हरदा- नर्मदापुरम् संभाग के आयुक्त श्री के.जी. तिवारी ने कहा है कि जिले के वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तित करने की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं सामाजिक सुधार है, जिसे सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाना आवश्यक है। इस उद्देश्य से बुधवार को आयुक्त श्री तिवारी एवं मुख्य वन संरक्षक श्री अशोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में राजस्व, वन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मैदानी अमले की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिले के 42 वनग्रामों को राजस्व ग्रामों में संपरिवर्तित करने से पूर्व की जाने वाली समस्त आवश्यक तैयारियों की विभागवार समीक्षा की गई। इस अवसर पर कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन, वनमण्डलाधिकारी श्रीमती ज्योति मुड़िया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजली जोसेफ जोनाथन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आयुक्त श्री तिवारी ने निर्देश दिए कि संपरिवर्तन से पूर्व प्रत्येक वनग्राम का पूर्ण एवं सटीक मानचित्रण किया जाए। इसके अंतर्गत वनग्रामों की बाहरी सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण, स्थल सत्यापन, तथा संपूर्ण क्षेत्र का जीपीएस आधारित डिजिटल नक्शा तैयार किया जाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि मानचित्रण कार्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि भविष्य में विवाद का कारण बन सकती है, इसलिए इस कार्य को अत्यंत सावधानी से किया जाए।
बैठक में वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जारी पट्टों की स्थिति की भी गहन समीक्षा की गई। आयुक्त ने निर्देश दिए कि वन अधिकार पट्टाधारियों की अद्यतन सूची तैयार कर नक्शों में उनकी स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज की जाए। जिन पात्र हितग्राहियों को अभी तक वन अधिकार पत्र जारी नहीं हुए हैं, उनकी जानकारी एकत्र कर प्रक्रिया पूर्ण की जाए। इसके साथ ही, वन अधिकार पत्रधारी की मृत्यु होने की स्थिति में नामांतरण की कार्यवाही समय पर पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए।
आयुक्त श्री तिवारी ने यह भी कहा कि नए दावा आवेदनों को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से दर्ज कर उनका शीघ्र निराकरण किया जाए। इसके साथ ही सामुदायिक वन अधिकार दावों की स्थिति की समीक्षा कर लंबित मामलों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित किया जाए। वन अधिकार पट्टों से संबंधित समस्त नस्तियाँ वनमण्डलाधिकारी कार्यालय में जमा कराने के निर्देश भी बैठक में दिए गए।
बैठक के दौरान जिले के 48 वनखण्डों की वन व्यवस्थापन स्थिति की भी समीक्षा की गई। मुख्य वन संरक्षक श्री अशोक कुमार ने वन संरक्षण, प्रबंधन एवं विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी दी तथा आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किए।
आयुक्त श्री तिवारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समय-सीमा में संपरिवर्तन से संबंधित सभी प्रक्रियाएँ पूर्ण करें, ताकि वनग्रामों को राजस्व ग्रामों का दर्जा देकर वहां निवासरत ग्रामीणों को शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
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