खंडवा- जय भोलेनाथ ग्रुप एवं ओम साईं सेवा संस्था द्वारा 20 नवंबर से प्रारंभ किए गए सेवा सप्ताह के छठवें दिन जरूरतमंदों को ठंड से बचाव हेतु 150 से अधिक स्वेटर, कंबल और ऊनी टोपे वितरित किए गए। सामाजिक सरोकारों से जुड़े इन दोनों संगठनों द्वारा प्रतिदिन सेवाभाव पर आधारित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज के कमजोर वर्गों तक मदद पहुँचाई जा रही है।
सेवा सप्ताह के तहत लगातार जारी हैं जनसेवा गतिविधियाँ
सेवा सप्ताह में वस्त्र वितरण, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक स्वास्थ्य शिविर, धार्मिक कार्यक्रमों सहित कई मानवीय सेवाएं निरंतर संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रमों को सफल बनाने में ग्रुप की सदस्याएँ—
नंदा चंचलानी, पुष्पा चंचलानी, भाव्या साधवानी, सरिता पाटीदार, मुस्कान तोलानी, नंदिनी उधलानी, प्रियंका चौहान, ज्योति चौहान, पूजा चौहान, रश्मि बाहेती, रक्षा प्रजापति, सुनीता यादव और कशीश साहनी—महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सुबह 6 बजे से वस्त्र वितरण, मजदूरों व आमजन को मिली राहत
छठवें दिन का आयोजन सुबह 6 बजे प्रारंभ हुआ। ठंड में दैनिक मजदूरी पर जाने वाले मजदूरों, दूध विक्रेताओं और ऑटो चालकों को सबसे पहले ऊनी टोपे वितरित किए गए। इसके बाद शिव मंदिर परिसर में पहुँचने वाले जरूरतमंदों, बुजुर्गों और प्रतिदिन पूजा-अर्चना करने वालों को भी स्वेटर, कंबल और गर्म कपड़े प्रदान किए गए।
स्कूली बच्चों के लिए अलग से ऊनी टोपे उपलब्ध कराए गए। छोटे बच्चों को प्रसाद के साथ हेयर बेल्ट, हेयर पिन, पेंसिल जैसी उपयोगी सामग्री भी भेंट की गई।
कार्यक्रम में प्रसादी वितरण, समाज सेवा का अनूठा संदेश
पूरे आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों को प्रसादी का वितरण भी किया गया। उदाहरणीय सेवा भावना के साथ ग्रुप के सेवा कार्यों की सराहना उपस्थित जनों ने की।
101 दिनों तक लगातार नए वस्त्र वितरण का संकल्प
ग्रुप के संरक्षक मनोहर शामनानी ने बताया कि जय भोलेनाथ ग्रुप ऐसी अनूठी संस्था है, जो 101 दिनों तक लगातार नए या नए जैसे गर्म वस्त्रों का वितरण करती है। यह सेवा शरद पूर्णिमा से मकर संक्रांति तक निरंतर चलती है।
मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल-गुड़ प्रसाद और उपयोगी वस्तुओं का वितरण भी किया जाता है।
संस्था का सिद्धांत : पुराने नहीं, हमेशा नए कपड़े
शामनानी ने बताया कि संस्था द्वारा कभी भी पुराने कपड़े वितरित नहीं किए जाते। जरूरतमंदों को उनकी पसंद, रंग और साइज के अनुसार कपड़े चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है।
उन्होंने कहा—“नर सेवा ही नारायण सेवा है, और इसी उद्देश्य के साथ संस्था समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रही है।”
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें