खंडवा- खण्डवा जिले के एक आईटी इंजीनियर ने संविधान दिवस के मौके पर अपने गांव से संविधान महासंशोधन सुझाव आंदोलन शुरू किया। इस युवक का कहना है कि वह पूरे देश में घूम-घूम कर संविधान में संशोधन करने बाबत सुझाव आमंत्रित करेगा और इसे भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संसद को सौंपेगा। इनका मानना है कि 70 साल में देश में अभी भी ऐसी कई समस्याएं हैं जिनके बारे में संविधान में संशोधन होना चाहिए।
दो वर्षो के अध्ययन के बाद बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जी ने देश के लिए संविधान बनाया था जो पूरे देश में आज भी चल रहा है। विगत 70 वर्षो से ये संविधान हमारे देश में लागू है। समय-समय पर विशेष परिस्थितियों में इसमें संशोधन हुए हैं। आज भी देश के सामाजिक क्षेत्र में संविधान में संशोधन की आवश्यकता है। इसको लेकर मैंने अपने जन्मभूमि के ग्राम केनूद से संविधान महासंशोधन सुझाव आंदोलन का शुभारंभ संविधान दिवस से प्रारंभ किया है इसमें आप सभी का सहयोग अपेक्षित है। यह बात संविधान महासंशोधन सुझाव आंदोलन के प्रमुख शिवपालसिंह बादल ने ग्राम केनूद में कही।
शिवपालसिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान में संशोधन आंदोलन को लेकर हम पूरे भारत देश के गांव-गांव और शहर-शहर तक घूमेंगे। इस आंदोलन के प्रचार प्रसार में हम खासकर इंटरनेट के माध्यम से सोशल मीडिया का सहारा लेंगे जिसमें हम सोशल मीडिया के फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर अपने पोस्ट अपलोड करेंगे। इस आंदोलन में रैलियां, सभाओं के माध्यम से लोगों के सुझाव अपलोड करेंगे। बड़े मंत्री, साहित्यकार, इतिहासकार और बड़े लेखक बड़े सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के जज लोगों को हम साथ लेंगे। उनका बिना नाम बताएं हम इनसे संशोधन के लिए सुझाव लेंगे जो हमारी वेबसाइट है डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाटकॉम सीबीएसी डाटकॉम ओआरजी में प्राप्त करेंगे और उनसे आग्रह करेंगे कि आप इस संविधान संशोधन आंदोलन को सफलतापूर्वक सफल बनाएं और हमारे सुझाव को भारत सरकार एक्सेप्ट कर उन्हें संशोधित विधान को संशोधित करें जिससे देश को एक नई दिशा मिलेगी और जिससे देश में प्रगति होगी।
लेकिन शिवपाल सिंह भारत के संविधान मैं संशोधन को लेकर गांव में बड़ा आयोजन रखा जिसमें भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा दिए गए निर्देश का खुला उल्लंघन किया गया।
बड़ी बात तो यह है कि हाल ही में देश में कोरोना संक्रमण का दोबारा आगमन हुआ है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है तो वही संविधान का महा संशोधन करने निकले हैं शिवपाल सिंह ने जरा भी देश के कानून की चिंता नहीं की और कोविड-19 के नियमों की धज्जियां उड़ाई है।
इस दौरान ग्रामीणों ने एक ने भी मास्क का प्रयोग नहीं किया और शिवपाल सिंह के साथ बगैर मास के ही निकल आए हैं।
जो व्यक्ति भारत सरकार के कानून का मजाक उड़ा रहा हो ऐसे व्यक्ति से संविधान के महा संशोधन की क्या उम्मीद की जाए?
उल्लेखनीय है कि शिवपाल सिंह बादल एक आईटी इंजीनियर है और पिछले लगभग 15 सालों से महानगरों में रहकर काम करते थे। लॉकडाउन के बाद वह अपने गांव केनूद लौटे तो वापस ही नहीं गए। अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम कर उन्होंने ऐसी कई समस्याएं देखी जिसका कानूनी हल या तो नहीं था या बहुत पेचीदगी पूर्ण था। यही बात उनके दिमाग में खटकी और उन्होंने संविधान में संशोधन करने के सुझाव आमंत्रित करने का आंदोलन प्रारंभ करने की सोची। आज संविधान दिवस के मौके पर इन्होंने इस महा आंदोलन की शुरुआत अपने गांव से की। सभी ग्रामीणों को इकट्ठा करके उन्होंने भारत के संविधान के बारे में बताया और वर्तमान परिस्थितियों के नजरिए से इसमें संशोधन करने की बात कही। शिवपाल सिंह ने अपने इस अभियान के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सभी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए अपने दोस्तों और आईटी इंजीनियरों की एक टीम बनाई है। यह अपने इस अभियान के तहत सोशल मीडिया के साथ-साथ देश भर का भ्रमण करके लोगों से संविधान में जरूरी संशोधन करने के सुझाव मांगेंगे और इसे भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और संसद को सौंपेंगे। जिससे यह संस्थाएं देश हित में जरूरी सुझाव को संशोधित कर कानूनी जामा पहना सके।
इस आईटी इंजीनियर का मानना है कि देश में अभी तक मात्र 104 संविधान संशोधन हुए हैं और वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी कई समस्याएं हैं जिनका न तो कानून में और ना ही संविधान में कोई हल है। ऐसी समस्याओं के बारे में ही वह संविधान में संशोधन चाहते हैं जिससे देश पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ सके। उनका कहना है कि पिछले समय में जो संशोधन हुए हैं यदि उसी गति से देश चलता रहा तो आगामी 50 सालों में भी हम दुनिया के साथ अपनी रफ्तार नहीं बना पाएंगे। इस युवक का कहना है कि देश में किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी और आरक्षण जैसी अनेक समस्याएं हैं जिसका निदान संविधान में संशोधन के जरिए ही किया जा सकता है। इनका मानना है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर किया जाए जिससे देश में जातिगत भेदभाव समाप्त किया जा सके। संविधान दिवस पर ग्राम केनूद के युवा इंजीनियर शिवपालसिंह बादल ने संविधान महासंशोधन को लेकर अपने जन्मभूमि ग्राम से आंदोलन का शुभारंभ किया। बाबा साहब द्वारा बनाए गए संविधान का पालन पूरा देश कर रहा है लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए इस में सुधार की आवश्यकता है। ग्राम के युवा शिवपालसिंह ने इसे आंदोलन का रूप देते हुए पूरे देश में भी घूम कर सुझाव लेने का जो निर्णय लिया जो स्वागत योग्य है।


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