देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी उत्पादों को मिला जीआई टैग, किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि।
बैतूल। मध्यप्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने में सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ बैतूल जिले के प्रसिद्ध गाजरिया आम को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल बैतूल, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है। जीआई टैग मिलने से गाजरिया आम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशिष्ट पहचान मिलेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और नए बाजारों तक पहुंच का लाभ मिलेगा।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में यह उपलब्धि राज्य के उद्यानिकी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है, जिसे वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।
गाजरिया आम की विशेष पहचान
बैतूल का गाजरिया आम अपनी विशिष्ट गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध के कारण वर्षों से लोगों की पहली पसंद रहा है। इस आम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनानास जैसी सुगंध और गाजर के समान नारंगी रंग का गूदा है। इसी कारण इसे 'गाजरिया आम' कहा जाता है। इसकी मिठास, रेशारहित गूदा और आकर्षक रंग इसे अन्य आमों से अलग पहचान दिलाते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार बैतूल जिले के खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ जैसे 500 वर्ष से अधिक पुराने किले इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और गोंड राजाओं के शासन की गवाही देते हैं। माना जाता है कि गाजरिया आम की खेती भी इसी क्षेत्र की प्राचीन कृषि परंपरा का हिस्सा रही है।
इन क्षेत्रों में होता है सर्वाधिक उत्पादन
बैतूल जिले के बैतूल, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर और चिचोली विकासखंडों में गाजरिया आम का सर्वाधिक उत्पादन होता है। अब जीआई टैग मिलने के बाद इन क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने और उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने की योजना बनाई गई है। इससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और निर्यात के अवसर उपलब्ध होंगे।
इन 12 उद्यानिकी उत्पादों को मिला जीआई टैग
मध्यप्रदेश के जिन उद्यानिकी उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हुआ है, उनमें बैतूल का गाजरिया आम, गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन, खरगौन की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू एवं गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, अलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम-सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं। (शासकीय सूची में कुल 12 जीआई टैग स्वीकृत उत्पादों का उल्लेख किया गया है।)
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। इसके साथ ही निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बैतूल के गाजरिया आम को मिला जीआई टैग केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जिले की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।