गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

धरमपुरी गौशाला में अव्यवस्थाओं पर कलेक्टर का कड़ा प्रहार: जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त कदम

खण्डवा- जिले के ग्राम धरमपुरी स्थित गौशाला के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं ने प्रशासनिक तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और लापरवाही पर स्पष्ट नाराजगी जताते हुए दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान खण्डवा एसडीएम श्री ऋषि कुमार सिंघई भी उपस्थित रहे।

जर्जर फर्श और रिसती पानी की होद, निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्न

निरीक्षण में पाया गया कि गौशाला का फर्श अत्यंत खराब स्थिति में है, जिससे गौवंश के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संचालक द्वारा बताया गया कि गौशाला गत जून माह में ही उन्हें हैंडओवर की गई थी और तभी से फर्श जर्जर स्थिति में है। इसके साथ ही पशुओं के लिए निर्मित पानी की होद में गंभीर तकनीकी खामी पाई गई—होद में पानी रुक ही नहीं पा रहा था और निरंतर रिसाव हो रहा था।

इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्री गुप्ता ने निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री को निर्माण कार्य की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित उपयंत्री और सहायक यंत्री के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश देकर स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक धन से हुए निर्माण में लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

चरनोई भूमि पर गेहूं की फसल, प्राथमिकता पर उठे सवाल

निरीक्षण का एक और चिंताजनक पहलू तब सामने आया जब गौशाला के लिए निर्धारित चरनोई भूमि पर चारे के बजाय गेहूं की फसल बोई गई पाई गई। यह स्थिति गौवंश की मूल आवश्यकताओं की अनदेखी को दर्शाती है। कलेक्टर ने इस पर सख्त आपत्ति जताते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में गेहूं या सोयाबीन जैसी व्यावसायिक फसलें न लगाई जाएं, बल्कि नेपियर घास या अन्य उपयुक्त चारा फसलें ही उगाई जाएं, ताकि गौवंश को पर्याप्त पोषण उपलब्ध हो सके।

निरीक्षण और रिपोर्टिंग में लापरवाही पर कार्रवाई

कलेक्टर श्री गुप्ता ने उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. हेमन्त शाह को निर्देशित किया कि पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के माध्यम से गौशालाओं का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण में पाई जाने वाली कमियों का समयबद्ध निराकरण भी अनिवार्य रूप से कराया जाए।

धरमपुरी क्षेत्र के सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी एवं विकासखण्ड पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा अव्यवस्थाओं की समय पर रिपोर्टिंग न किए जाने पर भी कलेक्टर ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इससे यह स्पष्ट संकेत गया है कि केवल गौशाला प्रबंधन ही नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

प्रशासन की सख्ती से जागी उम्मीद

कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता की इस सक्रियता और संवेदनशीलता की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है। गौसेवा केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि व्यवस्थागत जिम्मेदारी का प्रश्न भी है। प्रशासन की यह कार्रवाई संकेत देती है कि गौशालाओं में लापरवाही, भ्रष्टाचार या कुप्रबंधन को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

धरमपुरी गौशाला का मामला जिले की अन्य गौशालाओं के लिए भी चेतावनी है कि व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें, अन्यथा कार्रवाई तय है। अब देखना यह होगा कि जांच और नोटिस की प्रक्रिया के बाद जिम्मेदारों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है।

गौवंश की सुरक्षा और बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना केवल प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज और प्रबंधन की साझा जिम्मेदारी भी है—और इसी दिशा में यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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