सोमवार, 30 नवंबर 2020

हर्षोल्लास व उत्साह से मनाया गया गुरूनानक देव जी का जन्मोत्सव, श्रद्धालुओं ने मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर की अरदास




खंडवा - प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्री सिंघ सभा खंडवा के तत्वावधान में 551 वां प्रकाशोत्सव गुरूनानक जयंती महापर्व सामाजिक बंधुओं द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया गया। तीन दिनों के इस कार्यक्रम में प्रतिदिन प्रभातफेरी के साथ ही गुरूमत क्वीज, बाल दरबार एवं दस्तार प्रतियोगिता का आयोजन संपन्न हुआ जिसमें सामाजिक बंधुओं ने भाग लिया। कोरोना काल के चलते विशाल शोभायात्रा एवं लंगर का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया था। तीन दिनों तक प्रतिदिन सामाजिक बंधुओं ने गुरूद्वारा पहुंचकर अरदास करते हुए मत्था टेका। गुरूनानक साहब ने अपने जीवनकाल में सामाजिक एकता के साथ ईश्वर एक है वह निराकार है तथा वह जन्म नहीं लेता इस तरह की बातों का वह पूरी दुनिया में प्रचार-प्रसार करते थे। मानव हितकारी सर्वपक्षीय उपदेशों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी लंबी मुख्य यात्राएं की तथा हर किसी के समझ में आ जाने वाली भाषा में मानव प्रेम का पाठ पढ़ाया। वे भारत के कोने-कोने के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, चीन, भूटान, नेपाल, रूस, अफगानिस्तान, मक्का-मदीना, बगदाद आदि स्थानों पर भी पहुंचे। उन्होंने धर्म के उच्च पदों पर बैठे पंडितों, सिद्धी प्राप्त योगियों, काजियों, मौलवियों के साथ गोष्ठी की और मनुष्य को नैतिकता का पाठ पढ़ाया तथा नेक कमाई करने का उपदेश दिया। उन्होंने सन्यास लेने वाले, वन में जाकर तपस्या करने वाले, तथा योग साधना में लीन योगियों के सम्मुख संवाद के द्वारा अपनी बात रखी। गुरूनानक साहब ने हिन्दुओं और मुसलमानों का समान रूप से देखा। इसलिए जहां उनके लाखों हिन्दू श्रद्धालु थे, तो हजारों मुसलमान भी उनके अनुयायी थे, इतिहास इस बात का साक्षी है। गुरूजी व्यर्थ के कर्मकाण्ड के विरूद्ध थे। निमाड़ का अहोभाग्य है कि कई बड़ों संतों के साथ ही गुरूनानक देव जी भी वर्ष 1534 में तीर्थनगरी ओंकारेश्वर भी पहुंचे थे और कुछ दिनों तक रूक कर धर्म की प्रभावना कर पैदल बुरहानपुर पहुंचे थे। ओंकारेश्वर की इस यात्रा का जिक्र गुरूवाणी में 929 पेज पर अंकित है। रविवार को गुरूनानक देव की जयंती पर प्रात: प्रभातफेरी के पश्चात सामाजिक बंधु एवं अन्य धर्मो के श्रद्धालु भी गुरूद्वारा पहुंचे और अरदास करते हुए नमन किया। विशाल लंगर की जगह श्रद्धालुओं गुरूसिंघ सभा कमेटी द्वारा प्रसादी का वितरण किया गया। कोरोना वायरस के चलते सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क वालों को ही गुरूद्वारा में दर्शन करने की अनुमति थी। गुरूद्वारा के मुख्य ग्रंथी जसवीरसिंह राणा ने गुरूनानक जयंती प्रकाशोत्स की शुभकमाना देते हुए कहा कि मानव सेवा का पाठ पढ़ाने वाले गुरूदेव की जन्मजयंती उत्साह से श्रद्धालुओं द्वारा मनाई गई। साथ ही नानक साहब से यही अरदास की गई कि सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे और जो कोरोना की महामारी इस समय दुनिया में आई है उसे जल्द से जल्द दूर करें। हजूरी रागी जत्था ज्ञानी वीरसिंघ सचखंड हजुर साहिब के द्वारा गुरबाणी कीर्तन किया गया। 


प्रमुख ग्रंथी जसवीरसिंघ राणा, गुरूसिंघ सभा के अध्यक्ष दलजीतसिंघ छाबड़ा, उपाध्यक्ष हरदीपसिंघ छाबड़ा, जितेन्द्रसिंघ उबेजा, सिद्रपालसिंघ चावला, सचिव दलजीतसिंघ सवन्नी, सहसचिव गुरविन्दरसिंघ वाधवा, दलजीतसिंघ खनूजा, कोषाध्यक्ष भूपेन्द्रसिंघ कुकरेजा, रागी ज्ञानी ईश्वरसिंघ के साथ ही अन्य पदाधिकारियों ने तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Featured Post

जनसुनवाई में महिलाओं ने लगाई रोक की गुहार, मैदान में सिर्फ छोटी कार्रवाई! आखिर खंडवा को नशे के जाल से कब मिलेगी मुक्ति?

खंडवा-  जिले में शराब के बढ़ते दुष्प्रभावों को लेकर ग्रामीण अंचलों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ग्राम पंचायत हा...