावहता के बावजूद गांव के लगभग 200 ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कुओं और हैंडपंपों से पानी लाकर आग बुझाने का प्रयास किया और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ग्रामीणों की इस एकजुटता ने बड़ी तबाही को और बढ़ने से रोक दिया।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि समय रहते ग्रामीणों ने आग को फैलने से रोक लिया, अन्यथा पूरा गांव इसकी चपेट में आ सकता था।

देर से पहुंची फायर ब्रिगेड, प्रशासन हरकत में

घटना की सूचना मिलते ही राजस्व और पुलिस विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक फायर ब्रिगेड का घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

मोहदा थाना के एसआई रामस्वरूप रघुवंशी सहित पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा और स्थिति को नियंत्रित करने में सहयोग किया।

प्रशासन ने शुरू की राहत व्यवस्था

भैंसदेही एसडीएम अजीत मरावी ने बताया कि कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर तत्काल राहत एवं पुनर्वास कार्य शुरू कर दिए गए हैं। प्रभावित परिवारों को राशन, अस्थायी आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

साथ ही, राजस्व विभाग द्वारा नुकसान का सर्वे कर आरबीसी 6(4) के तहत प्रकरण तैयार कर शीघ्र राहत राशि प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

आपदा प्रबंधन पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और अग्निशमन व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। समय पर फायर ब्रिगेड की उपलब्धता और त्वरित कार्रवाई से इस तरह की घटनाओं में नुकसान को कम किया जा सकता है।

बर्राढाना की यह घटना केवल एक आगजनी नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा और संसाधनों की कमी का संयुक्त परिणाम है। हालांकि, ग्रामीणों की एकजुटता और साहस ने बड़ी त्रासदी को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब आवश्यकता है कि प्रशासन त्वरित राहत के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाए।