मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर विस्फोट कांड: खंडवा में आरोपी को 6 वर्ष सश्रम कारावास, रेलवे सुरक्षा में सख्ती का बड़ा संदेश

खंडवा- रेल सुरक्षा बल (RPF) थाना खंडवा द्वारा दर्ज एक संवेदनशील एवं गंभीर मामले में माननीय रेलवे न्यायालय खंडवा ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी साबिर उर्फ शब्बीर को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में कुल 6 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर विस्फोट कर सेना की विशेष ट्रेन को रोकने से जुड़ा था, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक चिंता उत्पन्न की थी।

घटना: सेना की विशेष ट्रेन को रोकने की साजिश

यह घटना 18 सितंबर 2024 की है, जब जम्मू-कश्मीर से कर्नाटक की ओर जा रही सेना की विशेष ट्रेन को खंडवा जिले के डोंगरगांव और सागफाटा स्टेशनों के बीच अप ट्रैक पर लगाए गए डेटोनेटर के विस्फोट के कारण अचानक रोकना पड़ा। यह घटना रेलवे सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गंभीर मानी गई, क्योंकि इसमें सेना की विशेष ट्रेन को निशाना बनाया गया था।

घटना के बाद तत्कालीन वरिष्ठ खंड अभियंता (रेलपथ) श्री आशुतोष कुमार की शिकायत पर RPF थाना खंडवा में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 06/2024 दर्ज किया गया। इसमें रेल संपत्ति (विधिविरुद्ध कब्जा) अधिनियम, 1966 एवं रेल अधिनियम, 1989 की प्रासंगिक धाराएं शामिल की गईं।

जांच: तकनीकी साक्ष्य और श्वान दस्ते की अहम भूमिका

मामले की जांच उप निरीक्षक श्री अरविंद कुमार सिंह को सौंपी गई। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर डेटोनेटर के फटे हुए टुकड़े एवं खोखे जब्त किए गए, जो जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हुए।

रेल सुरक्षा बल के श्वान दस्ते के प्रशिक्षित डॉग ‘जेम्स’ ने इस केस में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। जेम्स ने घटनास्थल से लगभग 8 किलोमीटर तक सर्चिंग कर आरोपी तक पहुंचने में पुलिस की मदद की। इसके आधार पर रेलवे कर्मचारी (ट्रैकमैन) साबिर उर्फ शब्बीर की पहचान हुई।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में खुफिया ब्यूरो (IB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), राज्य एटीएस एवं स्थानीय पुलिस भी शामिल रही, जिससे जांच और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हुई।

न्यायिक प्रक्रिया और सजा

जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर प्रकरण रेलवे न्यायालय खंडवा में प्रस्तुत किया गया। 28 अप्रैल 2026 को माननीय न्यायालय ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने विशेष रूप से इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि आरोपी स्वयं रेलवे कर्मचारी था, इसके बावजूद उसने रेलवे सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य किया।

सुनाई गई सजा:

धारा 3(अ), रेल संपत्ति अधिनियम 1966: 3 वर्ष सश्रम कारावास + ₹3000 अर्थदंड।

धारा 174(सी), रेल अधिनियम 1989: 1 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 अर्थदंड।

धारा 151, रेल अधिनियम 1989: 2 वर्ष सश्रम कारावास + ₹1000 अर्थदंड।

कुल सजा: 6 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹5000 अर्थदंड।

जांच और अभियोजन टीम की सराहनीय भूमिका- इस मामले के सफल अनावरण और दोषसिद्धि में निरीक्षक RPF खंडवा श्री संजीव कुमार, जांच अधिकारी श्री अरविंद कुमार सिंह, सहायक उप निरीक्षक श्री जगदीश नेहेते, वरिष्ठ लोक अभियोजक श्री अजय सिंह एवं RPF श्वान दस्ते के डॉग ‘जेम्स’ की विशेष एवं सराहनीय भूमिका रही।

संदेश: रेलवे सुरक्षा से समझौता नहीं

यह फैसला रेलवे सुरक्षा के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को स्पष्ट करता है। खासकर जब मामला सेना की ट्रेन से जुड़ा हो, तो इस तरह की घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती हैं।

खंडवा में आया यह निर्णय न केवल अपराधियों के लिए सख्त चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और सजग हैं।

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