सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

जनजातीय सुरक्षा मंच ने मोर्चा खोला, धर्मांतरित जनजातियों का आरक्षण खत्म किया जाए



खंडवा - धर्मांतरित जनजातियों को अनुसूचित जनजाति सूची से हटाकर उन्हें दिया जाने वाला आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर सोमवार को जनजाति सुरक्षा मंच ने राष्ट्रपति के व प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर व जिले की चार विधानसभाओं के विधायकों व जिला पंचायत अध्यक्ष को  ज्ञापन सौंपें गए। खंडवा में पंधाना विधायक राम दांगोरे और विधायक देवेन्द्र वर्मा को सौंप ज्ञापन में बताया कि धर्मान्तरित जनजातियों को आरक्षण सुविधाएं दिए जाने के खिलाफ तत्कालीन बिहार सरकार के जनजातीय नेता और लोकसभा सदस्य व केंद्रीय मंत्री कार्तिक उराव ने तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को 1970 में आवेदन दिया था। इस बात को 50 साल हो गए हैं। उस आवेदन को न तो लोकसभा में पटल पर रखा गया था, ना ही उसे खारिज किया था बल्कि उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। भारतीय अधिनियम 1935 के तहत भारतीय ईसाई की परिभाषा में यह कहा गया है, कि भारतीय ईसाई वह होगा जो कोई भी ईसाई पंथ को मानता हो। इसके अनुसार अनुसूचित जनजाति से जब एक व्यक्ति ईसाई धर्म में धर्मान्तरित हो जाता है, तो स्वाभाविक रूप से वह व्यक्ति भारतीय ईसाई की श्रेणी में आएगा। इसलिए उसको किसी भी प्रकार की आरक्षण की सुविधाएं देना असंवैधानिक माना जाएगा। ज्ञापन में बताया, कि अनुसूचित जनजातियों के साथ हो रहे इस अन्याय को हमेशा के लिए खत्म कर धर्मांतरित लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के लिए आवश्यक संसोधन किया जाए। ज्ञापन देने वालों में जनजाति सुरक्षा मंच के संगठन मंत्री ब्रजलाल ठाकरे, जिलाध्यक्ष रामजीवन गंधवाने, चिंताराम जगताप, रामसिंह रावत सहित मंच के पदाधिकारी मौजूद थे।

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