बुधवार, 28 जनवरी 2026

भगवान राम ने शत्रु के समक्ष भी सत्य का पालन किया, शिवशक्ति महिला मंडल द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा का भावपूर्ण समापन

खंडवा- शिवशक्ति महिला मंडल द्वारा शहर के रामनगर क्षेत्र में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच समापन हुआ। कथा के छठवें एवं अंतिम दिवस पर वृंदावन धाम से पधारे प्रख्यात कथावाचक पं. श्री बनवारी भाई उपमन्युजी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म और वचनपालन का संदेश दिया।

महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने जीवन में हर परिस्थिति में अपने कुल की मर्यादा और सत्य का पालन किया। उन्होंने “रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाही पर वचन न जाई” चौपाई के माध्यम से बताया कि श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ के वचन को सर्वोपरि मानते हुए बिना किसी संकोच के चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार किया। यह त्याग, आज्ञापालन और आदर्श पुत्र का श्रेष्ठ उदाहरण है।

कथा के दौरान सीता हरण के पश्चात लंका के प्रसंग का उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने बताया कि विभीषण के शरणागत होने पर भगवान राम ने उन्हें तत्काल लंका का भावी राजा घोषित कर दिया। जब सुग्रीव ने शंका व्यक्त की कि यदि रावण भी शरण में आ जाए तो क्या होगा, तब भगवान राम ने स्पष्ट कहा कि यदि रावण सीता को लेकर शरण में भी आ जाए, तब भी लंका का राज्य विभीषण को ही मिलेगा और रावण को अयोध्या का राज्य सौंपकर चारों भाई पुनः वनवास में ही रहेंगे। इस प्रसंग से यह स्पष्ट होता है कि भगवान राम ने शत्रु के समक्ष भी सत्य, न्याय और धर्म से कभी समझौता नहीं किया।

शिव महापुराण कथा के दौरान महाराज श्री ने भगवान शिव परिवार से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंगों का भी सजीव वर्णन किया। उन्होंने भगवान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध, नंदी के जन्म और शिव भक्ति की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के प्रत्येक प्रसंग में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

कथा समापन अवसर पर रामनगर क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण के साथ शिव महापुराण कथा के विश्राम दिवस को भाव-विभोर होकर मनाया। शिवशक्ति महिला मंडल के पदाधिकारियों ने कथा आयोजन में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं व्यवस्थापक मंडल का आभार व्यक्त किया।

शिव महापुराण कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म, मर्यादा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश मिला, जिससे समाज में नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का संचार हुआ।

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