कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धा और सम्मान के साथ हुई, जहां उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों ने बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात आयोजित सभा में मुख्य अतिथि पूर्व आईएएस श्री जी.पी. कबीरपंथी, विशेष अतिथि पूर्व डीएसपी श्रीमती संघमित्रा गजभिए एवं सरोजिनी नायडू महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ. श्रीमती छाया चंद्रवशी ने अपने प्रेरक उद्बोधनों के माध्यम से बाबा साहब के विचारों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहब का जीवन केवल एक व्यक्ति की संघर्ष गाथा नहीं, बल्कि पूरे समाज के उत्थान का मार्गदर्शन है। उन्होंने शिक्षा, समानता और संविधान के मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज के समय में उनके विचार और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
संगठन के अध्यक्ष श्री रामस्वरूप निमोरे ने अपने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए संगठन की सामाजिक प्रतिबद्धता को दोहराया। संरक्षक श्री लालचंद मंडराई एवं सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. एच.आर. रैदास ने बाबा साहब के योगदान पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक समरसता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, पूर्व अध्यक्ष एवं नियंत्रण समिति के अध्यक्ष श्री जे.पी. गनोत्ते ने आयोजन की सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। आयोजन स्थल पर आए अतिथियों, सदस्यों एवं राहगीरों का स्वागत व्हाइट कैप एवं अंगवस्त्र देकर किया गया, जो सम्मान और एकता का प्रतीक रहा। साथ ही सभी के लिए स्वल्पाहार, मट्ठा एवं फलों की व्यवस्था कर सेवा भाव का परिचय दिया गया।
इस अवसर पर बच्चों के लिए आयोजित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा। बच्चों ने सम्राट अशोक, माता सावित्रीबाई फुले, रानी लक्ष्मीबाई और बाबा साहब के रूप में सजीव प्रस्तुति देकर इतिहास और प्रेरणा को जीवंत कर दिया। यह आयोजन न केवल मनोरंजक रहा, बल्कि नई पीढ़ी को महान व्यक्तित्वों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बना।
कार्यक्रम का समापन भव्य शोभायात्रा एवं महारैली के साथ हुआ। प्रकाश तरुण पुष्कर से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा झांकियों, डीजे, ढोल-नगाड़ों और जयघोषों के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई एमपी नगर स्थित बाबा साहब की प्रतिमा स्थल तक पहुंची। यहां उपस्थित जनसमूह ने माल्यार्पण कर बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि बाबा साहब के विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। जरूरत है तो केवल उन्हें आत्मसात कर समाज में समानता, शिक्षा और भाईचारे को बढ़ावा देने की।
अंत में महासंघ के महासचिव सेमंतराज बोरीले ने सभी अतिथियों, सदस्यों, मातृशक्ति एवं बच्चों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देते हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
जय भीम | जय भारत | जय संविधान
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