खालवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत कुदई माल के अंतर्गत आने वाले ग्राम अंधारिया के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं — जैसे सड़क, नाली और पक्के रास्ते — से वंचित हैं।
दलदल भरे रास्तों से स्कूल जाती हैं लाड़ली लक्ष्मियां
गांव के लोगों ने बताया कि ग्राम अंधारिया से करीब 3 किलोमीटर दूर ग्राम मलगांव में कक्षा 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई होती है।
यहां पढ़ने के लिए प्रतिदिन 50 से 60 छात्र-छात्राएं, जिनमें लाड़ली लक्ष्मी योजना की बेटियां भी शामिल हैं, बारिश के मौसम में कीचड़ और दलदल भरे कच्चे रास्ते से होकर पैदल स्कूल जाती हैं।
बरसात के दिनों में यह रास्ता इतना बदहाल हो जाता है कि कई बार बच्चे और ग्रामीण फिसल कर घायल हो जाते हैं।
गांव के बच्चों का कहना है कि स्कूल पहुंचने में उन्हें अक्सर डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं।
ग्रामीणों की रोजमर्रा की जद्दोजहद
सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि अंधारिया और आसपास के सैकड़ों ग्रामीण भी इन्हीं कच्चे रास्तों से होकर बाजार, बैंक, पेट्रोल पंप और जिला मुख्यालय के कामों के लिए आते-जाते हैं।
यह क्षेत्र आईटीआई, स्कूल, छात्रावास और बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं से तो जुड़ा है, लेकिन सड़कें इतनी जर्जर हैं कि आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में विकास केवल कागजों तक सीमित है।
अंधारिया, मलगांव, मोहनिया, सिरपुर, भगावा, सालिया खेड़ा और कुंदई जैसे कई गांवों में सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी नहीं हैं।
अटल जी का सपना अब भी अधूरा
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने “हर गांव को सड़क से जोड़ने” का सपना देखा था।
लेकिन भाजपा शासन के दो दशक और जनप्रतिनिधियों के चार दशक पूरे होने के बावजूद, खंडवा के ग्रामीण अंचलों में विकास अभी भी कोसों दूर है।
ग्रामीणों का कहना है कि नेता केवल चुनाव के समय वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई ध्यान नहीं देता।
अगर सड़कों और नालियों की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आने वाले समय में लोग मजबूर होकर अपना जनादेश बदलने पर विचार कर सकते हैं।
ग्रामीणों की मांग
- अंधारिया से मलगांव तक 3 किमी सड़क का पक्का निर्माण
- स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित मार्ग
- नाली और जल निकासी की व्यवस्था
- ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की पारदर्शिता