जबलपुर- मध्यप्रदेश में विद्युत पारेषण व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और भविष्य की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने सीहोर जिले के 132 केवी श्यामपुर सबस्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक स्थापित कर उसे ऊर्जीकृत कर दिया है। इस नई क्षमता के जुड़ने से न केवल क्षेत्र में बढ़ते विद्युत भार का प्रभावी प्रबंधन संभव होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री राजेश शांडिल्य ने बताया कि प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को ध्यान में रखते हुए कंपनी चरणबद्ध तरीके से अपने पारेषण नेटवर्क का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। श्यामपुर सबस्टेशन में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे सबस्टेशन पर बढ़ते लोड का संतुलित वितरण किया जा सकेगा और विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में एमपी ट्रांसको प्रदेशभर में 417 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण का कार्य कर रही है। इनमें 400 केवी के 14 सबस्टेशन, 220 केवी के 88 सबस्टेशन तथा 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं। यह व्यापक पारेषण नेटवर्क प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक निर्बाध बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रदेश में वर्तमान समय में एमपी ट्रांसको के 1,053 पावर ट्रांसफार्मर संचालित हैं। इनमें 400 केवी स्तर के 41, 220 केवी स्तर के 220 तथा 132 केवी स्तर के 792 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। श्यामपुर सबस्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत होने के बाद कंपनी की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 85,298 एमवीए हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्युत पारेषण अवसंरचना का लगातार विस्तार प्रदेश में औद्योगिक विकास, कृषि क्षेत्र, शहरीकरण और घरेलू बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। एमपी ट्रांसको द्वारा समय-समय पर क्षमता वृद्धि और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से प्रदेश की बिजली व्यवस्था को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाया जा रहा है।
श्यामपुर सबस्टेशन में अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से सीहोर जिले और आसपास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी, ओवरलोड की समस्या कम होगी तथा भविष्य में बढ़ने वाली बिजली की मांग को भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा। यह उपलब्धि प्रदेश की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में एमपी ट्रांसको के सतत प्रयासों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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