उन्होंने बताया कि खंडवा मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है। यह रेलवे का प्रमुख जंक्शन है, जहां से देशभर के लिए परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हैं। इंदिरा सागर बांध और बिजली उत्पादन केंद्र की मौजूदगी के कारण भी यहां सुरक्षा बल की आवश्यकता अधिक रहती है। जिला बड़ा है, पुलिस लाइन स्थापित है और भविष्य में उद्योग एवं संभाग बनने की संभावनाएं मजबूत हैं। बटालियन स्थापना के लिए भूमि का चयन भी पूर्व में खंडवा में ही किया जा चुका है।
प्रमोद जैन ने कहा कि इन सभी तथ्यों के बावजूद पुलिस बटालियन को खरगोन भेजे जाने का निर्णय आश्चर्य और क्षोभ का विषय है। खंडवा प्रदेश का अति संवेदनशील जिला है। यहां स्थित ओंकारेश्वर धाम देश का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं और सुरक्षा बल की आवश्यकता रहती है। इसके अलावा खंडवा को सिमी का गढ़ भी माना जाता है, ऐसे में अतिरिक्त पुलिस बल की उपस्थिति अनिवार्य है।
सद्भावना मंच के सदस्य कमल नागपाल ने बताया कि माली कुआं स्थित मंच कार्यालय में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि खंडवा को मिलने वाली सुविधाएं अन्य जिलों में भेजे जाने से जिले के सर्वांगीण विकास की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। बटालियन के लिए उपयुक्त स्थान खंडवा में पहले ही तय हो चुका था, इसलिए इसे यहां से हटाना न्यायोचित नहीं है।
मंच के संस्थापक तथा सदस्यों —
प्रमोद जैन, आनंद तोमर, जगदीश चंद्र चौरे, देवेंद्र जैन, गणेश भावसार, राधेश्याम शाक्य, कमल नागपाल, जैकी रेवतानी, राजेश पोरपंथ, शहादत मतीन और सुरेश कुमार
— ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को ई-मेल भेजकर मांग रखी कि पुलिस बटालियन का मुख्यालय खंडवा में ही स्थापित किया जाए।
सद्भावना मंच ने कहा कि खंडवा की भौगोलिक स्थिति, सुरक्षा आवश्यकताएं और भविष्य की संभावनाएं इसे बटालियन के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान बनाती हैं। इसलिए सरकार को इस निर्णय पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।
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