निमाड़/खंडवा। निमाड़ी संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से कलाकार अनुजा जोशी उपाध्याय ने अक्टूबर और नवंबर माह में कई बड़े मंचों पर अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों के माध्यम से निमाड़ी गण-गौर नृत्य की गरिमा और समृद्धि को नए आयाम दिए। दो महीनों की इस कलात्मक यात्रा ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि निमाड़ी लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रखर और अलग पहचान प्रदान की।
पेटलावद से शुरू हुई सांस्कृतिक यात्रा
अनुजा जोशी उपाध्याय की श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुतियों की शुरुआत पेटलावद के मंच से हुई, जहाँ उन्होंने निमाड़ी गण-गौर और पारंपरिक लोक-नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की भरपूर प्रशंसा प्राप्त की। इस प्रस्तुति ने आगे होने वाले आयोजनों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
14–15 अक्टूबर: जयपुर के नेहरू युवा केंद्र में दो दिवसीय प्रस्तुति
जयपुर स्थित नेहरू युवा केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में अनुजा ने लगातार दो दिनों तक निमाड़ी गण-गौर नृत्य की अनुपम प्रस्तुति दी।
उनकी नृत्याभिव्यक्ति, वेशभूषा, पारंपरिक ताल और निमाड़ी भावों ने राजस्थान की धरती पर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।
जयपुर जैसे कला-संवेदनशील शहर में निमाड़ी नृत्य का यह प्रदर्शन निमाड़ी संस्कृति के लिए बेहद गौरवपूर्ण क्षण रहा।
29 अक्टूबर से 3 नवंबर: भोपाल में मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर ऐतिहासिक प्रदर्शन
मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस समारोह में अनुजा जोशी उपाध्याय ने पूरे सप्ताहभर भोपाल के मुख्य मार्गों और प्रमुख कार्यक्रम स्थलों पर गण-गौर नृत्य का प्रदर्शन किया।
इस दौरान:
- उन्होंने भव्य झांकी प्रस्तुतियों का नेतृत्व किया,
- पारंपरिक निमाड़ी वेशभूषा का प्रदर्शन किया,
- और सबसे महत्वपूर्ण—माननीय मुख्यमंत्री तथा VIP अतिथियों की उपस्थिति में अपनी कला का प्रदर्शन किया।
यह प्रस्तुति निमाड़ी संस्कृति के लिए राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित मंच पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।
7 नवंबर: खकनार (बुरहानपुर) में दमदार प्रस्तुति
बुरहानपुर जिले के खकनार में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में अनुजा ने पुनः निमाड़ी गण-गौर नृत्य की जीवन्त और आकर्षक प्रस्तुति देकर दर्शकों से भरपूर सराहना प्राप्त की।
इस प्रस्तुति ने निमाड़ और बुरहानपुर क्षेत्र के दर्शकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम किया।
24 नवंबर: निमाड़ उत्सव महेश्वर में चमकी निमाड़ी परंपरा
महेश्वर में आयोजित निमाड़ उत्सव में अनुजा की प्रस्तुति इस पूरे श्रृंखला का एक प्रमुख आकर्षण रही।
नर्मदा तट पर बसे कला-पुंज महेश्वर में निमाड़ी लोकनृत्य का प्रदर्शन एक विशेष सांस्कृतिक अनुभव बन गया।
उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने ‘निमाड़ी लोकसंस्कृति की वास्तविक आत्मा’ बताते हुए सराहा।
26 नवंबर: गौतमपुरा में साधना उपाध्याय की 13 प्रस्तुतियां
गौतमपुरा में आयोजित भव्य आयोजन में श्रीमती साधना उपाध्याय ने—
- गणेश वंदना
- कालिका नृत्य
- निमाड़ी गण-गौर नृत्य
- एवं कुल 13 विविध प्रस्तुतियां
दीं, जिनमें प्रत्येक प्रस्तुति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
साधना उपाध्याय की प्रस्तुति ने निमाड़ी संस्कृति की बहुआयामी सुंदरता को राष्ट्रीय मंच के समक्ष स्थापित किया।
निमाड़ी संस्कृति के संरक्षण का मूल आधार — उपाध्याय परिवार का मार्गदर्शन
निमाड़ी लोकसंस्कृति के संरक्षण और व्यापक प्रचार-प्रसार में राम नारायण उपाध्याय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने ही साधना उपाध्याय तथा अनुजा जोशी उपाध्याय को निमाड़ी गण-गौर एवं अन्य लोकनृत्यों को बड़े मंचों तक पहुँचाने का मार्ग सुझाया।
आज उसी प्रेरणा और दिशा का परिणाम है कि उपाध्याय परिवार की कलाएं राष्ट्रीय स्तर पर धमक पैदा कर रही हैं।
निमाड़ी संस्कृति नया अध्याय लिख रही है
अक्टूबर–नवंबर माह में हुई अनुजा, साधना और उपाध्याय परिवार की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि निमाड़ी संस्कृति केवल क्षेत्रीय कला नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण अंग है।
इन प्रस्तुतियों ने निमाड़ की:
- लोककला
- परंपरा
- वेशभूषा
- संगीत
- और सांस्कृतिक मूल्यों
को न केवल जीवित रखा, बल्कि नए मंचों पर उसका विस्तार भी किया।
यह यात्रा निमाड़ी कला के लिए एक नई दिशा, नई पहचान और नई प्रेरणा है।
संपर्क: हेमंत उपाध्याय — 7999749125
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