भोपाल- प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले के हरिहरपुर स्थित खेत का दौरा कर प्राकृतिक पद्धति से उगाई जा रही साग-सब्जी और गेहूं की फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खेत में अपनाए जा रहे जैविक तरीकों, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपायों और जल संरक्षण तकनीकों का विस्तार से अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने किसानों से संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती की प्रक्रिया और उसके लाभों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने खेत में उपयोग किए जा रहे जैविक इनपुट, जैसे जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल है, बल्कि इससे किसानों की लागत में भी कमी आती है और मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विशेष रूप से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की संरचना और पोषक तत्वों की मात्रा में सुधार होता है। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी स्थायी रूप से बढ़ता है।
उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला और खेत में अपनाई जा रही तकनीकों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों को कम संसाधनों में अधिक लाभ मिल सकता है। बदलते मौसम और जल संकट की स्थिति में यह खेती पद्धति किसानों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही है।
उप मुख्यमंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपने अनुभव साझा करने का भी आग्रह किया, ताकि अन्य किसान भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलें स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती हैं, क्योंकि इनमें रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया जाता। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध होती है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ समाज को स्वस्थ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रीवा जिले में प्राकृतिक खेती के बढ़ते प्रयोग प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल का यह दौरा किसानों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल न केवल टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगी।
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